(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए:
1. कविता में 'नव-जीवन की ले अगँडाई' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर: अंकुर ★
2. 'नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पतुली- से ये जलधर' में 'काली पतुली' है-
उत्तर: बारिश की बूँदें ★
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
उत्तर: "अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई" - यह पंक्ति स्पष्ट रूप से अंकुर के बारे में बात करती है।
"काली पुतली-से ये जलधर" - यहाँ जलधर का अर्थ बादल है, जो काली आँखों की पुतली के समान दिखते हैं।
कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए:
उत्तर: 
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए:
"आसमान में उड़ता सागर, लगा बदलियों के स्वर्णिम पर,
बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बाली धरती की तरुणाई।"
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि आकाश में जल से भरे बादलों के बीच बिजली इस तरह चमक रही है जैसे सागर ने सुनहरे पंख लगाकर उड़ान भर ली हो। बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों की तरह प्रतीत होती है, जो धरती की युवा शक्ति और सुंदरता को जाग्रत कर रही है।
"नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-द्रवित अश्रु बहाकर, धरती की जड़-प्यास बुझाई।"
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि नीला आकाश नीली आँखों जैसा दिखाई देता है और काले बादल उन आँखों की काली पुतलियों जैसे लगते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो ये बादल धरती के दुःखों को देखकर द्रवित हो गए हों और करुणा के आँसू बनकर वर्षा के रूप में बह पड़े हों। इन आँसुओं ने धरती की सूखी और प्यासी जड़ों को तृप्त कर दिया।
कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए:
बारिश की पहली बूँद से धरती का हरित रूप कैसे प्रकट होता है?
उत्तर: बारिश की पहली बूँद धरती पर गिरते ही, धरती हरी-भरी और नई-जीवन का प्रतीक बन जाती है। यह बूँदें धरती को तरोताजा कर देती हैं और उसमें नयी ऊर्जा भर देती हैं।
कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
उत्तर: प्रस्तुत कविता के अनुसार, नीले आकाश को नीली आँखों के समान और काले बादल को उन नीली-नीली आँखों की काली पुतली के समान बताया गया है।
'आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्तिका भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता है- समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं।
इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।
उत्तर: 'अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई"
धरती से अंकुर का निकलना और उसे नव-जीवन की अंगड़ाई लेते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति में नए जीवन के जन्म और विकास को मानवीय क्रियाओं के माध्यम से दर्शाता है।
"हरी दूब पुलकी-मुसकाई"
हरी घास को मुस्कुराते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति के जीवंत होने और खुशी व्यक्त करने का भाव प्रस्तुत करता है।
"नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर"
आकाश को नीली आँखों के रूप में और बादलों को काली पुतलियों के रूप में चित्रित किया गया है। यह दृश्य प्राकृतिक तत्वों को मानवीय अंगों से जोड़कर एक अनूठा और कल्पनाशील चित्र प्रस्तुत करता है।
"करुणा-विगलित 'अश्रु बहाकर"
बारिश की बूँदों को करुणा से भरे आँसुओं के रूप में दर्शाया गया है। यह दृश्य बारिश को एक भावनात्मक रूप देता है, जो धरती के प्रति सहानुभूति दर्शाता है।
"बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को फिर से ललचाई"
धरती को एक बूढ़ी महिला के रूप में दर्शाया गया है जो फिर से युवा और हरी-भरी होने के लिए लालायित है। यह दृश्य प्रकृति के पुनर्जन्म और नवीनीकरण की प्रक्रिया को मानवीय इच्छाओं के रूप में प्रस्तुत करता है।
'अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई' कविता की इस पंक्ति में 'फूटने' का अर्थ पौधे का अंकुरण है। 'फूट' का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसे- फूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों, जैसे- अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो।
उत्तर:
'नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर' कविता की इस पंक्ति में 'जलधर' शब्द आया है। 'जलधर' दो शब्दों से बना है, जल और धर इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र; दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलिए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल।
शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता से 'धर' से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:

दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें-

उत्तर:
क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र
नगाड़ा
ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द
नयन
ग. जल को धारण करने वाला
जलधर
घ. एक प्रकार की घास
दूब
ङ. आँसू का समानार्थी
अश्रु
च. आसमान का समानार्थी शब्द
अंबर
(क) बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
उत्तर: बारिश आने पर मुझे बहुत अच्छा लगता है। ठंडी-ठंडी बूँदों का स्पर्श बहुत सुखदायक होता है और मुझे यह समय बहुत आनंददायक लगता है।
(ख) आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।
उत्तर: मुझे सर्दी की ऋतु सबसे अधिक प्रिय है क्योंकि इस समय मौसम ठंडा और सुहावना होता है। गर्म कपड़े पहनने का मजा आता है और कई प्रकार के गर्म व्यंजन खाने को मिलते हैं।
(क) प्रत्येक मौसम समाचार के विभिन्न माध्यमों (इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट या सोशल मीडिया) के प्रमुख समाचारों में रहता है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठंड के समाचार देते दिखाई देते हैं। आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार।
उत्तर: अत्यधिक गर्मी के समय मैंने देखा कि लोग छाया की तलाश में रहते हैं और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। सर्दी के समय लोग आग के पास बैठकर खुद को गर्म रखते हैं। बारिश के समय लोग छतरी लेकर चलते हैं और बारिश से बचने के लिए शेल्टर की तलाश करते हैं।
नाम देना भी सृजन है। ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और इसे एक नाम दीजिए।
उत्तर: रेगिस्तानी लिली या मरुस्थल का जीवन
आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।
उत्तर: ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली, तबला, हारमोनियम, गिटार आदि।
बारिश की बूँदें न केवल जीव-जंतुओं को राहत पहुँचाती हैं बल्कि धरती को हरा-भरा भी बनाती हैं। कभी-कभी ये बूँदें आकाश में बहुरंगी छटा बिखेरती हैं जिसे 'इंद्रधनुष' कहा जाता है। आप भी एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए और उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए | इसे कोई प्यारा सा नाम भी दीजिए।
उत्तर:
कितना प्यारा है इंद्रधनुष
आशाओं का संचार करता है
खुशियों का विस्तार करता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष,
जो प्रेम की पुकार बनता है।
वर्षा के बाद आकाश को सजाता है
बचपन के किस्सों को फिर से दोहराता है
रंग-बिरंगे रंगों से रंगकर सारा संसार,
इंद्रधनुष समृद्धि के गीत गुनगुनाता है,
प्रकृति का महिमामंडन करता है
निराशाओं का खंडन करता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष,
जो जीवन के हर पल का उत्सव बनाता है।
वीरता के किस्सों को सुनाता है
प्रेम का उत्सव मनाता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष
जो हमें आशावादी रहना सिखाता है।
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