Production Engineering 2 MCQ


20 Questions MCQ Test Mock Test Series for SSC JE Mechanical Engineering (Hindi) | Production Engineering 2 MCQ


Description
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QUESTION: 1

निम्नलिखित में से कौन सी एक गियर परिष्करण विधि नहीं है?

Solution:

गियर परिष्करण विधियाँ:

(1) परम्परागत परिष्करण विधियाँ:

i) गियर शेविंग

ii) गियर अपघर्षण

iii) गियर होनिंग

iv) गियर लेपिंग

v) गियर बर्निशिंग

vi) गियर स्किविंग

(2) गियर परिष्करण की अग्रिम विधियाँ

i) विद्युत रसायनिक प्रक्रिया के द्वारा गियर परिष्करण

ii) विद्युत रसायनिक अपघर्षण के द्वारा गियर परिष्करण

iii) अपघर्शक प्रवाह परिष्करण के द्वारा परिष्करण (ए.एफ.एफ.)

गियर होबिंग:

  • यह घूर्णन करते हुए कटर जिसे होब कहते हैं, के द्वारा गियर के दांत काटने की प्रक्रिया है
  • होबिंग प्रक्रिया के द्वारा लगभग सारे (लौह, अलौह और प्लास्टिक) पदार्थों में से स्पर, सर्पिलाकार, वोर्म और स्प्लाइन गियर बनाये जाते हैं लेकिन बेवल और आंतरिक गियर नहीं बनाये जा सकते हैं
QUESTION: 2

ड्रिल के सर्पिल कोण का सामान्य मान क्या है?

Solution:

हेलिक्स कोण भूमि के अग्रणी किनारे और ड्रिल की धुरी के बीच का कोण है। इसे सर्पिल कोण के रूप में भी जाना जाता है। ड्रिल के सर्पिल कोण का सामान्य मान 30 डिग्री है।

QUESTION: 3

भराव मापक क्या मापने में प्रयुक्त होते हैं?

Solution:

भराव मापक, रिक्ति की चौड़ाई मापने में प्रयुक्त होते हैं। भराव मापी दो जुड़ने वाले भागों के मध्य रिक्ति की चौड़ाई मापने के लिए सामान्यतः अभियांत्रिकी में प्रयुक्त होते हैं।

इसमें इस्पात की विभिन्न चौड़ाई की इस्पात की न्यून लम्बाई की पट्टियाँ होती हैं जिनमें उनके मापन अंकित होते हैं।

QUESTION: 4

इस्पात की थर्मिट वेल्डिंग में प्रयुक्त धातु चूर्ण क्या होता है?

Solution:

थर्मिट वेल्डिंग में आयरन ऑक्साइड और एल्युमिनियम के मध्य रासायनिक प्रक्रिया होती है जिसमें एल्युमिनियम ऑक्साइड पैदा होता है जिसे धातुमल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। उत्पन्न हुए लौह को भराव पदार्थ के रूप में प्रयुक्त किया जाता है और ऊष्मा उत्पन्न होती है जिसे धातु को पिघलाने में प्रयुक्त किया जाता है।

QUESTION: 5

धात्विक शीट कार्य में पंच और डाई में शियर किस हेतु उपलब्ध होता है?

Solution:

पंच और डाई के कार्यकारी फलक भूमि से दूर रहते हैं ताकि ये क्षैतिज तल के समानांतर ना रहें बल्कि किसी कोण पर झुके हुए हों। इस झुकाव कोण को शियर कहते हैं। यह शियर में क्षेत्रफल को कम करता है और कार्यकारी बल बहुत ही कम होता है। धात्विक शीट कार्य में, पंच और डाई में शियर, दबाव भार को कम करने के लिए प्रयुक्त होता है।

QUESTION: 6

डाई कास्टिंग की मुख्य विशेषता क्या है?

Solution:

डाई कास्टिंग की विशेषताएँ

1. अच्छी कण संरचना

2. निम्न अवशिष्ट कास्ट

3. अच्छा सतह परिष्करण और उत्कृष्ट दिखावट

4. उच्च विमीय परिशुद्धता

5. सांचे को पुनः प्रयुक्त किया जा सकता है

6. त्वरित उत्पादकता दर

7. निम्न संरंध्र्ता

8. निम्नतम तल क्षेत्र आवश्यक होता है

QUESTION: 7

निम्न में से कौनसा ढलवाँ दोष नहीं है?

Solution:

ढलवाँ दोष धातु ढलाई प्रक्रिया में उत्पन्न एक अनियमितता है जो कि अवांछनीय है।

ढलवाँ दोष का वर्गीकरण निम्न प्रकार से दिया जा सकता है:

QUESTION: 8

निम्नलिखित में से क्या चाप वेल्डिंग का आधार-भूत मानदंड नहीं है?

Solution:

चाप वेल्डिंग के मुख्य मानदंड निम्न प्रकार हैं:

वेल्डिंग धारा: वेल्डिंग धारा सबसे अधिक प्रभावशाली मानदंड है क्योंकि यह, बीड के आकार को प्रभावित करती है, इलेक्ट्रोड के पिघलने की दर को नियंत्रित करती है और अवक्षेपण दर, ऊष्मा प्रभावित क्षेत्र, भेदन की गहराई और पिघले हुए आधार धातु की मात्रा को भी नियंत्रित करती है।

चाप वोल्टेज: वेल्डिंग वोल्टेज, इलेक्ट्रोड और पिघली हुई घातु के बीच के चाप की लम्बाई के साथ परिवर्तनीय होता है। चाप की लम्बाई बढ़ने से चाप वोल्टेज भी बढ़ता है।

वेल्डिंग गति: वेल्डिंग गति एक रेखीय दर है जिससे चाप, वेल्डिंग जोड़ के अनुदिश आगे बढ़ता है। वेल्डिंग वोल्टेज और वेल्डिंग धारा के किसी भी संयोजन के लिए वेल्डिंग गति में परिवर्तन सामान्य प्रारूप की पुष्टि करता है। वेल्डिंग बीड छोटी होती जाती है।

इलेक्ट्रोड आकार: इलेक्ट्रोड आकार नियत धारा पर वेल्डिंग बीड के आकार और भेदन की गहराई को प्रभावित करता है।

इलेक्ट्रोड कार्य कोण: वेल्डिंग क्षेत्र के अनुसार इलेक्ट्रोड को कार्य-वस्तु के लम्बवत, आगे की ओर झुकाकर, पीछे की ओर झुकाकर पकड़ा जा सकता है। चूँकि चाप धारा इलेक्ट्रोड़ के अक्ष के अनुसार स्वतः व्यवस्थित होती रहती है इसलिए प्रत्येक स्थिति में वेल्डिंग क्षेत्र भिन्न होगा और इसलिए वेल्डिंग बीड भी भिन्न होगी।

QUESTION: 9

घिसाई चक्र में कौनसे बंध प्रयुक्त किये जाते हैं?

Solution:

परिष्करण चक्र में प्रयुक्त सामान्य बंध:

विट्रीफाईड बंध से बंधे चक्र (V):

  • मिट्टी और सिरामिक की तुलना में इसे आसानी से बनाया जा सकता है।
  • विट्रीफाइड चक्र संरंध्र, मजबूत, दृढ और तेल, जल और ताप से अप्रभावित रहता है। यह बहुत अधिक सीमाओं में उपलब्ध होता है और अधिकतर धातु कटाव प्रक्रिया में प्रयुक्त होता है, इसलिए यह बंध सामान्यतः प्रयुक्त होता है।

सिलिकेट (s) बंध चक्र:

  • बंध पदार्थ के रूप में सोडा (जल ग्लास) का सिलिकेट प्रयुक्त किया जाता है।
  • यह अधिक भंगुर होता है और विट्रीफाइड चक्र की तुलना में कमजोर होता है।

रेज़िनोइड (B) बंध:

यह झटके को सहने की क्षमता प्रदान करता है और उसे प्रत्यास्थ बनाता है।

शलक (E) बंध चक्र: 

यह कुछ प्रत्यास्थ और पतले लेकिन मजबूत गियर बनाने में प्रयुक्त होता है।

यह अधिक परिष्करण के लिए प्रयुक्त किया जाता है और इसलिए यह कैमशाफ्ट और मिल रोल्स जैसे पदार्थों को परिष्कृत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

रबड़ बंध चक्र:

लचकदार चक्र बनाने में प्रयुक्त होता है।

यह उच्च गति लगभग 16000 फुट/मिमी में संचालित होते हैं। ढलाईखाने में स्नेगिंग कार्य और चक्र में पतले कट के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं।

धात्विक बंध (M):

हीरक चक्र के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं

QUESTION: 10

एम् आई जी वेल्डिंग में हीलियम और आर्गन किसलिए प्रयुक्त होते हैं?

Solution:

जी टी ए डब्ल्यू/ टी आई जी वेल्डिंग प्रक्रिया जहाँ अनोपभोगीय इलेक्ट्रोड अक्रिय गैसों को रोधित माध्यम की तरह प्रयुक्त किया जाता है, एम् आई जी वेल्डिंग में हीलियम और आर्गन गैसें रोधन के लिए प्रयुक्त होती हैं। एम् आई जी वेल्डिंग सामान्यतः 25 प्रतिशत आर्गन, 75 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड प्रयुक्त करती है। शुद्ध आर्गन प्रयुक्त की जा सकती है लेकिन यह मिश्रण सस्ता होता है।

QUESTION: 11

ग्रे ढलवाँ लोहा अपनी किस उच्च विशेषता के कारण भारी यंत्रों के आधार में प्रयुक्त होता है?

Solution:

ढलवाँ लोहा भारी यंत्रों के आधार में अपनी उच्च अवमंदन क्षमता और दबाव मजबूती के कारण प्रयुक्त होता है। अवमंदन क्षमता पदार्थ की कम्पन को अवशोषित करने की सापेक्ष क्षमता है।

QUESTION: 12

जोड़ियाँ बनाइए

Solution:

महत्वपूर्ण G कूट

G 00 – त्वरित स्थानान्तरण

G 01 – रेखीय अंतर्वेशन

G 02 – सी डब्ल्यू वृत्तीय अंतर्वेशन

G 03 – सी सी डब्ल्यू वृत्तीय अंतर्वेशन

G 04 – ड्वेल

G – 97 – स्पिंडल गति

महत्वपूर्ण M कूट

M 00 – प्रोग्राम स्टॉप

M 03 – स्पिंडल (सी डब्ल्यू)

M 04 – स्पिंडल (सी सी डब्ल्यू)

M 05 – स्पिंडल बंद

M 08 – प्रशीतक प्रारंभ

M 09 – प्रशीतक बंद

M 10 – क्लैंप प्रारंभ

M 11 – क्लैंप बंद

M 02 या M 30 – प्रोग्राम बंद, पुनः प्रारंभ

QUESTION: 13

एक आरी की ब्लेड किस दिशा में काटती हैं?

Solution:

आरी की ब्लेड के दांत अग्रमुखी होते हैं। आरी इस प्रकार बनाई जाती है कि इसे खींचने की जगह आगे की ओर धकेलने पर यह कटाव प्रदान करती है।

QUESTION: 14

कौनसा इस्पात रेल और रेल ट्रैक बनाने के लिए बड़े पैमाने में प्रयुक्त होता है?

Solution:

इस्पात का उपयोग रेल और रेल ट्रैक बनाने में होता है। यह इस्पात अवश्य ही कठोर और क्रोकिंग के प्रति प्रतिरोधित होना चाहिए। यह विशेषताएँ लोहे में कार्बन और मैंगनीज़ की मात्रा पर निर्भर करती हैं। कठोर और घिसाव प्रतरोधी इस्पात बनाने के लिए कार्बन की अधिकतम मात्रा 0.82 प्रतिशत और मैंगनीज़ की मात्रा अधिकतम 1.7 प्रतिशत होनी चाहिए।

QUESTION: 15

चाप वेल्डिंग में कार्बन इलेक्ट्रोड के द्वारा किस उपकरण का प्रयोग किया जाता है?

Solution:

कार्बन इलेक्ट्रोड दिष्ट धारा में कार्य करते हैं। यदि ध्रुवीयता ऋणात्मक (सीधे) है तो चाप स्थिर होगा, उसे बनाये रखना आसान होगा, समरूप और शंक्वाकार होगा। यदि ध्रुवीयता धनात्मक (विपरीत) है तो चाप को बनाये रखना मुश्किल होता है और यह आधार धातु पर काला कार्बन अवक्षेपण छोड़ता है।

QUESTION: 16

ताम्बे की स्फटिकमय संरचना कैसी होती है?

Solution:

पदार्थ की स्फटिकमय संरचना

एफ सी सी: - निकिल, ताम्बा, चांदी, प्लेटिनम, सोना, सीसा, एल्यूमिनियम, औस्टेनाईट Ƴ-लौह

बी सी सी: - वेनेडियम, मोलिब्डेनम, टैंटलम, टंग्स्टन, फेराईट या α-लौह, δ-फेराईट या δ-लौह

एच सी पी: - मैग्नीशियम, ज़िंक,

कोबाल्ट: - एच सी पी < 420°C, एफ सी सी > 420°C

क्रोमियम:- एच सी पी < 20°C, बी सी सी > 20°C

काँच: - गैर-स्फटिकमय

QUESTION: 17

निम्नलिखित में से किस ताप सीमा में डेल्टा लौह घटित होता है?

Solution:

तीन विभिन्न प्रकार के लौह पहचाने गए हैं जो कि फेराईट (α), 910°C तक स्थिर रहता है, औस्टेनाईट (γ), 910° ‐ 1394°C के मध्य स्थिर रहता है और डेल्टा फेराईट (δ), 1394° – 1539°C के मध्य स्थिर रहता है।

QUESTION: 18

विद्युत् विसर्जक यांत्रिक प्रक्रिया में कार्य-वस्तु और इलेक्ट्रोड किसमें डूबे हुए होते हैं?

Solution:

विद्युत् विसर्जक यांत्रिकीकरण एक निर्माण प्रक्रिया है जहाँ विद्युत् निर्वहन सेवांछित आकार प्राप्त किया जाता है। दो इलेक्ट्रोड जिनमें विभव आरोपित होता है और वे एक दुसरे से विद्युत् अपघट्य के द्वारा पृथक हैं, के मध्य त्वरित पुनरावर्ती धाराओं की कई श्रृंखलाओं के द्वारा कार्य-वस्तु से पदार्थ को हटाया जाता है| अक्सर केरोसीन आधारित तेल विद्युत् विसर्जक यांत्रिकीकरण में द्विविद्युत् की तरह कार्य करते हैं| उपकरण से धातु के टुकड़ों को हटाने के लिए द्विविद्युत् द्रव को उपकरण के ऊपर से 0.35 न्यूटन/ वर्गमीटर या इससे कम दाब पर संचारित किया जाता है| इसे छलनी के द्वारा संचारित किया जाता है|

QUESTION: 19

गुणवत्ता पूर्ण पेंच चूड़ी किसके द्वारा बनाई जाती है?

Solution:

गुणवत्ता पूर्ण पेंच चूड़ी, चूड़ी चेज़िंग के द्वारा बनाई जाती है। यह प्रक्रिया धीमी है लेकिन उच्च गुणवत्ता देती है। बहु बिंदु चेज़िंग कुछ हद तक गुणवत्ता की कीमत पर अधिक उत्पादकता देती है।

QUESTION: 20

एक कटाव उपकरण की नोज त्रिज्या का मान 2 mm है, 4 माइक्रोन के सैद्धांतिक सतह खुरदरेपन के लिए फ़ीड दर _____ mm/rev है।

Solution:

R = 2 mm

f = ?

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