Test: Hindi-4


20 Questions MCQ Test CTET ( Central Teacher Eligibility Test ) Mock Test Series | Test: Hindi-4


Description
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QUESTION: 1

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

श्रद्धा एक सामाजिक भाव है, इससे अपनी श्रद्धा के बदले में हम श्रद्धेय से अपने लिए कोई बात नहीं चाहते श्रद्धा धारण करते हुए अपने को उस समाज में समझते हें जिसके किसी अंश पर चाहे हम व्यष्टि रूप में उनके अन्तर्गत न भी हों-जानबूझकर उसने कोई शुभ प्रभाव डाला श्रद्धा स्वयं ऐसे कर्मों के प्रतिकार में होती है जिनका शुभ प्रभाव अकेले हम पर नहीं, बल्कि सारे मनुष्य समाज पर पड़ सकता है श्रद्धा एक ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता है जिसे हम केवल समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रकट करते है सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध या घृणा प्रकट करने के लिए समाज ने प्रत्येक यक्ति को प्रतिनिधित्व प्रदान कर रखा है यह काम उसने इतना भारी समझा है कि उसका भार सारे मनुष्यों को बाँट दिया है दो-चार माननीय लोगों के ही सर पर नहीं छोड़ रखा है जिस समाज में सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध प्रकट करने के लिए जितने ही अधिक लोग तत्पर पाए जाएंगे उतना ही वह समाज जाग्रत समझा जाएगा श्रद्धा की सामाजिक विशेषता एक इसी बात से समझ लीजिए कि जिस पर हम श्रद्धा रखते हैं इस पर चाहते हैं कि और लोग भी श्रद्धा रखें पर जिस पर हमारा प्रेम होता है उससे और दस-पाँच आदमी प्रेम रखें-इसकी हमें परवा क्या इच्छा ही नहीं होती; क्योंकि हम प्रिया पर लोभवश एक प्रकार का अनन्य अधिकार इजारा चाहते हैं, श्रद्धालु अपने भाव में संसार को सम्मिलित करना चाहता है, पर प्रेमी नहीं। 

Q. उपर्युक्त गद्य अवतरण का शीर्षक हो सकता है- 

Solution:

‘श्रद्धा का स्वरूप’ उपर्युक्त गद्य अवतरण का शीर्षक हो सकता है।

QUESTION: 2

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

श्रद्धा एक सामाजिक भाव है, इससे अपनी श्रद्धा के बदले में हम श्रद्धेय से अपने लिए कोई बात नहीं चाहते श्रद्धा धारण करते हुए अपने को उस समाज में समझते हें जिसके किसी अंश पर चाहे हम व्यष्टि रूप में उनके अन्तर्गत न भी हों-जानबूझकर उसने कोई शुभ प्रभाव डाला श्रद्धा स्वयं ऐसे कर्मों के प्रतिकार में होती है जिनका शुभ प्रभाव अकेले हम पर नहीं, बल्कि सारे मनुष्य समाज पर पड़ सकता है श्रद्धा एक ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता है जिसे हम केवल समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रकट करते है सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध या घृणा प्रकट करने के लिए समाज ने प्रत्येक यक्ति को प्रतिनिधित्व प्रदान कर रखा है यह काम उसने इतना भारी समझा है कि उसका भार सारे मनुष्यों को बाँट दिया है दो-चार माननीय लोगों के ही सर पर नहीं छोड़ रखा है जिस समाज में सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध प्रकट करने के लिए जितने ही अधिक लोग तत्पर पाए जाएंगे उतना ही वह समाज जाग्रत समझा जाएगा श्रद्धा की सामाजिक विशेषता एक इसी बात से समझ लीजिए कि जिस पर हम श्रद्धा रखते हैं इस पर चाहते हैं कि और लोग भी श्रद्धा रखें पर जिस पर हमारा प्रेम होता है उससे और दस-पाँच आदमी प्रेम रखें-इसकी हमें परवा क्या इच्छा ही नहीं होती; क्योंकि हम प्रिया पर लोभवश एक प्रकार का अनन्य अधिकार इजारा चाहते हैं, श्रद्धालु अपने भाव में संसार को सम्मिलित करना चाहता है, पर प्रेमी नहीं। 

Q. श्रद्धा और प्रेम में क्या अन्तर है? 

Solution:

श्रद्धा सामाजिक है और प्रेम व्यक्तिगत हैं।

QUESTION: 3

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

श्रद्धा एक सामाजिक भाव है, इससे अपनी श्रद्धा के बदले में हम श्रद्धेय से अपने लिए कोई बात नहीं चाहते श्रद्धा धारण करते हुए अपने को उस समाज में समझते हें जिसके किसी अंश पर चाहे हम व्यष्टि रूप में उनके अन्तर्गत न भी हों-जानबूझकर उसने कोई शुभ प्रभाव डाला श्रद्धा स्वयं ऐसे कर्मों के प्रतिकार में होती है जिनका शुभ प्रभाव अकेले हम पर नहीं, बल्कि सारे मनुष्य समाज पर पड़ सकता है श्रद्धा एक ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता है जिसे हम केवल समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रकट करते है सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध या घृणा प्रकट करने के लिए समाज ने प्रत्येक यक्ति को प्रतिनिधित्व प्रदान कर रखा है यह काम उसने इतना भारी समझा है कि उसका भार सारे मनुष्यों को बाँट दिया है दो-चार माननीय लोगों के ही सर पर नहीं छोड़ रखा है जिस समाज में सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध प्रकट करने के लिए जितने ही अधिक लोग तत्पर पाए जाएंगे उतना ही वह समाज जाग्रत समझा जाएगा श्रद्धा की सामाजिक विशेषता एक इसी बात से समझ लीजिए कि जिस पर हम श्रद्धा रखते हैं इस पर चाहते हैं कि और लोग भी श्रद्धा रखें पर जिस पर हमारा प्रेम होता है उससे और दस-पाँच आदमी प्रेम रखें-इसकी हमें परवा क्या इच्छा ही नहीं होती; क्योंकि हम प्रिया पर लोभवश एक प्रकार का अनन्य अधिकार इजारा चाहते हैं, श्रद्धालु अपने भाव में संसार को सम्मिलित करना चाहता है, पर प्रेमी नहीं। 

Q. श्रद्धा एक आनन्दपूर्ण कृतज्ञता है, क्योंकि- 

Solution:

श्रद्धा एक आनन्दपूर्ण कृतज्ञता है, क्योंकि हम समाज के प्रतिनिधि के रूप में इसे प्रकट करते हैं।

QUESTION: 4

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

श्रद्धा एक सामाजिक भाव है, इससे अपनी श्रद्धा के बदले में हम श्रद्धेय से अपने लिए कोई बात नहीं चाहते श्रद्धा धारण करते हुए अपने को उस समाज में समझते हें जिसके किसी अंश पर चाहे हम व्यष्टि रूप में उनके अन्तर्गत न भी हों-जानबूझकर उसने कोई शुभ प्रभाव डाला श्रद्धा स्वयं ऐसे कर्मों के प्रतिकार में होती है जिनका शुभ प्रभाव अकेले हम पर नहीं, बल्कि सारे मनुष्य समाज पर पड़ सकता है श्रद्धा एक ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता है जिसे हम केवल समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रकट करते है सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध या घृणा प्रकट करने के लिए समाज ने प्रत्येक यक्ति को प्रतिनिधित्व प्रदान कर रखा है यह काम उसने इतना भारी समझा है कि उसका भार सारे मनुष्यों को बाँट दिया है दो-चार माननीय लोगों के ही सर पर नहीं छोड़ रखा है जिस समाज में सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध प्रकट करने के लिए जितने ही अधिक लोग तत्पर पाए जाएंगे उतना ही वह समाज जाग्रत समझा जाएगा श्रद्धा की सामाजिक विशेषता एक इसी बात से समझ लीजिए कि जिस पर हम श्रद्धा रखते हैं इस पर चाहते हैं कि और लोग भी श्रद्धा रखें पर जिस पर हमारा प्रेम होता है उससे और दस-पाँच आदमी प्रेम रखें-इसकी हमें परवा क्या इच्छा ही नहीं होती; क्योंकि हम प्रिया पर लोभवश एक प्रकार का अनन्य अधिकार इजारा चाहते हैं, श्रद्धालु अपने भाव में संसार को सम्मिलित करना चाहता है, पर प्रेमी नहीं। 

Q. उपर्युक्त गद्यांश का निष्कर्ष है-  

Solution:

उपर्युक्त गद्यांश का निष्कर्ष है- ‘श्रद्धा एक सामाजिक भाव है’।

QUESTION: 5

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

श्रद्धा एक सामाजिक भाव है, इससे अपनी श्रद्धा के बदले में हम श्रद्धेय से अपने लिए कोई बात नहीं चाहते श्रद्धा धारण करते हुए अपने को उस समाज में समझते हें जिसके किसी अंश पर चाहे हम व्यष्टि रूप में उनके अन्तर्गत न भी हों-जानबूझकर उसने कोई शुभ प्रभाव डाला श्रद्धा स्वयं ऐसे कर्मों के प्रतिकार में होती है जिनका शुभ प्रभाव अकेले हम पर नहीं, बल्कि सारे मनुष्य समाज पर पड़ सकता है श्रद्धा एक ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता है जिसे हम केवल समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रकट करते है सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध या घृणा प्रकट करने के लिए समाज ने प्रत्येक यक्ति को प्रतिनिधित्व प्रदान कर रखा है यह काम उसने इतना भारी समझा है कि उसका भार सारे मनुष्यों को बाँट दिया है दो-चार माननीय लोगों के ही सर पर नहीं छोड़ रखा है जिस समाज में सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध प्रकट करने के लिए जितने ही अधिक लोग तत्पर पाए जाएंगे उतना ही वह समाज जाग्रत समझा जाएगा श्रद्धा की सामाजिक विशेषता एक इसी बात से समझ लीजिए कि जिस पर हम श्रद्धा रखते हैं इस पर चाहते हैं कि और लोग भी श्रद्धा रखें पर जिस पर हमारा प्रेम होता है उससे और दस-पाँच आदमी प्रेम रखें-इसकी हमें परवा क्या इच्छा ही नहीं होती; क्योंकि हम प्रिया पर लोभवश एक प्रकार का अनन्य अधिकार इजारा चाहते हैं, श्रद्धालु अपने भाव में संसार को सम्मिलित करना चाहता है, पर प्रेमी नहीं। 

Q. जाग्रत समाज का क्या लक्षण है?

Solution:

सदाचार पर श्रद्धा और अत्याचार पर क्रोध करना, जागृत समाज का लक्षण है।

QUESTION: 6

निम्नलिखित में से ‘अल्पप्राण’ वर्ण कौन-से हैं? 

Solution:

‘क, ग’, अल्पप्राण वर्ण में आते हैं।

QUESTION: 7

‘पुरोहित’ में कौन सा उपसर्ग है- 

Solution:

‘पुरोहित’ में पुर: उपसर्ग है।

QUESTION: 8

निम्नलिखित में से किस वाक्य में वचन संबंधी अशुद्धि है? 

Solution:

शुद्ध वाक्य है- ये लताएँ कमजोर हैं।

QUESTION: 9

‘क्ष’ वर्ण किसके योग से बना है? 

Solution:

‘क्ष’ वर्ण क् + ष के योग से बना है।

QUESTION: 10

‘कुरुक्षेत्र’ किसकी रचना है? 

Solution:

‘कुरुक्षेत्र’ रामधारी सिंह दिनकर की रचना है।

QUESTION: 11

निम्नलिखित अपठित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दें। 

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सँभालो 
चट्टानों की छाती से दूध निकालो। 
है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो, 
पीयूष चंद्रमाओं को पकड़ निचोड़ो। 
चढ़ तुंग शैल-शिखरों पर सोम पियो रे। 
योगियों नहीं, विजयी के सदृश्य जियो रे। 
छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए 
मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए। 
दो बार नहीं यमराज कंठ धरता 
मरता है जो, एक ही बार मरता है। 
नत हुए बिना जो अशनि घात सहती है 
स्वाधीन जगत में वही जाती रहती है। 

Q. कवि किसे छोड़ने की बात करता है? 

Solution:

कवि ने वैराग्य छोड़ने की बात कही है।

QUESTION: 12

निम्नलिखित अपठित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दें। 

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सँभालो 
चट्टानों की छाती से दूध निकालो। 
है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो, 
पीयूष चंद्रमाओं को पकड़ निचोड़ो। 
चढ़ तुंग शैल-शिखरों पर सोम पियो रे। 
योगियों नहीं, विजयी के सदृश्य जियो रे। 
छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए 
मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए। 
दो बार नहीं यमराज कंठ धरता 
मरता है जो, एक ही बार मरता है। 
नत हुए बिना जो अशनि घात सहती है 
स्वाधीन जगत में वही जाती रहती है। 

Q. कवि किसके समान जीने को कहता है? 

Solution:

कवि विजयी व्यक्तियों के समान जीने को कहता है।

QUESTION: 13

निम्नलिखित अपठित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दें। 

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सँभालो 
चट्टानों की छाती से दूध निकालो। 
है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो, 
पीयूष चंद्रमाओं को पकड़ निचोड़ो। 
चढ़ तुंग शैल-शिखरों पर सोम पियो रे। 
योगियों नहीं, विजयी के सदृश्य जियो रे। 
छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए 
मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए। 
दो बार नहीं यमराज कंठ धरता 
मरता है जो, एक ही बार मरता है। 
नत हुए बिना जो अशनि घात सहती है 
स्वाधीन जगत में वही जाती रहती है। 

Q. जो बिना झुके मुसीबतों का सामना करते हैं, वे किसका उपभोग करते हैं? 

Solution:

जो बिना झुके मुसीबतों का सामना करते हैं वे स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं।

QUESTION: 14

निम्नलिखित अपठित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दें। 

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सँभालो 
चट्टानों की छाती से दूध निकालो। 
है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो, 
पीयूष चंद्रमाओं को पकड़ निचोड़ो। 
चढ़ तुंग शैल-शिखरों पर सोम पियो रे। 
योगियों नहीं, विजयी के सदृश्य जियो रे। 
छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए 
मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए। 
दो बार नहीं यमराज कंठ धरता 
मरता है जो, एक ही बार मरता है। 
नत हुए बिना जो अशनि घात सहती है 
स्वाधीन जगत में वही जाती रहती है। 

Q. कौन सा शब्द ऐसा है जो हमेशा बहूवचन के रूप में प्रयुक्त होता है? 

Solution:

‘प्राण’ का प्रयोग हमेशा बहुवचन में होता है।

QUESTION: 15

‘माता-पिता’ में कौन सा समास है? 

Solution:

‘माता-पिता’ में द्वंद्व समास का प्रयोग हुआ है।

QUESTION: 16

‘अँगुठा चूमना’ मुहावरे का अर्थ है- 

Solution:

‘अँगुठा चूमना’ मुहावरे का अर्थ है- खुशामद करना।

QUESTION: 17

“यह शर इधर गांडीव धनुष से भिन्न जैसे ही हुआ। 
धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्न वैसे ही हुआ।“ 

Q. प्रस्तुत पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? 

Solution:

प्रस्तुत पंक्तियों में अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है।

QUESTION: 18

निम्नलिखित विकल्पों में से ‘सुत’ शब्द को स्त्रीवाचक बनाने के लिए किस प्रत्यय का प्रयोग किया जाएगा? 

Solution:

‘सुत’ शब्द का अर्थ है-पुत्र। ‘सुत’ शब्द में ‘आ’ प्रत्यय जोड़ने पर ‘सुता’ शब्द बनता है जिसका अर्थ है-पुत्री।

QUESTION: 19

विशेषण की दृष्टि से कौन सा वाक्य अशुद्ध है? 

Solution:

यहाँ ‘एक दूसरे से मित्र रखो’ के स्थान पर ‘एक दूसरे से मित्रता रखो’ का प्रयोग होगा।

QUESTION: 20

निम्नलिखित में से किस वाक्य में सर्वनाम का सही प्रयोग नही हुआ है? 

Solution:

यहाँ ‘जो परिश्रम करते हैं, वह सुखी रहते हैं, के स्थान पर जो परिश्रम करते हैं, वे सुखी रहते हैं, का प्रयोग उचित है। इस वाक्य में ‘वह’ के स्थान पर ‘वे’ का प्रयोग होगा।

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