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बौद्ध धर्म और जैन धर्म बाद की वैदिक काल में

Table of Contents
1. परिचय महाभारत के बाद जीवन जटिल हो गया, जो वेदिक काल की सरलता के विपरीत है। अन्य धार्मिक जटिलताओं के उत्तर में बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय हुआ। बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध ने हरियाणा का दौरा किया, विशेष रूप से कम्मसधम्म (आधुनिक कैथल) में, जहाँ उन्होंने कई उपदेश दिए। हरियाणा में हिसार, करनाल, टोपरा, और थानसेर में महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र बने, जो सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किए गए थे। थानसेर:महात्मा बुद्ध ने यहाँ उपदेश दिया, और सम्राट अशोक ने इसके उत्तर-पश्चिम भाग में 300 फीट ऊंचा स्तूप बनवाया।
2. अवसान और पुनरुत्थान:
3. जैन धर्म:
4. हरियाणा में प्रमुख जैन केंद्र:

परिचय
  • महाभारत के बाद जीवन जटिल हो गया, जो वेदिक काल की सरलता के विपरीत है।
  • अन्य धार्मिक जटिलताओं के उत्तर में बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय हुआ।

बौद्ध धर्म
  • महात्मा बुद्ध ने हरियाणा का दौरा किया, विशेष रूप से कम्मसधम्म (आधुनिक कैथल) में, जहाँ उन्होंने कई उपदेश दिए।
  • हरियाणा में हिसार, करनाल, टोपरा, और थानसेर में महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र बने, जो सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किए गए थे।
  • थानसेर:महात्मा बुद्ध ने यहाँ उपदेश दिया, और सम्राट अशोक ने इसके उत्तर-पश्चिम भाग में 300 फीट ऊंचा स्तूप बनवाया।

टोपरा: सम्राट अशोक ने ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लेखों के साथ 42 फीट ऊंचा पत्थर का स्तंभ स्थापित किया।

सुघ: महात्मा बुद्ध ने उपदेश दिया, और सम्राट अशोक ने यमुना के किनारे एक स्तूप का निर्माण किया।

अग्रोहा: बौद्ध धर्म का केंद्र, जहाँ पुरातात्त्विक खुदाई के माध्यम से स्तूपों और विहारों के अवशेष मिले।

रोहतक और कलानौर: महात्मा बुद्ध द्वारा दौरा किया गया, जिसने बौद्ध धर्म के प्रसार में योगदान दिया।

अवसान और पुनरुत्थान:

  • हियूएन-त्सांग के समय में हरियाणा में बौद्ध धर्म का अवसान हुआ, लेकिन 7वीं शताब्दी में हर्ष के शासन के दौरान पुनर्जीवित हुआ।

हर्षवर्धन और राज्यवर्धन, जो पुश्यभूति वंश से थे, ने बौद्ध धर्म का समर्थन किया।

जैन धर्म:

  • जैन धर्म ने बौद्ध धर्म के बाद हरियाणा में अपना प्रभाव जारी रखा, जिसमें जैन संत लोचाचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
  • जैन धर्म का विस्तार अग्रोहा और रोहतक में हुआ, विशेषकर 6-7वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म की गिरावट के बाद।
  • जैन आचार्य जिनवल्लभ सूरी, हरिभद्र सूरी, और अभयदेव ने जैन धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • पांच रंगों का झंडा जैन धर्म के महाव्रतों का प्रतीक था, जिसमें प्रत्येक रंग विभिन्न गुणों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • रोहतक, सिरसा, और अन्य क्षेत्र प्रमुख जैन केंद्र बन गए।

हरियाणा में प्रमुख जैन केंद्र:

  • (यहाँ पर प्रमुख जैन केंद्रों की सूची दी जा सकती है।)

थानेसर (कुरुक्षेत्र): जैन गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र, जहां प्राचीन जैन मूर्तियों की खोज की गई है।

रोहतक: 7वीं सदी के आसपास जैन केंद्र के रूप में उभरा, जहां खोखराकोट में प्राचीन जैन मूर्तियाँ मिलीं।

जिंद: जैन तीर्थंकर आदिनाथ की धातु की प्रतिमा मिली, जिसमें 9वीं सदी के लेख हैं।

पिंजोर (पंचकुला): कई जैन मूर्तियाँ मिलीं, जिनमें चंद्रप्रभ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी की मूर्तियाँ शामिल हैं।

सिरसा: 10वीं सदी के दौरान जैन धर्म का प्रभाव देखा गया, जहां जैन मूर्तियों के खंडित अवशेष मिले।

हांसी: जैन धर्म का एक मध्यकालीन केंद्र, जहां जैन अरहतों और धातु की मूर्तियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति थी।

अस्थल बोहर (रोहतक): नाथ संप्रदाय का एक ऐतिहासिक केंद्र, जिसमें जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण कलाकृतियाँ भी शामिल हैं।

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