Lushkoff is in the habit of
  • a)
    stealing
  • b)
    telling lies
  • c)
    working hard
  • d)
    making the excuse
Correct answer is option 'B'. Can you explain this answer?

Shorya Phougat answered  •  9 hours ago
Ι αʅʂσ ԃσɳƚ ƙɳσɯ ƚԋҽ αɳʂɯҽɾ σϝ ƚԋιʂ ϙυҽʂƚισɳ . ιϝ ყσυ ƙɳσɯ ƚԋҽɳ ρʅȥ. ɾҽρʅყ ɱҽҽ....
Saad Kugasia asked   •  3 hours ago

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए
मनुष्यों की पोशाकें उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती हैं। प्रायः पोशाक ही समाज में मनुष्य का अधिकार और उसका दर्जा निश्चित करती है। वह हमारे लिए अनेक बंद दरवाजे खोल देती है, परंतु कभी ऐसी भी स्थिति आ जाती है कि हम ज़रा नीचे झुककर समाज की निचली श्रेणियों की अनुभूति को समझना चाहते हैं उस समय यह पोशाक ही बंधन और अड़चन बन जाती है। जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं, उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
Q. पोशाक हमारे लिए बंधन कब बन जाती है?
  • a)
    जब हम अपने से निचली श्रेणियों की अनुभूति को समझना चाहते हैं
  • b)
    जब हम दूसरों से आगे बढ़ना चाहते हैं
  • c)
    जब हम किसी समारोह में जाते हैं
  • d)
    जब हम विद्यालय में पढ़ने जाते हैं
Correct answer is option 'A'. Can you explain this answer?

Disha Tiwari asked   •  7 hours ago

कुम्भकारः- (घटरचनायां लीनः गायति)
ज्ञात्वाऽपि जीविकाहेतोः रचयामि घटानहम्।
जीवनं भङ्गुरं सर्वं यथैष मृत्तिकाघटः।
चन्दनः – नमस्करोमि तात! पञ्चदश घटान् इच्छामि। किं दास्यसि?
देवेश – कथं न? विक्रयणाय एव एते। गृहाण घटान्। पञ्चशतोत्तर-रूप्यकाणि च देहि।
चन्दनः – साधु! परं मूल्यं तु दुग्धं विक्रीय एव दातुं शक्यते।
देवेशः – क्षम्यतां पुत्र! मूल्यं विना तु एकमपि घटं न दास्यामि।
मल्लिका – (स्वाभूषणं दातुमिच्छति) तात! यदि अधुनैव मूल्यम् आवश्यकं तर्हि, गृहाण एतत् आभूषणम्।
देवेशः – पुत्रिके! नाहं पापकर्म करोमि। कथमपि नेच्छामि त्वाम् आभूषणविहीनां कर्तुम्। नयतु यथाभिलषितान् घटान्। दुग्धं विक्रीय एव घटमूल्यम् ददातु।
उभौ – धन्योऽसि तात! धन्योऽसि।

‘नाहं पापकर्म करोमि” अत्र ‘करोमि’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदम् किम्?
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