निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. 'आदमीनामा' कविता का प्रतिपाद्य बताइए।
उत्तरः 'आदम़ीनामा' शीर्षक कविता में नजीर अकबरावादी ने आदमी के विभिन्न रूपों को दर्शाया है। इस संसार में कुछ आदमी बहुत अच्छे हैं तो कुछ हद दर्जे के कमीने हैं। कुछ लोग मन्दिर-मस्जिद बनाने तथा धार्मिक प्रवचन देने का काम करते हैं तो कुछ वहाँ से जूतियाँ तक चुरा ले जाते हैं। कुछ लोग दूसरों की मदद करने को तैयार रहते हैं तो कुछ दूसरे को जान से मार डालने तक से नहीं हिचकिचाते। दुनिया में कुछ लोग शाही सुख भोगने वाले हैं तो कुछ भुखमरी में रह रहे हैं। सभी लोग अपनी-अपनी विशेषताएँ तथा कमियाँ रखते हैं। सभी लोग एक समान नहीं हो सकते।
प्रश्न 2. 'आदमीनामा' में वर्णित आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तरः इस जग में हर आदमी की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है। कुछ आदमी मेहनतकश होते हैं जो ईमानदारी से धन को कमाते हैं। कुछ अपने कपट से धन संचय करते हैं। कुछ परोपकारी होते हैं तो कुछ लालची भी होते हैं। कुछ चुगलखोर होते हैं कुछ भाईचारे की भावना रखते हैं। कुछ नफरत के बीज बोने वाले होते हैं तो कुछ नम्र स्वभाव के सहनशील होते हैं। तो कुछ झगड़ालू भी होते हैं। इस प्रकार आदमी अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के होते हैं। स्वाभावगत भिन्नता के कारण आदमी की प्रवृतियाँ भी भिन्न हो जाती हैं।
प्रश्न 3. 'आदमी नामा' में किन तीन तरह के व्यक्तियों पर व्यंग्य किया गया है ? कविता के अंश लिखकर अर्थ द्वारा बताइए।
उत्तरः पढ़ते हैं आदमी को कुरआन और नमाज
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी।
अर्थात-कवि व्यंग्य कर रहे हैं कि आदमी भाँति-भाँति के होते हैं। एक वे हैं जो लोगों को कुरआन, नमाज पढ़ाते हैं। दूसरे वे हैं जो उन लोगों की जूतियाँ तक चुरा लेते हैं। तीसरे वे हैं जो इन चोरों को पकड़ते हैं। व्यक्ति के स्वभाव और कर्म की विचित्रता यहाँ चित्रित की गई है।
प्रश्न 4. आदमी नामा कविता का कौन-सा अंश आपको अच्छा लगा और क्यों ?
उत्तरः 'यां आदमी पै जान को वारे है आदमी
और आदमी पै तैग को मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी।
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी।
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी।
मुझे ये पंक्तियाँ इसलिये अच्छी लगी क्योंकि इसमें दूसरे के लिये अपनी जान न्यौछावर करने वाली भावना है तो वही तलवार चलाकर दूसरे की जान ले लेने वाला भी आदमी है। इन पंक्तियों में एक आदमी के मुसीबत में पड़ने पर दूसरे आदमी को सहायता के लिये पुकारने पर आदमी परोपकार की भावना से भर दूसरे आदमी की सहायता करने के लिये दौड़ पड़ता है।
प्रश्न 5. कवि ने 'आदमीनामा' कविता में आदमी शब्द की पुनरावृत्ति किस उद्देश्य से की है ?
उत्तरः आदमी शब्द की पुनरावृत्ति करने के पीछे कवि का यह उद्देश्य है कि संसार का सारा कार्य-व्यापार आदमी के सहारे से ही चल रहा है। समाज में अच्छे बुरे सभी प्रकार के कार्य आदमियों द्वारा ही सम्पन्न किये जाते हैं इस कारण ईश्वर ने भिन्ना-भिन्ना प्रवृत्तियों वाले आदमियों की रचना की है।
प्रश्न 6. 'आदमीनामा' शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति धारणा बनती है?
उत्तरः 'आदमीनामा' शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर हमारे मन में मनुष्य के प्रति दो प्रकार की धारणा बनती है-एक अच्छी धारणा, दूसरी बुरी धारणा। जो मनुष्य सुविधा व साधन संपन्न हैं, लेकिन दूसरों की समय पड़ने पर सहायता नहीं कर सकता, वह निश्चित रूप से अच्छा मनुष्य नहीं है। दूसरी ओर किसी की एक पुकार पर दौड़कर सहायता करने जाना एक अच्छे मनुष्य की निशानी है। इस प्रकार मनुष्य चाहे कितना भी अच्छा या बुरा क्यों न बन जाए उसमें एक सीमा तक मनुष्यता का होना अपरिहार्य है, अन्यथा वह मनुष्य कहलाने के योग्य नहीं रह पाएगा। मानवीय मूल्यों की उपस्थिति के बिना मानव की श्रेणी में शामिल होना अर्थपूर्ण नहीं है।
प्रश्न 7. कवि ने 'आदमीनामा' में मनुष्य के भिन्न-भिन्न रूपों का वर्णन करके किसे प्राथमिकता दी है?
उत्तरः वास्तव में, कवि ने अपनी कविता 'आदमीनामा' में मनुष्य के अनेक रूपों का वर्णन किया है, जिसमें अमीर-गरीब, राजा-रंक, शक्तिशाली-कमजोर, धार्मिक-अधार्मिक, रक्षक-भक्षक, सौभाग्यशाली-दुर्भाग्यशाली आदि रूप शामिल हैं। कवि ने मनुष्य के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों रूपों का वर्णन करके यह पाठकों पर छोड़ दिया है कि वे जिस रूप को अपनाना चाहें, अपना लें। कवि ने इन रूपों का केवल वर्णन मात्र ही किया है, इनके निर्मित होने के कारणों की चर्चा नहीं की है। वह लोगों को सिर्फ मानव के विभिन्न रूपों से परिचित कराना चाहता है। कवि ने इन विभिन्न रूपों में से किसे स्वीकार किया जाए और क्यों, इस पर मौन साध रखा है।
इसलिए यह कहा जा सकता है कि कवि का उद्देश्य मनुष्य के विभिन्न रूपों से पाठकों को अवगत कराना मात्र है। किस रूप को स्वीकार करना चाहिए और उसके अनुसार कैसा कार्य करना चाहिए, यह पाठकों की मानसिकता एवं इच्छा पर निर्भर है।
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