Test: Utilization of Electrical Energy- 3


20 Questions MCQ Test Mock Test Series for SSC JE Electrical Engineering (Hindi) | Test: Utilization of Electrical Energy- 3


Description
Attempt Test: Utilization of Electrical Energy- 3 | 20 questions in 12 minutes | Mock test for Electrical Engineering (EE) preparation | Free important questions MCQ to study Mock Test Series for SSC JE Electrical Engineering (Hindi) for Electrical Engineering (EE) Exam | Download free PDF with solutions
QUESTION: 1

एक ट्रैन की औसत गति किससे स्वतंत्र होती है?

Solution:

औसत गति: यह प्रारम्भ से स्टॉप तक ट्रैन द्वारा प्राप्त की गई गति का औसत मान है अर्थात् इसे चलने का कुल समय और दो स्टॉपों के बीच ट्रैन द्वारा तय की गयी दूरी के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे Va के द्वारा दर्शाया जाता है।

औसत गति = स्टॉपों के बीच की दूरी/ट्रैन के चलने का वास्तविक समय

Va = D/T

जहाँ Va किमी प्रति घंटा में ट्रैन की औसत गति है

D किमी में स्टॉपों के बीच की दूरी है

T घंटे में वास्तविक समय है

यहाँ चलने का कुल समय में स्टॉपों की अवधि शामिल नहीं है। इसलिए औसत गति स्टॉपों की अवधि से स्वतंत्र होती है।

QUESTION: 2

आसंजक भार क्या होता है?

Solution:

आसंजक भार: एक चलित्र वाहन के पहियों में ड्राइव पर वहन किए जाने वाले कुल भार को आसंजक भार के रूप में जाना जाता है।

त्वरित भार: यह ट्रेन का प्रभावी भार होता है जिसमें ट्रेन के निष्क्रिय भार सहित घूर्णन जड़त्व के कारण कोणीय त्वरण होता है।

QUESTION: 3

ट्रैक्टिव प्रयास की आवश्यकता क्यों होती है?

Solution:

ट्रैक्टिव प्रयास चलित्र वाहन के पहिये पर कार्य करने वाला बल होता है जो ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक होता है। यह एक वेक्टर राशि है जो हमेशा एक चलित्र वाहन के पहिये पर स्पर्शीय रूप से कार्यरत होती है। इसे न्यूटन में मापा जाता है।

ट्रैक पर चलाने के लिए एक चलित्र वाहन या ट्रेन के पहिये पर कुल प्रभावी बल या कुल ट्रैक्टिव प्रयास (Ft) ट्रैक्टिव प्रयास के योग के बराबर होता है:

a) रैखिक और कोणीय त्वरण (Fa) के लिए आवश्यक

b) गुरुत्वाकर्षण प्रभाव (Fg) को दूर करने के लिए

c) ट्रेन की गति (Fr) के घर्षण प्रतिरोध को दूर करने के लिए

Ft = Fa+Fg+Fr

QUESTION: 4

ट्रेन प्रणोद में ऊर्जा खपत क्यों आवश्यक होती है?

Solution:

मोटर की ऊर्जा इनपुट को ऊर्जा खपत कहा जाता है। यह ट्रेन के प्रणोदन के लिए ट्रेन के विभिन्न हिस्सों द्वारा की गई ऊर्जा खपत है। वितरण प्रणाली से ली गई ऊर्जा को ट्रेन के विभिन्न हिस्सों द्वारर खपत की गई उर्जा के बराबर और प्रकाशन, तापन, नियंत्रण और ब्रेकिंग के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा के बराबर होना चाहिए।

यह ऊर्जा खपत निम्न के लिए आवश्यक है

a) ट्रेन के द्रव्यमान के त्वरण के लिए

b) ढलान के ऊपर जाते समय ढलान पर काबू पाने के लिए

c) ट्रेन के प्रतिरोध पर काबू पाने के लिए

QUESTION: 5

अपकेंद्री पंप के लिए मोटर का चयन करते समय सबसे कम महत्वपूर्ण विशेषता क्या है?

Solution:

अपकेंद्री पंप के लिए विद्युत मोटर का चयन करते समय बिजली रेटिंग, प्राम्भिक विशेषताएँ और संचालन गति सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएँ होती हैं। गति नियंत्रण इस उद्देश्य के लिए सबसे कम महत्वपूर्ण विशेषता होती है क्योंकि ज्यादातर समय अपकेंद्री पंप निरंतर गति से चलते हैं।

QUESTION: 6

एक पावर प्रेस को चलाने वाले मोटर के लिए लोड चक्र क्या होगा?

Solution:

निरंतर और स्थिर भार: मोटर पर भार समान परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करते हैं।

निरंतर और परिवर्तनीय भार: मोटर पर भार लंबी अवधि के लिए दोहराया जाता है लेकिन एक अवधि में यह लगातार बदलता रहता है।

कंपित भार: मोटर पर भार जिसे कम्पन द्वारा अध्यारोपित निरंतर बलाघूर्ण के रूप में देखा जा सकता है।

प्रभाव भार: मोटर पर भार जिसमें नियमित और दोहराते हुए भार शीर्ष या कम्पन होते हैं, अर्थात् भार अधिकतम स्तर तक आकस्मिक रूप से बढ़ता है।

कम अवधि भार: मोटर का भार समय-समय पर आरोपित होता है, कम समय के लिए स्थिर रहता है और फिर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है।

कम अवधि के अंतरिम भार: मोटर पर भार समय-समय पर समान ड्यूटी चक्र में होता है, प्रत्येक ड्यूटी चक्र में भार और विश्राम के कार्य की अवधि होती है।

एक पावर प्रेस को चलाने वाले मोटर के लिए भार चक्र अंतरिम और परिवर्तनीय होगा।

QUESTION: 7

हेलोजन लैंप के लाभ क्या होता है/होते हैं?

Solution:

हेलोजन लैंप को क्वार्ट्ज हेलोजन और टंगस्टन हेलोजन लैंप के रूप में भी जाना जाता है। यह तापदीप्त लैंप का एक उन्नत रूप होता है। फिलामेंट नमनीय टंगस्टन से बना होता है और एक गैस भरे बल्ब में स्थित होता है। उच्च दबाव समाविष्ट करने के लिए यह बल्ब मानक ग्लास से मजबूत है। यह लैंप अपने संक्षिप्त आकार और उच्च लुमेन आउटपुट के कारण वर्क लाइट और फिल्म/टेलीविजन लाइट व्यवस्था के लिए एक उद्योग मानक है।

लाभ:

1) हेलोजन लैंप आकार में छोटे और भार में हल्के होते हैं

2) उत्पाद लागत कम होती है

3) यह सी.एफ.एल. (प्रतिदीप्त) या पारा वाष्प लाइट जैसे पारे का उपयोग नहीं करता है

4) मानक टंगस्टन से बेहतर रंग तापमान (2800-3400 केल्विन)

5) एक तापदीप्त लैंप से लंबा जीवनकाल

6) चालू करते ही पूर्ण चमक प्राप्त होती है

QUESTION: 8

एक सोडियम वाष्प लैंप की संदीप्ति दक्षता कितनी होती है?

Solution:

सामान्य सोडियम वाष्प लैंप की रेटिंग:

1) सोडियम वाष्प लैंप की दक्षता 40 से 50 लुमेन/वाट के बीच होती है

2) सामान्यतौर पर यह लैंप 45 वाट, 60 वाट, 85 वाट और 140 वाट रेटिंग में निर्मित होते हैं

3) इन लैंप का सामान्य परिचालन तापमान 300° C है

4) सोडियम वाष्प लैंप का औसत मान जीवन 3000 घंटे है और यह वोल्टेज भिन्नताओं से प्रभावित नहीं होते हैं।

QUESTION: 9

प्रतिदीप्त ट्यूब को पाउडर के रूप में प्रतिदीप्त पदार्थ की पतली परत द्वारा अंदर से लेपित क्यूँ किया जाता है?

Solution:

अदृश्य पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करने और दृश्य किरणों के विकिरण के लिए प्रतिदीप्त ट्यूब को पाउडर के रूप में प्रतिदीप्त पदार्थ की पतले परत द्वारा अंदर से लेपित किया जाता है।

QUESTION: 10

प्रतिदीप्त ट्यूब के प्रकाश की दिखावट एक ताप्दिप्त लैंप की तुलना में शीत होती है। तो यह किस तथ्य के कारण होता है?

Solution:

प्रतिदीप्त लैंप (विद्युत् निर्वहन लैंप) ताप्दिप्त लैंप की तुलना में शीत और अधिक कुशल होता है जो फॉस्फोर लेपन की प्रतिदीप्ति द्वारा प्रकाश उत्पन्न करता है। इसके पीछे का कारण ट्यूब कम शक्ति का उपभोग करता है।

QUESTION: 11

विद्युत प्रतिरोध वेल्डिंग की विशेषताएं क्या होती हैं?

Solution:

विद्युत प्रतिरोध वेल्डिंग की विशेषताएं इस प्रकार हैं।

1) वेल्डिंग प्रक्रिया तेज़ और सरल होती है।

2) यदि आवश्यक हो तो स्थानीयकृत तापन संभव होता है।

3) फिलर पदार्थ का उपयोग करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

4) समान और असमान धातु दोनों को वेल्ड किया जा सकता है।

5) तुलनात्मक रूप से कम कौशल की आवश्यकता है।

6) इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए नियोजित किया जा सकता है।

QUESTION: 12

फ्लैश बट वेल्डिंग में क्या होता है?

Solution:

फ्लैश बट वेल्डिंग प्रतिरोध, चाप और दबाव वेल्डिंग का एक संयोजन होता है। इस विधि का मुख्य रूप से उत्पादन वेल्डिंग में उपयोग किया जाता है।

फ्लैश बट वेल्डिंग के फायदे:

1) शक्ति की कम आवश्यकता

2) जुड़ने वाली सतहों पर कम निरिक्षण की आवश्यकता होती है।

3) प्राप्त वेल्ड बहुत साफ और शुद्ध होता है; क्यूंकि सतहों पर दिखाई देने वाली बाहरी धातुएं फ़्लैश या आर्क के कारण जल जाती हैं।

QUESTION: 13

आर्क वेल्डिंग में मूल विद्युत आवश्यकता यह है कि वहां:

Solution:

विद्युत् आर्क वेल्डिंग दो धातु के टुकड़ों को जोड़ने की प्रक्रिया है या दो एलेक्ट्रोड़ के बीच या वेल्ड किए जाने वाले एक एलेक्ट्रोड़ और एक धातु के बीच आर्क के प्रभाव से उत्पन्न ताप के कारण धातु को पिघलाया जाता है। इलेक्ट्रोड के बीच आर्क बनाने के लिए इस प्रक्रिया में उच्च खुले परिपथ वोल्टेज की मूल आवश्यकता होती है।

QUESTION: 14

हिस्ट्रेसिस हानि और भंवर धारा हानि का उपयोग निम्न में मसे किस में किया जाता है?

Solution:

हिस्ट्रेसिस हानि और भंवर धारा हानि का उपयोग इस्पात के प्रेरण तापन में किया जाता है।

QUESTION: 15

प्रेरण तापन में निम्न में से किसका मान उच्च होता है?

Solution:

चालक पदार्थ जैसे लौहचुम्बकीय और गैर - लौहचुम्बकीय पदार्थ के तापन को प्रेरण तापन के रूप में जाना जाता है।

प्रेरण तापन में पदार्थ पर उच्च आवृत्ति तापन लागू किया जाता है।

QUESTION: 16

आर्क फर्नेस में चोक क्यों प्रदान किया जाता है?

Solution:

यदि उच्च वोल्टेज को वायु अंतराल पर लागू किया जाता है, तो अंतराल में हवा विद्युत्स्थैतिक बलों के प्रभाव में आयनित हो जाती है और चालक माध्यम बन जाती है, विद्युत धारा सतत स्पार्क के रूप में प्रवाहित होती है, जिसे चाप के रूप में जाना जाता है। चाप भट्ठी में इस चाप को स्थिर करने के लिए चोक प्रदान किया जाता है

QUESTION: 17

विकरित तापक किसके लिए प्रयोग किया जाता है?

Solution:

विकरित तापन विधि में, ताप ऊर्जा स्रोत (उद्दीप्त लैंप) से स्थानांतरित होती है और गर्म किए जाने वाले पदार्थ पर विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में केंद्रित की जाती है। सामान्यतौर पर इस विधि का उपयोग वस्त्र उद्योग में कपड़े सुखाने और किसी वस्तु पर गीले पैंट को सूखाने के लिए किया जाता है।

QUESTION: 18

वह कौन-सी प्रक्रिया है जिसके द्वारा धातुओं की शुद्धता उनके अयस्कों से निष्कर्षित की जा सकती है?

Solution:

परिष्करण: यह एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा धातुओं की शुद्धता उनके अयस्कों से निष्कर्षित की जा सकती है।

विद्युत-गठन: यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विद्युत अपघटन से अन्य धातु या गैर धातु पर एक धातु का गठन किया जाता है।

विद्युत धातुकरण: यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सजावट के लिए और सुरक्षात्मक उद्देश्यों के लिए धातु को चालन आधार पर गठित किया जा सकता है। किसी गैर-चालक आधार को ग्रेफाइट प्लेटिंग का गठन करके चालक के रूप में कार्यरत किया जाता है।

एनोडीकरण: धातु की सतह पर ऑक्साइड फिल्म के जमाव की प्रक्रिया को एनोडीकरण और ऑक्सीकरण के रूप में जाना जाता है।

QUESTION: 19

विद्युत-लेपन की स्पंजी कोटिंग क्या दर्शाती है?

Solution:

जमा धातु बहुत मजबूत और छिद्रपूर्ण होते हैं। यदि विद्युत धारा की दर अधिक होती है, तो नाभिक का गठन होता है और कम विद्युत धारा के घनत्व पर, जमा तत्व मोटे और स्फटिकमय होते हैं। विद्युत-लेपन की स्पंजी कोटिंग अतिधारा घनत्व को इंगित करती है।

QUESTION: 20

r त्रिज्या वाले एक गोलार्द्ध के केंद्र पर बनाया गया ठोस कोण क्या होगा? 

Solution:

ठोस कोण एक क्षेत्र द्वारा स्थान में एक बिंदु पर बनाया गया कोण है, अर्थात् सतह पर स्थित अनगिनत रेखाओं और सतह पर बिंदु पर मिलने वाली अनगिनत रेखाओं द्वारा निर्मित आयतन में संलग्न कोण होता है। इसे सामान्यतौर पर चिन्ह 'ω' द्वारा दर्शाया जाता है और इसे स्टेरैडियन में मापा जाता है।

 

ठोस कोण (ω) = क्षेत्रफल/त्रिज्या2 

गोलार्द्ध का क्षेत्रफल = 2πr2

 r त्रिज्या वाले एक गोलार्द्ध के केंद्र पर बनाया गया ठोस कोण

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