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NCERT Solutions: तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) "उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।" इस कथन में रेखांकित शब्द 'हम' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

  • सुभाषचंद्र बोस के लिए
  • देश के तरुण वर्ग के लिए *
  • चित्तरंजन दास के लिए
  • भारतवासियों के लिए *

उत्तर: देश के तरुण वर्ग के लिए, भारतवासियों के लिए
'हम' शब्द यहाँ देश के तरुण वर्ग (युवाओं) और भारतवासियों के लिए प्रयुक्त हुआ है, क्योंकि सुभाषचंद्र बोस अपने उद्बोधन में युवाओं को संबोधित कर रहे हैं और पूरे भारतवासियों के लिए स्वप्न की बात कर रहे हैं।

(2) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?

  • आर्थिक असमानता से
  • स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
  • श्रम और कर्म की मर्यादा से *
  • जातिभेद से

उत्तर: श्रम और कर्म की मर्यादा से
स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न श्रम और कर्म की मर्यादा से साकार होगा, क्योंकि सुभाषचंद्र बोस ने कहा है कि ऐसे समाज में श्रम और कर्म को सम्मान मिलेगा और आलसी व अकर्मण्य लोगों के लिए कोई जगह नहीं होगी।

(3) "उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।" उत्तराधिकारी' होने से क्या अभिप्राय है?

  • हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
  • हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
  • उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है *
  • उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है

उत्तर: उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
उत्तराधिकारी होने का मतलब है कि हमें उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए कर्म करना है। सुभाषचंद्र बोस ने युवाओं को यह स्वप्न सौंपा है ताकि वे इसे साकार करें।

(4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-

  • राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी *
  • तरुणों का साहस बढ़ेगा
  • राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
  • राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा

उत्तर: राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
जब सभी को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिलेगा, तो राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी, क्योंकि शिक्षित और सशक्त लोग समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: ठीक है, मैं और भी आसान हिंदी में जवाब दूंगा। हमने अपने दोस्तों के साथ चर्चा की और पाया कि हमारे चुने हुए जवाब इन कारणों से सही हैं:

  1. "उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।" में 'हम' का मतलब युवा और भारतवासी हैं इसलिए सही है, क्योंकि सुभाषचंद्र बोस अपने भाषण में युवाओं से बात कर रहे हैं और पूरे भारत के लिए सपना देखते हैं। वे कहते हैं कि यह सपना वे युवाओं को दे रहे हैं, जो भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  2. स्वाधीन राष्ट्र का सपना मेहनत और काम से पूरा होगा इसलिए सही है, क्योंकि बोस ने कहा है कि जिस समाज में मेहनत और काम को सम्मान मिलेगा, वही आदर्श समाज बनेगा। आलसी लोगों के लिए वहां कोई जगह नहीं होगी।
  3. उत्तराधिकारी का मतलब है उनके सपनों को पूरा करने के लिए काम करना इसलिए सही है, क्योंकि बोस युवाओं से कहते हैं कि यह सपना उन्हें दे रहे हैं ताकि वे इसे सच करें। वे चाहते हैं कि युवा इसके लिए मेहनत करें, मुश्किलें सहें और जरूरत पड़े तो जान भी दें।
  4. सबको शिक्षा और तरक्की का बराबर मौका मिलने से देश की मेहनत करने की ताकत बढ़ेगी इसलिए सही है, क्योंकि पाठ में कहा गया है कि जब सबको बराबर शिक्षा और मौका मिलेगा, तो लोग मिलकर देश को मजबूत करेंगे। इससे देश की मेहनत करने की ताकत बढ़ेगी।

मिलकर करें मिलान

नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।
मिलकर करें मिलानउत्तर: 
मिलकर करें मिलान

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

(क) "उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।"
उत्तर: 
मतलब: सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि समाज में अमीर-गरीब का फर्क न हो। सबके पास बराबर पैसा और संसाधन हों ताकि कोई गरीबी में न रहे।
कक्षा में साझा करने के लिए: मैं कहूंगा कि यह पंक्ति हमें सिखाती है कि एक अच्छे समाज में सभी को बराबर मौका और संसाधन मिलने चाहिए।

(ख) "वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।"
उत्तर: 
मतलब: देशबंधु चित्तरंजन दास का सपना उनकी ताकत और खुशी का स्रोत था। यह सपना उन्हें हमेशा प्रेरणा देता था।
कक्षा में साझा करने के लिए: मैं कहूंगा कि यह पंक्ति बताती है कि एक बड़ा सपना हमें मेहनत करने और खुश रहने की ताकत देता है।

(ग) "उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।"
उत्तर: मतलब: बोस चाहते थे कि समाज में हर व्यक्ति को हर तरह की आजादी मिले, जैसे बोलने, सोचने और जीने की। कोई भी दबाव न हो।
कक्षा में साझा करने के लिए: मैं कहूंगा कि यह पंक्ति हमें सिखाती है कि एक अच्छे समाज में सभी को अपनी मर्जी से जीने का हक होना चाहिए।

सोच-विचार के लिए

अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-

(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर: 
नेताजी ने एक ऐसे राष्ट्र का सपना देखा था जिसमें:

  • सबको बराबर मौका और शिक्षा मिले।
  • नारी और पुरुष को समान अधिकार हों।
  • जाति का भेदभाव न हो।
  • मेहनत और काम को सम्मान मिले।
  • कोई गरीबी या अभाव न हो।
  • देश विदेशी प्रभाव से मुक्त हो और विश्व में आदर्श राष्ट्र के रूप में जाना जाए।

(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?
उत्तर: 
नेताजी ने अपने सपने को सच करने को अपने जीवन की सार्थकता माना। उनका लक्ष्य था एक ऐसा समाज और राष्ट्र बनाना जो स्वतंत्र, समान और मजबूत हो। इसके लिए वे हर मुश्किल सहने और बलिदान देने को तैयार थे।

(ग) "आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा" सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर: 
बोस ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे चाहते थे कि समाज में हर व्यक्ति मेहनत करे और देश के लिए कुछ करे। आलसी लोग समाज को कमजोर करते हैं, इसलिए उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर: आज की युवा पीढ़ी ये कर सकती है:

  • अच्छी शिक्षा लेकर देश के लिए काम करे।
  • जाति, लिंग और गरीबी के भेदभाव को खत्म करने में मदद करे।
  • मेहनत और ईमानदारी से समाज को बेहतर बनाए।
  • देश की आजादी और सम्मान की रक्षा करे।
  • दूसरों को प्रेरित करे और नेताजी के सपनों को फैलाए।

अनुमान और कल्पना से

(क) "उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो", सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
उत्तर: 
बोस ने इन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी:

  • बोलने और सोचने की आजादी।
  • धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव से मुक्ति।
  • गरीबी और आर्थिक दबाव से आजादी।
  • विदेशी शासन और सामाजिक दबाव से मुक्ति।

(ख) "उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे", सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर: 
उस समय समाज में औरतों को पुरुषों जितने अधिकार नहीं मिलते थे। वे शिक्षा, नौकरी और फैसले लेने में पीछे थीं। बोस ने इसलिए समान अधिकारों की बात की ताकि औरतें भी समाज और देश के लिए पुरुषों की तरह काम कर सकें।

(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर:
 हमारे समाज में इन लोगों को विशेष अधिकार चाहिए:

  • गरीब लोग, ताकि उन्हें शिक्षा और रोजगार मिले।
  • दिव्यांग लोग, ताकि वे आसानी से समाज में शामिल हो सकें।
  • छोटी जातियों और आदिवासी समुदाय, ताकि उन्हें बराबरी मिले।
  • बच्चे और बूढ़े, ताकि उनकी देखभाल हो।

(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- "हे मेरे तरुण भाइयो !" उनका संबोधन केवल 'भाइयो' शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर: 
उस समय भाषणों में "भाइयो" कहना आम था, क्योंकि यह सभी को एकजुट करने का तरीका था। लेकिन बोस का मतलब सिर्फ पुरुषों से नहीं, बल्कि पूरे युवा वर्ग से था। शायद "भाइयो" शब्द उस समय के समाज में सभी को संबोधित करने का प्रचलित तरीका था।

(ङ) "यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ- स्वीकार करो।" सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?

उत्तर: युवा वर्ग बहुत प्रेरित और उत्साहित हुआ होगा। बोस के जोशीले शब्दों ने उन्हें देश के लिए कुछ करने की हिम्मत दी होगी। शायद कुछ ने तुरंत उनके साथ काम शुरू किया होगा, और कुछ ने उनके सपने को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया होगा।

शीर्षक

(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे 'तरुण के स्वप्न' शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर: 
यह शीर्षक इसलिए दिया गया क्योंकि बोस अपने भाषण में युवाओं (तरुणों) को एक आदर्श समाज और राष्ट्र का सपना दे रहे हैं। वे चाहते थे कि युवा इस सपने को अपनाएं और इसे सच करें।

(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर: 
मैं इसे "आदर्श भारत का सपना" नाम दूंगा।
क्यों: क्योंकि यह भाषण एक ऐसे भारत के बारे में है जो स्वतंत्र, समान और मजबूत हो। यह नाम बोस के सपने को साफ और प्रेरणादायक तरीके से दर्शाता है।

(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
उत्तर: मैं इन विषयों को शामिल करूंगा:

  • शिक्षा और बराबरी का महत्व।
  • पर्यावरण की रक्षा।
  • युवाओं की देश के प्रति जिम्मेदारी।
  • एकता और भाईचारा।

शीर्षक: "हमारा नया भारत"
क्यों: यह शीर्षक आज के समय में देश को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

भाषा की बात

(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए-
भाषा की बातउत्तर: 
भाषा की बात

कैसे ढूंढा:

  • पाठ में "यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य एवं अखंड सत्य है" से अखंड सत्य मिला।
  • "मेरे क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है" से क्षुद्र जीवन मिला।
  • "स्वाधीन संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र" से स्वाधीन समाज और स्वाधीन राष्ट्र मिला।
  • "जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है" से असीम शक्ति और अपार आनंद मिला।
  • "आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र" से आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र मिला।

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर: मैं इन शब्दों के साथ ये विशेषताएं जोड़ना चाहूंगा:

  • अखंड - विश्वास: क्योंकि अखंड विश्वास से लोग एकजुट रहते हैं और देश मजबूत होता है।
  • सत्य - पवित्र: क्योंकि सत्य हमेशा साफ और पवित्र होता है, जो समाज को सही रास्ता दिखाता है।
  • जीवन - सुखी: क्योंकि हर व्यक्ति सुखी जीवन चाहता है, और यह समाज को बेहतर बनाता है।
  • समाज - एकजुट: क्योंकि एकजुट समाज में कोई भेदभाव नहीं होता और सब मिलकर काम करते हैं।
  • शक्ति - नई: क्योंकि नई शक्ति से युवा देश के लिए बड़े काम कर सकते हैं।
  • राष्ट्र - मजबूत: क्योंकि मजबूत राष्ट्र दुनिया में सम्मान पाता है।
  • आनंद - असीम: क्योंकि असीम आनंद से लोग खुश रहते हैं और मेहनत करते हैं।

क्यों: मैंने ये विशेषताएं इसलिए चुनीं क्योंकि ये शब्द सुभाषचंद्र बोस के सपने से मिलते-जुलते हैं। वे चाहते थे कि समाज और राष्ट्र मजबूत, एकजुट और खुशहाल हो। ये विशेषताएं उनके सपने को और सुंदर बनाती हैं।

विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

(क) "और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र" इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द 'स्वाधीन' का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है 'पराधीन'। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

उत्तर: 
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे-"समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।"
उत्तर: स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से वाक्य बनाएं:

  • स्वीकार: हमें सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न को स्वीकार करना चाहिए ताकि हम आदर्श समाज बना सकें।
  • अस्वीकार: जो लोग मेहनत को अस्वीकार करते हैं, वे समाज की उन्नति में बाधा डालते हैं।
  • सार्थक: सुभाषचंद्र बोस का सपना उनके जीवन को सार्थक बनाता था।
  • निरर्थक: बिना मेहनत के काम करना निरर्थक है और समाज को कमजोर करता है।
  • विषमता: समाज में विषमता को खत्म करना नेताजी का सपना था।
  • समानता: हमें समानता के लिए काम करना चाहिए ताकि सबको बराबर मौका मिले।
  • क्षुद्र: सुभाषचंद्र बोस ने अपने क्षुद्र जीवन को भी देश के लिए सार्थक बनाया।
  • विशाल/महान: उनका सपना एक विशाल और महान भारत का था।
  • संपन्न: नेताजी चाहते थे कि हमारा देश संपन्न और खुशहाल हो।
  • विपन्न: हमें विपन्न लोगों की मदद करनी चाहिए ताकि समाज में बराबरी आए।
  • अकर्मण्य: समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं, बल्कि मेहनती लोगों पर निर्भर है।
  • कर्मण्य/कर्मठ: कर्मण्य लोग ही देश को मजबूत बनाते हैं।
  • मरण: सुभाषचंद्र बोस ने कहा कि स्वप्न के लिए मरण भी स्वर्ग के समान है।
  • जीवन: हमें अपना जीवन देश की सेवा में लगाना चाहिए।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
उत्तर: 

  • विद्यालय के लिए: मैं चाहता हूँ कि मेरा विद्यालय हर बच्चे के लिए एक खुशहाल जगह बने। सभी को अच्छी शिक्षा मिले और दोस्तों के साथ मिल-जुलकर पढ़ाई हो।
  • राज्य के लिए: मेरा सपना है कि मेरा राज्य साफ-सुथरा हो, सभी को पानी और बिजली मिले, और लोग एक-दूसरे की मदद करें।
  • देश के लिए: मैं चाहता हूँ कि मेरा देश मजबूत और अमीर हो, जहां सभी को बराबर मौका मिले, गरीबी खत्म हो, और हमारा देश दुनिया में सम्मान पाए।

(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर: 

  • हम अपने देश का सम्मान करें और झंडे को इज्जत दें।
  • स्कूल में अच्छे संस्कार सीखें और दूसरों के साथ प्यार से रहें।
  • गंदगी न फैलाएं और पर्यावरण की रक्षा करें।
  • अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों का भी ध्यान रखें।
  • देश के लिए मेहनत करें और पढ़ाई से भविष्य बनाएं।

मिलान कीजिए

(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

मिलान कीजिएउत्तर: 
मिलान कीजिए


(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम 'तरुण के स्वप्न' पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
उत्तर: 'तरुण के स्वप्न' पाठ में चित्तरंजन दास का नाम आया है। पाठ में सुभाषचंद्र बोस ने उनके स्वप्न की बात की है और उन्हें अपना प्रेरणास्रोत माना है।

सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
उत्तर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयास:
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का नारा देकर लोगों को प्रेरित किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह से आजादी की लड़ाई लड़ी, जैसे दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन। भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने क्रांति के रास्ते से अंग्रेजों का विरोध किया। इन सभी ने एक स्वाधीन और संपन्न समाज का सपना देखा।

स्वतंत्रता मिलने के बाद सरकार और लोगों ने कई उल्लेखनीय कोशिशें कीं, जो मेरी सामाजिक अध्ययन की किताब, अनुभव और पुस्तकालय से पता चलीं:

  • शिक्षा के लिए: सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान शुरू किया, जिससे हर बच्चे को मुफ्त पढ़ाई मिले। आज स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए मिड-डे मील भी मिलता है, जो मैंने खुद देखा है।
  • गरीबी हटाने के लिए: पंचवर्षीय योजनाओं से गांवों में सड़कें, बिजली और पानी की व्यवस्था की गई। मेरे गांव में भी सोलर लाइट लगी है।
  • बराबरी के लिए: संविधान में सभी को समान अधिकार दिए गए। महिलाओं और दलितों के लिए नौकरी और शिक्षा में आरक्षण हुआ, जिससे वे आगे बढ़ सके।
  • स्वास्थ्य के लिए: आयुष्मान भारत योजना से गरीब लोग मुफ्त इलाज करा सकते हैं। मेरे पड़ोस में किसी को इसका फायदा मिला है।
  • आर्थिक विकास के लिए: उद्योग और तकनीक को बढ़ावा दिया गया। आज भारत में मोबाइल और कंप्यूटर बनाने की फैक्टरियां हैं।

निष्कर्ष: ये सभी प्रयास सुभाषचंद्र बोस के स्वाधीन और संपन्न समाज के सपने को पूरा करने की दिशा में हैं। मैंने अपनी किताब और आसपास के अनुभवों से ये सीखा है। पुस्तकालय से भी इतिहास की किताबों में इन योजनाओं के बारे में पढ़ा।

स्त्री सशक्तीकरण

(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर: 
सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि औरतें पुरुषों के बराबर अधिकार पाएं। आज सरकार ने औरतों को कई विशेषाधिकार दिए हैं, जो मैंने अपने आसपास देखे हैं:

  • शिक्षा: लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा और स्कॉलरशिप दी जाती है, जैसे मेरी बहन को स्कूल में किताबें मुफ्त मिलती हैं।
  • नौकरी: औरतों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण है, जैसे मेरी पड़ोसन को बैंक में नौकरी मिली।
  • सुरक्षा: महिलाओं के लिए हेल्पलाइन (1091) और कानून जैसे दहेज विरोधी कानून बनाए गए हैं।
  • स्वास्थ्य: माताओं और बच्चों के लिए मुफ्त टीकाकरण और चेकअप कैंप लगते हैं, जो मैंने गांव में देखा।
  • वोट का अधिकार: औरतें भी पुरुषों की तरह वोट डाल सकती हैं, जैसे मेरी मां चुनाव में जाती हैं।

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने 'आजाद हिंद फौज' का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में औरतों की एक टुकड़ी थी, जिसका नाम झांसी रेजिमेंट था।
भूमिका: इस टुकड़ी की औरतों ने जंग में हिस्सा लिया। वे लड़ाई में अंग्रेजों से मुकाबला करती थीं और देश की आजादी के लिए जान की परवाह नहीं करती थीं। साथ ही, वे घायलों की देखभाल और प्रेरणा देने का काम भी करती थीं।

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी

आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: मैं किस स्वतंत्रता सेनानी से प्रभावित हूँ: मैं सुभाषचंद्र बोस से प्रभावित हूँ। उनके कार्य और विचार मुझे बहुत पसंद हैं।
क्यों प्रभावित हूँ:

  • सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का नारा दिया, जो उनके साहस को दिखाता है।
  • वे चाहते थे कि देश में सभी को बराबरी मिले, खासकर औरतों को भी पुरुषों जितने अधिकार मिलें।
  • उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश के लिए लड़ाई लड़ी, जो मुझे प्रेरित करता है कि हमें अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करनी चाहिए।

कक्षा में अभिनय (रोल प्ले): मैं सुभाषचंद्र बोस बनकर बोलता हूँ
"नमस्ते मेरे प्यारे देशवासियों, खासकर मेरे युवा भाइयों और बहनों! आज हम गुलामी की जंजीरों में हैं, लेकिन डरने की जरूरत नहीं! तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। हम सब मिलकर अंग्रेजों को भारत से भगाएंगे। औरतें भी हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगी। हमें मेहनत और त्याग से एक स्वाधीन और संपन्न समाज बनाना है। तो उठो, जागो और देश के लिए लड़ो!"
(फिर मैं कक्षा में बच्चों से पूछता हूँ, "क्या तुम मेरे साथ आजादी का नारा लगाओगे? 'जय हिंद!'")

"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।"

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' नारे के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और भी बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दर्शाते हैं।
नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

`तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।`उत्तर: 
`तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।`

परियोजना कार्य

आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुने।
उत्तर: 
संग्रहिका (10 महिला और 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानी): मैंने हर राज्य से एक-एक स्वतंत्रता सेनानी चुना और उनके चित्र इकट्ठे किए। नीचे उनके नाम और योगदान लिखे हैं (चित्र आप खुद खींच या प्रिंट कर सकते हैं):
महिला स्वतंत्रता सेनानी:
परियोजना कार्य

  • रानी लक्ष्मीबाई (झांसी, उत्तर प्रदेश) - 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से लड़ी और वीरता की मिसाल बनीं।

परियोजना कार्य

  • बेगम हजरत महल (उत्तर प्रदेश) - 1857 में अवध में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

परियोजना कार्य

  • सरोजिनी नायडू (आंध्र प्रदेश) - "भारत छोड़ो" आंदोलन में हिस्सा लिया और कविताओं से प्रेरित किया।

परियोजना कार्य

  • अरुणा आसफ अली (दिल्ली) - 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में झंडा फहराया।

परियोजना कार्य

  • कस्तूरबा गांधी (गुजरात) - गांधीजी के साथ सत्याग्रह में हिस्सा लिया।

परियोजना कार्य

  • कमला चट्टोपाध्याय (पश्चिम बंगाल) - राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रही और संविधान में योगदान दिया।

परियोजना कार्य

  • रानी चेन्नम्मा (कर्नाटक) - 1824 में अंग्रेजों के खिलाफ पहली बगावत की।

परियोजना कार्य

  • विजया लक्ष्मी पंडित (उत्तराखंड) - संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

परियोजना कार्य

  • लक्ष्मी सहगल (तमिलनाडु) - आजाद हिंद फौज में डॉक्टर रहीं।

परियोजना कार्य

  • माता सुंदरी (पंजाब) - सिख समुदाय को एकजुट कर अंग्रेजों का विरोध किया।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:
पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • महात्मा गांधी (गुजरात) - अहिंसा से आजादी की लड़ाई लड़ी।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • भगत सिंह (पंजाब) - क्रांति से अंग्रेजों को चुनौती दी।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • चंद्रशेखर आजाद (मध्य प्रदेश) - आजादी के लिए हथियार उठाए।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • सुभाषचंद्र बोस (पश्चिम बंगाल) - आजाद हिंद फौज बनाई।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • सरदार पटेल (गुजरात) - देश को एकजुट किया।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • जवाहरलाल नेहरू (उत्तर प्रदेश) - पहले प्रधानमंत्री बने और विकास के लिए काम किया।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र) - स्वराज का नारा दिया।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • मंगल पांडे (बिहार) - 1857 की क्रांति शुरू की।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • लाला लाजपत राय (हरियाणा) - साइमन कमीशन का विरोध किया।

पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:

  • अशफाकउल्ला खान (उत्तर प्रदेश) - काकोरी कांड में हिस्सा लिया।

झरोखे से

आपने जो पाठ पढ़ा है उसमें सुभाषचंद्र बोस तरुणों से अपने सपनों की बात करते हैं। अब आप नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र पढ़िए जिसमें उन्होंने गृह एवं कुटीर उद्योग पर अपने विचार व्यक्त किए हैं-
झरोखे सेउत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने अपने पत्र में गृह और कुटीर उद्योगों की बात की है, जो देश की आजादी से पहले लिखा गया था। ये उद्योग घर पर या छोटे स्तर पर चलने वाले काम हैं, जैसे हस्तकला, सिलाई या खाने की चीजें बनाना। मैंने अपने साथियों के साथ इस पर चर्चा की। यहाँ एक आसान उदाहरण है जो हमने बात की:

  • मेरा साथी रवि ने कहा: मेरे गांव में कई औरतें घर पर अगरबत्ती बनाती हैं। यह कुटीर उद्योग है, जो परिवार को कमाई देता है और बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे गांव मजबूत होता है।
  • मेरी साथी सीमा ने कहा: मेरी मां घर पर सिलाई का काम करती हैं। यह गृह उद्योग है, जो हमें पढ़ाई के लिए पैसे देता है। लेकिन कभी-कभी बाजार में सामान बेचने में मुश्किल होती है।
  • मैंने कहा: मेरे पड़ोस में लोग घर पर पापड़ और अचार बनाते हैं। यह छोटा उद्योग है, जो रोजगार देता है। लेकिन आजादी के बाद सरकार ने इन उद्योगों को मदद दी, जैसे लोन और ट्रेनिंग। इससे लोग आत्मनिर्भर बनते हैं।

हमने चर्चा से सीखा कि ये उद्योग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और गांवों में रोजगार बढ़ाते हैं। अगर आप भी चर्चा करें, तो अपने आसपास के उदाहरण बताएं!

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=u_zmDD54dU4

  • 'आजाद हिंद फौज' के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म
इंटरनेट लिंक से फिल्म का नाम लाइफ ऑफ सुभाषचंद्र बोस है। यह NFAI कलेक्शन की एक फिल्म है, जिसमें नेताजी की असली जिंदगी के फुटेज हैं। फिल्म में दिखाया गया है:

  • बोस की जिंदगी के मुख्य घटनाएं, जैसे सरदार पटेल, मौलाना आजाद और आचार्य कृपलानी से मिलना।
  • आजाद हिंद फौज का नेतृत्व, "जय हिंद" का नारा और ब्रिटिश के खिलाफ युद्ध।
  • जर्मनी और पूर्व एशिया में उनकी गतिविधियां, राष्ट्रीय ध्वज की कल्पना और स्वराज के लिए लड़ाई।
  • भारत से गायब होना और उनकी आखिरी यात्रा, साथ में सैनिकों के बलिदान।

यह फिल्म बोस की देशभक्ति और आजादी की लड़ाई को दिखाती है। आप इसे देखकर और प्रेरित हो सकते हैं!
'आजाद हिंद फौज' के विषय में जानकारी
मैंने इंटरनेट से जानकारी जुटाई और अब कक्षा में प्रस्तुत कर रहा हूँ। आजाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी - INA) भारत की आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • इतिहास: आजाद हिंद फौज की शुरुआत 1942 में मोहन सिंह ने की थी, लेकिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में इसे नया रूप दिया। बोस 2 जुलाई 1943 को सिंगापुर पहुंचे और रास बिहारी बोस से नेतृत्व लिया। फौज में भारतीय सैनिक थे, जो ब्रिटिश फौज से अलग होकर शामिल हुए। बोस ने इसे "आजाद हिंद सरकार" का हिस्सा बनाया।
  • भूमिका भारत की आजादी में: फौज ने जापान की मदद से 1944 में बर्मा से भारत पर हमला किया (इम्फाल अभियान)। हालांकि यह सैन्य रूप से असफल रहा, लेकिन इसने भारतीयों को प्रेरित किया। बोस ने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का नारा दिया, जिससे लोग देशभक्ति से भर गए। INA के ट्रायल ने ब्रिटिश फौज में बगावत फैलाई और आजादी की मांग तेज की। इसमें औरतों की "झांसी रेजिमेंट" भी थी, जो लड़ाई में हिस्सा लेती थी।
  • मुख्य तथ्य: फौज में 40,000 से ज्यादा सैनिक थे। बोस ने इसे पूर्व एशिया में बनाया और "जय हिंद" का नारा दिया। यह आजादी की लड़ाई में एक क्रांतिकारी कदम था, जो दिखाता है कि बोस कितने बहादुर थे।

कक्षा में प्रस्तुति: "नमस्ते दोस्तों! आज मैं आजाद हिंद फौज के बारे में बताता हूँ। नेताजी बोस ने इसे बनाया और ब्रिटिश से लड़ाई की। यह फौज भारत की आजादी के लिए प्रेरणा बनी। जय हिंद!"

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FAQs on NCERT Solutions: तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)

1. "तरुण के स्वप्न" पाठ का मुख्य विषय क्या है?
Ans."तरुण के स्वप्न" पाठ का मुख्य विषय आत्मविश्वास और सपनों को साकार करने की प्रेरणा है। यह पाठ दर्शाता है कि कैसे तरुण अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाईयों का सामना करता है और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है। इसमें यह संदेश दिया गया है कि कठिन परिश्रम और सही दिशा में प्रयास करने से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
2. इस पाठ में तरुण के सपनों का क्या महत्व है?
Ans. इस पाठ में तरुण के सपनों का महत्व यह है कि वे उसकी पहचान और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। तरुण के सपने उसे प्रेरित करते हैं और उसे अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर करते हैं। यह दिखाता है कि सपने केवल कल्पनाएँ नहीं होतीं, बल्कि वे वास्तविकता में बदलने की क्षमता रखती हैं जब उन पर मेहनत की जाती है।
3. पाठ में तरुण को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
Ans. पाठ में तरुण को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि सामाजिक दबाव, आर्थिक समस्याएँ और व्यक्तिगत संदेह। ये सभी चुनौतियाँ उसे अपने सपनों को साकार करने में बाधा डालती हैं, लेकिन वह इनका सामना करके आगे बढ़ने का साहस दिखाता है।
4. "तरुण के स्वप्न" पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?
Ans. "तरुण के स्वप्न" पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने सपनों का पीछा करना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए। यह पाठ हमें प्रेरित करता है कि कठिनाइयाँ अस्थायी होती हैं, और यदि हम मेहनत करते हैं और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम सफल हो सकते हैं।
5. क्या पाठ में कोई विशेष संदेश है जो युवाओं के लिए है?
Ans. हाँ, पाठ में विशेष संदेश यह है कि युवाओं को अपने सपनों के प्रति वफादार रहना चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। यह संदेश उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि वे अपने सपनों को हकीकत में बदलने में सक्षम हैं, भले ही रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ।
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