पाठ का सार - वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्दर शेखर वेंकट रमन, स्पर्श, हिन्दी, कक्षा - 9 Class 9 Notes | EduRev

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Class 9 : पाठ का सार - वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्दर शेखर वेंकट रमन, स्पर्श, हिन्दी, कक्षा - 9 Class 9 Notes | EduRev

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पाठ का सार

भारत के महान वैज्ञानिक डाॅ. रामन् के विषय में सबसे पहले सन् 1921 की बात सामने आती है, जब वे एक समुद्री यात्रा पर थे और समुद्र का पानी नीला क्यों होता है, इसकी खोज कर बैठे। यह काम पूरा करते ही रामन् विश्वविख्यात हो गए। 7 नवंबर सन् 1888 में जन्मे रामन् गणित और भौतिकी विषयों के कारण जगत-प्रसिद्ध हुए, जिसका श्रेय उनके पिता को जाता है। रामन् का मस्तिष्क विज्ञान के रहस्यों को सुलझाने के लिए बचपन से ही बेचैन रहता था। अपने काॅलेज के जमाने से ही उन्होंने शोध कार्यों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था।

उनका पहला शोधपत्रा फिलाॅसाॅफिकल मैगज़ीन में प्रकाशित हुआ था। रामन् सर्वप्रथम भारत सरकार के वित्त-विभाग में अफसर बने। उनका कार्यक्षेत्रा कलकत्ता (कोलकाता) रहा। नौकरी करते हुए उन्होंने कलकत्ता की प्रसिद्ध वैज्ञानिक संस्था ‘इंडियन एसोसिएशन फाॅर द कल्टीवेशन आॅफ साइंस’ के जरिए शोधकार्य चालू रखा। इस संस्था का उद्देश्य देश में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना था। रामन् ने सरकारी नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय में भी नौकरी की। रामन् की खोज भौतिकी के क्षेत्रा में एक क्रांति के समान थी। इसका पहला परिणाम तो यह हुआ कि प्रकाश की प्रकृति के बारे में आइंस्टाइन के विचारों का प्रायोगिक प्रमाण मिल गया। रामन् की खोज की वजह से पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन सहज हो

गया। पहले इस काम के लिए इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का सहारा लिया जाता था। यह मुश्किल तकनीक है और इसमें गलतियों की संभावना बहुत अधिक रहती है। रामन् की खोज के बाद पदार्थ की आणविक और परमाणविक संरचना के अध्ययन के लिए रामन् स्पेक्ट्रोस्कोपी का सहारा लिया जाने लगा। रामन् प्रभाव की खोज ने उनको विश्व की चोटी के वैज्ञानिकों की पंक्ति में ला खड़ा किया।

भारतीय संस्कृति से रामन् को हमेशा गहरा लगाव रहा। उन्होंने अपनी भारतीय पहचान को हमेशा अक्षुण्ण रखा। रामन् का वैज्ञानिक व्यक्तित्व प्रयोगों और शोधपत्र-लेखन तक ही सिमटा हुआ नहीं था। उनके अंदर एक राष्ट्रीय चेतना थी और वे देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास के प्रति समर्पित थे। विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने ‘करेंट साइंस’ नामक एक पत्रिका का भी संपादन किया।

रामन् वज्ञैानिक चेतना की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने हमें हमेशा यह संदेश दिया कि हम अपने आसपास घट रही विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं की छानबीन एक वैज्ञानिक दृष्टि से करें। तभी तो उन्होंने प्रकाश की किरणों की आभा के अंदर से वैज्ञानिक सिद्धांत खोज निकाले। हमारे आसपास ऐसी न जाने कितनी चीज़ें हैं जो अपने पात्रा की तलाश में हैं। शरूरत है, रामन् के जीवन से प्रेरणा लेने की और
प्रकृति के बीच छिपे वैज्ञानिक रहस्य का भेदन करने की।

लेखक परिचय - 

धीरंजन मालवे
इनका जन्म बिहार के नालंदा जिले के डुंवरावाँ गाँव में 9 मार्च 1952 को हुआ। ये एम.एससी (सांख्यिकी), एम. बी.ए और एल.एल.बी हैं। वे आज भी वैज्ञानिक जानकारी को आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। मालवे ने कई भरतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखी हैं, जो इनकी पुस्तक ‘विश्व-विख्यात भारतीय वैज्ञानिक’ पुस्तक में समाहित हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ

  1. आभा – चमक
  2. जिज्ञासा – जानने के इच्छा
  3. हासिल – प्राप्त
  4. अयिशयोक्ति – किसी बात को बढ़ा-चढ़ा कर कहना 
  5. रूझान – झुकाव
  6. असंख्य - अनगिनत
  7. उपकरण – साधन
  8. सृजित – रचा हुआ
  9. समक्ष – सामने 
  10. अध्यापन – पढ़ाना
  11. परिणति – परिणाम 
  12. ऊर्जा – शक्ति
  13. फोटॉन – प्रकाश का अंश
  14. नील वर्णीय - नीले रंग का
  15. ठोस रवे - बिल्लौर 
  16. एकवर्णीय - एक रंग का
  17. समृद्ध – उन्नतशील 
  18. भ्रांति - संदेह
  19.  

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