उत्तर: उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
उसने गृहकार्य नहीं किया था।
विश्लेषण: मुख्य कारण था - उसने गृहकार्य नहीं किया था। इसलिए वह स्कूल जाने से बचना चाहता था और इसलिए उसने खुद को बीमार बताने का बहाना बनाया।
2. कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि-
उत्तर: घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
विश्लेषण: बच्चे ने जो अनुभव किया, वह बहुत कष्टप्रद था - उसे भूख और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। इस अनुभव से उसे समझ आया कि स्कूल न जाने का बहाना बनाना फायदेमंद नहीं है और इसे दोहराना उचित नहीं होगा।
3. "लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी" इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
विश्लेषण: बच्चा शुरू में आराम करने की नीयत से लेटा था, पर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और ऊबने के कारण उसकी पीठ में असुविधा होने लगी। यह संकेत देता है कि उसकी पीठ का दर्द बीमारी के कारण नहीं, बल्कि लगातार लेटे रहने और उकताहट के कारण था।
4. "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि-
उत्तर: बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
विश्लेषण: बच्चे ने सुधाकर काका को अस्पताल में आराम करते और स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाते देखा। उसे लगा कि बीमारी होने पर खाने-पीने और आराम का सुख मिलता है, इसलिए उसने यह विचार निकाला कि बीमार होने में भी एक तरह की 'ठाठ' होती है - आराम और अच्छा खाना।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग- अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर: हमारे समूह में जब इन प्रश्नों पर चर्चा हुई तो कुछ साथियों के उत्तर मुझसे अलग थे। मैंने उन्हें समझाया कि मैंने ये उत्तर क्यों चुने:
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।)

उत्तर: नीचे दिए गए शब्दों को उनके सही अर्थों से मिलाया गया है:

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समझ में साझा कीजिए और लिखिए-
(क) "मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।"
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि बच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था क्योंकि उसने अपना गृहकार्य नहीं किया था और उसे सजा का डर था। इसलिए उसने सजा से बचने के लिए बीमार पड़ने का नाटक करने का फैसला किया।
मेरे विचार: यह पंक्ति बच्चों की मासूम और शरारती सोच को दर्शाती है। बच्चा जल्दी में बिना सभी परिणाम सोचें निर्णय ले लेता है, जो बाद में उसे परेशानी में डाल सकता है।
(ख) "देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।"
उत्तर: इन पंक्तियों से बच्चे के मन का गुस्सा और निराशा पता चलती है। वह बीमारी का बहाना करके यह उम्मीद कर रहा था कि उसे सुधाकर काका की तरह स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाने को मिलेगी। लेकिन उसे खाने को कुछ नहीं मिला, बल्कि भूखा रहना पड़ा। उसे लग रहा था कि घर में कोई उसकी परवाह नहीं कर रहा है। वह मन ही मन सोच रहा था कि उसने कोई बहुत बड़ी चीज नहीं माँगी थी, फिर भी उसे भूखा रखा जा रहा है। उसे नाना जी की बात ("भूखे रहने से विकार निकल जाएँगे" पर भी गुस्सा आ रहा था।
मेरे विचार: यहाँ लेखक ने बीमारी के बहाने पर मिलने वाली उपेक्षा और भूख को प्रभावी ढंग से दिखाया है। बच्चा उम्मीद करता है कि उसे विशेष व्यवहार मिलेगा, किन्तु उसे उपेक्षा का अनुभव होता है, जिससे वह दुखी और नाराज होता है।
(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
उत्तर: हाँ, बच्चे का निर्णय सही था। उसने अनुभव किया कि छुट्टी मारकर घर पर लेटे रहने में ऊब, पीठ-दर्द और भूख होती है, जबकि स्कूल में दोस्त, खेल और सीखने का आनंद मिलता है। इसलिए थोड़ी सजा सहकर स्कूल जाना बेहतर विकल्प था।
(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेत - मन में उत्पन्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते हैं, उदाहरण के लिए - क्रोध, दुख, भय, करुणा, प्रेम आदि)

उत्तर: जब बच्चे ने बहाना बनाया था तो उसके मन में आरम्भ में हल्की खुशी और शरारत की भावना थी, पर धीरे-धीरे उसमें ऊब, निराशा, जलन, गुस्सा, भूख और पछतावे के भाव आए। उसे अकेलापन और दोस्तों की याद आई, और अंत में उसने अपनी गलती समझी।
(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
उत्तर:
समानताएँ:
अंतर:
निष्कर्ष: बच्चे की कल्पना और असलियत में अंतर है - बीमारी सुखद नहीं बल्कि कष्टप्रद हो सकती है।
(ङ) नानी जी और नाना जी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर: हाँ, मेरे विचार से नाना जी और नानी जी ने जो किया, वह उनकी समझ के हिसाब से सही था। उन्होंने सोचा होगा कि पेट खराब होने या बुखार में हल्का भोजन ही ठीक रहता है। उन्होंने दवा दी और आराम करने को कहा ताकि बच्चे की तबीयत में सुधार हो। फिर भी, बच्चे को हल्का और सुपाच्य खाना देना भी मददगार होता, ताकि उसे कमजोरी न लगे।
(ख) कहानी में बच्चे की नानी जी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?
(संकेत - इस सवाल में आपको नानी जी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
उत्तर: अगर मैं नानी जी की जगह होती और समझ जाती कि बच्चा नाटक कर रहा है, तो मैं उसे सच उगलवाने के लिए एक मनोरंजक योजना बनाती। मैं रसोई में जाकर बच्चे के मनपसंद भोजन, जैसे गरमागरम कचौड़ी या हलवा बनाने की बात जोर-जोर से करती। फिर मैं उसके पास जाकर कहती, "अरे वाह! आज तो मैंने तुम्हारी पसंदीदा चीज बनाई है, पर तुम तो बीमार हो। बीमार लोग यह सब नहीं खा सकते। तुम्हारे लिए तो बस यह फीकी खिचड़ी है।" ऐसा सुनकर और खाने की खुशबू से उसका मन ललचा जाता और वह खुद ही मान लेता कि वह बीमार नहीं है और उसे भी वह खाना खाना है।
(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर: अगर मैं बच्चे की जगह होता और घर में अकेला होता तो ऊबने से बचने के लिए किताबें पढ़ता, अपना मनपसंद संगीत सुनता, ड्राइंग या पेंटिंग करता, या हल्के-फुल्के खेल खेलता। साथ ही, खिड़की से बाहर के नज़ारे देखता और कुछ नया सीखने की कोशिश करता। इससे समय अच्छा बीतता और बोरियत भी नहीं होती।
(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा बीतता? अगला दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसे क्या-क्या अच्छा लगा होगा?
उत्तर:
अगर बच्चा स्कूल जाता:
अगले दिन स्कूल में:
(ङ) कहानी में नाना जी और नानी जी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानी जी या नाना जी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर: अगर मैं उनकी जगह होता, तो पहले बच्चे की सच्ची तबीयत जानने की कोशिश करता, फिर प्यार से उसे समझाता और दवा देता। साथ ही हल्का सुपाच्य खाना भी देता ताकि उसे कमजोर न लगे। जरूरत पड़ी तो डॉक्टर के पास दिखाता और बच्चे को यह समझाता कि झूठ बोलकर बीमारी का बहाना बनाना सही नहीं है।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: इस पाठ की अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखें I

उत्तर:

कहानी को एक बार पुनः पढ़कर पता लगाइए-
(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:
(ख) नानी जी-नाना जी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:

उत्तर:

(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
उत्तर: वाक्य: "क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।" (यह वाक्य बच्चे के पछतावे को दर्शाता है।)
(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
उत्तर: वाक्य: "गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!" (यह वाक्य खाने-पीने की उसकी पसंद को स्पष्ट करता है।)
(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
उत्तर: वाक्य: "कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।" (यह वाक्य स्कूल की मस्ती और दोस्तों के साथ समय बिताने की याद दिलाता है।)
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम 'नहीं होना बीमार' है। अपने समूह में चर्चा करके लिखें कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताएँ।
उत्तर: हाँ, कहानी का नाम "नहीं होना बीमार" उपयुक्त है।
कारण:
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए |
उत्तर:
कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं। आपको इन्हें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी से छात्र/छात्राएँ कक्षा में सामने आएँगे और एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे-
1. "बुखार आ गया।" मैंने कराहते हुए कहा।
उत्तर: अभिनय: माथे पर हाथ रखकर, चेहरा उदास बनाकर, धीमी और दर्द भरी आवाज में बोलना।
2. "आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।" मैंने कहा।
उत्तर: अभिनय: थोड़ा गुस्से और जलन के साथ, उंगली दिखाते हुए, जोर देकर बोलना।
3. "मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।"
उत्तर: अभिनय: रजाई में लेटे हुए, कमजोर और शिकायती आवाज में, चेहरा दर्द से भरा हुआ दिखाना।
4. नाना जी आए। बोले, "अब कैसा है सिरदर्द?"
उत्तर: अभिनय: गंभीर और चिंतित चेहरा, धीमी और देखभाल करने वाली आवाज में बोलना।
5. फिर नाना जी बोले, "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"
उत्तर: अभिनय: सख्त लेकिन प्यार भरी आवाज, बच्चे की ओर देखते हुए, गंभीर चेहरा बनाकर बोलना।
(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: 1. "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा... ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो!"
(मुस्कान क्योंकि बच्चे की मासूम सोच मज़ेदार है।)
2. "पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।"
(मुस्कान क्योंकि बच्चे का अतिशयोक्ति भरा अंदाज़ हास्यप्रद है।)
3. "मुनू एक बार भी मुझे देखने नहीं आया। आया भी होगा तो दबे पाँव आया होगा और मुझे सोता जान लौट गया होगा।"
(मुस्कान क्योंकि बच्चे की शिकायतों में मासूमियत है।)
(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: 1. "गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर।"
(मुँह में पानी क्योंकि इन व्यंजनों का वर्णन ललचाने वाला है।)
2. "अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी।"
(मुँह में पानी क्योंकि दाल के सुगंधित वर्णन से भूख बढ़ती है।)
3. "तली हुई हरी मिर्च।"
(मुँह में पानी क्योंकि तली मिर्च का जिक्र चटपटे स्वाद की याद दिलाता है।)
मैं बिना आवाज़ किए दरवाज़े तक गया और ऐसे झाँककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।
इस बात को कहानी में इस प्रकार विशेष रूप से लिखा गया है-
"दबे पाँव दरवाज़े तक गया और चुपके से झाँककर देखा।"
इस कहानी में अनेक स्थानों पर वाक्यों को विशेष ढंग से लिखा गया है। साधारण बातों को कुछ अलग तरह से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ सकती है।
नीचे दिए गए वाक्यों को कहानी में कैसे लिखा गया है:
उत्तर:
'देखें!' नाना जी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज़ देखने लगे।
इस बीच नानी जी भी आ गईं। 'क्या हुआ?', नानी जी ने पूछा।
पिछले प्रश्न पर दिए गए वाक्यों को ध्यान से देखिए। इन वाक्यों में आपको कुछ शब्दों से पहले या बाद में कुछ चिह्न दिखाई दे रहे हैं। इन्हें विराम चिह्न कहते हैं।
अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्नों को कहानी में ढूँढिए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए-

आवश्यकता हो तो इस प्रश्न का उत्तर पता करने के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: विराम चिह्न का प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:

"मुझे बड़ी तेज़ इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ।"
आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाईए।
उत्तर: कल्पना के आधार पर उस गली का चित्र:

(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन करें।
उत्तर: मेरी कक्षा बहुत सुंदर और जीवंत है। दीवारों पर रंग-बिरंगे चार्ट और बच्चों के बनाए चित्र लगे हैं। सामने बड़ा-सा ब्लैकबोर्ड है, जिस पर शिक्षक रंगीन चॉक से लिखते हैं। खिड़कियों से हल्की धूप और ताज़ी हवा आती है, जिससे माहौल तरोताज़ा रहता है। बेंच-डेस्क साफ-सुथरे हैं, और हर डेस्क पर किताबें और कॉपियाँ व्यवस्थित रहती हैं। कक्षा में बच्चों की हँसी और बातचीत की गुनगुन रहती है, लेकिन जब शिक्षक पढ़ाते हैं, तो सब शांत होकर ध्यान देते हैं। बाहर खिड़की से हरे पेड़ और खेल का मैदान दिखता है, जो मन को खुश कर देता है।
(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
उत्तर: हाँ, एक बार मैं घर पर अकेला था क्योंकि मम्मी-पापा को किसी काम से बाहर जाना पड़ा था।
(ग) कहानी में आम खाने वाले मुनु को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?
उत्तर: हाँ, एक बार मेरे दोस्त को स्कूल में ड्राइंग प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला, और मुझे उससे थोड़ी ईर्ष्या हुई।
(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर: बहानों की सूची
(ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर: बहाने अक्सर तब बनाए जाते हैं जब हम कोई काम नहीं करना चाहते, जैसे स्कूल न जाना, होमवर्क न करना या ज़िम्मेदारी से बचना। यह आलस्य, डर या मन न लगने के कारण हो सकता है।
बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम ये कर सकते हैं:

उत्तर:

उत्तर: हमारे घर में जब कोई बीमार होता है तो उसे हल्का और सुपाच्य भोजन दिया जाता है। सामान्यतः दलिया, खिचड़ी, मूँग की दाल, दही-चावल या सूजी का हलवा खिलाया जाता है। कभी-कभी नारियल पानी, फल या सूप भी दिए जाते हैं ताकि रोगी को ताकत मिले और पाचन पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
(ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
उत्तर: मुझे भी तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन खाने का बहुत मन करता है। खासकर घर पर बनी पूड़ी-सब्ज़ी, कचौड़ी, पकौड़े, जलेबी और चाट जैसी चीज़ें मुझे बहुत पसंद हैं। इसके अलावा पिज़्ज़ा, आइसक्रीम और आलू-पराठे भी मेरे प्रिय व्यंजन हैं, जिन्हें देखकर मन ललचा उठता है।
(ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है
उत्तर: हमारे घर में कई व्यंजन केवल विशेष अवसरों और त्योहारों पर ही बनाए जाते हैं। जैसे दीपावली पर गुजिया और लड्डू, होली पर मालपुआ और दही-बड़े, रक्षाबंधन पर खीर-पूरी, जन्माष्टमी पर पंचामृत और माखन-मिश्री, तथा दशहरे पर पूड़ी-चना बनते हैं। इसी प्रकार किसी शादी या बड़ी पूजा पर कचौड़ी, पुलाव और मिठाइयाँ विशेष रूप से तैयार की जाती हैं। ये व्यंजन त्यौहारों की रौनक और स्वाद दोनों को बढ़ा देते हैं।
(घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?
उत्तर: मेरे विद्यालय में प्रायः समोसे, कचौड़ी, ब्रेड-पकौड़े, इडली-सांभर, आलू-चाट, बिस्कुट और ठंडी पेय सामग्री मिलती है। कभी-कभी हमें टिफिन में घर से पराठा, सब्ज़ी, आचार और मिठाई भी मिलती है। इनमें से मुझे सबसे अधिक आलू-चाट और इडली-सांभर पसंद है, क्योंकि यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पेट भी भर देता है।
(ङ) इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?
उत्तर: मेरे बचपन की एक विशेष याद गर्मियों की है, जब माँ ठंडी आमरस बनाती थीं और हम सब भाई-बहन मिलकर पराठों के साथ खाते थे। कभी-कभी दादी गुड़ की रोटी या सत्तू बनाकर देती थीं। इन व्यंजनों का स्वाद और परिवार के साथ मिलकर खाने का आनंद आज भी मन को बहुत सुख देता है।
(च) कहानी में बच्चा भोजन की सुगंध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगंध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?
उत्तर: हाँ, मेरे साथ भी ऐसा कई बार हुआ है जब खाने की खुशबू ने मुझे रसोई की ओर खींच लिया है। एक बार माँ ने मेरे पसंदीदा आलू के पराठे बनाए थे। जैसे ही घी की खुशबू पूरे घर में फैली, मैं तुरंत रसोई में पहुँच गया कि पराठे कब मिलेंगे।
मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है:


उत्तर:


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