प्रश्न 1: बाबा भारती और सुल्तान के बीच क्या संबंध था?
उत्तर: बाबा भारती अपने घोड़े सुल्तान से अत्यधिक प्रेम करते थे। वे सुल्तान को अपने जीवन का एक अभिन्न हिस्सा मानते थे। सुल्तान उनके लिए केवल एक घोड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार का सदस्य था। वे उसकी देखभाल करते थे और उसे अपने साथ हमेशा रखते थे। उनका यह प्रेम सच्चे आत्मीय संबंध का प्रतीक था।
प्रश्न 2: खड्गसिंह ने बाबा भारती से घोड़ा चुराने की योजना कैसे बनाई?
उत्तर: खड्गसिंह ने एक अपाहिज व्यक्ति का रूप धारण कर बाबा भारती को धोखा देने की योजना बनाई। जब बाबा भारती उस पर दया कर उसे घोड़े पर चढ़ा रहे थे, तो खड्गसिंह ने घोड़े की लगाम छीन ली और उसे लेकर भाग गया। इस प्रकार उसने चालाकी से घोड़ा चुराने में सफलता पाई।
प्रश्न 3: खड्गसिंह के चरित्र में परिवर्तन कैसे आया?
उत्तर: खड्गसिंह एक कुख्यात डाकू था, लेकिन बाबा भारती की सच्चाई और दयालुता से प्रभावित होकर उसने अपने कृत्यों पर पश्चाताप किया। उसने महसूस किया कि उसकी धोखाधड़ी से अधिक महत्व सच्चाई और दया का है। इस पश्चाताप के बाद उसने घोड़ा वापस किया, जिससे उसका चरित्र परिवर्तन स्पष्ट होता है।

प्रश्न 4: खड्गसिंह का बाबा भारती से घोड़ा चुराना क्या दर्शाता है?
उत्तर: खड्गसिंह का बाबा भारती से घोड़ा चुराना उसके स्वार्थ और लालच को दर्शाता है। उसने अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए एक अपाहिज का रूप धारण कर बाबा भारती को धोखा दिया। हालांकि, यह घटना अंततः उसके हृदय परिवर्तन का कारण बनी और उसने अपने कृत्य पर पश्चाताप किया।
प्रश्न 5: खड़गसिंह कौन था और वह बाबा भारती के पास क्यों आया था?
उत्तर: खड़गसिंह इलाके का प्रसिद्ध डाकू था और उसने सुल्तान नामक घोड़े की कीर्ति सुन रखी थी। वह उसे देखने के लिए बाबा भारती के पास आया था।
प्रश्न 6: खड़गसिंह के चले जाने के बाद बाबा भारती को रात के समय नींद क्यों नहीं आती थी ?
उत्तर: खड़गसिंह के चले जाने के बाद बाबा भारती को रात के समय नींद इसीलिए नहीं आती थी क्योंकि वे डर गए थे। जाते समय खड़गसिंह ने उन्हें धमकी दी थी कि वह यह घोड़ा उनके पास नहीं रहने देगा।
प्रश्न 7: संध्या के समय घोड़े पर सवार बाबा ने घोड़े को क्यों थाम लिया था?
उत्तर: बाबा भारती ने घोड़े को इसलिए थाम लिया था क्योंकि उन्होंने एक अपाहिज की करुणापूर्ण आवाज सुनी थी, जो एक वृक्ष की छाया में पड़ा कराह रहा था।
प्रश्न 8: बाबा ने खड़गसिंह को बुलाकर क्या कहा था?
उत्तर: बाबा ने खड़गसिंह को बुलाकर यह कहा कि मेरी तुमसे केवल यह प्रार्थना है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना। घोड़ा अब तुम्हारा हो चुका है। नहीं तो लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे।

प्रश्न 1: बाबा भारती का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
उत्तर: बाबा भारती एक साधू थे। उन्होंने अपना सब कुछ छोड़ दिया था और गाँव से बाहर छोटे से मंदिर में रहते थे और भगवान का भजन करते थे। उनके पास सुल्तान नाम का एक घोड़ा था जिसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में नहीं था। भगवान के भजन पूजा से जो समय बचता था ,बाबा भारती उस समय को अपने घोड़े की सेवा में लगा देते थे। वह सुल्तान को ऐसा प्यार करते थे जैसा कि कोई सच्चा प्रेमी अपने प्यार को करता हो। वह सुल्तान की चाल पर लट्टू थे। जब तक सुल्तान पर चढ़कर चौदह - पंद्रह किलोमीटर का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता था।
प्रश्न 2: एक दिन संध्या के समय डाकू खड्गसिंह ने क्या नाटक किया ?
उत्तर: एक दिन संध्या के समय डाकू खड्गसिंह एक अपाहिज कंगला बनकर उस रास्ते में पड़ गया, जिस रास्ते से बाबा भारती अपने घोड़े पर जा रहे थे। कंगले के रूप में खड्गसिंह ने स्वयं को वैद्य दुर्गादत्त का सौतेला भाई बताकर रामवाला गाँव तक ले चलंने की गुहार लगाई। बाबा भारती ने घोड़ा रोककर उसे घोड़े पर चढ़ा लिया। तब वह खड्गसिंह अपने असली रूप में आ गया और बाबा भारती से उनका घोड़ा चालाकी से हथिया लिया।
प्रश्न 3: बाबा भारती घोड़े की किस प्रकार सेवा करते थे?
उत्तर: बाबा भारती को भगवद्-भजने के बाद जो समय बचता, वह घोड़े की सेवा में अर्पण हो जाता। वे रोजाना अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और उसे देख-देखकर प्रसन्न होते थे। वे ऐसी लगन, ऐसे प्यार और स्नेह से अपने सुलतान घोड़े की देखभाल करते थे कि मानो वह उनका अतीव प्रियजन हो। उन्हें रुपया, माल असबाब, जमीन तथा नागरिक सुखमय जीवन से भी घृणा थी। वे गाँव के बाहर एक छोटे मंदिर में रहते थे। वे सुलतान से अतिशय प्रेम करते थे और उसके दाना-पानी का पूरा ध्यान रखते थे।

प्रश्न 4: घोड़े सुलतान को देखकर बाबा भारती को कैसे आनंद की प्राप्ति होती थी ?
उत्तर: बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान को देखकर बड़ा आनंद मिलता था। जैसे माँ को अपने बेटे को देखकर, साहूकार को अपने देनदार और किसान को अपने लहलहाते खेत को देखकर आनंद आता है, उसी प्रकार बाबा भारती को अपने घोड़े को देखकर आनंद मिलता था। इस कारण सुलतान से बिछुड़ने की बात से उन्हें असह्य वेदना होती थी। वे उसके बिना एक क्षण भी नहीं रह सकने की बात सोचते रहते थे।
प्रश्न 5: खड्गसिंह द्वारा छद्म तरीके से घोड़ा प्राप्त करने के तुरंत बाद ही बाबा भारती की दशा का वर्णन करें।
उत्तर: बाबा भारती ने जिसे अपाहिज मानकर अपने घोड़े पर बिठाया था, वह डाकू खड्गसिंह था । छद्म तरीके से घोड़ा प्राप्त करने पर खड्गसिंह उसे दौड़ाए लिए जाने लगा। उस समय बाबा भारती के मुख से भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई। डाकू उनकी प्रिय वस्तु को छीन रहा था, इस कारण उनमें भय उत्पन्न हुआ, जो व्यक्ति अपाहिज बनकर घोड़े पर बैठा था, वह उसे एकाएक यों छीन ले जाएगा। इससे विस्मय और डाकू से घोड़ा न मिलने से और आगे से गरीबों पर विश्वास न करने की चिंता से वे निराशा से ग्रस्त हो गए थे।
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