Short Question Answers - श्री चंद्र गहना से लोटती बेर Class 9 Notes | EduRev

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Class 9 : Short Question Answers - श्री चंद्र गहना से लोटती बेर Class 9 Notes | EduRev

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कवि ने चने को बीते के बराबर क्यों कहा है? ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता के अनुसार स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः
उसके आकार के कारण। चने का पौधा कम ऊँचाई वाला होता है।
व्याख्यात्मक हल:
चने का पौधा कद में छोटा, ठिगना और कम ऊँचाई वाला होता है, जो एक बालिश्त (बित्ते/बहुत छोटे) के बराबर होगा। उसके छोटे आकार के ही कारण कवि ने उसे बित्ते के बराबर कहा है।

प्रश्न 2. ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता में कवि किस भूमि को अधिक उपजाऊ बता रहे हैं तथा अधिक उपजाऊ बताने में क्या संदेश निहित है?  
उत्तरः शहरों से दूर गाँवों की भूमि।
किसानों के प्रेम व परिश्रम के कारण ही उपजाऊ है।
शहरों के समान प्रदूषण नहीं है।
व्याख्यात्मक हल:
प्रस्तुत कविता में कवि शहरों से दूर गाँव की भूमि को अधिक उपजाऊ बता रहा हैं, क्योंकि वहाँ की भूमि किसानों के प्रेम व परिश्रम के कारण अधिक उपजाऊ है। वहाँ का वातावरण बहुत शांत है। वहाँ न तो व्यापारिक व शहरी गतिविधियों का प्रभाव है और न ही शहरों के समान प्रदूषण है। वहाँ के पेड़-पौधे भी प्रेम करते हैं। वहाँ प्रकृति का प्रत्येक अंग प्रेम परिपूर्ण दिखाई देता है।
प्रश्न 3. ‘इस विजन में दूर व्यापारिक नगर से प्रेम की प्रिय भूमि उपजाऊ अधिक है।’-इस पंक्ति के माध्यम से कवि किस भूमि की बात कर रहे हैं और क्यों ? ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता के आधार पर बताइए।
अथवा
‘इस विजन में .........  अधिक है’-पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का क्या आक्रोश है और क्यों ?

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1072]

उत्तरः इन पंक्तियों में कवि ने नगरीय संस्ड्डति के प्रति यह आक्रोश व्यक्त किया है कि वहाँ शोर-शराबा बहुत अधिक है। वहाँ मन को शान्ति नहीं मिलती है, भाग-दौड़ अधिक है। जबकि ग्रामीण वातावरण में स्वच्छन्दता है। यहाँ प्रेम की अधिकता है। लोगों की भीड़ यहाँ नहीं है। नगरीय संस्कृति में व्यापारिक हलचलें अधिक हैं। कवि का इनके प्रति आक्रोश है।

प्रश्न 4. सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता है ?

C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1055]

उत्तरः सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि उसके पकने की बात कहना चाहता है। पीले फूलों की शोभा फैल गई है और सरसों पककर तैयार हो गई है। पूर्ण विकास हो चुका है अर्थात् विवाह योग्य हो गई है। 

प्रश्न 5. अलसी के मनोभावों का वर्णन कविता के आधार पर कीजिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1017]

उत्तरः कवि ने अलसी को एक सुन्दर स्नेहमयी नायिका के रूप में चित्रित किया है। उसकी देह पतली है। कमर लचीली है। अतः वह बहुत चंचल है। उसके सिर पर नीले-नीले फूल उसकी चंचलता को और अधिक बढ़ा रहे हैं। यह अलसी रूपी नायिका प्रेम में पागल है और अपना प्रथम स्पर्श करने वाले को दिल देने को तत्पर जान पड़ती है।

प्रश्न 6. अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है ?
अथवा
‘अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है ? पठित कविता के आधार पर लिखिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1066]

उत्तरः कवि ने अलसी को एक हठीली नवयुवती कहा है। वह नीले रंग के सुन्दर फूल को सिर पर सजाकर कह रही है-जो मुझे छू लेगा उसे मैं अपने हृदय को दान कर दूँगी। वह उसे ही प्यार करेगी जो उसके सिर पर रखे फूल को छू लेगा। इसलिए उसे हठीली कहा है।

प्रश्न 7. ‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खम्भा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है ? कविता के आधार पर बताइए।

[C.B.S.E. 2011 Term II, Set B1]

उत्तरः कवि ने तालाब में सूरज की परछाईं की कल्पना चाँदी के एक बड़े गोल खम्भे से की है। तालाब में सूरज की परछाईं चमचमाती है, तो उसे देखकर आँखें चकमका रही हैं। सूरज, चाँदी के समान चमक रहा है। 

प्रश्न 8. पठित कविता के आधार पर ‘हरे चने’ के रूप सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1016]

अथवा
चने के पौधे को ठिंगना क्यों कहा है और किस प्रकार सजकर खड़ा है ? ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता के आधार पर लिखिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1054]

उत्तरः हरा चना खेत में खड़ा है। कविता में हरे चने के पौधे को ठिगना अर्थात् छोटे कद वाला बताया गया है। उसके सिर पर गुलाबी रंग का छोटा-सा फूल सुशोभित है। यह गुलाबी फूल हरे चने के पेड़ पर ऐसे शोभा दे रहे हैं जैसे साफा बँधा हुआ है और दूल्हे की तरह बन-ठन कर खड़ा है।

प्रश्न 9. काले माथे वाली चिड़िया अपने सफेद पंखों से क्या करती है ? उसकी मानसिकता स्पष्ट कीजिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1016]

उत्तरः काले माथे वाली चिड़िया अपने श्वेत पंखों से जल में मछली के उछलते ही झपट्टा मारती है तथा मछली को चोंच में लेकर उड़ जाती है। उसकी मानसिकता छिपकर वार करने वालों के समान है।

प्रश्न 10. कवि ने ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता में अलसी के पौधे की क्या विशेषताएँ बताई हैं ? उसका रूप सौन्दर्य दर्शाते हुए लिखिए।

C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1019] 

उत्तरः अलसी की विशेषताएँ-पतली, लचीली, हठीली, नीले फूल वाली और कमजोर शरीर वाली है। वह नाजुक होते हुई भी रूपवती है जो स्पर्श करने पर अपना हृदय देने को तत्पर है।

प्रश्न 11. ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता का कवि कहाँ बैठकर किस ऋतु का दृश्य देख रहा है ? इस ऋतु का महीना तथा उसकी दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1018]

उत्तरः प्रस्तुत कविता का कवि खेत की मेड़ पर बैठकर बसंत ऋतु का (फागुन मास में) दृश्य देख रहा है। फसल का अपने यौवन पर होना तथा मौसम मस्त और सुहाना होना आदि इस ऋतु की विशेषताएँ हैं। 

प्रश्न 12. ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता के आधार पर काले माथे वाली चिड़िया की दो विशेषताएँ बताइए।

[C.B.S.E. 2012 Term II, HA-1071]

उत्तरः चिड़िया का मस्तक काला तथा पंख सफेद है। वह आसमान में उड़ते हुए भी पानी पर नजर रखती है और मछली के उछलते ही उस पर झपट पड़ती है। अतएव वह बहुत चतुर एवं चालाक है।

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