लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1: पिताजी और दादीजी को लेखक के कार्य क्यों पसंद नहीं थे?
उत्तर: पिताजी और दादीजी को सेवा-समिति में लेखक की भागीदारी अच्छी नहीं लगती थी।
प्रश्न 2: माताजी लेखक को किस प्रकार प्रेरित करती थीं?
उत्तर: माताजी लेखक का उत्साह बनाए रखती थीं, भले ही उन्हें पिताजी की डाँट सहनी पड़े।
प्रश्न 3: लेखक ने सत्य का पालन कैसे किया?
उत्तर: लेखक ने वकील के कहने पर भी पिताजी के हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह उनके लिए गलत था।

प्रश्न 4: लेखक को वकील द्वारा किस कार्य के लिए बुलाया गया था, और उन्होंने उसे करने से क्यों इनकार कर दिया?
उत्तर: लेखक को वकील साहब ने बुलाकर वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने के लिए कहा। उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि यह धर्म विरुद्ध होगा और इस प्रकार का पाप वह बिलकुल भी नहीं कर सकते।
प्रश्न 5: माताजी की शिक्षा कैसे हुई?
उत्तर: माताजी अशिक्षित थीं, लेकिन उन्होंने खुद पढ़ाई करने का शौक पैदा किया और आस -पड़ौस की स्त्रियों से सीखना शुरू किया।
प्रश्न 6: लेखक माताजी की तुलना किससे करता है?
उत्तर: लेखक अपनी माताजी की तुलना मेजिनी की माता से करता है, जिन्होंने अपने पुत्र का समर्थन किया।
प्रश्न 7: लेखक की माँ ने उसे कठिन समय में कैसे सहारा दिया?
उत्तर: लेखक की माँ ने कठिन समय में प्रेम भरी वाणी से उसे सांत्वना दी और कभी अधीर नहीं होने दिया।
प्रश्न 8: लेखक अपनी माँ को किस दुखद समाचार के लिए तैयार करता है?
उत्तर: लेखक कहता है कि उसकी मृत्यु का दुखद समाचार उसकी माँ को सुनाया जाएगा इसलिए उस समय वह धीरज रखें।
प्रश्न 9: लेखक अपनी माँ के गर्व की बात कैसे करता है?
उत्तर: लेखक कहता है कि उसने अपनी माँ की कोख को कलंकित नहीं किया और अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहा।
प्रश्न 10: लेखक ने स्वाधीन भारत के इतिहास से अपनी माता को कैसे जोड़ा?
उत्तर: लेखक का मानना है कि जब स्वाधीन भारत का इतिहास लिखा जाएगा, तब उसकी माता का नाम भी उज्ज्वल अक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि उन्होंने अपने पुत्र को देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1: रामप्रसाद 'बिस्मिल' अपने जीवन के अंतिम समय में अपनी माँ का स्मरण कर भावुक हो उठते हैं - अपने विचार प्रकट कीजिए ।
उत्तर: 'बिस्मिल' जी अपनी माँ द्वारा किए गए त्याग को स्मरण करते हैं। अपनी आत्मकथा 'मेरी माँ' में बिस्मिल कहते हैं कि उनके चरित्र निर्माण में माँ ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दी गई शिक्षा के कारण बिस्मिल बड़े-से-बड़े संकटों में भी अधीर नहीं हुए। अपनी प्रेमपूर्ण वाणी और व्यवहार से माँ ने अपने बेटे को हमेशा देश-प्रेम, साहस और सत्य के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। माँ की कृपा के कारण उन्होंने अपने जीवन लक्ष्य को प्राप्त किया। जीवन के अंतिम समय में वे अपनी माताजी के श्रीचरणों में बैठकर उनकी सेवा करने की इच्छा रखते हैं। जिसे प्रेम और दृढ़ता के साथ उनका जीवन सुधारा, उसका ऋण उतारने का प्रयत्न करने का भी अवसर बिस्मिल जी को न मिला। अपनी माँ की दया से देश सेवा में संलग्न हो सके। इन्हीं विचारों और भावनाओं को महसूस कर बिस्मिल भावुक हो उठते हैं।
प्रश्न 2: अंग्रेज सरकार क्रांतिकारियों पर बहुत अत्याचार करती थी। इतने सख्त कानून होने पर भी अपनी आत्मकथा लिखना और उसे जेल से बाहर भिजवाना - इससे बिस्मिल के किन गुणों का पता चलता है?
उत्तर: अंग्रेज़ भारतीयों पर बहुत अत्याचार करते थे। वे साधारण भारतीयों को चैन से नहीं रहने देते थे। विशेष रूप से क्रांतिकारियों पर तो उनके अत्याचारों की कोई सीमा ही नहीं होती थी। उन्हें बेड़ियों में बाँधकर रखते थे। ऐसे वातावरण में कुछ भी लिखकर बाहर भेजना असंभव था, किंतु हमारे आजादी के मतवालों के शब्दकोश में असंभव शब्द तो था ही नहीं। बिस्मिल जी द्वारा आत्मकथा का जेल में लिखा जाना और बाहर भेजकर उसका प्रकाशित होना उनके के अदम्य साहस, निडर, चतुर, होनहार, बुद्धिमान, पारस्परिक समन्वय, सामंजस्य आदि अनेक गुणों के समायोजन के कारण ही संभव हो पाया।
प्रश्न 3: रामप्रसाद 'बिस्मिल' की माँ ने उनके जीवन पर किस प्रकार गहरा प्रभाव डाला? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: रामप्रसाद 'बिस्मिल' की माँ ने उनके जीवन पर बहुत ही सकारात्मक और गहरा प्रभाव डाला। सबसे पहले, जब उनके पिता और दादी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने से मना कर रहे थे, तो उनकी माँ ने हमेशा उनका साथ दिया। उन्होंने अपने बेटे को शिक्षा पूरी करने और अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया। माताजी का साथ मिलने से ही बिस्मिल ने जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने संकल्प को नहीं छोड़ा। उनकी माँ ने उन्हें सत्य और नैतिकता का पालन करने की शिक्षा दी। उन्होंने बिस्मिल को यह उपदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में निर्दोष व्यक्ति की प्राण-हानि नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, माँ ने खुद भी शिक्षा प्राप्त की और अपने बच्चों को शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचार आर्य समाज के प्रभाव से उदार हुए, जिससे बिस्मिल को अपने क्रांतिकारी विचारों को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।
प्रश्न 4: बिस्मिल की माँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उनके जीवन को प्रभावित करने में सहायक रहीं? विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर: बिस्मिल की माँ के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ उनके जीवन को प्रभावित करने में सहायक रहीं। सबसे पहले, वे एक स्वयंसिद्ध शिक्षिका थीं - ग्यारह वर्ष की उम्र में विवाहित होकर शाहजहाँपुर आईं, और बाद में खुद ही पढ़ने की रुचि दिखाई और शिक्षा प्राप्त की। दूसरे, वे बहुत ही सहानुभूतिशील और समझदार थीं - जब बिस्मिल के पिता और दादी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने से मना कर रहे थे, तो माँ ने हमेशा उनका साथ दिया। तीसरे, वे बहुत ही सिद्धांतपरायण थीं - उन्होंने अपने बेटे को सत्य और नैतिकता का पालन करने की शिक्षा दी। चौथे, वे बहुत ही सहनशील थीं - जब बिस्मिल के क्रांतिकारी कार्यों के कारण पिताजी की डाँट-फटकार और दंड सहन करना पड़ता था, तो भी वे अपने बेटे का साथ देती रहीं। इन सभी गुणों ने बिस्मिल के व्यक्तित्व का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 5: बिस्मिल की माँ के प्रति उनके अंतिम विचारों में क्या भावनाएँ झलकती हैं? विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर: बिस्मिल की माँ के प्रति उनके अंतिम विचारों में गहरी भक्ति, आभार और प्रेम की भावनाएँ झलकती हैं। वे माँ से माफी माँगते हुए कहते हैं कि वे कभी उनका क़र्ज़ नहीं चुका पाएंगे। वे चाहते थे कि अपने अंतिम समय में माँ के चरणों की सेवा करें, लेकिन उन्हें यह अवसर नहीं मिला। वे माँ से प्रार्थना करते हैं कि जब भारत स्वतंत्र होगा, तो इतिहास में उनके बलिदान के साथ उनकी माँ का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। वे अपनी माँ को अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हैं और कहते हैं कि अगर वे अनेक जन्मों में भी सारे जीवन प्रयत्न करें तो भी वे उनसे उऋण नहीं हो सकते। इन विचारों से पता चलता है कि बिस्मिल के अंतिम पलों में भी उनकी माँ के प्रति उनकी श्रद्धा और प्रेम अखंड बना रहा।