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Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Electrical Engineering (EE) MCQ


Test Description

20 Questions MCQ Test SSC JE Electrical Mock Test Series (Hindi) - Test: Power Systems- 4 (Hindi)

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Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 1

प्रत्यावर्ती धारा प्रसारण प्रणाली की तुलना में दिष्ट धारा प्रसारण प्रणाली की क्या विशेषताएं हैं?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 1

प्रत्यावर्ती धारा प्रसारण प्रणाली पर दिष्ट धारा प्रसारण प्रणाली की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1) दिष्ट धारा प्रणाली लंबे समय तक किफ़ायती होती है

2) दिष्ट धारा के प्रसारण में केवल दो तारों की आवश्यकता होती है, जबकि 3 फेज प्रत्यावर्ती धारा को 4 तारों की आवश्यकता हो सकती है

3) दिष्ट धारा में कोरोना हानि नहीं होती है, जबकि प्रत्यावर्ती धारा के लिए यह इसकी आवृत्ति के साथ बढ़ती जाती है

4) प्रत्यावर्ती धारा में स्किन प्रभाव देखा जाता है, जिससे प्रसारण चालक डिजाइन में समस्याएं आती हैं

5) कोई प्रेरणिक और धारिता हानि नहीं होती है

6) कोई सामीप्य प्रभाव नहीं होता है

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 2

संधारित्र और प्रतिघातक का प्रयोग वोल्टेज नियंत्रित करने के लिए प्रसारण प्रणाली में किया जाता है जैसा कि नीचे दर्शाया गया है। सही विकल्प को चुनिए।

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 2

जब भी प्रेरक भार प्रसारण रेखा से जुड़ा होता है, पश्चगामी भार विद्युत धारा के कारण शक्ति गुणांक पश्चगामी होता है। इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए, एक शंट संधारित्र उससे जुड़ा होता है जो स्रोत वोल्टेज से आगे विद्युत धारा निकालती है। शक्ति गुणांक में सुधार किया जा सकता है।

श्रेणी संधारित्र का प्रयोग प्रसारण लाइन के प्रेरकत्व की क्षतिपूर्ति के लिए किया जाता है। वे प्रसारण क्षमता और लाइन के संतुलन में वृद्धि करेंगे। इनका प्रयोग समानांतर रेखाओं के बीच भार को बांटने के लिए भी किया जाता है।

श्रेणी प्रतिघातक का प्रयोग प्रणाली की प्रतिबाधा में वृद्धि के लिए विद्युत धारा सीमित प्रतिघातक के रूप में किया जाता है। उनका प्रयोग तुल्याकलिक विद्युतीय मोटर के प्रारंभिक विद्युत धारा को सीमित करने के लिए और शक्ति रेखाओं के प्रसारण क्षमता में वृद्धि होने के क्रम में प्रतिक्रियाशील शक्ति की क्षतिपूर्ति के लिए भी किया जाता है।

एक शंट प्रतिघातक प्रतिक्रियाशील शक्ति का अवशोषक होता है, इसलिए प्रणाली की ऊर्जा दक्षता में वृद्धि होती है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 3

एक निलंबित अवरोधी स्ट्रिंग की स्ट्रिंग दक्षता में किसके द्वारा सुधार नहीं किया जा सकता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 3

स्ट्रिंग दक्षता को स्ट्रिंग पर वोल्टेज और इकाई निकटवर्ती स्ट्रिंग पर वोल्टेज और स्ट्रिंग की संख्या के गुणनफल के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।

स्ट्रिंग दक्षता = पुरे स्ट्रिंग पर वोल्टेज / n×चालक से निकटवर्ती इकाई पर वोलटेज

प्रसारण लाइन के पर्याप्त प्रदर्शन के लिए, यह आवश्यक है कि लाइन में वोल्टेज वितरण एक समान होना चाहिए। यह निम्नलिखित विधियों से हासिल किया जा सकता है।

1) लंबी पार भुजा का उपयोग करने पर

2) धारिता ग्रेडिंग

3) ग्रेडिंग के रिंग या स्थैतिक ढाल का उपयोग करने पर

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 4

बिना भार की स्थिति में प्रसारण लाइन में विद्युत धारा किसके कारम मौजूद होती है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 4

बिना भार की स्थिति के दौरान प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा केवल लाइन धारिता के कारण आवेशित विद्युत धारा होती है। यह प्रणाली में धारिता var को बढ़ाती है।

चूँकि, लाइन बिना भार की स्थिति में है तो लाइन प्रेरकत्व कम होगा। इसलिए बिना भार या हल्के भार की स्थिति के दौरान धारिता var प्रेरणिक var से अधिक हो जाता है।

इस घटना के कारण ग्राहक छोर में वोल्टेज भेजने वाले छोर के वोल्टेज से अधिक हो जाता है। यह प्रभाव फेरांटी प्रभाव भी कहलाता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 5

प्रसारण लाइन की दूरी की सीमा में वृद्धि के लिए क्या किया जाता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 5

श्रेणी संधारित्र का प्रयोग प्रसारण लाइन के प्रेरकत्व की क्षतिपूर्ति के लिए किया जाता है। वे प्रसारण क्षमता और लाइन के संतुलन में वृद्धि करते हैं। इनका प्रयोग समानांतर रेखाओं के बीच भार को बांटने के लिए भी किया जाता है।

एक शंट प्रतिघातक प्रतिक्रियाशील शक्ति का अवशोषक होता है, इसलिए प्रणाली की ऊर्जा दक्षता में वृद्धि होती है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 6

पवन दाब का प्रभाव किसके लिए अधिक प्रमुख होता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 6

प्रसारण लाइनों की तुलना में पवन दबाव का प्रभाव सहायक टावर पर अधिक प्रमुख होता है।

टावरों में उचित सतह वाले क्षेत्र होते हैं जो किसी भी स्थिर हवा द्वारा उत्पन्न बल प्राप्त करते हैं। प्रसारण लाइनों पर हवा द्वारा उत्पन्न निलंबन बिंदु पर भी बल होता है। प्रसारण टावरों में फ्लैट सतह होती है जबकि ट्रांसमिशन लाइन वृत्ताकार होती हैं। हवा की सही गति के कारण टावरों का दोलन होने की संभावना होती है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 7

कम वोल्टेज से 33 किलो वोल्ट तक की सीमा में केबल के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला अवरोधक कौन-सा है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 7

निम्नलिखित लाभों के कारण हम क्रॉस लिंक्ड पॉलीइथालिन का उपयोग केबलों के अवरोधक के रूप में करते हैं।

1) यह 600 वोल्ट और 35 किलो वोल्ट के विभिन्न वोल्टेज श्रेणियों में काम करता है

2) यह यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करता है

3) यह अधिकतम दबाव का सामना कर सकता है

4) यह भूमिगत क्षति का प्रतिरोध करता है

5) मौसम प्रतिरोधी

6) ताप प्रतिरोधी

7) उच्च चालक संचालन तापमान की अनुमति देता है

8) लघु परिपथन और अधिभार स्तर को कम करता है

8) नमी प्रतिरोधी

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 8

तापमान में वृद्धि के साथ एक केबल का अवरोधी प्रतिरोध __________ है और लंबाई में वृद्धि के साथ _________ है।

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 8

अवरोधी प्रतिरोध तापमान संवेदनशील होता है। जब तापमान बढ़ता है, तो अवरोधी प्रतिरोध कम होता है और जब तापमान घटता है, तो अवरोधी प्रतिरोध बढ़ता है। अवरोधी प्रतिरोध प्रत्येक 10°C बदलाव पर दो के गुणांक से बदलता है।

अवरोधी प्रतिरोध लम्बाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए केबल की लम्बाई के बढ़ने के साथ यह घटता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 9

एक रेडियल शक्ति प्रणाली को किसके द्वारा दर्शाया जाता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 9

रेडियल शक्ति वितरण प्रणाली में, विभिन्न संभरक मूल रूप से उपकेंद्र से निकलते हैं और वितरण ट्रांसफॉर्मर के प्राथमिक से जुड़े होते हैं। इसे केवल खुले पथों द्वारा दर्शाया जाता है।

लेकिन रेडियल विद्युतीय शक्ति वितरण प्रणाली में एक बड़ी कमी होती है, जिससे किसी भी संभरक विफलता की स्थिति में, संबंधित उपभोक्ताओं को कोई शक्ति नहीं मिलेगी क्योंकि ट्रांसफॉर्मर के सिंचन के लिए कोई वैकल्पिक पथ नहीं होता है। ट्रांसफार्मर विफलता की स्थिति में भी बिजली की आपूर्ति बाधित होती है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 10

एक प्रत्यावर्ती प्रसारण लाइन में लाइन के दो छोर पर वोल्टेज के फेज में अंतर किसके कारण होता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 10

एक प्रत्यावर्ती प्रसारण लाइन में लाइन के दो छोर पर वोल्टेज के फेज में अंतर प्रसारण लाइन के प्रेरणिक और धारिता प्रतिघात के कारण होता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 11

प्रत्यावर्ती धारा प्रसारण लाइन में चरण संशोधक क्या होते हैं?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 11

एक तुल्यकालिक मोटर इसके उत्तेजना को बदलकर या तो रेखा के पश्चगामी या अग्रगामी विद्युत धारा प्राप्त करने के लिए बनाया जा सकता है। भार के कम शक्ति गुणांक को सही करने के लिए बिजली संयंत्रों को निष्क्रिय रूप से संचालित तुल्यकालिक मोटरों के साथ जोड़ा जाता है और इस प्रकार फीडर और जेनरेटर में धारा और शक्ति की हानि को कम किया जाता है।

तुल्यकालिक चरण संशोधक सामान्य तुल्यकालिक मोटर से उतने भिन्न होते हैं जितने वे उच्चतम आर्थिक गति के लिए बनाए जाते हैं और छोटे शाफ्ट और बेयरिंग के साथ प्रदान किए जाते हैं।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 12

चालक में लघु परिपथन के कारण _________ त्रुटि होती है।

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 12

शंट त्रुटि में लघु परिपथन चालक और भूमि के बीच या दो या दो से अधिक चालक के बीच लघु परिपथन शामिल होते हैं।

शंट त्रुटि को धारा में वृद्धि और वोल्टेज तथा आवृत्ति में गिरावट द्वारा चित्रित किया जा सकता है।

शंट त्रुटि को निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:

1) एकल लाइन और भूमिगत त्रुटि (एल.जी. त्रुटि)

2) लाइन से लाइन त्रुटि (एल.एल. त्रुटि)

3) डबल लाइन से भूमिगत त्रुटि (एल.जी. त्रुटि)

4) तीन चरण त्रुटि

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 13

ठोस रूप से भू-सम्पर्कित अभारित आवर्तित्र के R चरण में एक त्रुटि होती है। तो त्रुटि धारा IR1 और उदासीन धारा IN को किस प्रकार से ज्ञात किया जाता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 13

लाइन से भु-सम्पर्कन त्रुटि में,

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 14

किस स्थिति में धारा की रेटिंग आवश्यक नहीं होती है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 14

एक विलगकारी एक सामान्य रूप से संचालित यांत्रिक स्विच होती है जो विद्युत शक्ति का एक हिस्सा अलग करती है। ये सुरक्षित रखरखाव कार्यों के लिए प्रणाली से एक हिस्से को बाकि हिस्सों से अलग करती है।

विलगकारी का उपयोग बिना किसी भार के परिपथ को खोलने के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य परिपथ के एक हिस्से को दूसरे से अलग करना होता है और लाइन में धारा प्रवाहित होने के दौरान इसे नहीं खोला जाता है। विलगकारी सामान्यतौर पर ब्रेकर के दोनों सिरों पर उपयोग किया जाता है, ताकि किसी भी खतरे के बिना परिपथन ब्रेकर की मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जा सके।

इसलिए विलगकारी की स्थिति में धारा की रेटिंग आवश्यक नहीं होती है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 15

एक विद्युत परिपथ में एक फ्यूज क्यों प्रदान किया जाता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 15

एक फ्यूज एक विद्युत सुरक्षा उपकरण है जो विद्युत परिपथ की अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसका आवश्यक घटक एक धातु तार या पट्टी है जो इसके माध्यम से बहुत अधिक धारा के प्रवाह होने पर पिघल जाता है, जिससे धारा में बाधा आती है। इसलिए यह अत्यधिक धाराओं से परिपथ की रक्षा करता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 16

________ आर्क अवसान के उच्च प्रतिरोध बाधा की एक विधि नहीं है:

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 16

आर्क परिपथ ब्रेकर में इसके दो संपर्क खुलने के कारण होने वाला एक स्फुलिंग प्रवाह होता है। परिपथ ब्रेकर में आर्क अवसान के दो तरीके निम्नानुसार हैं:

1) उच्च प्रतिरोध विधि: उच्च प्रतिरोध विधि में, आर्क के प्रतिरोध में धीरे-धीरे समय के साथ वृद्धि की जाती है ताकि दो संपर्कों के बीच धारा बल आर्क को बनाए रखने के लिए अपर्याप्त हो। इसलिए परिपथ ब्रेकर के विभाग को कोई हानि नहीं किए बिना आर्क को उच्च प्रतिरोध के साथ बाधित किया जाता है। प्रतिरोध बढ़ाने की विभिन्न विधियां हैं:

a) आर्क की लंबाई में वृद्धि

b) आर्क के अनुप्रस्थ काट क्षेत्र को कम करना

c) आर्क शीतलन विधि

d) आर्क विभाजन विधि

2) कम प्रतिरोध विधि: इस विधि में आर्क के प्रतिरोध को तब तक कम रखा जाता है जब तक कि धारा का परिमाण शून्य ना हो जाए। आर्क स्वाभाविक रूप से बुझ जाता है और इसे संपर्कों के बीच के वोल्टेज की तुलना में माध्यम के पारद्युतिक मजबूती को उच्च बनाकर प्रतिबंधित किया जाता है। इसे हासिल करने के लिए विभिन्न तरीके निम्न हैं:

a) संपर्क अंतराल की लंबाई में वृद्धि करके

b) आर्क के माध्यम को ठंडा करके

c) आर्क कक्ष में उच्च दबाव

d) आयनों का विस्फोट प्रभाव

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 17

प्रतिरोध स्विचिंग के बिना लघु लाइन त्रुटि को बाधित करने के लिए सबसे उपयुक्त परिपथ ब्रेकर कौन सा है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 17

संपर्क स्थान या आर्क के साथ समानांतर में प्रतिरोध के एक निश्चित जुड़ाव को प्रतिरोध स्विचिंग कहा जाता है। प्रतिरोध स्विचिंग परिपथ ब्रेकर में नियोजित होता है जिसमें संपर्क स्थान की उच्च पोस्ट का शून्य प्रतिरोध होता है। प्रतिरोध स्विचिंग मुख्य रूप से आवर्ती वोल्टेज और क्षणिक वोल्टेज वृद्धि को कम करने के लिए उपयोग की जाती है।

SF6 परिपथ ब्रेकर प्रतिरोध स्विचिंग के बिना लघु लाइन त्रुटि को बाधित करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 18

प्रेरण डिस्क सिद्धांत का उपयोग करने वाला रिले किस पर संचालित होता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 18

प्रेरण डिस्क प्रकार का रिले एक एमिटर या वोल्टमीटर, या एक वाटमीटर या ऊर्जा मीटर के समान सिद्धांत पर आधारित है। प्रेरण रिले में विक्षेपित बलाघूर्ण एसी विद्युत चुम्बकीय के प्रवाह द्वारा एक एल्यूमीनियम या तांबा डिस्क में भंवर धाराओं द्वारा उत्पादित किया जाता है।

यह केवल एसी वोल्टेज अनुप्रयोग पर काम करता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 19

अंतर्निहित दिशात्मक विशेषता के साथ एक रिले कौन-सा रिले होता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 19

एक म्हो रिले प्रवेश के एक घटक | Y | ∠θ को मापता है। लेकिन प्रतिबाधा आरेख पर आलेखित किए जाने पर इसकी विशेषता मूल के माध्यम से गुजरने वाला एक वृत्त होता है।

इस रिले को म्हो रिले कहा जाता है क्योंकि इसकी विशेषता एक सीधी रेखा है, जब इसे प्रवेश आरेख पर आलेखित किया जाता है।

यह स्वाभाविक रूप से एक दिशात्मक रिले है क्योंकि यह केवल अग्रगामी दिशा में दोष का पता लगाता है।

Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 20

सर्ज रक्षक क्या प्रदान करता है?

Detailed Solution for Test: Power Systems- 4 (Hindi) - Question 20

एक सर्ज रक्षक एक विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग एक सुरक्षित सीमा (लगभग 120 वोल्ट) पर वोल्टेज को अवरुद्ध करते हुए शक्ति में वृद्धि और वोल्टेज स्पाइक्स के खिलाफ उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। जब एक सीमा 120 वोल्ट से अधिक हो, तो एक सर्ज रक्षक भूमी वोल्टेज से लघुपथन कर लेता है या वोल्टेज को अवरुद्ध कर देता है।

इसलिए हम कह सकते हैं कि, सर्ज रक्षक सामान्य वोल्टेज में उच्च प्रतिबाधा और वृद्धि के लिए कम प्रतिबाधा प्रदान करता है।

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