वचन
व्याकरण में वचन का अर्थ है संख्या। जिससे किसी विकारी शब्द की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। वचन दो प्रकार के होते है-
वचन के भेद
एकवचन (Ekvachan)
- जिस शब्द में किसी व्यक्ति या वस्तु की संख्या एक होने का पता चले उसे एकवचन कहते हैं, जैसे-लड़का खेल रहा है। खिलौना टूट गया है। यह मेरी पुस्तक है।
इन वाक्यों में आए लड़का, खिलौना तथा पुस्तक शब्द एकवचन है।
बहुवचन (Bahuvachan)
- जिस शब्द से किसी व्यक्ति या वस्तु की संख्या एक से अधिक होने का पता चले, उसे बहुवचन कहते हैं। जैसे-लड़के खेल रहे हैं। खिलौने टूट गए। ये पुस्तकें मेरी हैं।
इन वाक्यों में आए लड़के, खिलौने एवं पुस्तकें शब्द बहुवचन है।
1. एकवचन बनाने के नियम
एकवचन शब्द के साथ जन, गण, वर्ग, वृन्द, मण्डल, परिषद् आदि लगाकर।
- गुरु-गुरुजन
- युवा-युवावर्ग
- मंत्री-मन्त्रिमण्डल
- मंत्रि-परिषद
2. बहुवचन बनाने के नियम
शब्दान्त 'आ' को 'ए' में बदलकर-
- लड़का-लड़के
- पपीता-पपीते
- रसगुल्ला-रसगुल्ले
शब्दान्त 'अ' को 'ए' में बदलकर-
- दाल-दालें
- दीवार-दीवारें
- कलम-कलमें
शब्दान्त में आये 'आ' के साथ 'एँ' जोड़कर-
'ई' वाले शब्दों के अन्त में 'इयाँ' लगाकर-
- लड़की-लड़कियाँ
- साड़ी-साडि़याँ
स्त्रीलिंग शब्द के अन्त में आए 'या' को 'याँ' में बदलकर-
- डिबिया-डिबियाँ
- गुडि़या-गुडि़याँ
स्त्रीलिंग शब्द के अन्त में आए 'उ' 'ऊ' के साथ एँ लगाकर-
'इ' ई स्वरान्त वाले शब्दों के साथ 'यों' लगाकर तथा 'ई' की मात्रा को 'इ' में बदलकर-
- रोटी-रोटियों
- नदी-नदियों
- गाड़ी-गाडि़यों