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पठन सामग्री और सार: उत्साह और अट नहीं रही

भावार्थ :

उत्साह

प्रस्तुत कविता एक आह्वाहन गीत है। इसमें कवि बादल से घनघोर गर्जन के साथ बरसने की अपील कर रहे हैं। बादल बच्चों के काले घुंघराले बालों जैसे हैं। कवि बादल से बरसकर सबकी प्यास बुझाने और गरज कर सुखी बनाने का आग्रह कर रहे हैं। कवि बादल में नवजीवन प्रदान करने वाला बारिश तथा सबकुछ तहस-नहस कर देने वाला वज्रपात दोनों देखते हैं इसलिए वे बादल से अनुरोध करते हैं कि वह अपने कठोर वज्रशक्ति को अपने भीतर छुपाकर सब में नई स्फूर्ति और नया जीवन डालने के लिए मूसलाधार बारिश करे।
आकाश में उमड़ते-घुमड़ते बादल को देखकर कवि को लगता है की वे बेचैन से हैं तभी उन्हें याद आता है कि समस्त धरती भीषण गर्मी से परेशान है इसलिए आकाश की अनजान दिशा से आकर काले-काले बादल पूरी तपती हुई धरती को शीतलता प्रदान करने के लिए बेचैन हो रहे हैं। कवि आग्रह करते हैं की बादल खूब गरजे और बरसे और सारे धरती को तृप्त करे।

अट नहीं रही

प्रस्तुत कविता में कवि ने फागुन का मानवीकरण चित्र प्रस्तुत किया है। फागुन यानी फ़रवरी-मार्च के महीने में वसंत ऋतू का आगमन होता है। इस ऋतू में पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आते हैं। रंग-बिरंगे फूलों की बहार छा जाती है और उनकी सुगंध से सारा वातावरण महक उठता है। कवि को ऐसा प्रतीत होता है मानो फागुन के सांस लेने पर सब जगह सुगंध फैल गयी हो। वे चाहकर भी अपनी आँखे इस प्राकृतिक सुंदरता से हटा नही सकते।
इस मौसम में बाग़-बगीचों, वन-उपवनों के सभी पेड़-पौधे नए-नए पत्तों से लद गए हैं, कहीं यहीं लाल रंग के हैं तो कहीं हरे और डालियाँ अनगिनत फूलों से लद गए हैं जिससे कवि को ऐसा लग रहा है जैसे प्रकृति देवी ने अपने गले रंग बिरंगे और सुगन्धित फूलों की माला पहन रखी हो। इस सर्वव्यापी सुंदरता का कवि को कहीं ओऱ-छोर नजर नही आ रहा है इसलिए कवि कहते हैं की फागुन की सुंदरता अट नही रही है।

कवि परिचय

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

इनका जन्म बंगाल के महिषादल में सन 1899 में हुआ था। ये मूलतः गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। इनकी औपचारिक शिक्षा नवीं तक महिषादल में ही हुई। इन्होने स्वंय अध्ययन कर संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी का ज्ञान अर्जित किया। रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की विचारधारा ने इनपर गहरा प्रभाव डाला। सन 1961 में इनकी मृत्यु हुई।

प्रमुख कार्य

काव्य-रचनाएं - अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते।

कठिन शब्दों के अर्थ

  1. धराधर - बादल
  2. उन्मन - अनमनापन
  3. निदाघ - गर्मी
  4. सकल - सब
  5. आभा - चमक
  6. वज्र - कठोर
  7. अनंत - जिसका अंत ना हो
  8. शीतल - ठंडा
  9. छबि - सौंदर्य
  10. उर - हृदय
  11. विकल - बैचैन
  12. अट - समाना
  13. पाट-पाट - जगह-जगह
  14. शोभा श्री - सौंदर्य से भरपूर
  15. पट - समा नही रही
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FAQs on पठन सामग्री और सार: उत्साह और अट नहीं रही

1. उत्साह कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत ने युवाओं को किस चीज़ के लिए प्रेरित किया है?
Ans. सुमित्रानंदन पंत की कविता 'उत्साह' युवाओं को आशावाद और जीवन संघर्ष के लिए प्रेरित करती है। कविता में जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति और दृढ़ निश्चय पर बल दिया गया है। पंत के अनुसार, उत्साह ही मनुष्य को आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। यह कविता CBSE कक्षा 10 पाठ्यक्रम में आशा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है।
2. 'अट नहीं रही' कविता में कवि ने वसंत ऋतु का वर्णन कैसे किया है?
Ans. कवि निराला की 'अट नहीं रही' में वसंत की अप्रतिरोध्य शक्ति का जीवंत चित्रण है। प्रकृति की सौंदर्य और ऊर्जा इतनी तीव्र है कि आकाश, धरती और वायु सभी में वसंत उतर आई है। फूलों की खुशबू, पक्षियों का कलरव और पत्तियों की हरीतिमा सब कुछ प्रकृति के जागरण को दर्शाती है। यह कविता प्रकृति के नवीकरण और जीवन शक्ति का सूचक है जो CBSE पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
3. 'उत्साह' और 'अट नहीं रही' कविताओं में मुख्य अंतर क्या है?
Ans. 'उत्साह' में सुमित्रानंदन पंत मानवीय संघर्ष और आंतरिक शक्ति पर केंद्रित हैं, जबकि 'अट नहीं रही' में निराला बाहरी प्रकृति की सौंदर्य और ऊर्जा को दर्शाते हैं। पंत की कविता प्रेरणामूलक और दार्शनिक है, जबकि निराला की कविता वर्णनात्मक और संवेदनशील है। पहली कविता विचार-केंद्रित है, दूसरी भाव-केंद्रित है। दोनों कविताएँ शक्ति और जीवन का संदेश देती हैं, पर दृष्टिकोण भिन्न है।
4. पठन सामग्री में 'उत्साह' कविता का सार क्या है और इसे समझने के लिए क्या करें?
Ans. 'उत्साह' कविता का सार है कि जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए आंतरिक साहस और उत्साह आवश्यक है। कवि पंत जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। कविता की गहन समझ के लिए छात्रों को मुख्य भाव, प्रतीकों और काव्य-तत्वों को नोट करना चाहिए। EduRev पर उपलब्ध विस्तृत नोट्स, माइंड मैप्स और फ्लैशकार्ड्स का उपयोग करके इस कविता को प्रभावी तरीके से समझा जा सकता है।
5. 'अट नहीं रही' में कवि ने कौन-कौन सी प्रकृति संबंधी छवियों का उपयोग किया है?
Ans. निराला ने 'अट नहीं रही' में वसंत की सुंदरता दिखाने के लिए फूलों की खुशबू, पक्षियों के गीत, नीले आकाश, हरी पत्तियों और कोयल की बोली जैसी विविध प्रकृति छवियों का उपयोग किया है। ये प्रतीकात्मक छवियाँ वसंत के आगमन और प्रकृति के नवजीवन को दर्शाती हैं। ऐसे साहित्यिक साधनों को समझने के लिए पठन सामग्री और सार का गहन अध्ययन आवश्यक है। यह कविता CBSE के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा विषय है।
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