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Long Question Answers - रैदास के पद

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कवि ने अपनी तुलना ईश्वर से किस रूप में की है?

उत्तरः कवि अपने आराध्य को याद करते हुए उनसे अपनी तुलना करता है। उनका प्रभु हर तरह से श्रेष्ठ है तथा उनके मन में निवास करता है। हे प्रभु आप चंदन तथा हम पानी हैं। आपकी सुगंध मेरे अंग-अंग में बसी है। आप बादल हैं, मैं मोर हूँ। जैसे घटा आने पर मोर नाचता है, वैसे ही मेरा मन भी आपके स्मरण से नाच उठता है। जैसे चकोर प्रेम से चाँद को देखता है वैसे ही मैं आपको देखता हूँ। प्रभु आप दीपक हैं तो मैं उसमें जलने वाली बाती हूँ। जिसकी ज्योति दिन-रात जलती रहती है। प्रभु आप मोती हो तो मैं माला का धागा हूँ। जैसे सोने और सुहागे का मिलन हो गया हो, प्रभु आप स्वामी हैं मैं आपका दास हूँ। मैं सदा आपकी भक्ति करता हूँ।

प्रश्न 2. रैदास के प्रभु में वे कौन-सी विशेषताएँ हैं जो उन्हें अन्य देवताओं से श्रेष्ठ सिद्ध करती हैं?
उत्तरः 

  • वे केवल झूठी प्रशंसा या स्तुति नहीं चाहते।
  • वे जाति प्रथा या छुआछुत को महत्व नहीं देते। वे समदर्शी हैं।
  • उनके लिए भावना प्रधान है। वे भक्त वत्सल हैं।
  • दीन दुखियों व शोषितों की विशेष रूप से सहायता करते हैं। वे गरीब नवाज हैं।
  • वे किसी से डरते नहीं हैं, निडर हैं।

प्रश्न 3. कवि रैदास ने अपने पद के माध्यम से तत्कालीन समाज का चित्रण किस प्रकार किया है?
उत्तरः 

  • कवि रैदास ने अपने पद 'ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै' में सामाजिक छुआछूत एवं भेदभाव की तत्कालीन स्थिति का अत्यंत मार्मिक एवं यथार्थ चित्र खींचा है।
  • उन्होंने अपने पद में कहा है कि गरीब एवं दीन-दुखियों पर कृपा बरसाने वाला एकमात्र प्रभु है। उन्होंने ही एक ऐसे व्यक्ति के माथे पर छत्र रख दिया है, राजा जैसा सम्मान दिया है, जिसे जगत के लोग छूना भी पसंद नहीं करते। समाज में निम्न जाति एवं निम्न वर्ग के लोगों को तिरस्कारपूर्ण दृष्टि से देखा जाता था, ऐसे समाज में प्रभु ही उस पर द्रवित हुए।
  • कवि द्वारा नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना, सैन आदि संत कवियों के दिए गए उदाहरण दर्शाते हैं कि लोग निम्न जाति के लोगों के उच्च कर्म पर विश्वास भी मुश्किल से करते थे। इसलिए कवि को उदाहरण देने की आवश्यकता पड़ी। इन कथनों से तत्कालीन समाज की सामाजिक विषमता की स्पष्ट झलक मिलती है।

प्रश्न 4. कवि रैदास अन्य कवियों जैसे नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना एवं सैन की चर्चा क्यों करते हैं?उत्तरः 

  • कवि रैदास का कहना है कि उच्च कोटि के संत जैसे-नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना एवं सैन निम्न वर्ण एवं निम्न वर्ग के सदस्य होते हुए भी ईश्वर की कृपा पाकर तर गए अर्थात् वे इस संसार रूपी भव सागर से पार हो गए। ठीक उसी प्रकार सभी संतों को, चाहे वे निम्न वर्ण एवं निम्नवर्ग के ही क्यों न हों, इस पर ध्यान देना चाहिए और ईश्वर की भक्ति एवं आराधना के द्वारा मोक्ष प्राप्त करने के उपाय करने चाहिए।
  • वास्तव में ईश्वर अत्यधिक दयालु एवं सर्वशक्तिमान हैं और उनके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है। वह सब कुछ करने में समर्थ हैं, बस उनकी कृपा की आवश्यकता है। संत जनों को यही बताने के लिए कवि ने उपरोक्त संतों का नाम उदाहरण के रूप में दिया है।

प्रश्न 5. रैदास के पदों के माध्यम से हमें क्या संदेश मिलता है?
उत्तरः रैदास के पदों से हमें यह संदेश मिलता है कि ईश्वर ही हर असंभव कार्य को संभव करने का सामथ्र्य रखता है। ईश्वर सदैव श्रेष्ठ और सर्वगुण सम्पन्न रहा है। अतः हमें उस भगवान की शरण में जाना चाहिए क्योंकि वही हमें इस संसार रूपी सागर से पार लगा सकता है। ईश्वर ने जात-पात, अमीर-गरीब के भेदभाव को न मानते हुए ऐसे-ऐसे अछूतों का उद्धार किया है जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया था। अतः हमें ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए।

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FAQs on Long Question Answers - रैदास के पद

1. रैदास के पद में भगवान की भक्ति का संदेश क्या है?
Ans. रैदास के पदों में भगवान की निर्गुण भक्ति पर जोर दिया गया है, जहाँ वे ईश्वर को सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान मानते हैं। रैदास अपने पदों के माध्यम से सामाजिक समानता और मानवीय गरिमा का संदेश देते हैं, यह विश्वास प्रदर्शित करते हुए कि भक्ति के मार्ग पर सभी जाति और वर्ग समान हैं। उनकी भक्ति साधना सांसारिक मोह को त्यागकर परमात्मा से जुड़ने की बात करती है।
2. रैदास के पद का मुख्य विषय और उनका सामाजिक संदर्भ क्या है?
Ans. रैदास के पदों का प्रमुख विषय सामाजिक न्याय, धार्मिक समानता और भक्ति भावना है। मध्यकालीन भारत में जाति-व्यवस्था के विरुद्ध उनके पद एक क्रांतिकारी आवाज थे, जहाँ एक जूते के कारीगर ने समाज के उच्च वर्गों को चुनौती दी। रैदास की शिक्षाएँ आज भी समानता और मानवाधिकार के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती हैं।
3. रैदास के पदों में किस तरह की काव्य भाषा और शैली का प्रयोग किया गया है?
Ans. रैदास ने अपने पदों में सरल, सुबोध ब्रजभाषा और लोकभाषा का उपयोग किया है, जो आम जनता तक आसानी से पहुँचती है। उनकी रचनाओं में प्रतीकवाद, रूपकात्मक भाषा और लोकोक्तियों का समावेश है। इस काव्य शैली के कारण रैदास के संदेश को व्यापक समाज तक आसानी से पहुँचाया जा सका।
4. CBSE Class 9 में रैदास के पद की परीक्षा में लंबे उत्तर देते समय मुझे क्या बातें ध्यान रखनी चाहिए?
Ans. दीर्घ उत्तरों में पदों के मूल संदेश को स्पष्ट करें, प्रासंगिक उद्धरण जोड़ें और सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान करें। रैदास की भक्ति दर्शन, उनकी सामाजिक समानता की दृष्टि और काव्य शैली पर विस्तार से चर्चा करें। विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ और प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट उदाहरणों से समर्थित करें।
5. रैदास के पदों में दलितों और निम्न वर्गों के प्रति उनका दृष्टिकोण कैसा प्रतिबिंबित होता है?
Ans. रैदास के पदों में दलितों और पिछड़े वर्गों के प्रति गहरी सहानुभूति और गरिमा का भाव व्यक्त होता है, जहाँ वे मानव मूल्य को जाति और व्यवसाय से परे मानते हैं। उनके पदों में यह संदेश निहित है कि सच्ची भक्ति सबके लिए समान रूप से उपलब्ध है। रैदास की विचारधारा सामाजिक सुधार और सामूहिक मुक्ति का मार्ग दर्शाती है।
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