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योग !

रूपरेखा

  • प्रस्तावना,
  • युवा और योग,
  • युवाओं की योग के प्रति सोच,
  • उपसंहार।।

प्रस्तावना

कहा गया है 'योगः कर्मस कौशलम'। इसका अर्थ है कि कर्मों में कशलता योग है। इसका संकेत यह भी है कि यदि कर्मों में कुशलता प्राप्त करनी है तो योग अपनाइए। यह विचार सर्वथा उपयुक्त और परीक्षित भी है।

कार्यकुशल व्यक्ति एक प्रकार का योगी ही होता है। योग के आठ अंगों में से यम, नियम, आसन, ध्यान ये चार प्रत्येक व्यक्ति को सामान्य जीवन में लाभ पहुँचाते हैं। इनके अंगों के साधन से व्यक्ति तन और मन दोनों को सशक्त और परम उपयोगी बना सकता है।

युवा और योग

युवावर्ग के लिए तो योग वरदान से कम नहीं है। युवकों के सामने एक लंबा जीवन होता है। उनके विविध लक्ष्य, अभिलाषाएँ और सपने होते हैं। उनसे समाज और राष्ट्र की अनेक अपेक्षाएँ होती हैं।

इन सभी को प्राप्त करने और अपेक्षाओं पर खरे उतरने के लिए, व्यक्ति को उत्साही, ऊर्जावान, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और धैर्यशाली होना चाहिए। उपर्युक्त योग के चारों अंग इन विशेषताओं को प्राप्त करने में पूर्ण सहायक होते हैं। अतः युवाओं द्वारा योग को अपनाना उन्हें हर क्षेत्र में कुशलता और सफलता प्रदान कर सकता है।
युवा और योग

युवाओं की योग के प्रति सोच

बाबा रामदेव से पहले भी योग पर चर्चाएँ होती थीं। ग्रन्थों में योगियों को रहस्यमय और चमत्कार दिखाने में सक्षम व्यक्ति बताया जाता था। योग को एक परम कठिन और रहस्यमय विद्या माना जाता था। रामदेव ने उसे वनों और पर्वत-गुफाओं से बाहर लाकर सामान्य जन जीवन की घटना बनाया।

उनके द्वारा आयोजित योग:
शिविरों, क्रियात्मक प्रदर्शनों और प्रत्यक्ष लाभों ने आज योग को सर्वसाधारण के लिए सुगम बना दिया गया है। इससे युवाओं की एक अच्छी संख्या योग से जुड़ी है, फिर भी आज के युवाओं के प्रिय विषय कुछ और ही बने हुए हैं। युवाओं की दिनचर्या, खान-पान, वेश-भूषा और व्यवहार योग के अनुकूल नहीं है। इस प्रवृत्ति के कारण युवावर्ग कुछ अत्यन्त महत्वपूर्ण लाभों से वंचित हो रहा है।
योग कोई व्यायाम की विशेष पद्धति मात्र नहीं है, बल्कि जीवन में, सफलता के शिखरों तक ले जाने वाली सरल सीढ़ी है। युवाओं को यदि अपने सपने साकार करने हैं, तो योग को अपनाने से बढ़कर और कोई उनका सच्चा सहायक नहीं हो सकता।

उपसंहार

जीवन का चाहे कोई क्षेत्र क्यों न हो, एकाग्रता, धैर्य, आत्मविश्वास, अथक प्रयत्न की क्षमता, अहंकार शून्यता ही वे गुण हैं, जो हर युवा को कीर्तिमान स्थापित करने के अवसर प्रदान करते हैं। ये गुण उन्हें योग के प्रयोग से सहज ही प्राप्त हो सकते हैं।

अतः युवाओं को नियमित योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित कर लेना चाहिए। इससे व्यायाम और जीवन के नए-नए आयाम दोनों का लाभ प्राप्त होगा। कह नहीं सकता कि मेरे साथी युवा. मेरे इस अनुभूत प्रयोग अर्थात योग को अपनाएँगे या नहीं।

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