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कविता की व्याख्या: संगतकार

प्रसंग 1

मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज़ सुंदर कमज़ोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य

या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज़ में
वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से

व्याख्या: उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब मुख्य गायक किसी संगीत सभा में अपना कोई गीत प्रस्तुत कर रहा होता है तो उसकी भारी व गंभीर आवाज के साथ ही हमें संगतकार ( मुख्य गायक का साथ देने वाला सह गायक ) की आवाज सुनाई देती है। वह आवाज हल्की-हल्की मगर सुंदर और मधुर सुनाई देती हैं। कवि उस संगतकार की आवाज सुन कर अंदाजा लगा रहे हैं कि यह संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई भी हो सकता है या मुख्य गायक का कोई शिष्य भी हो सकता है या फिर संगीत सीखने के लिए पैदल चलकर मुख्य गायक के पास आने वाला कोई उनका दूर का रिश्तेदार भी हो सकता है। और सबसे खास बात यह है कि यह संगतकार जब से गायक ने गाना शुरू किया है तब से उसका साथ देना आया है। यानि शुरू से ही वह संगतकार मुख्य गायक की आवाज में अपनी आवाज मिलाकर उसके संगीत को और प्रभावशाली बनाता आया है।

प्रसंग 2

खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था

व्याख्या: उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि कभी - कभी मुख्य गायक किसी गाने का अंतरा गाने में इतना मगन (तल्लीन) हो जाता है कि वह अपने सुरों से ही भटक जाता है। यानि असली सुरों को ही भूल जाता है। और अपने ही गीत या ताल में लगने वाले स्वरों के उच्चारण को भूल जाता है। वह संगीत के उस मोड़ पर आ जाता है जहाँ अंत निकट हो। ऐसी स्थिति में संगतकार , जो हमेशा मुख्य सुरों को पकड़े रहता है। वही उस समय सही सरगम को दुबारा पकड़ने में मुख्य गायक की मदद कर उसे उस विकट स्थिति से बाहर लाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि संगतकार हमेशा मूल स्वरों को ही दोहराता रहता हैं। जब मुख्य गायक गीत गाते हुए सुरों की दुनिया में खो जाता है और अंतरे के सुर - तान की बारीकियों में उलझकर बिखरने लगता हैं व मुख्य सुरों को भूल जाता है । तब वह संगतकार के गाने को सुनकर वापस मुख्य सुर से जुड़ जाता है। अर्थात संगतकार , सुर से भटके हुए मुख्य गायक को वापस सुर पकड़ने में मदद करता हैं। कवि आगे कहते हैं कि उस समय ऐसा लगता है मानो जैसे कि वह संगतकार मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान समेटते हुए उसके साथ आगे बढ़ रहा है। उस समय उस मुख्य गायक को अपना बचपन याद आ जाता है जब वह नया - नया गाना सीखता था या नौसिखिया था। और उसका गुरु उसको सुरों से भटकने न दे कर सही सुरों पर बने रहने में उसकी मदद करता था।

प्रसंग 3

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग

व्याख्या: उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब कभी मुख्य गायक संगीत शास्त्र से संबंधित विधा का प्रयोग करके ऊंचे स्वर में गाता है तो उसका गला बैठने लगता है। उससे सुर सँभलते नहीं हैं। तब गायक को ऐसा लगने लगता है जैसे कि अब उससे आगे गाया नहीं जाएगा। उसके भीतर निराशा छाने लगती है। उसका मनोबल खत्म होने लगता है। उसकी आवाज कांपने लगती हैं जिससे उसके मन की निराशा व हताशा प्रकट होने लगती है। उस समय मुख्य गायक का हौसला बढ़ाने वाला व उसके अंदर उत्साह जगाने वाला संगतकार का मधुर स्वर सुनाई देता हैं। उस सुंदर आवाज को सुनकर मुख्य गायक फिर नए जोश से गाने लगता हैं। कवि आगे कहते हैं कि कभी - कभी संगतकार मुख्य गायक को यह बताने के लिए भी उसके स्वर में अपना स्वर मिलाता है कि वह अकेला नहीं है। कोई है जो उसका साथ हर वक्त देता है। और यह भी बताने के लिए कि जो राग या गाना एक बार गाया जा चुका है। उसे फिर से दोबारा गाया जा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि कभी - कभी मुख्य गायक अपने द्वारा गायी गई पंक्तियों को दोहराना नहीं चाहता जिस वजह से वह अपनी लय से भटकने लगता है , तभी मुख्य गायक का साथ देने संगतकार आ जाता है और मुख्य गायक को हौसला देता है कि जब - जब भी वह डगमगाएगा उसका साथ देने के लिए वह हमेशा उसके साथ है और जो पंक्तियाँ मुख्य गायक गा चूका है उन पंक्तियों को भी दोहराया जा सकता है।

प्रसंग 4

और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
या अपने स्वर को उँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

व्याख्या: उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब भी संगतकार मुख्य गायक के स्वर में अपना स्वर मिलता है यानि उसके साथ गाना गाता है तो उसकी आवाज में एक संकोच साफ सुनाई देता है। और उसकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि उसकी आवाज मुख्य गायक की आवाज से धीमी रहे। अर्थात उसका स्वर भूल कर भी मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा न हो जाए इसका ध्यान वह बहुत अच्छे से रखता है। लेकिन हमें इसे संगतकार की कमजोरी या असफलता नहीं माननी चाहिए क्योंकि वह मुख्य गायक के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसा करता है। कहने का तात्पर्य यह है कि अपना स्वर ऊँचा कर वह  मुख्य गायक के सम्मान को ठेस नही पहुँचाना चाहता है। यह उसका मानवीय गुण है।

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FAQs on कविता की व्याख्या: संगतकार

1. What is the main theme of Sangatkaar poem and why does it matter for Class 10 Hindi?
Ans. Sangatkaar explores the life of an accompanist who sacrifices personal recognition to support the lead singer, highlighting themes of selflessness, duty, and invisible contribution. Understanding this central message helps students grasp the poem's deeper meaning about humility and social roles, essential for board exam comprehension and literary analysis in CBSE Hindi curriculum.
2. Who is the Sangatkaar in the poem and what is his role?
Ans. The Sangatkaar is the background musician or accompanist who plays supporting melodies alongside the main vocalist. His role symbolises those individuals who work behind the scenes without seeking fame or appreciation. The poet uses this character to celebrate the quiet dignity of supporting others, a key poetic device students must identify for essay writing.
3. How does the poet portray the accompanist's sacrifice in Sangatkaar?
Ans. The poet depicts the accompanist's emotional and professional sacrifice through vivid imagery-he merges his identity into the lead singer's performance while suppressing his own talent and ambitions. Metaphors and symbolic language reveal how he accepts invisibility gracefully. Recognising these literary techniques of sacrifice and devotion helps students write stronger textual analysis answers.
4. What is the symbolism behind the Sangatkaar character in Hindi poetry?
Ans. Sangatkaar symbolises society's unsung heroes-teachers, parents, supporters-who find meaning in enabling others' success rather than personal glory. This symbolic representation critiques the obsession with fame while celebrating the spiritual fulfillment found in selfless service. Understanding this symbolism strengthens students' interpretation skills for CBSE board examinations.
5. How should I prepare Sangatkaar poem for my Hindi exam answers?
Ans. Master key poetic devices like metaphor, imagery, and tone; identify important stanzas showing the accompanist's character; note contrasts between visible fame and invisible support; and practice writing both short and long answers explaining the poem's central message. Using mind maps and flashcards from EduRev helps organise themes systematically for confident exam performance.
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