Extra Questions Answers - बस की यात्रा Class 8 Notes | EduRev

Hindi Class 8

Created by: Trisha Vashisht

Class 8 : Extra Questions Answers - बस की यात्रा Class 8 Notes | EduRev

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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: लेखक व उसके मित्र कहाँ जा रहे थे?
उत्तर:
लेखक व उसके मित्रों को जबलपुर जाना था। वे पन्ना किसी काम से आए थे।

प्रश्न 2: लेखक को बस वयोवृद्ध क्यों लगी?
उत्तर:
बस बहुत ही पुरानी व खस्ता हालत में थी। उसे देखकर लग रहा था कि वह अपने आप चल भी नहीं पाएगी। इसलिए लेखक ने उसे वयोवृद्ध कहा। उनका मानना था कि अगर हम इस पर सवारी करेंगे, तो इसे कष्ट होगा।

प्रश्न 3: बस के विषय में डाक्टर ने क्या कहा?
उत्तर:
डाक्टर ने कहा-‘‘बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।’’

प्रश्न 4: बस में सवारी करके यात्रियों को ग्लानि कब होने लगी?
उत्तर: 
क्षीण चाँदनी में वृक्षों की छाया के नीचे जब वह बस किसी वृद्धा की तरह थककर रुक गई तो यात्रियों को ग्लानि होने लगी कि बेचारी पर लद कर क्यों आ रहे थे?

प्रश्न 5: प्रकृति के लुभावने दृश्यों को लेखक क्यों न देख सका?
उत्तर: 
लेखक को बस के किसी हिस्से पर भरोसा न रहा। सड़क के दोनों ओर प्रकृति के लुभावने दृश्य थे, परंतु लेखक को लग रहा था कि बस किसी भी पेड़ से टकरा सकती है। ऐसे में वह प्रकृति के लुभावने दृश्यों को भला कैसे देख पाता?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: लेखक का यह कहना कि यह बस गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब लेखक ने बस को चलते देखा कि बस का कोई भी हिस्सा पूर्णरूप से ठीक नहीं है और किसी भी हिस्से का आपसी सहयोग न देखा, तो उसे गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन अर्थात् भारतीयों का अंग्रेजों का साथ न देना याद आ गया। बस का ठीक प्रकार से न चलना अर्थात् भारतीयों का विरोध करना है, लेखक को ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ की याद दिलाता है, जिसमें गाँधीजी ने नमक पर टैक्स लगने पर दाण्डी यात्रा करके, समुद्री नमक बनाकर अंग्रेजों के कानून को तोड़ा था। इसलिए लेखक ने कहा कि यह बस गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलन के वक्त जवान रही होगी।

प्रश्न 2: कम्पनी के हिस्सेदार को क्या सचमुच में क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए या उन पर व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: 
कम्पनी का हिस्सेदार जिस प्रकार से घिसे-पिटे टायरों की मदद से बस चलवा रहा था उससे लगता था कि उसे सिर्फ पैसा कमाने से मतलब था। उसे जान की परवाह तनिक भी न थी। जिस प्रकार क्रान्तिकारी आन्दोलन के नेता पर भी अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए जुनून सवार रहता है, उसी तरह कम्पनी के हिस्सेदार का उद्देश्य पैसा कमाना तथा किसी भी तरह बस चलवाना था, इसलिए यह उन पर व्यंग्य किया है।

प्रश्न 3: लेखक ने बस की चाल, उसकी दशा तथा गांधी जी के आंदोलन को किस प्रकार एक समान बताया है? यह कितना उचित है?
उत्तर: बस ड्राइवर और कंपनी के हिस्सेदार बस को चलाने की कोशिश करते तो उसका कोई ने कोई भाग (पुर्जा) खराब हो जाता। एक पुर्जा ठीक किया जाता तो दूसरा खराब हो जाता अर्थात् उसके पुर्जे आपस में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसी तरह गांधी जी के असहयोग एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय नमक कानून तोड़कर भारतीय भी अंग्रेज़ी सरकार के प्रति अपना असहयोग प्रकट कर रहे थे, इसलिए ये एक समान लग रहे थे और पूरी तरह उचित भी है।

प्रश्न 4: लेखक को बस में माँ द्वारा बच्चे को शीशी से दूध पिलाने की बात क्यों याद आ रही थी?
उत्तर: अचानक चलती बस रुकने पर लेखक को मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है। ड्राइवर ने टंकी का पेट्रोल बाल्टी में निकालकर अपनी बगल में रख लिया और नली से इंजन में पेट्रोल भेजने लगा। यह देखकर लेखक को लगा कि अब बस कंपनी के हिस्सेदार बस का इंजन निकालकर अपनी गोद में रख लेंगे और उसे नली से पेट्रोल पिलाएँगे। यह दृश्य उसी तरह दिखेगा जैसे माँ बच्चे को शीशी से दूध पिलाती है।

मूल्यपरक प्रश्न
प्रश्न 1: ‘बस की यात्रा’ पाठ के आधार पर उपभोक्ता संरक्षण के विषय में आप क्या कह सकते हैं ?

उत्तर: हमारे देश में ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून’ बनकर लागू हो चुका है, लेकिन हमारे देश के लोग भोले-भाले भी हैं। उनमें अपने उपभोक्ता-अधिकारों के प्रति जागरुकता नहीं आई है। लोगों के बीच ‘जागो ग्राहक जागो’ का एक नारा तो है, परंतु यह प्रयास अभी अधूरा है। पाठ ‘बस की यात्रा’ के माध्यम से लेखक ने व्यंग्य तो किया ही है, उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश भी की है, क्योंकि लोग ठगी का शिकार होते रहते हैं। खाद्य-पदार्थों में चोरबाजी, मिलावट भी होती है, लेकिन बहुत कम लोग इनके प्रति कानूनी कार्यवाही करते हैं। इसका फायदा दुकानदार, मिलावटखोर आदि उठाते रहते हैं और आम जनता को लूटते रहते हैं। इसलिए लोगों को उपभोक्ता-अधिकारों के प्रति जागरुक करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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