समानार्थी (एकार्थक शब्द ) प्रतीत होने वाले भिन्नार्थी शब्द की सूची:
अस्वाभाविक - जो प्रकृति के नियमोँ के विरुद्ध हो।
असाधारण - सांसारिक होकर भी अधिकता से न मिले, विशेष।
अनुज - छोटा भाई।
अग्रज - बड़ा भाई।
भाई - छोटे-बड़े दोनों के लिए।
अनुभव - व्यवहार या अभ्यास से प्राप्त ज्ञान।
अनुभूति - चिन्तन या मनन से प्राप्त आंतरिक ज्ञान।
अनुरूप - समानता या उपयुक्तता का बोध होता है।
अनुकूल - पक्ष या अनुसार का भाव प्रकट होता है।
अस्त्र - फेँककर चलाए जाने वाले हथियार।
शस्त्र - हाथ मेँ पकड़कर चलाए जाने वाले हथियार।
अवस्था - जीवन का बीता हुआ भाग।
आयु - सम्पूर्ण जीवन काल।
अपराध - कानून के विरुद्ध कार्य करना।
पाप - सामाजिक तथा धार्मिक नियमोँ के विरुद्ध आचरण।
अनुरोध - आग्रह (हठ) पूर्वक की गई प्रार्थना।
आग्रह - हठ।
अभिनन्दन - सराहना करना, बधाई।
अभिवन्दन - प्रणाम, नमस्कार करना।
स्वागत - किसी के आगमन पर प्रकट की जाने वाली प्रसन्नता।
अणु - पदार्थ की सबसे छोटी इकाई।
परमाणु - तत्त्व की सबसे छोटी इकाई।
अधिक - आवश्यकता से बढ़कर।
अति - आवश्यकता से बहुत अधिक।
पर्याप्त - जितनी आवश्यकता हो।
अर्चना - मात्र बाह्य सत्कार।
पूजा - आन्तरिक एवं बाह्य दोनोँ सत्कार।
अर्पण - छोटोँ द्वारा बड़ोँ को दिया जाना।
प्रदान - बड़ोँ द्वारा छोटोँ को दिया जाना।
अमूल्य - जिस वस्तु का कोई मूल्य ही न आँका जा सके।
बहुमूल्य - अधिक मूल्यवान वस्तु।
अशुद्धि - भाषा सम्बन्धी लिखने-बोलने की गलती।
भूल - सामान्य गलती।
त्रुटि - बड़ी गलती।
असफल - व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है।
निष्फल - कार्य के लिए प्रयुक्त होता है।
अहंकार - घमण्ड, स्वयं को अत्यधिक समझना।
अभिमान - गौरव, दूसरोँ से श्रेष्ठ समझना।
आचार - सामान्य व्यवहार, चाल-चलन।
व्यवहार - व्यक्ति विशेष के प्रति परिस्थिति विशेष मेँ किया गया आचरण।
आनंद - खुशी का स्थायी और गंभीर भाव।
आह्लाद - क्षणिक एवं तीव्र आनंद।
उल्लास - सुख-प्राप्ति की अल्पकालिक क्रिया, उमंग।
प्रसन्नता - साधारण आनंद का भाव।
आधि - मानसिक कष्ट।
व्याधि - शारीरिक कष्ट।
आवेदन - अधिकारी से की जाने वाली प्रार्थना।
निवेदन - विनयपूर्वक की जाने वाली प्रार्थना।
आशंका - अनिष्ट की कल्पना से उत्पन्न भय।
शंका - सन्देह।
आविष्कार - नवीन वस्तु का निर्माण करना।
अनुसंधान - रहस्य की खोज करना।
अन्वेषण - अज्ञात स्थान की खोज करना।
आज्ञा - बड़ोँ द्वारा छोटे को किसी कार्य को करने हेतु कहना।
अनुमति - स्वीकृति।
आवश्यक - किसी कार्य को करना जरूरी।
अनिवार्य - कार्य जिसे निश्चित रूप से करना हो।
आरम्भ - बहुत ही साधारण और सामान्य शुरुआत।
प्रारम्भ - ऐसी शुरुआत जिसमेँ औपचारिकता, महत्ता और साहित्यता हो।
ईर्ष्या - दूसरे की उन्नति पर जलना।
द्वेष - अकारण शत्रुता।
स्पर्धा - एक-दूसरे से आगे बढ़ने की भावना।
उत्साह - निर्भीक होकर कार्य करना।
साहस - भय की उपस्थिति मेँ कार्य करना।
उत्तेजना - आवेग। प्रोत्साहन - बढ़ावा।
उद्यम - परिश्रम, प्रवास।
उद्योग - उपाय, प्रयत्न।
उपकरण - साधन।
उपादान - सामग्री।
कष्ट - मुख्यतः शारीरिक पीड़ा।
क्लेश - मानसिक पीड़ा।
दुःख - सभी प्रकार से सामान्य दुःख को प्रकट करने वाला शब्द।
कन्या - वह अविवाहित लड़की जो रजस्वला न हुई हो।
लड़की - सामान्य अविवाहित या विवाहित किसी की लड़की।
पुत्री - अपनी बेटी।
कृपा - किसी का दुःख दूर करने का प्रयास।
दया - किसी के दुःख से प्रभावित होना।
संवेदना - अनुभूति जताना।
सहानुभूति - किसी के दुःख से प्रभावित होकर अपनी अनुभूति जताना।
कृतज्ञ - उपकार मानने वाला।
आभारी - उपकार करने वाले के प्रति मन के भाव प्रकट करने वाला।
खेद - सामान्य दुःख।
शोक - स्वजनोँ के अनिष्ट से होने वाला दुःख।
विषाद - निराशापूर्ण दुःख।
तन्द्रा - हल्की नीँद।
निन्द्रा - गहरी नीँद।
नक्षत्र - स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित आकाशीय पिण्ड।
ग्रह - सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित आकाशीय पिण्ड।
नमस्कार - बराबर वाले के प्रति नम्रता प्रकट करने हेतु।
प्रणाम - अपने से बड़ोँ को अभिवादन या उनके प्रति नम्रता प्रकट करने के लिए प्रणाम का प्रयोग शब्द का प्रयोग किया जाता है।
नमस्ते - यह छोटे एवं बड़े सभी के लिए अभिवादन का प्रचलित शब्द है।
प्रलाप - व्यर्थ की बात।
विलाप - दुःख मेँ रोना।
परिणाम - किसी वस्तु का धीरे-धीरे दूसरा रूप धारण करना।
फल - किसी स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाला लाभ।
परिश्रम - सभी प्रकार की मेहनत को व्यक्त करने वाला शब्द।
श्रम - मात्र शारीरिक मेहनत।
परामर्श - सलाह-मशविरा सूचक शब्द।
मंत्रणा - गोपनीय सलाह-मशविरा।
प्रसिद्धि - बड़ाई।
ख्याति - विशेष प्रसिद्धि।
पीड़ा - शारीरिक कष्ट।
वेदना - सामान्य अल्पकालिक हार्दिक दुःख।
व्यथा - गंभीर दीर्घकालिक मानसिक दुःख।
पीछे - क्रम को सूचित करने वाला शब्द।
बाद मेँ - समय का भाव सूचित करने वारा शब्द।
बहुत - ज्यादा (बिना तुलना के)।
अधिक - ज्यादा (तुलना मेँ)।
भय - अनिष्ट के कारण मन मेँ उठा विचार (डर)।
आतंक - शारीरिक और मन मेँ उठा भय।
त्रास - भयवश होने वाला कष्ट।
यातना - दूसरोँ के द्वारा दिया गया कष्ट।
भवदीय - आपका, तुम्हारा।
प्रार्थी - प्रार्थना करने वाला।
भ्रम - किसी बात के लिए विषय गलत समझते हुए गलत धारणा बना लेना।
सन्देह - किसी के विषय मेँ निश्चय हो जाना।
भागना - भयवश दौड़ना।
दौड़ना - सामान्यतः तेज चलना।
भाषण - सामान्य व्याखान।
प्रवचन - धार्मिक विषय पर व्याख्यान।
मनुष्य - मानव जाति के स्त्री-पुरुष दोनोँ का बोध कराने वाला शब्द।
पुरुष - मानव पुल्लिँग।
मंत्री - परामर्श देने वाला।
सचिव - मंत्री के आदेश को प्रचारित करने वाला।
मन - इन्द्रियोँ, विषयोँ का ज्ञान कराने वाला।
चित्त - चेतना का प्रतीक।
अन्तःकरण - सत्-असत्, उचित-अनुचित का ज्ञान कराने वाला।
महाशय - इस शब्द का प्रयोग प्रायः साधारण लोगोँ के लिए किया जाता है।
महोदय/मान्यवर - इस शब्द का प्रयोग बड़े लोगोँ के लिए किया जाता है।
मित्र - समवयस्क, जो अपने प्रति प्यार रखता हो।
सखा - साथ रहने वाला समवयस्क।
सगा - आत्मीयता रखने वाला।
सुहृदय - सुंदर हृदय वाला, जिसका व्यवहार अच्छा हो।
लड़का - बाल मानव।
पुत्र - अपना लड़का।
लज्जा - दूसरे के द्वारा अपने बारे मेँ गलत सोचने का अनुमान।
ग्लानि - अपनी गलती पर होने वाला पश्चाताप।
संकोच - किसी कार्य को करने मेँ होने वाली झिझक।
यथेष्ट - अपेक्षित या जितना वांछनीय हो।
पर्याप्त - पूरी तरह से प्राप्त।
व्यापार - किसी काम मेँ लगे रहना।
व्यवसाय - थोड़ी मात्रा मेँ खरीदने और बेचने का कार्य।
वाणिज्य - क्रय-विक्रय और लेन-देन।
व्याख्यान - मौखिक भाषण।
अभिभाषण - लिखित व्याख्यान।
विनय - अनुशासन एवं शिष्टतापूर्ण निवेदन।
अनुनय - किसी बात पर सहमत होनेकी प्रार्थना।
आवेदन - योग्यतानुसार किसी पद केलिए कथन द्वारा प्रस्तुत होना।
प्रार्थना - किसी कार्य-सिद्धि के लिए विनम्रतापूर्ण कथन।
श्रद्धा - महानजनोँ के प्रति आदर भाव।
भक्ति - देवताओँ के प्रति आदर भाव।
श्रीयुत् - इस शब्द का प्रयोग आदर के लिए किया जाता है।
हमारे यहाँ इसका प्रयोग बहुत कम होता है।
श्रीमान् - इस शब्द का प्रयोग भी आदर के लिए किया जाता है।
हमारे यहाँ इसका प्रयोग अधिक होता है। श्रीयुत् और श्रीमान् का अर्थ समान-सा ही है।
स्त्री - कोई भी नारी।
पत्नी - किसी की विवाहिता स्त्री।
स्नेह - बड़ोँ का छोटोँ के प्रति प्रेम।
प्रेम - प्यार।
प्रणय - पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका का प्रेम।
सभ्यता - भौतिक विकास।
संस्कृति - कलात्मक एवं आध्यात्मिक विकास।
सुंदर - आकर्षक वस्तु।
चारु - पवित्र और सुंदर वस्तु।
रुचिर - सुरुचि जाग्रत करने वाली सुंदर वस्तु।
मनोहर - मन को लुभाने वाली वस्तु।
हेतु - अभिप्राय।
कारण - कार्य की पृष्ठभूमि।
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