(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
(1) सुल्तान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
उत्तर: बाबा भारती असावधान हो गए। (★)
(2) "बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।" इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
उत्तर: बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया। (★)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: बाबा भारती ने घोड़े को खो दिया, तो अब उन्हें चोरी का डर नहीं रहा। प्रशंसा चाहना एक सामान्य मानवीय भावना है, जो यह दर्शाता है कि बाबा भारती भी सामान्य मनुष्यों की तरह भावनाओं से युक्त थे।
(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने 'हार की जीत' रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर: सबकी सहायता करने तथा समाज में भाईचारा व सौहार्द बने रहने के उद्देश्य से इस कहानी का नाम 'हार की जीत' रखा होगा।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर: डाकू का हृदय परिवर्तन
कारण: बाबा भारती ने कहा था कि इस घटना को किसी के सामने वह समय घोड़े की देखभाल में लगाया जाता था। तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। तभी खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन हुआ और पुन: घोड़े को बाबा भारती को वापस दे दिया।
(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
उत्तर: बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से यह वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा ताकि लोगों का गरीबों पर से विश्वास न उठ जाए।
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति का अर्थ है कि भगवत-भजन करने के लिए जो समय बचता था, वह समय घोड़े की देखभाल में लग जाता था। इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति अपनी हर उपलब्ध समय को घोड़े की सेवा में समर्पित करता था।
विचार: यह पंक्ति यह दर्शाती है कि व्यक्ति की जिम्मेदारियों और समर्पण का स्तर कितना ऊँचा था। उसने आध्यात्मिक कार्यों के अलावा घोड़े की देखभाल को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना, जो समर्पण और ईमानदारी को दर्शाता है।
उत्तर: अर्थ: यहाँ बाबा ने घोड़े को गर्व के साथ दिखाया, जबकि खड्गसिंह ने उसे आश्चर्यचकित होकर देखा। यह विभिन्न दृष्टिकोणों को दर्शाता है।
विचार: इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि वस्तुओं को देखने के दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं। बाबा का घमंड और खड्गसिंह का आश्चर्य उनके व्यक्तित्व और उनके अनुभवों की विविधता को दिखाता है।
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में बताया गया है कि डाकू जो भी वस्तु पसंद करता था, उसे वह अपनी समझता था और उस पर कब्जा कर लेता था।
विचार: यह पंक्ति डाकू के चरित्र की स्वार्थी और बलात्कारी प्रवृत्तियों को उजागर करती है। डाकू की इस प्रवृत्ति से उसकी नैतिकता की कमी और दूसरों की चीजों पर अधिकार जमाने की प्रवृत्ति स्पष्ट होती है।
उत्तर: अर्थ: बाबा भारती ने घोड़े की ओर ऐसी दृष्टि से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है, जो कि एक निस्तेज और आत्मसमर्पण की भावना को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि घोड़ा अब तुम्हारा हो गया है।
विचार: इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि बाबा भारती ने घोड़े के हस्तांतरण को एक पराजय की तरह देखा। यह दृष्टिकोण हार मानने और अन्यायपूर्ण स्थिति को स्वीकार करने का संकेत है, जिसमें स्वीकृति और विवशता की भावना है।
उत्तर: अर्थ: यहाँ उन्होंने अस्तबल की ओर कदम बढ़ाए, लेकिन फाटक पर पहुँचकर उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने कोई गलती की है।
विचार: यह पंक्ति दर्शाती है कि किसी निर्णय या कार्य में पहुंचने के बाद ही उसकी गलती का एहसास होता है। यह तात्पर्य है कि कई बार हम अपनी भूल को तब ही पहचानते हैं जब हम अपने निर्णय पर पूरी तरह पहुंच जाते हैं, जिससे सीखने और सुधारने का अवसर मिलता है।
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
"दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।"
(क) किस-किस के आँसुओं का मिलन हो गया था?
उत्तर: बाबा भारती और खड्गसिंह के आँसुओं का मिलन हो गया था।
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
उत्तर: बाबा भारती के आँसू खुशी और राहत के थे क्योंकि उन्हें उनका घोड़ा वापस मिल गया था, जबकि खड्गसिंह के आँसू पश्चाताप और शर्मिंदगी के थे।
(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
उत्तर: बाबा भारती की दिनचर्या कुछ इस प्रकार हो सकती है:
(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
उत्तर: दिनचर्या:
सुबह:
दोपहर:
शाम:
रात:
(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर: इस कहानी की कई बातें मुझे बहुत पसंद आईं:
इन सभी बातों ने मिलकर इस कहानी को बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक बना दिया है।
(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे- शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
उत्तर: कहानी में संवाद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यह कहानी को जीवंत और प्रभावशाली बनाते हैं। संवाद पात्रों की भावनाओं, विचारों और उनके आपसी रिश्तों को व्यक्त करने में मदद करते हैं।
यहाँ पर कुछ विचार दिए गए हैं जो कहानी के संवादों पर आधारित हैं:
(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं- लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर:
(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं- बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुल्तान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए।

उत्तर:


मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती ? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए।
(संकेत- आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं - मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ.....)
उत्तर: मेरा नाम सुल्तान है। मैं एक घोड़ा हूँ और मेरे स्वामी बाबा भारती हैं। बाबा भारती मुझसे बहुत प्रेम करते हैं और मेरी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ते। एक दिन, खड्गसिंह नाम का डाकू मुझे चुराने आया। उसने चालाकी से बाबा को धोखा देकर मुझे ले जाने की कोशिश की, लेकिन बाबा की ईमानदारी और विश्वास ने उसे बदल दिया। अंततः, खड्गसिंह ने मुझे वापस लौटा दिया। इस घटना ने मुझे सिखाया कि सच्चाई और ईमानदारी हमेशा जीतती है।
(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था।
उत्तर:
(ख) आप उपयुक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
उत्तर:
आप जानते ही हैं कि लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। आइए, उनकी लिखी एक कविता पढ़ते हैं-
वह चली हवा
वह चली हवा,
वह चली हवा ।
ना तू देखे
ना मैं देखूँ
पर पत्तों ने तो देख लिया
वरना वे खुशी मनाते क्यों?
वह चली हवा,
वह चली हवा ।
- सुदर्शन
साझी समझ
आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा ? आपस में
चर्चा कीजिए और अपनी लेखन - पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: कविता की अच्छाइयाँ:
सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
उत्तर: सुदर्शन की कविताएँ और अन्य रचनाएँ उनके साहित्यिक योगदान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी रचनाएँ विविध विषयों और भावनाओं को छूने वाली होती हैं। यदि आप उनकी कुछ अन्य रचनाएँ पढ़ना और समझना चाहते हैं, तो निम्नलिखित संसाधनों की सहायता ले सकते हैं:
| 1. What is the main message of "हार की जीत" story in Class 6 Hindi? | ![]() |
| 2. Who are the main characters in हार की जीत and what do they represent? | ![]() |
| 3. Why does the protagonist feel like they've lost in the beginning of "हार की जीत"? | ![]() |
| 4. How does "हार की जीत" explain the difference between losing and true defeat? | ![]() |
| 5. What life lessons from "हार की जीत" are most important for Class 6 students to understand? | ![]() |