टोपरा: सम्राट अशोक ने ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लेखों के साथ 42 फीट ऊंचा पत्थर का स्तंभ स्थापित किया।
सुघ: महात्मा बुद्ध ने उपदेश दिया, और सम्राट अशोक ने यमुना के किनारे एक स्तूप का निर्माण किया।
अग्रोहा: बौद्ध धर्म का केंद्र, जहाँ पुरातात्त्विक खुदाई के माध्यम से स्तूपों और विहारों के अवशेष मिले।
रोहतक और कलानौर: महात्मा बुद्ध द्वारा दौरा किया गया, जिसने बौद्ध धर्म के प्रसार में योगदान दिया।
हर्षवर्धन और राज्यवर्धन, जो पुश्यभूति वंश से थे, ने बौद्ध धर्म का समर्थन किया।
थानेसर (कुरुक्षेत्र): जैन गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र, जहां प्राचीन जैन मूर्तियों की खोज की गई है।
रोहतक: 7वीं सदी के आसपास जैन केंद्र के रूप में उभरा, जहां खोखराकोट में प्राचीन जैन मूर्तियाँ मिलीं।
जिंद: जैन तीर्थंकर आदिनाथ की धातु की प्रतिमा मिली, जिसमें 9वीं सदी के लेख हैं।
पिंजोर (पंचकुला): कई जैन मूर्तियाँ मिलीं, जिनमें चंद्रप्रभ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी की मूर्तियाँ शामिल हैं।
सिरसा: 10वीं सदी के दौरान जैन धर्म का प्रभाव देखा गया, जहां जैन मूर्तियों के खंडित अवशेष मिले।
हांसी: जैन धर्म का एक मध्यकालीन केंद्र, जहां जैन अरहतों और धातु की मूर्तियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति थी।
अस्थल बोहर (रोहतक): नाथ संप्रदाय का एक ऐतिहासिक केंद्र, जिसमें जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण कलाकृतियाँ भी शामिल हैं।