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NCERT Solutions: वर्णोच्चारण-शिक्षा १

पृष्ठम् 155: प्रश्नानि

1. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन द्विपदेन वा उत्तरत-
(क) उरसि किं तन्त्रं भवति? 
उत्तरम्: वायुबलतन्त्रम्।

(ख) नाभिप्रदेशे स्थिताः मांसपेश्यः किं नोदयन्ति? 
उत्तरम्: श्वासप्रवृत्तिम्। 

(ग) आस्यस्य आभ्यन्तरे वर्णानाम् उत्पत्त्यर्थं द्वितीयं तत्त्वं किम् अस्ति? 
उत्तरम्: द्वितीयं तत्त्वं करणम् अस्ति।

(घ) आस्ये कति स्थानानि सन्ति? 
उत्तरम्: षट् स्थानानि। 

(ङ) स्थानस्य कार्यनिदर्शनार्थं किं समुचितम् उदाहरणम् अस्ति? 
उत्तरम्: मुरली। 

(च) करणानि मुरल्याः कस्य भागम् इव व्यवहरन्ति? 
उत्तरम्: अङ्गुलीभागम् इव। 

2. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत।
(क) करणं किं भवति? 
उत्तरम्: करणं तदङ्गं भवति, यत् वर्णस्य उच्चारणसमये स्थानं स्पृशति वा समीपं याति। 

(ख) उरः श्वासकोशे स्थितं वायुं कुत्र निःसारयति? 
उत्तरम्: उरः श्वासकोशे स्थितं वायुं ऊर्ध्वं निःसारयति। 

(ग) मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि कीदृशं व्यवहरन्ति? 
उत्तरम्: मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि आस्यस्य स्थानानि इव व्यवहरन्ति।

(घ) केषां वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति? 
उत्तरम्: कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति। 

(ङ) तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं सामान्यं करणं किम् अस्ति? 
उत्तरम्: तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं  सामान्यं करणं जिह्वा एव भवति

(च) कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं स्थानस्य करणस्य च मध्ये किं भवति
उत्तरम्: कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं स्थानस्य करणस्य च मध्ये अन्तरम् न भवति

3. अधोलिखितेषु वाक्येषु आम् /  इति लिखित्वा उचितभावं सूचयत-
(क) श्वासकोशस्थितः वायुः ऊर्ध्वं चरन् पूर्वम् आस्यं प्राप्नोति।
उत्तरम्: आम्

(ख) सर्वप्रथमं नाभि-प्रदेशे स्थिताः मांसपेश्याः कण्ठं नोदयन्ति।
उत्तरम्: आम्

(ग) आस्यस्य आभ्यन्तरे वर्णानाम् उत्पत्त्यर्थम् आभ्यन्तर-प्रयत्नः आवश्यकम् अस्ति।
उत्तरम्: आम्

(घ) तालव्य-वर्णनाम् उच्चारणार्थं दन्तः स्थानं स्पृशति।
उत्तरम्:

(ङ) मूर्धन्यानां वर्णानाम् उच्चारणार्थं जिह्वा स्थानं स्पृशति।
उत्तरम्: आम्

(च) तत्तत्स्थानस्य एव कश्चित् पूर्वभागः, तत्तत्स्थानस्य परभागं स्पृशति।
उत्तरम्: आम्

पृष्ठम् 156: प्रश्नानि

4. मुखे उपलभ्यमानानि स्थानानि बहिष्ठात् अन्तः यथाक्रमं (अर्थात् विपरीत - क्रमेण) लिखन्तु -
(क) मूर्धा __________
(ख) दन्तः __________
(ग) तालु __________
(घ) कण्ठः __________
(ङ) ओष्ठः __________

उत्तरम्:
(ङ) ओष्ठः
(ख) दन्तः
(ग) तालु
(क) मूर्धा
(घ) कण्ठः

5. यथायोग्यं मेलनं कुरुत -
पृष्ठम् 156: प्रश्नानिउत्तरम्:

पृष्ठम् 156: प्रश्नानि

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FAQs on NCERT Solutions: वर्णोच्चारण-शिक्षा १

1. वर्णोच्चारण की शिक्षा का क्या महत्व है ?
Ans. वर्णोच्चारण की शिक्षा का महत्व इसलिए है क्योंकि यह भाषा के सही उच्चारण को सुनिश्चित करती है, जिससे संवाद में स्पष्टता और प्रभावशीलता बढ़ती है। सही उच्चारण से शब्दों का अर्थ स्पष्ट होता है और बातचीत में ग़लतफ़हमियों को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से, बच्चों को सही उच्चारण सिखाना उनकी भाषा कौशल और आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।
2. क्या वर्णोच्चारण केवल बोलने के लिए ही महत्वपूर्ण है ?
Ans. नहीं, वर्णोच्चारण केवल बोलने के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पढ़ने और लेखन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही उच्चारण से छात्रों को शब्दों को बेहतर तरीके से समझने और लिखने में मदद मिलती है। यह भाषा के विकास में योगदान करता है और बच्चों को साहित्यिक और संवादात्मक कौशल विकसित करने में सहायता करता है।
3. वर्णोच्चारण सिखाने की प्रक्रिया में कौन-कौन से तत्व शामिल होते हैं ?
Ans. वर्णोच्चारण सिखाने की प्रक्रिया में कई तत्व शामिल होते हैं, जैसे कि ध्वनि का उत्पादन, स्वर और व्यंजन का सही उच्चारण, ताल और लय का समझना, और शब्दों के बीच सही अंतराल बनाए रखना। इसमें खेल, गीत, और गतिविधियों का उपयोग करके बच्चों के लिए सीखने को मजेदार और प्रभावशाली बनाना भी शामिल होता है।
4. क्या वर्णोच्चारण की शिक्षा केवल प्राथमिक स्तर पर ही दी जाती है ?
Ans. नहीं, वर्णोच्चारण की शिक्षा केवल प्राथमिक स्तर पर नहीं दी जाती, बल्कि यह विभिन्न शैक्षिक स्तरों पर महत्वपूर्ण होती है। उच्च स्तर पर भी, विशेषकर भाषाई अध्ययन, सार्वजनिक बोलने, और भाषण कला में, सही उच्चारण की आवश्यकता होती है। यह सभी आयु समूहों के लिए आवश्यक है ताकि वे प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें।
5. वर्णोच्चारण सिखाने के लिए कौन-कौन से संसाधन उपयोगी हो सकते हैं ?
Ans. वर्णोच्चारण सिखाने के लिए विभिन्न संसाधन उपयोगी हो सकते हैं, जैसे कि ऑडियो और वीडियो सामग्री, ऑनलाइन पाठ्यक्रम, भाषा शिक्षण ऐप्स, और किताबें। इसके साथ ही, शिक्षकों द्वारा संवादात्मक गतिविधियाँ और खेल भी छात्रों के लिए सीखने में मददगार होते हैं। सही मार्गदर्शन और संसाधनों का उपयोग करके, विद्यार्थी बेहतर उच्चारण कौशल विकसित कर सकते हैं।
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