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अनुवाद - समवायो हि दुर्जयः - Chapter Explanation

(क) पुरा एकस्मिन्‌ वृक्षे एका चटका प्रतिवसति स्म। कालेन तस्या: सन्तति: जाता।
एकदा कश्चित्‌ प्रमत्त: गज: तस्य वृक्षस्य अध: आगत्य तस्य शाखां शुण्डेन अत्रोटयत्‌।

सरलार्थ - 
पहले समय में एक वृक्ष पर एक चिड़िया रहती थी । समय के साथ उसके सन्तान उत्पन्न हुए एकबगर कोइ मस्त हाथी ने उस वृक्ष के नीचे आकर उसकी टहनी को सुंड से तोड़ दुया ।

(ख) चटकाया: नीडं भुवि अपततू। तेन अण्डानि विशीर्णाना। अथ सा चटका व्यलपत्‌। तस्या: विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: नाम खगः दुःखेन ताम्‌ अपृच्छत्‌-'' भद्रे, किमर्थ विलपसि?" इति। चटकावदत्‌-दुष्टेनैकेन गजेन मम सन्तति: नाशिता। तस्य गजस्य वधेनैव मम दुःखम्‌ अपसरेत्।"

सरलार्थ - 
चिड़िया का घोसला जमीन पर गिर गया । इससे अण्डे फूट गए । तब वह चिड़िया रोने लगी । उसके विलाप को सुनकर काषठकूट नामक पक्षी दुःख पूर्वक उससे पूछा - "देवी , तू किसलिए रो रही है ? " चिड़िया बोली "एक दुष्ट हाथी ने मेरे सन्तान नष्ट कर डाली । उस हाथी की हत्या से ही मेरा दुःख दुर होगा ।''

(ग) ततः काष्ठकूट: तां वीणारवा-नाम्न्या: मक्षिकाया: समीपम्‌ अनयत। तयो: वार्ता श्रुत्वा मक्षिकावदत्‌-''ममापि मित्र मण्डूक: मेघनादः अस्ति। शीघ्रं तमुपेत्य यथोचितं करिष्याम:।" तदानीं तौ मक्षिकया सह गत्वा मेघनादस्य पुर: सर्व वृत्तान्तं न्यवेदयताम्‌। मेघनाद: अवदत्‌- "यथाहं कथयामि तथा वुउरुतम्‌। मक्षिके। प्रथम त्वं मध्याह्ने तस्य गजस्य कर्ण शब्दं कुरु, येन सः नयने निमील्य स्थास्यति।

सरलार्थ - 
तब काष्ठकूट उसे वीणारवा नामक एक मक्खी के पास ले गया । उनकी बगत सुनकर मक्खी बोली "मेरी भी एक मित्र मेघनाद नगमक मेंढक है । शीघ्र उसके पास चलकर उचित कार्य करते हैं " । तब उन दोनों ने मक्खी के साथ जाकर मेघनाद के सामने सारा किस्सा (वृत्तांत) निवेदन कर दिया । मेघनाद बोला "जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो । हे मक्खी पहले तुम दोपहर के समय उस हाथी के कान में शब्द करो जिससे वह आँखे बंद करके पड़ा रहेगा"

(घ) तदा काष्ठकूट: चञ्चवा तस्य नयने स्फोटयिष्यति। एवं सः गज: अन्ध: भविष्यति। तृषार्त: सः जलाशयं गमिष्यति। मार्गे महान्‌ गर्त्त: अस्ति। तस्य अन्तिके अहं स्थास्यामि शब्दं च करिष्यामि। मम शब्देन तं गर्त जलाशयं मत्वा स तस्मिन्नेव गर्ते पतिष्यति मरिष्यति च।" अथ तथा कृते सः गज: मध्याह्ने मण्डूकस्य शब्दम्‌ अनुसृत्य महतः गर्तस्य अन्त: पतित: मृत: च। तथा चोक्तम्‌- "बहूनामप्यसाराणां समवायो हि दुर्जय:"

सरलार्थ -  तब काष्ठकूट चोंच से उसकी आँखें फोड़ डालेगा । इस प्रकार वह हाथी अन्धा हो जाएगा । प्यास से व्याकुंल वह तालाब की ओर जाएगा । रास्ते में विशाल गड्ढा है । उसके पाश मैं खड़ा हो जाऊँगा और शब्द (टर्र - टर्र) करुँगा । मेरे शब्द के द्वारा उस गड्ढे को तालाब मानकर वह उस गड्ढे में ही गिर पड़ेगा और मर जाएगा । तब वैसा करने पर वह हाथी दोपहर के समय में मेंढक के शब्द का अनुसरण करके बड़े गड्ढे के अन्दर गिरा और मरा । और वैसे कहा गया है - अनेक निर्बल (छोटे प्राणियों का संगठन (मेल) भी मश्किल से जीतने योग्य होता है ।) (अर्थात् दर्जय होता है ।)

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FAQs on अनुवाद - समवायो हि दुर्जयः - Chapter Explanation

1. समवायो हि दुर्जयः का मतलब क्या है और इसका उदाहरण क्या है?
Ans. "समवायो हि दुर्जयः" का अर्थ है "एकता में ही शक्ति है" या "संगठन से ही जीत संभव है।" यह संस्कृत मुहावरा दर्शाता है कि जब लोग एक साथ काम करते हैं, तो कोई भी शक्ति उन्हें हरा नहीं सकती। इसका प्रसिद्ध उदाहरण पंचतंत्र की कहानी है, जहाँ कई लकड़ियाँ बंधी होने पर टूटी नहीं जा सकतीं।
2. Class 7 संस्कृत में समवायो हि दुर्जयः का अनुवाद हिंदी में कैसे करते हैं?
Ans. इस वाक्य का सटीक हिंदी अनुवाद "एकता में ही विजय निहित है" या "संगठन ही अपराजेय है" होता है। अनुवाद करते समय शब्दों के सटीक अर्थ और संदर्भ को समझना जरूरी है। समवायो का अर्थ है "एकता" और दुर्जयः का मतलब है "जो जीता न जा सके।"
3. इस श्लोक का नैतिक संदेश क्या सिखाता है और इसे जीवन में कैसे लागू करें?
Ans. यह श्लोक सामूहिक शक्ति और सहयोग का महत्व सिखाता है। नैतिक दृष्टिकोण से, यह बताता है कि व्यक्तिगत प्रयास से अधिक, समूह में काम करने से बड़े लक्ष्य हासिल होते हैं। जीवन में इसे पारिवारिक और सामाजिक एकता को बढ़ावा देकर लागू किया जा सकता है।
4. समवायो हि दुर्जयः श्लोक किस प्राचीन ग्रंथ से लिया गया है?
Ans. यह श्लोक पंचतंत्र से आता है, जो प्राचीन भारतीय साहित्य का एक प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ है। महर्षि विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतंत्र में नीति कथाएँ और जीवन-पाठ दिए गए हैं। इस कहानी में बकरियों की एकता का वर्णन किया गया है जो भेड़िए से खुद को बचाती हैं।
5. CBSE Class 7 संस्कृत में इस अनुवाद टॉपिक से परीक्षा में क्या सवाल पूछे जा सकते हैं?
Ans. परीक्षा में श्लोक का हिंदी या अंग्रेजी अनुवाद करने के लिए कहा जा सकता है। शब्दार्थ पूछे जा सकते हैं, जहाँ संस्कृत शब्दों के अर्थ समझने होंगे। कहानी का सार लिखना या इसका नैतिक संदेश समझाना भी आम प्रश्न है। विविध प्रश्न-उत्तर के लिए EduRev पर उपलब्ध वर्कशीट्स और MCQ टेस्ट देखें।
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