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NCERT Solutions: पानी रे पानी

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा  (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?
  • नल सूख जाने से।
  • पानी बरसने से। (*)
  • तालाब और झीलों से। (*)
  • बाढ़ आने से।

उत्तर: पानी बरसने से।
तालाब और झीलों से।
विश्लेषण: क्योंकि प्रकृति वर्षा के मौसम में पानी बरसाता है, जिसे तालाबों और झीलों में जमा किया जाता है। यही जमा पानी धीरे-धीरे रिसकर ज़मीन के नीचे जाता है और हमारे भूजल भंडार को समृद्ध करता है।

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?

  • वर्षा जल का संग्रह करना।
  • समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना। (*)
  • नदियों का समुद्र में जाकर मिलना। (*)
  • बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।

उत्तर: समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
विश्लेषण: क्योंकि जल-चक्र में समुद्र से उठी भाप बादल बनती है और फिर बरसती है। इसके बाद नदियाँ अपने चारों ओर का पानी लेकर वापस उसी समुद्र में मिल जाती हैं, जिससे जल-चक्र पूरा होता है।

(3) "इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।" यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?

  • जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
  • आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
  • तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना। (*)
  • भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।

उत्तर: तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
विश्लेषण: यहाँ 'बड़ी गलती' का संकेत तालाबों को कचरे से भरकर समतल बना देने और उन पर मकान, बाजार आदि बना देने की ओर है। इसी गलती के कारण गर्मियों में नल सूख जाते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबने लगती हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मित्रों के साथ संवाद:

  • राहुल: अरे, तुमने पहले प्रश्न में "पानी बरसने से" और "तालाब-झीलों से" क्यों चुना?
  • मैं: देखो, जब बारिश होती है तो पानी मिट्टी से रिसकर नीचे चला जाता है। इसी से हमारा भूजल भरता है। और तालाब-झीलें तो जैसे धरती की गुल्लक हैं, इनसे भी पानी धीरे-धीरे ज़मीन में उतरता है। इसलिए मैंने यही चुना।
  • वान्या: अच्छा, दूसरे सवाल में तुमने "भाप का बादल बनकर बरसना" और "नदियों का समुद्र में मिलना" क्यों चुना?
  • मैं: क्योंकि यही तो जल-चक्र है। पहले सूरज की गरमी से समुद्र का पानी भाप बनता है, फिर बादल बनते हैं और बरसते हैं। बारिश का पानी नदियों में जाता है और नदियाँ फिर समुद्र में मिलती हैं। इस तरह पूरा चक्कर पूरा होता है।
  • अजय: और तीसरे सवाल में "तालाबों को कचरे से पाटना" ही क्यों चुना?
  • मैं: क्योंकि पाठ में साफ लिखा है कि पहले लोग तालाबों को पाटकर मकान, बाजार बना लेते थे। इस वजह से बरसात का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता और भूजल घट गया। गर्मी में नल सूख जाते हैं और बरसात में बाढ़ आती है। यही हमारी बड़ी गलती है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ शब्द समूह या संदर्भ चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।
मिलकर करें मिलान

उत्तर: मिलकर करें मिलान

पंक्तियों पर चर्चा

इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।

  • "पानी आता भी है तो बेवक्त।"

उत्तर: यह पंक्ति बताती है कि पानी की कमी के कारण नल में पानी अनियमित समय पर आता है, जैसे देर रात या सुबह जल्दी, जिससे लोगों को परेशानी होती है।

  • "देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।"

उत्तर: इसका अर्थ है कि कई जगहों पर पानी की इतनी कमी हो जाती है कि वहां लोगों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, बिल्कुल अकाल जैसी स्थिति बन जाती है।

  • "कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।"

उत्तर: जब बाढ़ आती है, तो जीवन ठप हो जाता है, लोग अपने काम-काज नहीं कर सकते, सड़कें और रास्ते बंद हो जाते हैं।

  • "अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।"

उत्तर: इसका मतलब है कि पानी की कमी और अधिकता दोनों ही समस्या हैं, हमें दोनों को समझकर सही कदम उठाने चाहिए।

सोच-विचार के लिए

लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।
(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?

उत्तर: धरती को बहुत बड़ी गुल्लक इसलिए कहा गया है क्योंकि जैसे हम गुल्लक में पैसे जमा करते हैं, वैसे ही धरती अपने अंदर पानी जमा करती है। बरसात का पानी धरती के नीचे संग्रहित होता है, जिसे साल भर उपयोग किया जा सकता है।

(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
उत्तर: जल-चक्र की प्रक्रिया ऐसे पूरी होती है-सूरज समुद्र के पानी को भाप बनाता है, भाप बादल बनती है, बादल बरसात लाते हैं, बारिश का पानी नदियों से वापस समुद्र में चला जाता है। यह प्रक्रिया बार-बार चलती रहती है।

(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
उत्तर: यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो पानी का भंडार खत्म हो जाएगा, लोगों और जानवरों को पीने, खेती और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी नहीं मिलेगा और बड़े संकट आ सकते हैं।

(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
उत्तर: पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान इसलिए बताया गया है क्योंकि पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। रुपए तो दोबारा मिल सकते हैं, लेकिन पानी की कमी से जीवन, खेती, जानवर और पूरा पर्यावरण संकट में आ सकता है।

शीर्षक

(क) इस पाठ का शीर्षक 'पानी रे पानी' दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर: इस पाठ का नाम 'पानी रे पानी' इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें पानी के महत्व, उसकी कमी और उसके सही उपयोग के बारे में बताया गया है। पाठ में पानी की समस्या, बर्बादी और उसके संरक्षण के उपाय समझाए गए हैं। यह नाम बच्चों को पानी की कीमत और जरूरत समझाने के लिए चुना गया है, ताकि वे उसे संभालकर इस्तेमाल करें।

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
उत्तर: मैं इस पाठ का नाम 'जल है तो जीवन है' दूँगा।
कारण: 
  • यह नाम पानी के महत्व को स्पष्ट करता है और बताता है कि पानी के बिना जीवन संभव नहीं।  
  • यह लोगों को पानी संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।

शब्दों की बात

बात पर बल देना
  • "हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।"  
  • "हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।"

(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
उत्तर: पहले वाक्य में "भी" शब्द है, जबकि दूसरे वाक्य में "भी" शब्द हटा दिया गया है।

  • "भी" हटाने से वाक्य में तुलना या समानता की भावना कम हो जाती है।
  • "भी" से लगता है कि जैसे गुल्लक होती है, वैसे ही धरती भी है।
  • "भी" हटाने से वाक्य केवल धरती की बात करता है, तुलना का भाव कम हो जाता है।

(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर: पाठ से प्रभाव पैदा करने वाले शब्दों वाले वाक्यः

1. "पानी आता भी है तो बेवक्त।"

  • "भी" शब्द यहाँ यह दर्शाता है कि पानी की उपस्थिति भी समस्या है, क्योंकि वह सही समय पर नहीं आता।

2. "कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।"

  • "सब कुछ" शब्द ज़्यादा व्यापक असर दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ है।

3. "अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।"

  • "एक ही सिक्के के दो पहलू" एक मुहावरे के रूप में प्रयुक्त होकर अर्थ को प्रभावशाली बनाता है।

4. "पानी को रुपयों से भी कई गुना ज़्यादा मूल्यवान बताया गया है।"

  • "कई गुना ज़्यादा" शब्द यह दिखाते हैं कि पानी का मूल्य केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, जीवन के दृष्टिकोण से बहुत अधिक है।

समानार्थी शब्द

नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। इस कार्य के लिए आप बादल में से शब्द चुन सकते हैं।
समानार्थी शब्द(क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।
(ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठ जाता है। 
(ग) अचानक बादल गरजने लगे।?
(घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है।
उत्तरः 
(क) सूर्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर
(ख) वाष्प, नीर
(ग) मेघ, जलद, वारिद समीर
(घ) वायु, पवन

उपसर्ग

"देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं"
उपयुक्त वाक्य में 'अ' और 'काल' शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है-समय, मृत्यु जब अकाल का अर्थ है-कुसमय, सूखा। कुछ शब्दों में काल के आधार से जुकर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दों को 'उपसर्ग' कहते हैं।
आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं-

उपसर्गअब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
उपसर्ग

उत्तरउपसर्गनए शब्दों से बने वाक्य:

  • सुपात्र: ज्ञान सुपात्र को ही देना चाहिए।
  • आपात्र: आपात्र को ज्ञान देने से बचना चाहिए।
  • अज्ञान: ज्ञान अज्ञान को दूर करता है।
  • विज्ञान: विज्ञान हमें प्रकृति के रहस्य समझने में मदद करता है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
उत्तर: हम धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए ये प्रयास कर सकते हैं:
  • बारिश के पानी को बचाएं और तालाब, कुएँ, झील में जमा करें।
  • तालाबों और जलस्रोतों की सफाई और देखभाल करें।
  • बर्बादी न करें, नलों को बंद रखें।
  • घर में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) सिस्टम लगाएँ।
  • पेड़-पौधे लगाएँ, जिससे पानी ज़मीन में जाए।
  • दूसरों को भी जल संरक्षण के लिए जागरूक करें।

(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
उत्तरजल-चक्र प्रक्रिया का खंड: पाठ के पहले पृष्ठ पर, "भूगोल की किताब पढ़ते समय..." से लेकर "...जल-चक्र पूरा हो जाता है।" तक के खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती और बरसात की बूँदें मिलकर जल-चक्र को पूरा करते हैं।
जल-चक्र का चित्र
आपकी बात


(ग) अपने द्वारा बनाए गए जल-चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।  
उत्तर: मेरे द्वारा बनाए गए जल-चक्र के चित्र में जल की पूरी यात्रा को दर्शाया गया है:

  • पहला चरण (वाष्पीकरण): चित्र में दिखाया गया है कि सूरज की तेज गर्मी के कारण समुद्र का पानी भाप (वाष्प) बनकर ऊपर आकाश की ओर उठ रहा है।
  • दूसरा चरण (संघनन): यह भाप जब ऊपर पहुँचकर ठंडी होती है, तो छोटे-छोटे पानी के कणों में बदलकर बादलों का रूप ले लेती है।
  • तीसरा चरण (वर्षण): जब इन बादलों में पानी की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो वे वर्षा की बूँदों के रूप में धरती पर बरसने लगते हैं।
  • चौथा चरण (संग्रहण): बारिश का यह पानी ज़मीन पर गिरता है और बहकर नालों और नदियों में इकट्ठा हो जाता है। चित्र में एक नदी इस पानी को लेकर आगे बढ़ रही है।
  • अंतिम चरण: यह नदी बहते हुए वापस उसी समुद्र में जाकर मिल जाती है, जहाँ से यह यात्रा शुरू हुई थी। इस प्रकार, तीरों की मदद से पानी की यह पूरी यात्रा दिखाकर जल-चक्र को समझाया गया है।

सृजन

(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया। आपके विद्यालय जाना है। आपके घर में सभी को एक सार्वजनिक नल से अपनी बाल्टी अथवा लोटे वहाँ पहुँचते हैं और ठीक उसी समय आपके पड़ोसी भी पानी लेने पहुँच जाते हैं। अब दोनों ही अपनी-अपनी बाल्टी पहले भरना चाहते हैं। ऐसी परिस्थिति में आपसे में किसी प्रकार का विवाद (तु-तु मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
उत्तर: पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन):  

  1. "पानी है अनमोल, बारी-बारी से लो।"  
  2. "सबको मिले पानी, न करो तू-तू मैं-मैं।"  
  3. "पानी बचाओ, प्यार से बाँटो।"  
  4. "जल है जीवन, मिलकर करें सम्मान।"  
  5. "एकजुट होकर पानी लें, विवाद नहीं करें।

इन स्लोगनों से हम सबको यह सीखने को मिलता है कि थोड़ा धैर्य, सहयोग और समझदारी से किसी भी परिस्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है।

(ख) "सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँद और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनार वसता तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर!"
इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चित्र उभर आया होगा, उस चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।

सृजन

उत्तर: सृजन

पानी रे पानी

नीचे हम सबके दिनचर्या से जुड़ी कुछ गतिविधियों के चित्र हैं। इन चित्रों पर बातचीत कीजिए जो धरती पर पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और उन चित्रों पर भी बात करें जो पानी की गुल्लक को जल्दी खाली कर रहे हैं।
पानी रे पानी

उत्तर: पानी के संकट को कम करने वाली गतिविधियाँ:

  • पौधारोपण करना (नीचे बाएँ) - इससे धरती में जल संरक्षित होता है।
  • पेड़-पौधों को पानी देना (ऊपर बीच) - बचे हुए पानी का सही उपयोग।
  • तालाब या जलस्रोत बनाना (बीच बाएँ) - वर्षा जल को संचित करने का अच्छा तरीका।

पानी की गुल्लक जल्दी ख़ाली करने वाली गतिविधियाँ:

  • बिना जरूरत के पानी बहाना (बीच बीच) - टोंटी खुली छोड़ना।
  • वाहन धुलना जरूरत से ज्यादा पानी से (नीचे बीच) - बहुत पानी बर्बाद होता है।
  • नल में मोटर लगाकर पानी खींचना (बीच दाएँ) - अन्य लोगों का हिस्सा लेना।
  • पानी व्यर्थ बहते देखना (ऊपर दाएँ) - जल की बर्बादी।

सार: हमें पानी बचाने वाली आदतें अपनानी चाहिए और बर्बादी से बचना चाहिए।

सबका पानी

'सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले' इस विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन करें। परिचर्चा के मुख्य बिंदुओं को आधार बनाते हुए रिपोर्ट तैयार करें।  
उत्तर: परिचर्चा की रिपोर्ट
विषय: सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले
स्थानः कक्षा-7
तिथि: XX मई 2025
आयोजकः विज्ञान एवं पर्यावरण क्लब
मुख्य बिंदु:  

  1. वर्षा जल संग्रहण: हर घर और स्कूल में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली लगाई जाए।  
  2. जल स्रोतों की रक्षा: तालाबों, नदियों और झीलों को कचरे से बचाना और उनकी सफाई करना।  
  3. पानी का समान वितरण: सार्वजनिक नलों पर पानी बारी-बारी से लिया जाए, ताकि सभी को मिले।  
  4. जागरूकता: लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करना, जैसे कम पानी से काम करना।  
  5. सरकारी प्रयास: स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए योजनाएँ शुरू करना।

निष्कर्ष: सभी को पानी मिले, इसके लिए सामूहिक प्रयास, जागरूकता और जल प्रबंधन जरूरी है।  

दैनिक कार्य में पानी

(क) क्या आपने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है? अपने घर में पानी के उपयोग से जुड़ी एक तालिका बनाइए। इस तालिका के आधार पर पता लगाइए -
  • घर के कार्यों में एक दिन में लगभग कितना पानी खर्च होता है? (बालटी, घड़े या किसी अन्य बर्तन को मापक बना सकते हैं)
  • आपके माँ और पिता या घर के अन्य सदस्य पानी बचाने के लिए क्या-क्या उपाय करते हैं?

उत्तर: हाँ, मैंने यह जानने की कोशिश की है कि मेरे घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है। नीचे एक तालिका दी गई है:
दैनिक कार्य में पानी

पानी बचाने के उपाय:  

  • मेरी माँ बर्तन धोते समय नल को बंद रखती हैं।
  • पिताजी गाड़ी धोने में बाल्टी का उपयोग करते हैं, पाइप नहीं।
  • मैं पौधों को नहाने के बाद बचे पानी से सींचता हूँ।

(ख) क्या पानी का उपयोग अनावश्यक रूप से किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कहाँ और कैसे?
उत्तर: हाँ, हमारे घर में पानी नियमित रूप से आता है। नगर निगम की ओर से सुबह के समय नल में पानी आता है, लेकिन कभी-कभी गर्मियों में पानी की कमी हो जाती है।

(ग) आपके घर में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?
जन-सुविधा के रूप में जल
नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए-

दैनिक कार्य में पानीइन चित्रों के आधार पर जल आपूर्ति की स्थिति के बारे में अपने साथियों से चर्चा कीजिए और उसका विवरण लिखिए।
उत्तर: जल आपूर्ति की स्थिति का विवरण
इन चित्रों के आधार पर जल आपूर्ति बहुत कठिन और सीमित दिखाई दे रही है।

  • लोग पानी भरने के लिए टैंकर, तालाब या कुएँ पर जाते हैं।
  • पानी बर्तन, बाल्टी, घड़े, टंकी आदि में जमा किया जाता है।
  • कुछ जगहों पर जल की भारी कमी को दूर करने के लिए रेल द्वारा "जल ट्रेन" से पानी पहुँचाया जाता है।
  • लोगों को बहुत दूर तक पानी लाने जाना पड़ता है।
  • स्थिति दिखाती है कि हर जगह आवश्यक जल सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और पानी छोटे-छोटे बर्तनों में ही लाना पड़ता है।

बिन पानी सब सून

(क) पाठ में मूल स्तर से कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं, जैसे- तालाबों में कचरा फेंककर भरना आदि। मूल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं? पता लगाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (इशारे लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षक और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं)
उत्तर: भूजल स्तर कम होने के अन्य कारण:  
  • जंगलों की कटाई, जिससे वर्षा कम होती है।  
  • अधिक खेती के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग।  
  • फैक्ट्रियों द्वारा पानी का दुरुपयोग।  
  • सीमेंट की सड़कों और इमारतों से पानी का रिसाव कम होना।

(ख) भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: कठिनाइयाँ:  

  • नलों में पानी की कमी, जिससे लोग रात को या सुबह जल्दी पानी भरते हैं।  
  • खेती के लिए पानी न मिलना, जिससे फसलें बर्बाद होती हैं।  
  • गर्मियों में सूखा और पानी के लिए लंबी लाइनें।  
  • पीने के पानी की कमी, जिससे स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं।

(ग) आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, पता लगाकर लिखिए।  
उत्तर: प्रशासन के प्रयास:  

  • वर्षा जल संग्रहण के लिए स्कूलों और सरकारी भवनों में टैंक बनाए जा रहे हैं।  
  • तालाबों की सफाई और गहरा करने की योजनाएँ।  
  • पेड़ लगाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।  
  • भूजल उपयोग पर नियम बनाए गए हैं, जैसे अधिक गहरे बोरवेल पर रोक।

यह भी जानें

वर्षा-जल संग्रहण
वर्षा के जल को एकत्र करना और उसका भंडारण करके बाद में प्रयोग करना जल की उपलब्धता में वृद्धि करने का एक उपाय है। इस उपाय द्वारा वर्षा का जल एकत्र करने को 'वर्षा जल संग्रहण' कहते हैं। वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य यही है कि "जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।" वर्षा जल संग्रहण की एक तकनीक इस प्रकार है-
छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण
इस प्रणाली में भवनों की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जाता है। इस जल में छत पर उपस्थित मिट्टी के कण मिल जाते हैं। अतः इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।
अपने घर या विद्यालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव में पता लगाइए कि वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं? यदि हाँ, तो कौन-सी विधि है? उसके विषय में लिखिए। यदि नहीं, तो अपने शिक्षक या परिजनों की सहायता से इस विषय में समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखिए।

उत्तर:  वर्षा जल संग्रहण पर उत्तर / पत्र का उदाहरण
मेरे गाँव/मुहल्ले/विद्यालय में वर्षा जल संग्रहण की एक विधि अपनाई जा रही है। हमारे यहाँ छतों पर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है। छत पर गिरे हुए पानी को पाइप के माध्यम से एक टंकी में एकत्र किया जाता है। इस पानी को उपयोग करने से पहले साफ़ किया जाता है ताकि इसमें छत की मिट्टी और गंदगी न रहे। इससे जल की बचत होती है और सूखे के समय पानी की उपलब्धता बनी रहती है।
यदि आपके गाँव/मुहल्ले में ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो आप इस प्रकार का पत्र भी लिख सकते हैं:
समाचार पत्र के संपादक को पत्र (वर्षा जल संग्रहण के लिए)
प्रति,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम]
[स्थान]
विषय: वर्षा जल संग्रहण की आवश्यकता

महोदय,
वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हमारे गाँव/मुहल्ले/विद्यालय में वर्षा जल संग्रहण की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि हम वर्षा के जल को इकट्ठा करके सही तरीके से संग्रहीत करें, तो जल की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है और सूखे के समय इसका लाभ उठाया जा सकता है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए समाचार पत्र में लेख प्रकाशित करें ताकि अधिक से अधिक लोग वर्षा जल संग्रहण के महत्व को समझें और इसे अपनाएँ।

धन्यवाद,
आपका विश्वासी,
[आपका नाम]
[स्थान]
[दिनांक]

आज की पहेली

जल के प्राकृतिक स्रोत हैं- वर्षा, नदी, झील और तालाब। दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढिए और लिखिए।
आज की पहेली

उत्तर:  
आज की पहेली

  • वर्षा: बारिश, मेह
  • नदी: प्रवाहिनी, तटिनी, तरंगिणी
  • झील /तालाब: जलाशय, सर, ताल, सरोवर
  • जल: नीर, अंबु, वारि, सलिल

खोजबीन के लिए

पानी से संबंधित गीत या कविताओं का संकलन कीजिए और इनमें से कुछ को अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। इसके लिए आप अपने परिजनों एवं शिक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर
1. कविता: "पानी अमूल्य धन है"
लेखक: अज्ञात
पानी-पानी हर कोई पुकारे,
बिन पानी सब सूना है प्यारे।
बूँद-बूँद का मोल समझो,
पानी को यूँ मत बहाओ।
खेतों में जब न पानी होगा,
भूखा पेट फिर कैसे रोज़ा।
नहाना, धोना सब ठीक है,
पर जल बचाना और भी ठीक है।

2. कविता: "बचाओ-बचाओ पानी"
लेखक: कक्षा उपयोग के लिए सरल कविता
बूँद-बूँद है अनमोल,
इसे ना करो यूँ गोलमाल।
नल खुले ना छोड़ो कभी,
बरबादी की ना हो वजह अभी।
जल ही जीवन का है नाम,
इसे बचाना है काम तमाम।

3. कविता: "जल बचाओ, जीवन बचाओ"
लेखक: अज्ञात
जीवन है पानी से प्यारा,
इसका ना हो जाए किनारा।
पानी बचाकर रखो सदा,
ताकि रहे ये सबका भला।

साझी समझ

प्रश्न: 'पानी रे पानी' और 'पाल के किनारे रखा इतिहास' में आपको कौन-कौन सी बातें समान लगीं? उनके विषय में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।  
उत्तर: समान बातें:  
  1. पानी की महत्ता: दोनों लेख पानी को जीवन का आधार बताते हैं। 'पानी रे पानी' में पानी को रुपये से अधिक कीमती कहा गया, और 'पाल के किनारे...' में तालाब बनाना अच्छा काम बताया गया।  
  2. तालाबों का महत्व: दोनों में तालाबों को धरती की गुल्लक के रूप में देखा गया, जो पानी जमा करते हैं।  
  3. समाज के लिए योगदान: 'पानी रे पानी' में जल संरक्षण और 'पाल के किनारे...' में तालाब बनाना समाज के लिए लाभकारी बताया गया।  
  4. प्रकृति और मानव का संबंध: दोनों लेख प्रकृति (पानी, तालाब) और मानव जीवन के बीच गहरा संबंध दर्शाते हैं।

चर्चा: दोनों लेख हमें पानी और तालाबों की रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं, ताकि भविष्य में पानी की कमी न हो। 

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FAQs on NCERT Solutions: पानी रे पानी

1. What is the main message of the poem "पानी रे पानी" in Class 7 Hindi?
Ans. The poem "पानी रे पानी" emphasises the critical importance of water for all living beings and highlights humanity's wasteful relationship with this precious natural resource. Through vivid imagery and emotional appeal, the poet stresses that water sustains life, agriculture, and ecosystems, urging readers to recognise water conservation as a moral responsibility in their daily lives.
2. Why does the poet use repetition of "पानी रे पानी" throughout the poem?
Ans. The repeated phrase "पानी रे पानी" serves as a powerful rhetorical device that creates rhythm and emphasis, drawing urgent attention to water's irreplaceable value. This repetition reinforces the poem's central theme of water scarcity and makes the message memorable for readers. The technique also conveys the poet's emotional plea, making the composition more impactful and easier to recall during NCERT examinations.
3. What are the main themes in पानी रे पानी that I should focus on for my exam?
Ans. Key themes include water's role as a life-sustaining resource, environmental conservation, human responsibility towards nature, and the consequences of water wastage. The poem also explores the connection between water availability and human survival, agricultural dependence on water resources, and social inequality in water access. Understanding these thematic elements helps students answer both short and long-answer questions effectively on NCERT solution papers.
4. How should I prepare answers for पानी रे पानी comprehension questions?
Ans. Focus on textual evidence and support your points with specific lines from the poem. Identify the poet's tone, literary devices like metaphor and personification, and the underlying message about water conservation. Study character emotions and symbolic meanings carefully. Using mind maps and flashcards from EduRev can help organise key concepts, making it easier to structure coherent answers that demonstrate deep understanding during CBSE evaluations.
5. What poetic devices does the poet use in पानी रे पानी and why?
Ans. The poem employs repetition, personification, and vivid imagery to amplify its environmental message about water crisis. Personifying water as a living entity creates emotional connection with readers, while descriptive language illustrates water's essential role across seasons and landscapes. These poetic techniques make abstract concepts tangible and persuasive, helping Class 7 students grasp the urgency of water preservation and craft sophisticated literary analysis answers.
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