(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को 'सीधे लड़के' किस संदर्भ में कहा?
उत्तर: अतिथियों की सेवा करने के कारण, किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण, आज्ञाकारिता के भाव के कारण
आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को 'सीधे लड़के' उनकी आज्ञाकारिता के भाव के कारण कहा था। अतिथि जब भी कुछ माँगते, जैसे ठंडा पानी या पंखा ठीक करने को, बच्चे तुरंत बिना किसी सवाल के पालन करते थे। उनकी आज्ञाकारिता और शिष्ट व्यवहार देखकर ही आगंतुकों ने उन्हें 'सीधे लड़के' कहा।
2. "एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी..." विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
उत्तर: उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं, पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
विश्वनाथ पड़ोसियों को निर्दयी कहता है क्योंकि वे उनकी परेशानी पर खुश होते हैं और छत पर बच्चों को सोने की जगह देने जैसे छोटे सहयोग से भी मना करते हैं।
3. "ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।" रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
उत्तर: मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण, रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण, अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
रेवती मेहमानों के आने की कामना नहीं करती क्योंकि घर छोटा है, व्यवस्था की कमी है, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, और मेहमानों के कारण काम बढ़ जाता है।
4. "हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।" रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
उत्तर: मेहमानों के आने की
रेवती दरवाजे की खटखट सुनकर चिंतित होती है और प्रार्थना करती है कि कोई मेहमान न आए, क्योंकि मेहमानों की वजह से पहले से परेशान परिवार को और मुश्किल हो सकती है।
5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
उत्तर: संवाद
संवाद एक रचना को नाटक का रूप देते हैं क्योंकि यह पात्रों के बीच बातचीत से कहानी को जीवंत बनाता है।
(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हमने अपने दोस्तों के साथ चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर: अर्थ: विश्वनाथ कहता है कि वह बहुत सारा पानी पी रहा है, लेकिन गरमी इतनी ज्यादा है कि प्यास नहीं बुझ रही। यह पंक्ति शहर की भीषण गरमी और पानी की कमी को दर्शाती है।
उत्तर: अर्थ: रेवती कहती है कि पूरा शहर इतना गर्म है कि लगता है आग की बारिश हो रही है। यह गरमी की तीव्रता और असहजता को दिखाता है।
उत्तर: अर्थ: रेवती अपने दुखी जीवन की तुलना चने भूनने से करती है, जैसे वे गरमी और मुश्किलों में जल रहे हैं। यह उनकी तकलीफ और मजबूरी को बताता है।
उत्तर: अर्थ: नन्हेमल ठंडा पानी पीने के बाद कहता है कि गरमी में पानी पीने से राहत मिलती है। यह पंक्ति पानी की अहमियत और गरमी की परेशानी को दर्शाती है।
कक्षा में साझा करने के लिए: इन पंक्तियों से पता चलता है कि एकांकी में गरमी और गरीबी की वजह से परिवार कितना परेशान है। आप अपने सहपाठियों से पूछ सकते हैं कि क्या वे इन पंक्तियों से परिवार की मजबूरी और गरमी की तीव्रता को समझ पाए।
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए-
उत्तर:

सोच-विचार के लिए
(क) "शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।" नन्हेमल का 'ऐसे ही मकान' से क्या आशय है?
उत्तर: नन्हेमल का मतलब है कि शहरों में छोटे, तंग और कम सुविधाओं वाले मकान आम हैं। विश्वनाथ का मकान छोटा है, जिसमें जगह की कमी, गरमी और हवा न होने की समस्या है। नन्हेमल यह कहकर शहरों की सामान्य मकान स्थिति को दर्शाता है।
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर: विश्वनाथ उन्हें इसलिए घर में आने देता है क्योंकि:
(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर:
ये संवाद दिखाते हैं कि नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ को ठीक से नहीं जानते और गलत जगह आ गए हैं।
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर:
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
उत्तर: एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी रेवती को अतिथियों के लिए भोजन बनाने को कहता है और उसकी अस्वस्थता को देखते हुए बाजार से खाना मंगवाने का सुझाव भी देता है, लेकिन उसने खुद खाना बनाने के बारे में नहीं सोचा। इसके कई कारण हो सकते हैं। उस समय के भारतीय समाज में रसोई का काम ज्यादातर महिलाओं का माना जाता था, इसलिए विश्वनाथ ने शायद इस रिवाज के कारण खुद खाना बनाने की नहीं सोची। साथ ही, वह खुद गरमी और थकान से परेशान था और उसे रसोई का काम करने का अनुभव या आदत नहीं रही होगी। रेवती की तबीयत खराब होने के बावजूद, विश्वनाथ ने बाजार से खाना मंगवाने का विकल्प सुझाया, जो उसकी चिंता को दिखाता है, लेकिन सामाजिक मान्यताओं के कारण उसने खुद खाना बनाने की जिम्मेदारी नहीं ली।
(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर: एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के लिए पानी लाता है और अपनी छोटी बहन का ध्यान रखता है। उसे ये जिम्मेदारियाँ शायद इसलिए दी गईं क्योंकि वह परिवार का सबसे बड़ा बेटा है और समझदार माना जाता है। प्रमोद का आज्ञाकारी स्वभाव, जैसे मेहमानों के लिए पानी लाना और पंखा चलाना, दिखाता है कि वह जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है। विश्वनाथ और रेवती गरमी, बीमारी और मेहमानों की खातिरदारी से परेशान थे, इसलिए उन्होंने प्रमोद को ये काम सौंपे। साथ ही, यह भी संभव है कि परिवार में बच्चों को छोटी-मोटी जिम्मेदारियाँ सिखाने की परंपरा रही हो, ताकि वे भविष्य में परिवार की मदद कर सकें।
(ग) "कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ" भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
उत्तर: रेवती अपने भाई के लिए कहती है, "कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ," भले ही वह भीषण गरमी और सिरदर्द से परेशान थी। वह भोजन बनाने को तैयार हुई क्योंकि वह अपने भाई से बहुत प्यार करती थी और उसका आदर करना अपना कर्तव्य समझती थी। भारतीय संस्कृति में मेहमानों और रिश्तेदारों की खातिरदारी को बहुत महत्व दिया जाता है, और रेवती नहीं चाहती थी कि उसका भाई भूखा सोए। उसने अपनी तकलीफ को नजरअंदाज कर अपने भाई की भूख और आराम को प्राथमिकता दी। यह भी संभव है कि वह अपने परिवार की इज्जत बनाए रखना चाहती थी, ताकि भाई को लगे कि उसका स्वागत अच्छे से हुआ।
(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए-

उत्तर: 

इस एकांकी के आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि-
एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच-निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये 'नए मेहमान' एकांकी का एक अंश है।
एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर: "नए मेहमान" एकांकी की विशेषताएँ:
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने 'हाँ' लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने 'नहीं' लिखिए।
उत्तर: 
(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे ! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में 'नए मेहमान' एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए इस एकांकी में आप क्या-क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर: यदि मुझे अपने विद्यालय में "नए मेहमान" एकांकी का मंचन करना हो, तो मैं निम्नलिखित तैयारियाँ करूँगा:
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा।
सुझाव-
उत्तर:
1. पात्रों का चयन
अपने समूह में आप ये पात्र बाँट सकते हैं:
अगर आपके पास लोग कम हैं, तो एक व्यक्ति दो छोटे पात्रों का रोल निभा सकता है।
2. मंच-सज्जा (Stage Setup)
3. प्रस्तुति की समय-योजना (10-12 मिनट)
4. अभिनय के सुझाव
5. वैकल्पिक बदलाव (अगर समय कम है)
"सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।"
"चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।"
"यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।"
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: एकांकी में कुछ शब्द और वाक्य गरमी की तीव्रता को विशेष प्रभाव के साथ दर्शाते हैं। नीचे ऐसे प्रयोगों की सूची दी गई है, जो मेरी लेखन पुस्तिका में लिखे जा सकते हैं:
★ मुहावरे
"आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।"
"लाखों के आदमी खाक में मिल गए।"
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश 'रात-दिन एक करना' तथा 'खाक में मिलना' मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: एकांकी में कुछ और मुहावरे भी हैं, जो विशेष प्रभाव पैदा करते हैं। नीचे उनकी पहचान, अर्थ और मेरे अपने वाक्यों में प्रयोग दिए गए हैं:
★ बात पर बल देना
"वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा।"
उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द 'ही' हटाकर पढ़िए-
"वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा"
(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में 'ही' के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और 'ही' हटा देने से क्या कमी आई?
उत्तर: वाक्य: "वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा।"
(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर 'ही' का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-

उपर्युक्त वाक्य में 'तो' का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-
"तुम तो नहाने जाओ।"
"तुम नहाने जाओ तो।"
'ही' और 'तो' के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।
उत्तर:
'तो' का प्रयोग और अर्थ में परिवर्तन:
'ही' और 'तो' के अन्य प्रयोग:
(क) "रेवती - ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।
विश्वनाथ - क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।"
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, मेरे सामने भी एक बार ऐसी दुविधा आई थी। एक दिन मेरे घर के बाहर एक अनजान व्यक्ति आया और बोला कि वह मेरे पापा के दोस्त का रिश्तेदार है। उसने कुछ मदद माँगी, लेकिन उसका व्यवहार और बातें ठीक नहीं लग रही थीं। मैं दुविधा में था कि उसकी मदद करूँ या पहले पापा से पूछूँ। मैंने उससे कुछ सवाल पूछे, लेकिन वह साफ जवाब नहीं दे रहा था, जैसे नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ को ठीक जवाब नहीं देते। आखिरकार, मैंने पापा से बात की और पता चला कि वह कोई जान-पहचान वाला नहीं था। इस अनुभव से मैंने सीखा कि अनजान लोगों पर भरोसा करने से पहले पूरी जानकारी लेनी चाहिए।
(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर: नन्हेमल और बाबूलाल एक-दूसरे के साथ हँसी-मज़ाक और तालमेल दिखाते हैं, जो उनकी दोस्ती को दर्शाता है। मेरे अच्छे मित्र हैं - रोहन, प्रिया, और अनुज।
वे मुझे प्रिय हैं क्योंकि:
ये दोस्त मेरे लिए खास हैं क्योंकि वे मेरे साथ खुशी और दुख में साथ रहते हैं।
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर: किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले मैं ये तैयारियाँ करता हूँ:
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर: एकांकी में पड़ोसी विश्वनाथ की मदद नहीं करते, बल्कि छत पर गंदगी की शिकायत करते हैं।
मैं अपने पड़ोसियों का इस तरह सहयोग करता हूँ:
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर: नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य नहीं है क्योंकि वे बिना साफ बताए आते हैं, बहुत माँग करते हैं (जैसे खाना, पानी, नहाने की व्यवस्था), और गलतफहमी पैदा करते हैं।
मेरे अनुसार, सामान्य अतिथियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए:
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर: यदि मैं विश्वनाथ की जगह होता, तो मैं नन्हेमल और बाबूलाल को घर में बुलाने से पहले निम्नलिखित सावधानियाँ बरतता:
ऐसा करने से मैं अनजान लोगों को घर में बुलाने की गलती से बचता और अपनी व परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करता।
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर: माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में अगर कोई अपरिचित व्यक्ति आए, तो मैं ये सावधानियाँ बरतूँगा:
ये सावधानियाँ मुझे और मेरे घर की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (जैसे- एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए...)
उत्तर: एक दिन की बात है, जब गर्मी का मौसम था और रात के आठ बज रहे थे। मेरे घर में मैं (विश्वनाथ), मेरी पत्नी रेवती, और मेरे बच्चे प्रमोद और किरण थे। घर छोटा-सा था, और गर्मी इतनी थी कि लगता था दीवारें तप रही हैं। रेवती का सिरदर्द हो रहा था, और मैं पंखा झल रहा था। तभी दरवाजे पर खटखट हुई। दो अनजान लोग, नन्हेमल और बाबूलाल, मेरे घर आ गए। वे बोले कि वे किसी संपतराम के दोस्त हैं, लेकिन मुझे वे पहचान में नहीं आए। फिर भी, मैंने मेहमाननवाजी के लिए उन्हें अंदर बुला लिया।
वे दोनों बहुत बातूनी थे और गर्मी से परेशान होकर पानी माँगने लगे। प्रमोद ने उनके लिए पानी लाया, और किरण को सुलाने की कोशिश की। रेवती को चिंता थी कि ये लोग कौन हैं, लेकिन मैंने सोचा शायद कोई परिचित ने भेजा हो। नन्हेमल और बाबूलाल ने खाना और नहाने की बात शुरू की, जिससे रेवती और परेशान हो गई। पड़ोसियों ने भी शिकायत की कि मेरे मेहमान उनकी छत पर गंदा पानी फैलाते हैं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
आखिर में, एक और मेहमान आया, जो रेवती का भाई निकला। रेवती ने अपनी तकलीफ भूलकर उसके लिए खाना बनाने की बात की। इस तरह, उस रात मेरे छोटे से घर में अनजान और अपनों, दोनों तरह के मेहमानों का आना-जाना लगा रहा। यह घटना मुझे मेहमाननवाजी और सावधानी का महत्व सिखा गई।
"क्या मेरा तार नहीं मिला?"
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। 'तार' संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।

(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर: एकांकी में रेवती के भाई का कहना, "क्या मेरा तार नहीं मिला?" दर्शाता है कि टेलीग्राफ (तार) संदेश भेजने का एक सामान्य साधन था। भारत में टेलीग्राफ का उपयोग 20वीं सदी के मध्य तक, खासकर 1940-1980 के दशक में, बहुत आम था। 2013 में भारत में टेलीग्राफ सेवा बंद हो गई। चूंकि एकांकी में टेलीग्राफ का जिक्र है और यह मध्यवर्गीय परिवार की जिंदगी को दर्शाता है, जिसमें आधुनिक तकनीक (जैसे मोबाइल फोन) का जिक्र नहीं है, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह एकांकी लगभग 40 से 70 वर्ष पहले (1950-1980 के बीच) लिखी गई होगी।
(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर: आजकल संदेश भेजने के निम्नलिखित साधन सुलभ हैं:
(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर: मैं किसी को संदेश भेजने के लिए सबसे ज्यादा व्हाट्सएप का उपयोग करता हूँ। यह आसान, तेज़, और मुफ्त है। मैं टेक्स्ट, फोटो, या वॉयस मैसेज भेज सकता हूँ, और ग्रुप चैट में कई लोगों से एक साथ बात कर सकता हूँ। अगर कुछ औपचारिक हो, जैसे स्कूल या प्रोजेक्ट से संबंधित, तो मैं ईमेल का उपयोग करता हूँ। कभी-कभी दोस्तों के साथ मज़े के लिए इंस्टाग्राम पर भी मैसेज करता हूँ।
(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।
उत्तर:
प्रिय दादाजी,
नमस्ते!
आशा है आप स्वस्थ और खुश हैं। मैं यह पत्र आपको इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि मुझे आपके साथ बिताए पल बहुत याद आ रहे हैं। स्कूल में सब ठीक है, और मैंने हाल ही में एक नाटक "नए मेहमान" पढ़ा, जिसमें एक परिवार की मेहमाननवाजी की कहानी है। यह पढ़कर मुझे आपकी बताई कहानियाँ याद आईं, जब आप मेहमानों के लिए खाना बनवाते थे।
मुझे याद है, आप हमेशा कहते हैं कि मेहमान भगवान का रूप होते हैं। इस नाटक में भी यही भाव था, लेकिन कुछ मेहमान अनजान थे, जिससे थोड़ी परेशानी हुई। आपके पास भी कोई ऐसी कहानी हो तो बताइएगा। मैं जल्दी ही छुट्टियों में आपसे मिलने आऊँगा। मम्मी-पापा और छोटी बहन भी आपको नमस्ते कह रहे हैं।
आपका प्यार,
[आपका नाम]
[आपका पता]
दिनांक: 13 अगस्त, 2025
"जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।"
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द 'साढ़े नौ', 'आने', 'गज' में 'साढ़े नौ' भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं 'आने' शब्द भारतीय मुद्रा और 'गज' शब्द लंबाई नापने का मापक है।
(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर: एक रुपये में 16 आने होते थे। (यह पुरानी भारतीय मुद्रा प्रणाली थी, जो अब प्रचलन में नहीं है।)
(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर: 1 रुपया = 16 आने = 64 पैसे
तो 4 आने = 16 पैसे होते थे।
(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: मेरे आस-पास "गज" शब्द का प्रयोग ज्यादातर कपड़ा नापने के संदर्भ में किया जाता है। कपड़े की दुकानों में, जैसे साड़ी या सूट के कपड़े की लंबाई नापने के लिए दुकानदार "गज" में माप बताते हैं। उदाहरण के लिए, "यह साड़ी 5 गज की है।" इसके अलावा, कुछ लोग पुराने ज़माने में जमीन या खेत नापने के लिए भी "गज" का उपयोग करते थे, लेकिन अब यह कम आम है।
(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं?
उत्तर: 1 गज = 3 फीट होती है।
कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक पथ के साथी से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा-सा अंश पढ़िए-
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।
भारत में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर: भारत में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा बहुत पुरानी है, जिसमें मेहमान को भगवान का रूप माना जाता है। जब मेरे घर में कोई अतिथि आते हैं, तो मैं उनका अभिवादन इस तरह करता हूँ: सबसे पहले हाथ जोड़कर "नमस्ते" या "प्रणाम" कहता हूँ। अगर वे बड़े हैं, तो पैर छूकर आशीर्वाद लेता हूँ। फिर उन्हें अंदर बुलाकर आराम से बिठाता हूँ और पानी या चाय ऑफर करता हूँ। अगर वे दूर से आए हैं, तो उनके थकान के बारे में पूछता हूँ और घर की कोई स्पेशल डिश बनवाने की कोशिश करता हूँ।
सहपाठियों के साथ चर्चा के लिए: मैं अपने राज्य (उत्तर प्रदेश) का पारंपरिक व्यंजन अतिथियों को खिलाना चाहता हूँ, जैसे "कचौड़ी-सब्जी" या "लिट्टी-चोखा", क्योंकि ये स्वादिष्ट और घरेलू होते हैं। अपने सहपाठियों से पूछें कि वे अपने क्षेत्र का कौन-सा व्यंजन (जैसे पंजाब का मक्की दी रोटी, राजस्थान का दाल-बाटी, या दक्षिण भारत का इडली-सांभर) मेहमानों को खिलाना पसंद करेंगे। चर्चा में बताएं कि ये व्यंजन क्यों स्पेशल हैं और कैसे बनते हैं। इससे हमें अलग-अलग राज्यों की संस्कृति के बारे में पता चलेगा।
इस एकांकी में 'आने', 'गज' और 'तार' शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर: एकांकी में 'आने', 'गज' और 'तार' शब्दों का इस्तेमाल पुराने समय की मुद्रा, माप और संचार के संदर्भ में हुआ है। मैंने इनके बारे में विस्तार से जानकारी इकट्ठी की, जिसमें इंटरनेट की मदद ली। नीचे विवरण दिया है:
| 1. What is the main story about in नए मेहमान for Class 8 Hindi? | ![]() |
| 2. Who are the main characters in नए मेहमान and what are their roles? | ![]() |
| 3. What is the central theme or message of नए मेहमान chapter? | ![]() |
| 4. How should I approach answering examination questions based on नए मेहमान for CBSE Class 8? | ![]() |
| 5. What are the important events and turning points in नए मेहमान that I should remember? | ![]() |