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संवाद- 5 - Hindi Grammar Class 10

प्रश्न 17. उड्डयन क्षेत्र में प्राइवेट एअरलाइंस कंपनियों के आने से सरल, सुखद और सस्ती यात्रा की आशा जगी थी, पर इनके व्यवहार ने इस उम्मीद पर पानी फेरने का कार्य किया है। इस विषय पर दो मित्रों विपिन और सौम्य की बातचीत को संवाद रूप में लिखिए।

उत्‍तर: 

विपिन: अरे सौम्य! सप्ताह भर से कहाँ थे तुम, दिखे ही नहीं।

सौम्य: मैं अपने पिता जी के साथ श्रीनगर घूमने चला गया था।

विपिन: फिर तो बड़ा मज़ा आया होगा।

सौम्य: मित्र, श्रीनगर घूमने का मज़ा और भी बढ़ जाता यदि पापा ने प्राइवेट एअर लाइंस से टिकट बुक न करवाया होता।

विपिन: क्यों प्राइवेट एअर लाइंस ने ऐसा क्या कर दिया?

सौम्य: प्राइवेट एअर लाइंस वालों ने सस्ती यात्रा का विज्ञापन दिया था। इसे देखकर ही पिता जी ने टिकट बुक करवाया था, पर एअर पोर्ट पर हमसे टैक्स के नाम पर टिकट के मूल्य का दो गुने से भी अधिक चार्ज वसूला गया।

विपिन: फिर, क्या इसके बाद भी यात्रा अच्छी नहीं रही?

सौम्य: नहीं विपिन बात यहीं तक होती तो ठीक थी परंतु उनकी फ़्लाइट दस घंटे लेट होने की अचानक घोषणा से सारे यात्री परेशान हो उठे। व दस घंटे बिताना काफ़ी कठिन था।

विपिन: फिर?

सौम्य: उड़ान के समय विमान में भी उनकी सेवाएँ अच्छी नहीं थी।

विपिन: पर वापसी तो अच्छी रही होगी?

सौम्य: वापसी के समय शाम छह बजे की फ्लाइट रात्रि को तीन बजे की हो गई। एअर पोर्ट पर ये नौ घंटे कैसे बीते, यह हम सहयात्री ही जानते हैं। बस किसी तरह दिल्ली आ गए।

विपिन: हमें इन प्राइवेट एअर लाइंस वालों की शर्ते जान-समझ लेना चाहिए।

सौम्य: ठीक कहते हो। अब हम आगे से सावधान रहेंगे।

प्रश्न 18. निरंतर बढ़ती जनसंख्या पर दो मित्रों में संवाद–

उत्‍तर: 
वैभव: नमस्कार सुमित! कहाँ से चले आ रहे हो?
सुमित: नमस्कार वैभव! एक प्राइवेट कंपनी में सेल्समैन का साक्षात्कार देने गया था।
वैभव: पर तुम इतनी जल्दी कैसे आ गए?
सुमित: वहाँ मुझसे पहले ही पाँच सौ से अधिक लोग पहुँचे थे।
वैभव: हाँ, आजकल हालात तो ऐसे ही हैं, पर क्या तुम इसका कारण जानते हो?
सुमित: इसका कारण नौकरियों की कमी हो सकती है।
वैभव: नहीं मित्र, इसका कारण है, हमारी निरंतर बढ़ती जनसंख्या।
सुमित: जनसंख्या वृद्धि और नौकरी का क्या संबंध है?
वैभव: बहुत बड़ा संबंध है मित्र! जनसंख्या बढ़ने के कारण नौकरी चाहने वलों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है।
सुमित: ठीक कह रहे हो। दस पदों के लिए इतनी भीड़ देख मैं तो दंग रह गया।
वैभव: इस जनसंख्या ने नौकरी के अलावा और भी बहुत-सी समस्याओं को जन्म दिया है।
सुमित: आखिर कौन-कौन-सी समस्याएँ हैं वे?
वैभव: बढ़ती जनसंख्या ने आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं तथा खान-पान की सुविधाओं पर भी प्रतिकूल असर डाला है।
सुमित: पर इस समस्या पर नियंत्रण कैसे हो?
वैभव: इस समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए सरकारी प्रयासों के अलावा युवाओं को आगे आना होगा।
सुमित: मित्र तुम ठीक कहते हो। व्यक्ति समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए जनसंख्या पर नियंत्रण बहुत आवश्यक है।

प्रश्न 19. देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर दो नागरिकों के मध्य बातचीत–

उत्‍तर: 

राहुल: अरे, मित्र सार्थक! कहाँ से चले आ रहे हो?
सार्थक: अरे क्या बताऊँ ? टेलीफ़ोन के दफ्तर से आ रहा हूँ।
राहुल: क्यों, क्या बात हो गई ? कुछ बिल जमा करवाने थे क्या?
सार्थक: क्या बताऊँ राहुल? बात तो बिल की है। इस बार का बिल बीस हजार आठ सौ रुपए भेज रखा है।
राहुल: क्या पिछले बिल भी ऐसे आते रहे हैं ?
सार्थक: नहीं राहुल पिछले महीनों के बिल दो-ढाई हज़ार रुपए के ही आया करते थे।
राहुल: क्या उन्होंने बिल ठीक कर दिया?
सार्थक: नहीं राहुल, क्लर्क बिल ठीक करने के पाँच हज़ार रुपए माँग रहा था।
राहुल: क्या तुमने उसे रिश्वत के पैसे दे दिए?
सार्थक: क्या करूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। आज तो समाज में हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
राहुल: यदि हमने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कदम न उठाया तो यह तो यूँ ही बढ़ता रहेगा।
सार्थक: तो हमें क्या करना चाहिए?
राहुल: करना क्या है, कल उसे बता दो कि दो-तीन दिन में रुपयों का इंतजाम होने पर दे दूंगा और हम दोनों इसी समय इंटेलीजेंस वालों को बताकर उसे रंगे हाथों पकड़वा देते हैं।
सार्थक: यही ठीक रहेगा। आखिर शुरुआत किसी-न-किसी को करनी ही पड़ेगी। चलो इसी समय इंटेलीजेंस कार्यालय चलते हैं।

प्रश्न 20. दूरदर्शन पर प्रसारित कार्यक्रमों के विषय में दो विद्यार्थियों के मध्य संवाद–

उत्‍तर: 

शुभम: मित्र ध्रुव! विज्ञान ने दूरदर्शन के रूप में हमें कितना सुंदर उपहार दिया है।
ध्रुव: शुभम, बिलकुल ठीक कहते हो। आज यह हर घर की ज़रूरत बन गई है।
शुभम: ठीक कह रहे हो। बच्चे, बूढ़े और युवा सभी इसके कार्यक्रमों का आनंद उठाते हैं।
ध्रुव: शुभम, दूरदर्शन मनोरंजन का ही नहीं, बल्कि ज्ञान का भी साधन है।
शुभम: है तो पर इसके कई चैनल अश्लील कार्यक्रम भी दिखा रहे हैं जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखने में शर्म आती
ध्रुव: ऐसे कार्यक्रमों का युवाओं पर अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। फिर भी ऐसे कार्यक्रम पता नहीं क्यों दिखाए जाते हैं ?
शुभम: इन कार्यक्रमों के निर्माताओं को ऐसे कार्यक्रमों से अधिक लाभ मिलता है तथा उनकी टी०आर०पी० बढ़ती है।
ध्रुव: कुछ भी हो, पर इन अश्लील कार्यक्रमों पर रोक लगनी ही चाहिए।
शुभम: पर इन पर रोक कैसे लगे?
ध्रुव: सरकार को चार-पाँच सदस्यों के सहयोग से ‘दूरदर्शन कार्यक्रम नियंत्रण बोर्ड’ का गठन कर देना चाहिए। इसकी स्वीकृति के बाद ही कार्यक्रम प्रसारित किया जाना चाहिए।
शुभम: पर समाज की भी तो कुछ ज़िम्मेदारी होनी चाहिए।
ध्रुव: समाज को भी ऐसे अश्लील कार्यक्रमों के खिलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए ताकि समाज का वातावरण स्वस्थ बना रहे।

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