उदाहरणार्थ एक मुहावरा है- 'काठ का उल्लू'। इसका अर्थ यह नहीं कि लकड़ी का उल्लू बना दिया गया है, अपितु इससे यह अर्थ निकलता है कि जो उल्लू (मूर्ख) काठ का है, वह हमारे किस काम का, उसमें सजीवता तो है ही नहीं। इस प्रकार हम इसका अर्थ लेते हैं- 'महामूर्ख' से।
हिन्दी के महत्त्वपूर्ण मुहावरे, उनके अर्थ और प्रयोग
(अ)
1. अंक में समेटना-(गोद में लेना, आलिंगनबद्ध करना)
शिशु को रोता हुआ देखकर माँ का हृदय करुणा से भर आया और उसने उसे अंक में समेटकर चुप किया।
2. अंकुश लगाना-(पाबन्दी या रोक लगाना)
राजेश खर्चीला लड़का था। अब उसके पिता ने उसका जेब खर्च बन्द
करके उसकी फ़िजूलखर्ची पर अंकुश लगा दिया है।
3. अंग बन जाना-(सदस्य बनना या हो जाना)
घर के नौकर रामू से अनेक बार भेंट होने के पश्चात् एक अतिथि ने कहा, "रामू तुम्हें इस घर में नौकरी करते हुए काफी दिन हो गए हैं, ऐसा लगता .. कि जैसे तुम भी इस घर के अंग बन गए हो।"
4. अंग-अंग ढीला होना-(बहुत थक जाना)
सारा दिन काम करते करते, आज अंग-अंग ढीला हो गया है।
5. अण्डा सेना-(घर में बैठकर अपना समय नष्ट करना)
निकम्मे ओमदत्त की पत्नी ने उसे घर में पड़े देखकर एक दिन कह ही दिया, "यहीं लेटे-लेटे अण्डे सेते रहोगे या कुछ कमाओगे भी।"
6. अंगूठा दिखाना-(इनकार करना)
आज हम हरीश के घर ₹10 माँगने गए, तो उसने अँगूठा दिखा दिया।
7. अन्धे की लकड़ी-(एक मात्र सहारा)
राकेश अपने माँ-बाप के लिए अन्धे की लकड़ी के समान है।
8. अंन्धे के हाथ बटेर लगना-(अनायास ही मिलना)
राजेश हाईस्कूल परीक्षा में प्रथम आया, उसके लिए तो अन्धे के हाथ बटेर लग गई।
9. अन्न-जल उठना-(प्रस्थान करना, एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले
जाना) रिटायर होने पर प्रोफेसर साहब ने कहा, "लगता है बच्चों, अब तो यहाँ से हमारा अन्न-जल उठ ही गया है। हमें अपने गाँव जाना पड़ेगा।"
10. अक्ल के अन्धे-(मूर्ख, बुद्धिहीन)
"सुधीर साइन्स (साइड) के विषयों में अच्छी पढ़ाई कर रहा था, मगर उस अक्ल के अन्धे ने इतनी अच्छी साइड क्यों बदल दी ?" सुधीर के एक मित्र ने उसके बड़े भाई से पूछा।
11. अक्ल पर पत्थर पड़ना-(कुछ समझ में न आना)
मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं, कुछ समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूँ।
12. अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरना-(मूर्खतापूर्ण कार्य करना)
तुम हमेशा अक्ल के पीछे लट्ठ लिए क्यों फिरते हो, कुछ समझ-बूझकर काम किया करो।
13. अक्ल का अंधा/अक्ल का दुश्मन होना-(महामूर्ख होना।)
राजू से साथ देने की आशा मत रखना, वह तो अक्ल का अंधा है।
14. अपनी खिचड़ी अलग पकाना-(अलग-थलग रहना, किसी की न मानना)
सुनीता की पड़ोसनों ने उसको अपने पास न बैठता देखकर कहा, "सुनीता तो अपनी खिचड़ी अलग पकाती है, यह चार औरतों में नहीं बैठती।"
15. अपना उल्लू सीधा करना-(स्वार्थ सिद्ध करना)
आजकल के नेता सिर्फ अपना उल्लू सीधा करते हैं।
(आ)
16. आग पर तेल छिड़कना-(और भड़काना)
बहुत से लोग सुलह सफ़ाई करने के बजाय आग पर तेल छिड़कने में प्रवीण होते हैं।
17. आग पर पानी डालना-(झगड़ा मिटाना)
भारत व पाक आपसी समझबूझ से आग पर पानी डाल रहे हैं।
18. आग-पानी या आग और फूस का बैर होना-(स्वाभाविक शत्रुता होना)
भाजपा और साम्यवादी पार्टी में आग-पानी या आग और फूस का बैर है।
19. आँख लगना-(झपकी आना)
रात एक बजे तक कार्य किया, फिर आँख लग गई।
20. आँखों से गिरना-(आदर भाव घट जाना)
जनता की निगाहों से अधिकतर नेता गिर गए हैं।
21. आँखों पर चर्बी चढ़ना-(अहंकार से ध्यान तक न देना)
पैसे वाले हो गए हो, अब क्यों पहचानोगे, आँखों पर चर्बी चढ़ गई है ना।
22. आँखें नीची होना-(लज्जित होना)
बच्चों की करतूतों से माँ-बाप की आँखें नीची हो गईं।
23. आँखें मूंदना-(मर जाना)
आजकल तो बाप के आँखें मूंदते ही बेटे जायदाद का बँटवारा कर लेते हैं।
24. आँखों का पानी ढलना (निर्लज्ज होना)
अब तो तुम किसी की नहीं सुनते, लगता है, तुम्हारी आँखों का पानी ढल गया है।
25. आँख का काँटा-(बुरा होना)
मनोज मुझे अपनी आँख का काँटा समझता है, जबकि मैंने कभी उसका बुरा नहीं किया।
26. आँख में खटकना-(बुरा लगना)
स्पष्टवादी व्यक्ति अधिकतर लोगों की आँखों में खटकता है।
27. आँख का उजाला-(अति प्रिय व्यक्ति)
राज अपने माता-पिता की आँखों का उजाला है।
28. आँख मारना-(इशारा करना)
रमेश ने सुरेश को कल रात वाली बात न बताने के लिए आँख मारी।
29. आँखों पर परदा पड़ना-(धोखा होना)
शर्मा जी ने सच्चाई बताकर, मेरी आँखों से परदा हटा दिया।
30. आँख बिछाना-(स्वागत, सम्मान करना)
रामचन्द्र जी की अयोध्या वापसी पर अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में आँखें बिछा दीं।
(इ)
31. इधर-उधर की हाँकना-(अप्रासंगिक बातें करना)
आजकल कुछ नवयुवक इधर-उधर की हाँकते रहते हैं।
32. इज्जत उतारना-(सम्मान को ठेस पहुँचाना)
दीनानाथ से बीच बाज़ार में जब श्यामलाल ने ऊँचे स्वर में कर्ज वसूली की बात की तो दीनानाथ ने श्यामलाल से कहा, "सरेआम इज्जत मत उतारो, आज शाम घर आकर अपने रुपए ले जाना।"
33. इतिश्री करना-(कर्त्तव्य पूरा करना/सुखद अन्त होना)
अपनी दोनों कन्याओं की शादी करके रामसिंह ने अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर ली।
34. इशारों पर नाचना-(गुलाम बनकर रह जाना)
बहुत से व्यक्ति अपनी पत्नी के इशारों पर नाचते हैं।
35. इधर की उधर करना-(चुगली करके भड़काना)
मनोज की इधर की उधर करने की आदत है, इसलिए उस पर विश्वास मत करना।
36. इन्द्र की परी-(अत्यन्त सुन्दर स्त्री)
राजेन्द्र की पत्नी तो इन्द्र की परी लगती है।
37. इन तिलों में तेल नहीं-(किसी भी लाभ की आशा न करना)
कपिल ने कारखाने को देख सोच लिया इन तिलों में तेल नहीं और बैंक से ऋण लेकर बहन का विवाह किया।
(ई)
38. ईंट से ईंट बजाना-(नष्ट-भ्रष्ट कर देना)
असामाजिक तत्त्व रात-दिन ईंट से ईंट बजाने की सोचा करते हैं।
39. ईंट का जवाब पत्थर से देना-(दुष्ट के साथ दुष्टता करना)
दुश्मन को सदैव ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए।
40. ईद का चाँद होना-(बहुत दिनों बाद दिखाई देना)
रमेश आप तो ईद का चाँद हो गए, एक वर्ष बाद दिखाई दिए।
41. ईंट-ईंट बिक जाना-(सर्वस्व नष्ट हो जाना)
"चाचाजी का व्यापार फेल हो गया और उनकी ईंट-ईंट बिक गई।"
42. ईमान देना/बेचना-(झूठ बोलना अथवा अपने धर्म, सिद्धान्त आदि के विरुद्ध आचरण करना)
इस महँगाई के दौर में लोग अपना ईमान बेचने से भी नहीं डर रहे हैं।
(उ)
43. उँगली उठाना-(इशारा करना, आलोचना करना।)
सच्चे और ईमानदार व्यक्ति पर उँगली उठाना व्यर्थ है।
44. उँगली पर नचाना-(वश में रखना)
श्रीकृष्ण गोपियों को अपनी उँगली पर नचाते थे।।
45. उड़ती चिड़िया पहचानना-(दूरदर्शी होना)
हमसे चाल मत चलो, हम भी उड़ती चिड़िया पहचानते हैं।
46. उँगलियों पर गिनने योग्य-(संख्या में न्यूनतम/बहुत थोड़े)
भारत की सेना में उस समय उँगलियों पर गिनने योग्य ही सैनिक थे, जब उन्होंने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे।
47. उजाला करना-(कुल का नाम रोशन करना)
आई. ए. एस. परीक्षा में उत्तीर्ण होकर बृजलाल ने अपने कुल में उजाला कर दिया।
48. उल्लू बोलना-(उजाड़ होना)
पुराने शानदार महलों के खण्डहरों में आज उल्लू बोलते हैं।
49. उल्टी गंगा बहाना-(नियम के विरुद्ध कार्य करना)
भारत कला और दस्तकारी का सामान निर्यात करता है, फिर भी कुछ लोग विदेशों से कला व दस्तकारी का सामान मँगवाकर उल्टी गंगा बहाते हैं।
50. उल्टी खोपड़ी होना-(ऐसा व्यक्ति जो उचित ढंग के विपरीत आचरण करता हो)
"चौधरी साहब, आपका छोटा बेटा बिल्कुल उल्टी खोपड़ी का है, आज फिर वह गाँव में उपद्रव मचा आया।" वृद्ध ने चौधरी को बताया।
51. उल्टे छुरे से मूंडना-(किसी को मूर्ख बनाकर उससे धन ऐंठना या अपना काम निकालना)
यह पुरोहित यजमानों को उल्टे छुरे से मूंडने में सिद्धहस्त है।
52. उँगली पकड़ते ही पहुँचा पकड़ना-(अल्प सहारा पाकर सम्पूर्ण की प्राप्ति हेतु उत्साहित होना)
रामचन्द्र ने नौकर को एक कमरा मुफ़्त में रहने के लिए दे दिया; थोड़े समय बाद वह परिवार को साथ ले आया और चार कमरों को देने का आग्रह करने लगा। इस पर रामचन्द्र ने कहा, तुम तो उँगली पकड़ते ही पहुँचा पकड़ने की बात कर रहे हो।
(ए)
53. एक ही लकड़ी से हाँकना-(अच्छे-बुरे की पहचान न करना)
कुछ अधिकारी सभी कर्मचारियों को एक ही लकड़ी से हाँकते हैं।
54. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होना-(सभी का एक जैसा होना)
आजकल के सभी नेता एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।
55. एड़ियाँ घिसना / रगड़ना-(सिफ़ारिश के लिए चक्कर लगाना)
इस दौर में अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को भी नौकरी ढूँढने के लिए एड़ियाँ घिसनी पड़ती हैं।
56. एक म्यान में दो तलवारें-(एक वस्तु या पद पर दो शक्तिशाली व्यक्तियों का अधिकार नहीं हो सकता) विद्यालय की प्रबन्ध-समिति ने दो-दो प्रधानाचार्यों की नियुक्ति करके एक म्यान में दो तलवारों वाली बात कर दी है।
57. एक ढेले से दो शिकार-(एक कार्य से दो उद्देश्यों की पूर्ति करना)
पुलिस दल ने बदमाशों को मारकर एक ढेले से दो शिकार किए। उन्हें पदोन्नति मिली और पुरस्कार भी मिला।
58. एक की चार लगाना-(छोटी बातों को बढ़ाकर कहना)
रमेश तुम तो अब हर बात में एक की चार लगाते हो।
59. एक आँख से देखना-(सबको बराबर समझना)
राजा का कर्तव्य है कि वह सभी नागरिकों को एक आँख से देखे।
60. एड़ी-चोटी का पसीना एक करना-(घोर परिश्रम करना)
रिक्शे वाले एड़ी-चोटी पसीना एक कर रोजी कमाते हैं।
61. एक-एक नस पहचानना-(सब कुछ समझना)
मालिक और नौकर एक-दूसरे की एक-एक नस पहचानते हैं।
62. एक घाट पानी पीना-(एकता और सहनशीलता होना)
राजा कृष्णदेवराय के समय शेर और बकरी एक घाट पानी पीते थे।
(ओ)
63. ओखली में सिर देना-(जानबूझकर अपने को जोखिम में डालना)
"अपने से चार गुना ताकतवर व्यक्ति से उलझने का मतलब है, ओखली में सिर देना, समझे प्यारे।" राजू ने रामू को समझाते हुए कहा।
64. ओस पड़ जाना-(लज्जित होना)
ऑस्ट्रेलिया से एक दिवसीय श्रृंखला बुरी तरह हारने से भारतीय टीम पर ओस पड़ गई।
65. ओले पड़ना-(विपत्ति आना)
देश में पहले भूकम्प आया फिर अनावृष्टि हुई; अब आवृष्टि हो रही है। सच में अब तो चारों ओर से सिर पर ओले ही पड़ रहे हैं।
(औ)
66. औने-पौने करना-(जो कुछ मिले उसे उसी मूल्य पर बेच देना)
रखे रखे यह कूलर अब खराब हो गया है, इसको तुरन्त ही औने-पौने में कबाड़ी के हाथ बेच दो।
67. औंधे मुँह गिरना-(पराजित होना)
आज अखाड़े में एक पहलवान ने दूसरे पहलवान को ऐसा दाँव मारा कि वह औंधे मुँह गिर गया।
68. औंधी खोपड़ी-(मूर्खता)
वह तो औंधी खोपड़ी है उसकी बात का क्या विश्वास।
69. औकात पहचानना-(यह जानना कि किसमें कितनी सामर्थ्य है)
"हमारे अधिकारी तुम जैसे नेताओं की औकात पहचानते हैं। चलिए, बाहर निकलिए।" चपरासी ने छोटे नेताओं को ऑफिस से भगाते हुए कहा।
70. और का और हो जाना-(पहले जैसा ना रहना, बिल्कुल बदल जाना)
विमाता के घर आते ही अनिल के पिताजी और के और हो गए।
(क)
71. कंधा देना-(अर्थी को कंधे पर उठाकर अन्तिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाना)
नगर के मेयर की अर्थी को सभी नागरिकों ने कंधा दिया।
72. कंचन बरसना-(अधिक आमदनी होना)
आजकल मुनाफाखोरों के यहाँ कंचन बरस रहा है।
73. कच्चा चिट्ठा खोलना-(सब भेद खोल देना)
घोटाले में अपना हिस्सा न पाने पर सह-अभियुक्त ने पुलिस के सामने सारे राज उगल दिए थे।
74. कच्चा खा/चबा जाना-(पूरी तरह नष्ट कर देने की धमकी देना)
जब से दोनों मित्र अशोक और नरेश की लड़ाई हुई है, तब से दोनों एक-दूसरे को ऐसे देखते हैं, जैसे कच्चा चबा जाना चाहते हों।
75. कब्र में पाँव लटकना-(वृद्ध या जर्जर हो जाना/मरने के करीब होना)
"सुनीता के ससुर की आयु काफ़ी हो गई है। अब तो उनके कब्र में पाँव लटक गए हैं।" सोनी ने अफसोस ज़ाहिर करते हुए कहा।
76. कलेजे पर पत्थर रखना-(धैर्य धारण करना)
गरीब और कमजोर श्यामा को गाँव का चौधरी सबके सामने खरी-खोटी सुना गया, जिसको उसने कलेजे पर पत्थर रखकर सुना लिया।
77. कढ़ी का सा उबाल-(मामूली जोश)
उत्सवों पर उत्साह कढ़ी का सा उबाल बनकर रह गया है।
78. कलम का धनी-(अच्छा लेखक)
प्रेमचन्द कलम के धनी थे।
79. कलेजे का टुकड़ा-(बहुत प्यारा)
सार्थक मेरे कलेजे का टुकड़ा है।
80. कलेजा धक से रह जाना-(डर जाना)
जंगल से गुजरते वक्त शेर को देखकर मेरा कलेजा धक से रह गया।
(ख)
81. खरी-खोटी सुनाना-(बुरा-भला कहना)
परीक्षा में फेल होने पर रमेश को खरी-खोटी सुननी पड़ी।
82. ख्याली पुलाव पकाना-(कल्पनाएँ करना)
मूर्ख व्यक्ति ही सदैव ख्याली पुलाव पकाते हैं, क्योंकि वे कुछ करने से पहले ही अपने ख्यालों में खो जाते हैं।
83. खाक में मिलना-(पूर्णत: नष्ट होना)
"राजन क्यों रो रहे हो ?" उसके एक मित्र ने पूछा, तो उसने रोते हुए जवाब दिया, "हमारा माल जहाज में आ रहा था, वह समुद्र में डूबा गया, मैं तो अब खाक में मिल गया।"
84. खाक छानना-(दर-दर भटकना)
आज के युग में अच्छे-अच्छे लोग बेरोज़गारी के कारण खाक छान रहे हैं।
85. खालाजी का घर-(जहाँ मनमानी चले)
मनमानी करने की आदत छोड़ दो क्योंकि यहाँ के कुछ नियम-कानून हैं, इसे 'खालाजी का घर' मत बनाओ।
86. खिचड़ी पकाना-(गुप्त मन्त्रणा करना)
राजनीति में कौन किसका दोस्त और कौन किसका दुश्मन है; अन्दर ही अन्दर एक-दूसरे के विरुद्ध खिचड़ी पकती रहती है।
87. खीरा-ककड़ी समझना-(दुर्बल और तुच्छ समझना)
"रणभूमि में अपने दुश्मन को हमेशा खीरा-ककड़ी समझकर उस पर टूट पड़ना चाहिए।" कमाण्डर अपने सैनिकों को समझा रहे थे।
88. खून-पसीना एक करना-(कठिन परिश्रम करना)
हमारे किसान खून-पसीना एक करके अन्न पैदा करते हैं।
89. खेल-खेल में-(आसानी से)
आजकल लोग खेल-खेल में एम. ए. पास कर लेते हैं।
90. खेत रहना-(युद्ध में मारा जाना)
"कारगिल युद्ध में 'बी फॉर यू' टुकड़ी के केवल दो सैनिक ही खेत रहे थे।' टुकड़ी के कमाण्डर ने अपने अधिकारी को बताया।
(ग)
91. गले का हार होना-(अत्यन्त प्रिय होना)
तुलसीदास द्वारा कृत रामचरितमानस जनता के गले का हार है।
92. गड़े मुर्दे उखाड़ना-(पुरानी बातों पर प्रकाश डालना)
आजकल पाकिस्तान गड़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहा है, मगर भारत बड़े सब्र से काम ले रहा है।
93. गिरगिट की तरह रंग बदलना-(किसी बात पर स्थिर न रहना)
राजनीति में लोग गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
94. गुरु घण्टाल-(बहुत धूर्त)
आपकी लापरवाही से आपका लड़का गुरु घण्टाल हो गया है।
95. गुस्सा नाक पर रहना-(जल्दी क्रोधित हो जाना)
"जब से मीना की शादी हुई है तब से तो उसकी नाक पर ही गुस्सा रहने लगा।" मीना की सहेलियाँ आपस में बातें कर रही थीं।
96. गूलर का फूल-(असम्भव बात/अदृश्य होना)
आजकल बाजार में शुद्ध देशी घी मिलना गूलर का फूल हो गया है।
97. गाँठ बाँधना-(याद रखना)
यह मेरी बात गाँठ बाँध लो, जो परिश्रम करेगा, वही सफलता प्राप्त करेगा।
98. गुदड़ी का लाल-(असुविधाओं में उन्नत होने वाला)
डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम गुदड़ी के लाल थे।
99. गोबर गणेश-(बुद्ध)
आज के युग में गोबर गणेश लोगों की गुंजाइश नहीं है।
100. गाल फुलाना-(रूठना)
बच्चों को पढ़ाई करने को कहो, तो गाल फुला लेते हैं।
(घ)
101. घड़ों पानी पड़ना-(बहुत लज्जित होना)
कल्लू बहुत अकड़ रहा था, साहब के डाँटने पर उस पर घड़ों पानी पड़ गया।
102. घर फूंक तमाशा देखना-(अपना नुकसान करके आनन्द मनाना)
घर फूंक तमाशा देखने वालों को कष्ट उठाना पड़ता है।
103. घाट-घाट का पानी पीना-(बहुत अनुभव प्राप्त करना)
मुझसे चाल मत चलो, मैं घाट-घाट का पानी पी चुका हूँ।
104. घाव पर नमक छिड़कना-(दुःखी को और दुःखी करना)
रामू अस्वस्थ तो था ही, परीक्षा में असफलता की सूचना ने घाव पर नमक छिड़क दिया।
105. घास छीलना-(व्यर्थ समय बिताना)
हमने पढ़कर परीक्षा उत्तीर्ण की है, घास नहीं खोदी है।
106. घात लगाना-(ताक में रहना/उचित अवसर की प्रतीक्षा में रहना)
पुलिस के हटते ही उपद्रवियों ने घात लगाकर दुर्घटना करने वाली बस पर हमला कर दिया।
107. घी के दीए जलाना-(खुशियाँ मनाना)
पृथ्वीराज की मृत्यु सुनकर जयचन्द ने घी के दीए जलाए।
108. घोड़े बेचकर सोना-(निश्चिन्त होकर सोना)
परीक्षा के बाद सभी छात्र कुछ दिन घोड़े बेचकर सोते हैं।
109. घोड़े दौड़ाना-(अत्यधिक कोशिश करना)
माया ने निहाल से दुश्मनी लेकर अपने खूब घोड़े दौड़ा लिए, लेकिन वह अभी तक उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकी।
110. घी खिचड़ी होना-(खूब मिल-जुल जाना)
रिश्तेदारों को घी खिचड़ी होकर रहना चाहिए।
(च)
111. चक जमाना-(पूरी तरह से अधिकार या प्रभुत्व स्थापित होना)
चन्द्रगुप्त मौर्य ने सम्पूर्ण आर्यावर्त पर चक जमा लिया था।
112. चंगुल में फँसना-(मीठी-मीठी बातों से वश में करना)
आजकल बाबा लोग सीधे-सादे लोगों को चंगुल में फँसा लेते हैं।
113. चाँदी का जूता मारना-(रिश्वत या घूस देना)
आजकल सरकारी कार्यालयों में बिना चाँदी का जूता मारे काम नहीं हो पाता है।
114. चाँद पर थूकना-(भले व्यक्ति पर लांछन लगाना)
महात्मा गाँधी की बुराई करना चाँद पर थूकना है।
115. चित्त पर चढ़ना-(सदा स्मरण रहना)
अनुज का दिमाग बहुत तेज है, उसके चित्त पर जो बात चढ़ जाती है, फिर वह उसे कभी नहीं भूलता।
116. चादर से बाहर पाँव पसारना-(सीमा के बाहर जाना)
चादर से बाहर पैर पसारने वाले लोग कष्ट उठाते हैं।
117. चुल्लू भर पानी में डूब मरना-(शर्म के मारे मुँह न दिखाना)
आप इतने सभ्य परिवार के होते हुए भी दुष्कर्म करते हैं, आपको चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
118. चूलें ढीली करना-(अधिक परिश्रम के कारण बहुत थकावट होना)
इस लेखन कार्य ने तो मेरी चूलें ही ढीली कर दीं।
119. चुटिया हाथ में होना-(संचालन-सूत्र हाथ में होना, पूर्णतः नियन्त्रण में होना)
"भागकर कहाँ जाएगा, उसकी चुटिया हमारे हाथ में है।" शत्रु के घर में उसे न पाकर चौधरी रणधीर ने उसकी पत्नी के सामने झल्लाकर कहा।
120. चेरी बनाना/बना लेना-(दास या गुलाम बना लेना)
"हमारे गाँव का प्रधान इतना शातिर दिमाग का है कि वह सभी जरूरतमन्द लोगों को चेरी बना लेता है।
(छ)
121. छक्के छूटना-(हिम्मत हारना)
आन्दोलनकारियों ने अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ा दिए।
122. छप्पर फाड़कर देना-(अनायास ही धन की प्राप्ति)
ईश्वर किसी-किसी को छप्पर फाड़कर देता है।
123. छाती पर मूंग दलना-(निरन्तर दुःख देना)
वह कई वर्षों से घर में निठल्ला बैठकर अपने पिताजी की छाती पर - मूंग दल रहा है।
124. छाती भर आना-(दिल पसीजना)
दुर्घटनाग्रस्त सोहन को मृत्यु-शैय्या पर तड़पते देखकर उसके मित्र चिंटू की छाती भर आई।
125. छाँह न छूने देना-(पास तक न आने देना)
मैं बुरे आदमी को अपनी छाँह तक छूने नहीं देता।
126. छठी का दूध याद दिलाना-(संकट में डाल देना)
भारतीयों ने, पाकिस्तानी सेना को छठी का दूध याद दिला दिया।
127. छूमन्तर होना-(गायब हो जाना)
मेरा पर्स यहीं रखा था, पता नहीं कहाँ छूमन्तर हो गया।
128. छक्के छुड़ाना-(हिम्मत पस्त करना)
भारतीय खिलाड़ियों ने विपक्षी टीम के छक्के छुड़ा दिए।
129. छक्का -पंजा भूलना-(कुछ भी याद न रहना)
अधिकारी को देखते ही कर्मचारी छक्के-पंजे भूल गए।
130. छाती ठोंकना-(साहस दिखाना)
अन्याय के खिलाफ़ छाती ठोंककर खड़े होने वाले कितने लोग होते हैं।
(ज)
131. जान के लाले पड़ना-(जान पर संकट आ जाना)
नौकरी छूटने से उसके तो जान के लाले पड़ गए।
132. जबान कैंची की तरह चलना-(बढ़-चढ़कर तीखी बातें करना)
कर्कशा की जबान कैंची की तरह चलती है।
133. जबान में लगाम न होना-(बिना सोचे समझे बिना लिहाज के बातें करना)
मनोहर इतना असभ्य है कि उसकी जबान में लगाम ही नहीं है।
134. जलती आग में घी डालना-(क्रोध भड़काना)
धनुष टूटा देखकर परशुराम क्रोधित थे ही कि लक्ष्मण की बातों ने जलती आग में घी डालने का काम कर दिया।
135. जड़ जमना-(अच्छी तरह प्रतिष्ठित या प्रस्थापित होना)
अब तो नेता ने पार्टी में अपनी जड़ें जमा ली हैं। पार्टी उन्हें इस बार उच्च पद पर नियुक्त करेगी।
136. जान में जान आना-(चैन मिलना)
खोया हुआ बेटा मिला तो माँ की जान में जान आई।
137. जहर का चूँट पीना-(कड़ी और कड़वी बात सुनकर भी चुप रहना)
निर्बल व्यक्ति शक्तिशाली आदमी की हर कड़वी बात को ज़हर के घूट की तरह पी जाता है।
138. जिगरी दोस्त-(घनिष्ठ मित्र)
राम और श्याम जिगरी दोस्त हैं।
139. ज़िन्दगी के दिन पूरे करना-(कठिनाई में समय बिताना)
आज के युग में किसान और मज़दूर अपनी ज़िन्दगी के दिन पूरे कर रहे हैं।
140. जीती मक्खी निगलना-(जान बूझकर अन्याय सहना)
आप जैसे समझदार को जीती मक्खी निगलना शोभा नहीं देता।
(झ)
141. झण्डा गड़ना-(अधिकार जमाना)
दुनिया में उन्हीं लोगों के झण्डे गड़े हैं, जो अपने देश पर कुर्बान होते हैं।
142. झकझोर देना-(हिला देना/पूर्णत: त्रस्त कर देना)
पिता की मृत्यु, ने उसे बुरी तरह झकझोर दिया।
143. झाँव-झाँव होना-(जोरों से कहा-सुनी होना)
इन दो गुटों के बीच झाँव-झाँव होती रहती है।
144. झाडू फिरना/फिर जाना-(नष्ट करना)
वार्षिक परीक्षा के दौरान मार्ग-दुर्घटना में घायल होने के कारण राकेश की सारी मेहनत पर झाडू फिर गयी।
145. झुरमुट मारना-(बहुत से लोगों का घेरा बनाकर खड़े होना)
युद्ध में सैनिक जगह-जगह झुरमुट मारकर लड़ रहे हैं।
146. झूमने लगना-(आनन्द-विभोर हो जाना)
ऋद्धि के भजनों को सुनकर सभागार में उपस्थित सभी लोग झूम उठे।
(ट)
147. टिप्पस लगाना-(सिफारिश करवाना)
आजकल मामूली काम के लिए मन्त्रियों से टिप्पस लगवाए जाते हैं।
148. टूट पड़ना-(आक्रमण करना)
भारत की सेना पाकिस्तानी सेना पर टूट पड़ी और उसका विनाश कर दिया।
149. टेढ़ी खीर-(कठिन काम या बात)
हिमालय के शिखर पर चढ़ना टेढ़ी खीर है।
150. टका-सा जवाब देना-(साफ़ इनकार कर देना)
अटल जी ने अमेरिका को टका-सा जवाब दे दिया कि भारतीय सेना इराक नहीं जाएगी।
151. टाट उलटना-(दिवाला निकलना)
चाँदी की कीमत में एकाएक गिरावट आने से उसे भारी घाटा उठाना पड़ा और अन्तत: उसकी टाट ही उलट गई।
152. टोपी उछालना-(बेइज्जती करना)
तुमने अपने पिता की टोपी उछालने में कोई कमी नहीं की है।
153. टाँग अड़ाना-(व्यवधान डालना)
बहुत से लोगों को दूसरों के काम में टाँग अड़ाने की बुरी आदत होती है।
154. टाँय-टाँय फिस होना-(काम बिगड़ जाना)
व्यावहारिक बुद्धि के अभाव से मुहम्मद तुगलक की सारी योजनाएँ टाँय-टाँय फिस हो गईं।
155. ठण्डे कलेजे से-(शान्त होकर/शान्त भाव से)
जनाब एक बार ठण्डे कलेजे से फिर सोच लीजिएगा, हमारी बात बन सकती
156. दूंठ होना-(निष्प्राण होना)
अब तो उसका समस्त परिवार दूंठ होने पर आया है।
(ड)
157. डंक मारना-(घोर कष्ट देना)
वह मित्र सच्चा मित्र कभी नहीं हो सकता, जो अपने मित्र को डंक मारता हो।
158. डंड पेलना-(निश्चिन्ततापूर्वक जीवनयापन करना)
बाप लाखों की सम्पत्ति छोड़ गए हैं, बेटा राम डंड पेल रहे हैं।
159. डाली देना-(अधिकारियों को प्रसन्न रखने के लिए कुछ भेंट देना)
घुसपैठिए अधिकारियों को डाली देकर ही सीमा पार कर सकते हैं।
160. डींग मारना-(अनावश्यक बातें कहना)
काम करने वाला व्यक्ति डींग नहीं मारता।
161. डूबना-उतराना-(संशय में रहना)
अपने कमरे में अकेली पड़ी मानसी रात-भर गहरे सोच-विचार में डूबती-उतराती रही।
162. डंका बजना-(ख्याति होना)
सचिन तेन्दुलकर का डंका दुनिया में बज रहा है
163. डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना-(बहुमत से अलग रहना)
राजेश सदा अपनी डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाता है।
164. डाढ़ी पेट में होना-(छोटी उम्र में ही बहुत ज्ञान होना)
आवेश के पेट में तो डाढ़ी है।
165. डेढ़ बीता कलेजा करना-(अत्यधिक साहस दिखाना)
सेना के जवान युद्ध क्षेत्र में डेढ़ बीता कलेजा करके जाते हैं।
166. ढंग पर चढ़ना-(प्रभाव या वश में करना)
प्रभात ने सुरेश को ऐसे चक्रव्यूह में फँसाया कि उसे ढंग पर चढ़ा दिया।
(त)
167. तंग आ जाना-(परेशान हो जाना)
उनकी रोज़-रोज़ की किलकिल से तो मैं तंग आ गया हूँ।
168. तकदीर का खेल-(भाग्य में लिखी हई बात)
अमीरी-गरीबी, यह सब तकदीर का खेल है।
169. तबलची होना-(सहायक के रूप में होना)
चाटुकार और स्वार्थी कर्मचारी अपने अधिकारी के तबलची बनकर रहते
170. ताक पर रखना-(व्यर्थ समझकर दूर हटाना)
परीक्षा अब समीप है और तुमने अपनी सारी पढ़ाई ताक पर रख दी।
171. तीसमार खाँ बनना-(अपने को शूरवीर समझ बैठना)
गोपी अपने को तीसमार खाँ समझता था और जब गाँव में चोर आए, तो वह घर से बाहर नहीं निकला।
172. तिल का ताड़ बनाना-(किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना)
सुरेश हमेशा हर बात का तिल का ताड़ बनाया करता है।
173. तार-तार होना-(पूरी तरह फट जाना)
तुम्हारी कमीज तार-तार हो गई है, अब तो इसे पहनना छोड़ दो।
174. तेली का बैल-(हर समय काम में लगे रहना)
अनिल तो तेली के बैल की तरह काम करता रहता है।
175. तुर्की-ब-तुर्की बोलना-(जैसे को तैसा)
मैं आपसे शिष्टतापूर्वक बोल रहा हूँ, यदि आप और गलत बोले तो मैं तुर्की- ब-तुर्की बोलूँगा।
176. तीन-तेरह करना-(पृथक्ता की बात करना)
पाकिस्तान में ही अलगाववादी नेता पाकिस्तान को तीन तेरह करने की बात करते हैं।
(थ)
177. थाली का बैंगन-(ढुलमुल विचारों वाला/सिद्धान्तहीन व्यक्ति)
सूरज थाली का बैंगन है, उससे हमेशा बचकर रहना।
178. थुड़ी-थुड़ी होना-(बदनामी होना)
शेरसिंह के दुराचार के कारण पूरे गाँव में उसकी थुड़ी-थुड़ी हो गई।
179. थैली का मुँह खोलना-(खुले दिल से व्यय करना)
बेटी के विवाह में सुलेखा ने थैली का मुँह खोल दिया था।
180. थूककर चाटना-(कही हुई बात से मुकर जाना)
कल्याण सिंह ने थूककर चाट लिया और भाजपा में पुनः प्रवेश कर लिया।
181. थाह लेना-(किसी गुप्त बात का भेद जानना)
शर्मा जी की थाह लेना आसान नहीं है, वे बहुत गहरे इनसान हैं।
(द)
182. दंग रह जाना-(अत्यधिक चकित रह जाना)
अन्त में अर्जुन और कर्ण का भीषण युद्ध हुआ, दोनों का युद्ध देखकर सारे। लोग दंग रह गए।
183. दाँतों तले उँगली दबाना-(आश्चर्यचकित होना)
शिवाजी की वीरता देखकर औरंगजेब ने दाँतों तले उँगली दबा ली।
184. दाल में काला होना-(संदेह होना)
राम और श्याम को एकान्त में देखकर मैंने समझ लिया कि दाल में। काला है।
185. दुम दबाकर भागना/भाग जाना/भाग खड़े होना-(चुपचाप भाग जाना)
घर में तीसमार खाँ बनता है और बाहर कमज़ोर को देखकर भी दुम दबाकर भाग जाता है।
186. दूध का दूध और पानी का पानी-(पूर्ण न्याय करना)
आजकल न्यायालयों में दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाता है।
187. दो नावों पर सवार होना-(दुविधापूर्ण स्थिति में होना या खतरे मे डालना)
श्यामलाल नौकरी करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी की परीक्षा की तैयारी करते हुए सोच रहा था कि क्या उसके लिए दो नावों पर सवारी करना उचित रहेगा?
188. द्वार झाँकना-(दान, भिक्षा आदि के लिए किसी के दरवाजे पर जाना)
आप जैसे वेदपाठी ब्राह्मण, गुरु-दक्षिणा के लिए हमारे पास आएँ और यहाँ से निराश लौटकर किसी का द्वार झाँके, यह नहीं हो सकता।
189. दिन-रात एक करना-(प्रयास करते रहना)
श्यामलाल ने अपने मित्र गोपी को उन्नति करते देख कह ही दिया-"अब तो तुमने दिन-रात एक कर रखे हैं, तभी तो उन्नति कर रहे हो।"
190. दिमाग दिखाना-(अहम् भाव प्रदर्शित करना)
"क्या बताऊँ दोस्त, लड़के वाले तो आजकल बड़े दिमाग दिखा रहे हैं।" अपने एक मित्र के पूछने पर दिलावर ने बताया
191. दिन दूनी रात चौगुनी होना-(बहुत शीघ्र उन्नति करना)
अरिहन्त प्रकाशन दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति कर रहा है।
(ध)
192. धोती ढीली होना-(घबरा जाना)
जंगल में भालू देखते ही उसकी धोती ढीली हो गई।
193. धौंस जमाना-(रौब दिखाना/आतंक जमाना)
गाँव के एक अमीर और रौबदार आदमी को, गाँव के ही एक खुशहाल (खाते-पीते) व्यक्ति ने अपनी दुकान पर आतंक जमाते देखा तो कहा "चौधरी साहब आप अपना रौब गाँव वालों को ही दिखाया करो, मेरी दुकान पर आकर किसी प्रकार की धौंस न जमाया करो।"
194. ध्यान टूटना-(एकाग्रता भंग होना)
गुरु जी एकान्त कमरे में बैठे ध्यानमग्न थे। छोटे बालक के कमरे में प्रवेश करने तथा वहाँ की वस्तुओं को उठा-उठाकर इधर-उधर करने की खट-पट की आवाज़ से उनका ध्यान टूट गया।
195. ध्यान रखना-(देखभाल करना/सावधान रहना)
"प्रीति जरा हमारे बच्चों का ध्यान रखना। मैं मन्दिर जा रही हूँ।" अनामिका ने अपनी पड़ोसन को सजग करते हुए कहा
196. धज्जियाँ उड़ाना-(दुर्गति)
सचिन ने शोएब अख्तर की गेंदबाजी की धज्जियाँ उड़ा दीं।
197. धूप में बाल सफ़ेद होना-(अनुभवहीन होना)
मैं तुम्हारा मुकदमा जीतकर रहूँगा, ये बाल कोई धूप में सफेद नहीं किए हैं।
(न)
198. नंगा कर देना-(वास्तविकता प्रकट करना/असलियत खोलना)
रघु और दौलतराम का झगड़ा होने पर उन्होंने सरेआम एक-दूसरे को नंगा कर दिया।
199. नंगे हाथ-(खाली हाथ)
"मनुष्य संसार में नंगे हाथ आता है और नंगे हाथ ही जाता है। इसलिए उसे चाहिए कि वह किसी के साथ बेईमानी या दुराचार न करे।" अपने प्रवचनों में गुरु महाराज लोगों को उपदेश दे रहे थे।
200. नमक-मिर्च लगाना-(बढ़ा-चढ़ाकर कहना)
चुगलखोर व्यक्ति नमक-मिर्च लगाकर ही कहते हैं।
201. नुक्ता-चीनी करना-(छिद्रान्वेषण करना)
"तुमसे कितनी बार कह चुका हूँ कि तुम मेरे काम में नुक्ता-चीनी मत किया करो।"
202. निन्यानवे के फेर में पड़ना-(धन संग्रह की चिन्ता में पड़ना)
व्यापारी तो हमेशा निन्यानवे के फेर में लगे रहते हैं।
203. नौ दो ग्यारह होना-(भाग जाना)
चोर मकान में चोरी कर नौ दो ग्यारह हो गए।
(प)
204. पत्थर की लकीर होना-(स्थिर होना या दृढ़ विश्वास होना)
मेरी बात पत्थर की लकीर समझो।
205. पहाड़ टूट पड़ना-(मुसीबत आना)
वर्षा में मकान गिरने की सूचना पाकर राम पर पहाड़ टूट पड़ा।
206. पाँचों उँगली घी में होना-(पूर्ण लाभ में होना)
कृपाशंकर ने जब से गल्ले का व्यापार किया, तब से उसकी पाँचों उँगली घी में हैं।
207. पानी उतर जाना-(लज्जित हो जाना)
लड़के का कुकृत्य सुनकर सेठ जी का पानी उतर गया।
208. पेट में दाढ़ी होना-(चालाक होना)
मुल्ला जी से कोई लाभ नहीं उठा पाएगा, उनके तो पेट में दाढ़ी है।
209. पेट का पानी न पचना-(अत्यन्त अधीर होना)
"बिना गाली दिए तेरे पेट का पानी नहीं पचता क्या?" बार-बार गाली देते देखकर सोहन ने अपने एक मित्र को टोका।
210. पीठ में छुरा भोंकना-(विश्वासघात करना)
जयन्ती लाल ने अपनी पहचान के शराबी, जुआरी लड़के से श्यामलाल की। बेटी की शादी कराकर, दोस्ती के नाम पर श्यामलाल की पीठ में छुरा भोंकने का-सा कार्य कर दिया।
211. पैरों पर खड़ा होना-(स्वावलम्बी होना)
मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि जब तक अपने पैरों पर खड़ा नहीं होऊँगा शादी नहीं करूंगा।
212. पानी-पानी होना-(शर्मसार होना)
जब रामपाल की करतूतों की पोल खुली तो वह पानी-पानी हो गया।
213. पगड़ी रखना-(इज़्ज़त रखना)
लाला जी ने फूलचन्द की लड़की की शादी में रुपए देकर उनकी पगड़ी रख ली।
214. पेट में चूहे दौड़ना-(भूख लगना)
जल्दी से खाना दे दो, पेट में चूहे दौड़ रहे हैं।
(फ)
215. फ़रिश्ता निकलना-(बहुत भला और परोपकारी सिद्ध होना)
"जिसको तुम अपना दुश्मन समझती थी, उसने तुम्हारे बेटे की नौकरी लगवा दी। देखा, वह बेचारा कितना बड़ा फरिश्ता निकला हमारे लिए।"
216. फिकरा कसना-(व्यंग्य करना)
"तुम तो हमेशा ही मुझ पर फिकरे कसती रहती हो, दीदी को कुछ नहीं कहती।"
217. फीका लगना-(घटकर या हल्का प्रतीत होना)
"तुम्हारी बात में वजन तो था, लेकिन रामशरण की बात के सामने तुम्हारी बातफीकी पड़ गई।
218. फूटी आँखों न भाना-(बिल्कुल अच्छा न लगना)
पृथ्वीराज जयचन्द को फूटी आँख भी नहीं भाते थे।
219. फूला न समाना-(बहुत प्रसन्न होना)
पुत्र की उन्नति देखकर माता-पिता फूले नहीं समाते हैं।
220. फूल सूंघकर रह जाना-(अत्यन्त थोड़ा भोजन करना)
गोयल साहब इतना कम खाते हैं, मानो फूल सूंघकर रह जाते हों।
221. फूंक-फूंक कर कदम रखना-(अत्यन्त सतर्कता के साथ काम करना)
इतिहास साक्षी है कि पाकिस्तान से कोई भी समझौता करते समय भारत को फूंक-फूंक कर पाँव रखने होंगे।
222. फूलकर कुप्पा होना-(बहुत प्रसन्न होना)
संतू ने जब सुना कि उसकी बेटी ने उत्तर प्रदेश में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए हैं, तो वह खुशी के मारे फूलकर कुप्पा हो गया।
223. फावड़ा चलाना-(मेहनत करना)
मजदूर फावड़ा चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाता है।
224. फूंक मारना-(किसी को चुपचाप बहकाना)
लीडर ने मजदूरों में क्या फूंक मार दी, जिससे उन्होंने हड़ताल कर दी।
225. फट पड़ना-(एकदम गुस्से में हो जाना)
संजय किसी बात पर कई दिनों से मुझसे नाराज़ था, आज जाने क्या हुआ फट पड़ा।
(ब)
226. बंटाधार होना-(चौपट या नष्ट होना)
हृदय प्रताप के व्यापार का ऐसा बंटाधार हुआ कि वह आज तक नहीं पनप पाया।
227. बहती गंगा में हाथ धोना-(बिना प्रयास ही यश पाना)
जीवन में कभी-कभी बहती गंगा में हाथ धोने के अवसर मिल जाते हैं।
228. बाग-बाग होना-(अति प्रसन्न होना)
गिरिराज लोक सेवा आयोग परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ, तो उसके परिवार वाले बाग-बाग हो उठे।
229. बीड़ा उठाना-(दृढ़ संकल्प करना)
क्रान्तिकारियों ने भारत को आज़ाद कराने के लिए बीड़ा उठा लिया है।
230. बेपर की उड़ाना-(अफवाहें फैलाना/निराधार बातें चारों ओर करते फिरना)
"कुछ लोग बेपर की उड़ाकर हमारी पार्टी को बदनाम करना चाहते हैं। अत: मेरा अनुरोध है कि कोई भी सज्जन ऐसे लोगों की बातों में न आएँ।" नेताजी मंच पर खड़े जनता को सम्बोधित कर रहे थे।
231. बट्टा लगाना-(दोष या कलंक लगना)
रिश्वत लेते पकड़े जाने पर अधिकारी की शान में बट्टा लग गया।
232. बाल-बाल बचना-(बिल्कुल बच जाना)
चन्द्रबाबू नायडू नक्सलवादी हमले में बाल-बाल बचे थे।
233. बाल बाँका न होना-(कुछ भी हानि या कष्ट न होना)
जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हारा बाल भी बाँका नहीं होगा।
234. बालू में से तेल निकालना-(असम्भव को सम्भव कर देना)
बढ़ती महँगाई को देखकर यह कहा जा सकता है कि अब महंगाई को दूर करना बालू में से तेल निकालने के समान हो गया है।
235. बाँछे खिलना-(अत्यन्त प्रसन्न होना)
लड़का पी. सी. एस. हो गया तो सक्सेना साहब की बाँछे खिल गईं।
(भ)
236. भण्डा फोड़ना-(रहस्य खोलना/भेद प्रकट करना)
अनीता और सुचेता में मनमुटाव होने पर अनीता ने सुचेता की एक गुप्त और महत्त्वपूर्ण बात का भण्डाफोड़ कर यह ज़ाहिर कर दिया कि अब वह उसकी कट्टर दुश्मन है।
237. भविष्य पर आँख होना-(आगे का जीवन सुधारने के लिए प्रयत्नशील रहना)
मेरे बेटे ने एम. बी. ए. की परीक्षा पास कर ली है, परन्तु मेरी आँखें अब भी उसके भविष्य पर लगी रहती हैं।
238. भिरड़ के छत्ते में हाथ डालना-(जान-बूझकर बड़ा संकट अपने पीछे लगाना)
"तुमने इतने बड़े परिवार के व्यक्ति को पीटकर अच्छा नहीं किया। समझो, तुमने भिरड़ के छत्ते में हाथ डाल दिया।"
239. भीगी बिल्ली बनना-(डर जाना)
पुलिस की आहट पाते ही चोर भीगी बिल्ली बन जाते हैं।
240. भूमिका निभाना-(निष्ठापूर्वक अपने काम का निर्वाह करना)
अमिताभ बच्चन ने भारतीय सिनेमा में अपने अभिनय की जो भूमिका निभाई है, वह देखते ही बनती है।
241. भेड़ियां धसान-(अंधानुकरण)
हमारा गाँव भेड़िया धसान का सशक्त उदाहरण है।
242. भाड़े का टटू-(पैसे लेकर ही काम करने वाला)
चुनावों में भाड़े के टटुओं की तो मौज आ जाती है।
243. भाड़ झोंकना-(समय व्यर्थ खोना)
दिल्ली में रहकर कुछ नहीं सीखा, वहाँ क्या भाड़ झोंकते रहे।
244. भैंस के आगे बीन बजाना-(बेसमझ आदमी को उपदेश)
अनपढ़ व अन्धविश्वासी लोगों से मार्क्सवाद की बात करना भैंस के आगे बीन बजाना है।
245. भागीरथ प्रयत्न करना-(कठोर परिश्रम)
स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए भारतीयों ने भागीरथ प्रयत्न किया।
(म)
246. मुख से फूल झड़ना-(मधुर वचन बोलना)
प्रशान्त की क्या बुराई करें, उसके तो मुख से फूल झड़ते हैं।
247. मन के लड्डू खाना-(व्यर्थ की आशा पर प्रसन्न होना)
'मन के लड्डू खाने से काम नहीं चलेगा, यथार्थ में कुछ काम करो।
248. मन ही मन में रह जाना-(इच्छाएँ पूरी न होना)
धन के अभाव में व्यक्ति की इच्छाएँ मन ही मन में रह जाती हैं।
249. माथे पर शिकन आना-(मुखाकृति से अप्रसन्नता/रोष आदि प्रकट होना)
जब मैंने उसके माथे पर शिकन देखी, तो मैं तभी समझ गया था कि मेरे प्रति उसके मन में चोर है।
250. मीठी छुरी चलाना-(प्यार से मारना/विश्वासघात करना)
सेठ दुर्गादास इतनी मीठी छुरी चलाता है कि सामने वाले को उसकी किसी बात का बुरा ही नहीं लगता है और वह कटता चला जाता है।
251. मुँह पर नाक न होना-(कुछ भी लज्जा या शर्म न होना)।
कुछ लोग राह चलते गन्दी बातें करते रहते हैं, क्योंकि उनके मुँह पर नाक नहीं होती।
252. मुट्ठी गरम करना-(रिश्वत देना)
सरकारी कर्मचारियों की बिना मुट्ठी गर्म किए काम नहीं चलता है।
253. मन मैला करना-(खिन्न होना)
क्या समय आ गया है किसी के हित की बात कहो तो वह मन मैला कर लेता है।
254. मुट्ठी में करना-(वश में करना)
अपनी धूर्तता और मक्कारी के चलते मेरे छोटे भाई ने माँ को मुट्ठी में कर रखा है।
255. मुँह की खाना-(हार जाना/अपमानित होना)
अमेरिका को वियतनाम युद्ध में मुँह की खानी पड़ी।
(य)
256. यम की यातना-(असह्य कष्ट)
सैनिकों ने घुसपैठिये की इतनी पिटाई की कि उसे "यम की यातना" नज़र आने लगी।
257. यमराज का द्वार देख आना-(मरकर जीवित हो जाना)
नेपाल में आए जानलेवा भूकम्प से बच निकल आना, यमराज का द्वार देख आने के समान था।
258. युग बोलना-(बहुत समय बाद होना)
आज रात आसमान में दो चाँद-से प्रतीत होना युग बोलने के समान है।
259. युधिष्ठिर होना-(अत्यन्त सत्य-प्रिय होना)
महात्मा विदुर वास्तव में, मन-वचन और कर्म से युधिष्ठिर थे।
(र)
260. रफूचक्कर होना-(भाग जाना)
पुलिस के आने की सूचना पाकर दस्यु दलं रफूचक्कर हो गया।
261. रँगा सियार-(धोखेबाज़ होना)
आजकल बहुत से साधु वेशधारी रँगे सियार बनकर ठगने का काम करते हैं।
262. राई का पहाड़ बनाना-(बढ़ा-चढ़ाकर कहना)
भूषण ने अपने काव्य में राई का पहाड़ बना दिया है।
263. रातों की नींद हराम होना-(चिन्ता, भय, दु:ख, आदि के कारण रातभर नींद न आना)
"क्या बताऊँ दोस्त, एक गरीब बाप के सम्मुख उसकी जवान बेटी की शादी की चिन्ता, उसकी रातों की नींद हराम कर देती है।"
264. रीढ़ टूटना-(आधारहीन रहना)
इकलौते जवान बेटे की अचानक मृत्यु पर गंगाराम को लगा जैसे उसकी रीढ़ टूट गई हो।
265. रंग बदलना-(बदलाव होना)
पूँजीवादी व्यवस्था में मनुष्य बेहद स्वार्थी हो गया है, अत: कौन कब रंग बदल ले, पता नहीं।
266. रोंगटे खड़ा होना-(भय से रोमांचित हो जाना)
घर में बड़ा साँप देखकर अमर के रोंगटे खड़े हो गए।
(ल)
267. लंगोटी बिकवाना-(दरिद्र कर देना)
शंकर ने अपने शत्रु जसबीर को अदालत के ऐसे चक्रव्यूह में फँसाया कि उस बेचारे की लंगोटी तक बिक गई है।
268. लकीर का फकीर होना-(रूढ़िवादी होना)
पढ़े-लिखे समाज में भी बहुत से लकीर के फकीर हैं।
269. लेने के देने पड़ना-(लाभ के बदले हानि)
व्यापार में कभी-कभी लेने के देने पड़ जाते हैं।
270. लासा लगाना-(किसी को. फँसाने की युक्ति करना)
जमुनादास ने सुखीराम को तो ठग लिया है। अब वह अब्दुल करीम को लासा लगाने की कोशिश कर रहा है।
271. लोहे के चने चबाना-(कठिनाइयों का सामना करना)
किसी पुस्तक के प्रणयन में लेखक को लोहे के चने चबाने पड़ते हैं, तब सफलता मिलती है।
272. लौ लगाना-(प्रेम में मग्न हो जाना/आसक्त हो जाना)
सारे बुरे कामों को छोड़कर भीमा ने ईश्वर से लौ लगा ली है। अब वह किसी की तरफ को देखता तक नहीं है।
273. ललाट में लिखा होना-(भाग्य में लिखा होना)
वह कम उम्र में विधवा हो गई, ललाट में लिखे को कौन बदल सकता है।
274. लंगोटिया यार-(बचपन का मित्र)
अतुल तो मेरा लंगोटिया यार है।
275. लम्बी तानकर सोना-(निष्क्रिय होकर बैठना)
राजनीति में लम्बी तानकर सोने से काम नहीं चलेगा, बढ़ने के लिए मेहनत करनी होगी।
276. लाल-पीला होना-(गुस्से में होना)
महेन्द्र ने प्रश्न गलत कर दिया तो भइया लाल-पीला होने लगे।
(व)
277. वकालत करना-(पक्ष का समर्थन करना)
"मैंने अपने पिता की वकालत इसलिए नहीं की, क्योंकि वे मुझसे भी भरी पंचायत में झूठ बुलवाना चाहते थे।"
278. वक्त की आवाज़-(समय की पुकार)
गरीबी और शोषण को नष्ट करके ही संसार दोषमुक्त हो सकता है। यही वक्त की आवाज़ है।
279. वारी जाऊँ-(न्योछावर हो जाना)
काफी समय बाद सैनिक बेटे को देखकर माँ ने उसकी बलाएँ उतारते हुए कहा-"मैं वारी जाऊँ बेटे, तुम युग-युग जियो।"
280. विधि बैठना-(युक्ति सफल होना/संगति बैठना)
इस बार तो ओमप्रकाश की विधि बैठ गई, उसका कारोबार दिन दूना, रात चौगुना बढ़ता जा रहा है।
281. विष उगलना-(क्रोधित होकर बोलना)
सामान्य बातों में विष उगलना अच्छी बात नहीं है।
282. विष की गाँठ-(उपद्रवी)
देवेन्द्र तो विष की गाँठ है।
283. विष घोलना-(गड़बड़ पैदा करना)
विभीषण ने राम को रावण के सभी रहस्य बताकर विष घोलने का कार्य किया।
(श्र), (श)
284. श्रीगणेश करना-(कार्य आरम्भ करना)
आज गुरुवार है, आप कार्य का श्रीगणेश करें।
285. शहद लगाकर चाटना-(किसी व्यर्थ की वस्तु को सँभालकर रखना)
सेठ दीनदयाल बड़ा कंजूस है। वह व्यर्थ की वस्तु को भी शहद लगाकर चाटता है।
286. शैतान के कान कतरना/काटना-(बहुत चालाक होना)
देवेन्द्र है तो लड़का पर शैतान के कान कतरता है।
287. शान में बट्टा लगाना-(शान घटना)
साइकिल की सवारी करने में आजकल के युवाओं की शान में बट्टा लगता
288. शेर की सवारी करना-(खतरनाक कार्य करना)
रोज प्रेस से रात को दो बजे आना शेर की सवारी करना है।
289. शिकंजा कसना-(नियन्त्रण और कठोर करना)
भारत ने अपने सैनिकों पर शिकंजा कस दिया है कि कोई भी घुसपैठिया किसी भी समय सीमा पर दिखाई दे, तो उसे तुरन्त गोली मार दी जाए।
290. शेर और बकरी का एक घाट पर पानी पीना-(ऐसी स्थिति होना जिसमें दुर्बल को सबल का कुछ भी भय न हो)
सम्राट अशोक के काल में शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पिया करते थे।
(स)
290. सफ़ेद झूठ-(सर्वथा असत्य)
चुनाव के समय नेता सफेद झूठ बोलते हैं।
291. साँप को दूध पिलाना-(शत्रु पर दया करना)
साँप को दूध पिलाकर केवल विष बढ़ाना है।
292. साँप सूंघना-(निष्क्रिय या बेदम हो जाना)
कक्षा में बहुत शोर-गुल हो रहा था, परन्तु गुरु जी के आते ही सभी बच्चे ऐसे हो गए जैसे उन्हें साँप सूंघ गया हो।
293. सिर आँखों पर-(विनम्रता तथा सम्मानपूर्वक ग्रहण करना)
विनय इतना आज्ञाकारी बालक है कि वह अपने बड़ों के प्रत्येक आदेश को अपने सिर आँखों पर रखता है।
294. सिर ऊँचा करना-(सम्मान बढ़ाना)
पी. सी. एस. परीक्षा उत्तीर्ण करके महेश ने अपने माता-पिता का सिर ऊँचा कर दिया।
295. सोने की चिड़िया-(बहुत कीमती वस्तु)
पहले भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था।
296. सिर उठाना-(विरोध करना)
व्यवस्था के खिलाफ सिर उठाने की हिम्मत विरलों में ही होती है।
297. सिर पर भूत सवार होना-(धुन लग जाना)
राजीव को कार्ल मार्क्स बनने का भूत सवार है।
298. सिर मुंडाते ओले पड़ना-(काम शुरू होते ही बाधा आना)
छत्तीसगढ़ में भाजपा ने चुनाव का प्रचार शुरू ही किया था कि जूदेव भ्रष्टाचार काण्ड में फँस गए, तब कांग्रेस ने चुटकी ली सिर मुंडाते ही ओले पड़े।
299. सिर पर हाथ होना-(सहारा होना)
जब तक माँ-बाप का सिर पर हाथ है, मुझे क्या चिन्ता है।
(ह)
300. हवाई किले बनाना-(कोरी कल्पना करना)
बिना कर्म किए हवाई किले बनाना व्यर्थ है।
301. हाथ खाली होना-(पैसा न होना)
महीने के अन्त में अधिकांश सरकारी कर्मचारियों के हाथ खाली हो जाते हैं।
302. हथियार डालना-(संघर्ष बन्द कर देना)
मैंने व्यवस्था के खिलाफ हथियार नहीं डाले हैं।
303. हक्का-बक्का रह जाना-(अचम्भे में पड़ जाना)
राज अपने चाचा जी को ट्रेन में देखकर हक्का-बक्का रह गया।
304. हाथ खींचना-(सहायता बन्द कर देना)
सोवियत रूस के विखण्डन के पश्चात् देश के साम्यवादियों की मदद से रूस ने हाथ खींच लिए।
305. हाथ का मैल-(तुच्छ और त्याज्य वस्तु)
पैसा तो हाथ का मैल है, फिर आ जाएगा, आप क्यों परेशान हो?
306. हाथ को हाथ न सूझना-(घना अँधेरा होना)
इस बार इतना कोहरा पड़ा कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।
307. हाथ-पैर मारना-(कोशिश करना)
मैंने बहुत हाथ-पैर मारे लेकिन कलेक्टर बनने में सफलता नहीं मिली।
308. हाथ डालना-(शुरू करना)
अंबानी जी जिस प्रोजेक्ट में हाथ डालते हैं, उसमें सफलता मिलती है।
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| 3. आँखें खुलना, कान खड़े होना जैसे मुहावरों का सही मतलब क्या है? | ![]() |
| 4. मुहावरों को वाक्यों में सही तरीके से कैसे लगाते हैं? | ![]() |
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