NCERT Solutions - फिराक गोरखपुरी Humanities/Arts Notes | EduRev

Hindi Class 12

Humanities/Arts : NCERT Solutions - फिराक गोरखपुरी Humanities/Arts Notes | EduRev

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1. शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?
 उत्तर:- 
शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर यह बताना चाहता है कि सावन मास में रक्षाबंधन के दिन बरसा में जिस तरह बिजली चमकती है उसी प्रकार बहन चमकती राखी बाँधकर भाई के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है। रक्षाबंधन एक मीठा बंधन है। सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है वही संबंध भाई का बहन से होता है।

 

2. खुद का परदा खोलने से क्या आशय है?
 उत्तर:- 
‘खुद का परदा’ खोलने से कवि का आशय है कि जो व्यक्ति उनकी बुराई करता है वह जाने-अनजाने संसार के सामने अपनी कमज़ोरी ही प्रकट करता है।

 

3. किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं  इस पंक्ति में शायर की किस्मत के साथ तना-तनी का रिश्ता अभिव्यक्त हुआ है। चर्चा कीजिए।
 उत्तर:- 
कवि को निराशा के क्षणों में ऐसा लगता है कि किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। कवि कहता है कि मैं किस्मत पर रोता हूँ और किस्मत मुझे उदास देखकर रोती है। इस प्रकार मैं और किस्मत दोनों एक जैसे हैं। दोनों असफलता और अभाव के कारण रोते रहते हैं।

 

4.1 टिप्पणी करें
 गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता। 

गोदी का चाँद अर्थात् बच्चा माँ को हर्षित करता है और गगन का चाँद बच्चे को यानि गोदी के चाँद को हर्षित करता है।

 

4.2 टिप्पणी करें
 सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व। 

रक्षाबंधन एक मीठा बंधन है। सावन में रक्षाबंधन आता है। सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है वही संबंध भाई का बहन से होता है। भाई-बहन के मन में प्यार की घटाएँ होती हैं।

 

5. इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।
 उत्तर:- 
हिंदी के प्रयोग –
आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी
हाथों पे झुलाती है उसे गोद-भरी
गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी

रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली
छायी है घटा गगन की हलकी-हलकी
बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे
भाई के हैं बाँधती चमकती राखी।

उर्दू के प्रयोग –
उजझे हुए गेसुओं में कंघी करके
देख के आईने में चाँद उतर आया है।

लोक-भाषा के प्रयोग –
रह -रह के हवा में जो लोका देती है।

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