What your Aim in life?

Emmy Arinaitwe answered  •  2 hours ago
Become an engineer and may be ambassador

What is atmosphere?

Gargi Yadav answered  •  3 hours ago
The blanket of Air which surrounds the Earth surface

Acid turns blue litmus
A: Orange
B: Pink
C: green
D: Red
Correct answe... more

Mayank Joshi answered  •  3 hours ago
Red Because Blue Litmus Paper Give Red Colour
You Can Try It On Your Home Also By Using Turmeric Powder And Use Paper Paste Of Turmeric Powder Put On Paper And Make Full Paper Yellow With Turmeric And Then Use Soap Then See Colour Is Changing
Kriti Mishra asked   •  47 minutes ago

दिन में मैं चादर लपेटे सोया था। दादी माँ आईं, शायद नहाकर आई थीं, उसी झाग वाले जल में। पतले-दुबले स्नेह-सने शरीर पर सफ़ेद किनारीहीन धोती, सन-से सफ़ेद बालों के सिरों पर सद्यः टपके हुए जल की शीतलता। आते ही उन्होंने सर, पेट छुए। आँचल की गाँठ खोल किसी अदृश्य शक्ति धारी के चबूतरे की मिट्टी मुँह में डाली, माथे पर लगाई। दिन-रात चारपाई के पास बैठी रहतीं, कभी पंखा झलती, कभी जलते हुए हाथ-पैर कपड़े से सहलाती, सर पर दालचीनी का लेप करतीं और बीसों बार छू-छूकर ज्वर का अनुमान करतीं।
Q. दादी माँ की धोती कैसी थी?
  • a)
    सफ़ेद
  • b)
    बिना किनारी की
  • c)
    नीला
  • d)
    दोनों तरह की
Correct answer is option 'D'. Can you explain this answer?

Shrinika Tyagi asked   •  1 hour ago

अतिशय गंभीरता के साथ मिठाईवाले ने कहा-“मैं भी अपने नगर का एक प्रतिष्ठत आदमी था। मकान, व्यवसाय, गाड़ी-घोड़े, नौकर-चाक्कर सभी कुछ था। स्त्री थी, छोटे-छोटे दो बच्चे भी थे। मेरा वह सोने का संसार था। बाहर संपत्ति का वैभव था, भीतर सांसारिक सुख था। स्त्री सुंदरी थी, मेरी प्राण थी। बच्चे ऐसे सुंदर थे, जैसे सोने के सजीव खिलौने! उनकी अठखेलियों के मारे घर में कोलाहल मचा रहता था। समय की गति! विधाता की लीला। अब कोई नहीं है। दादी, प्राण निकाले नहीं निकले। इसलिए अपने उन बच्चों की खोज में निकला हूँ। वे सब अंत में होंगे, तो यही कहीं। आखिर, कहीं न जनमे ही होंगे। उस तरह रहता, घुल-घुलकर मरता। इस तरह सुख-संतोष के साथ मरूँगा। इस तरह के जीवन में कभी-कभी अपने उन बच्चों की एक झलक-सी मिल जाती है। ऐसा जान पड़ता है, जैसे वे इन्हीं में उछल-उछलकर हँस-खेल रहे हैं। पैसों की कमी थोडे ही है, आपकी दया से पैसे तो काफी हैं। जो नहीं है, इस तरह उसी को पा जाता हूँ।”
Q. कोलाहल का अर्थ है?
  • a)
    रोना-धोना
  • b)
    हड़बड़ाकर भागना
  • c)
    शोर
  • d)
    खेलना-कूदना
Correct answer is option 'C'. Can you explain this answer?

Arti Choubey asked   •  6 hours ago

दिन में मैं चादर लपेटे सोया था। दादी माँ आईं, शायद नहाकर आई थीं, उसी झाग वाले जल में। पतले-दुबले स्नेह-सने शरीर पर सफ़ेद किनारीहीन धोती, सन-से सफ़ेद बालों के सिरों पर सद्यः टपके हुए जल की शीतलता। आते ही उन्होंने सर, पेट छुए। आँचल की गाँठ खोल किसी अदृश्य शक्ति धारी के चबूतरे की मिट्टी मुँह में डाली, माथे पर लगाई। दिन-रात चारपाई के पास बैठी रहतीं, कभी पंखा झलती, कभी जलते हुए हाथ-पैर कपड़े से सहलाती, सर पर दालचीनी का लेप करतीं और बीसों बार छू-छूकर ज्वर का अनुमान करतीं।
Q. दादी माँ की क्रियाकलापों से उसका क्या भाव झलकता था?
  • a)
    क्रूरता का
  • b)
    चिंता का भाव
  • c)
    स्नेह का भाव
  • d)
    पाखंडी का भाव
Correct answer is option 'C'. Can you explain this answer?

Parveen Khan asked   •  9 hours ago

मुरलीवाला हर्ष-गद्गद हो उठा। बोला-“सबको देंगे भैया! लेकिन ज़रा रुको, ठहरो, एक-एक को देने दो। अभी इतनी जल्दी हम कहीं लौट थोड़े ही जाएंगे। बेचने तो आए ही हैं और हैं भी इस समय मेरे पास एक-दो नहीं, . पूरी सत्तावन। …हाँ, बाबू जी, क्या पूछा था आपने, कितने में दीं! …दीं तो वैसे तीन-तीन पैसे के हिसाब से हैं, पर आपको दो-दो पैसे में ही दे दूंगा!”।
विजय बाबू भीतर-बाहर दोनों रूपों में मुसकरा दिए। मन-ही-मन कहने लगे-कैसा है! देता तो सबको इसी भाव से है, पर मुझ पर उलटा एहसान लाद रहा है। फिर बोले-“तुम लोगों की झूठ बोलने की आदत होती है। देते होगे सभी को दो-दो पैसे में, पर एहसान का बोझ मेरे ही ऊपर लाद रहे हो।”
Q. मुरलीवाला कितने पैसे में मुरली देना चाहता था?
  • a)
    पाँच पैसे में
  • b)
    चार पैसे में
  • c)
    तीन पैसे में
  • d)
    दो पैसे में
Correct answer is option 'D'. Can you explain this answer?

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