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Unit Test (Solutions): दुःख का अधिकार

समय: 1 घंटा
पूर्णांक: 30

निर्देश: सभी प्रश्नों का प्रयास करें।

प्रश्न संख्या 1 से 5 तक 1 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
प्रश्न संख्या 6 से 8 तक 2 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
प्रश्न संख्या 9 से 11 तक 3 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
प्रश्न संख्या 12 और 13 प्रत्येक 5 अंक का प्रश्न है।

प्रश्न 1: बाजार में खरबूजे बेचने वाली स्त्री कहाँ बैठी थी? (1 अंक)

(i) दुकान के भीतर
(ii) फुटपाथ पर
(iii) ठेले पर
(iv) घर के सामने

उत्तर: (ii)
कहानी में बताया गया है कि वह स्त्री बाजार के फुटपाथ पर बैठकर खरबूजे बेच रही थी।

प्रश्न 2: स्त्री का बेटा किस कारण मरा? (1 अंक)

(i) बीमारी से
(ii) दुर्घटना से
(iii) साँप के काटने से
(iv) भूख से

उत्तर: (iii)
कहानी में बताया गया है कि खेत में काम करते समय साँप के काटने से उसका बेटा मर गया।

प्रश्न 3: लोग स्त्री के बारे में कैसी बातें कर रहे थे? (1 अंक)

(i) सहानुभूति की
(ii) प्रशंसा की
(iii) निंदा की
(iv) सहायता की

उत्तर: (iii)
बाजार के लोग उस स्त्री के बारे में गलत और निंदा करने वाली बातें कर रहे थे।

प्रश्न 4: लेखक को स्त्री को देखकर कैसा लगा? (1 अंक)

(i) क्रोध आया
(ii) दया आई
(iii) हँसी आई
(iv) घृणा हुई

उत्तर: (ii)
लेखक को उस स्त्री की हालत देखकर बहुत दया आई और उसका मन दुखी हो गया।

प्रश्न 5: कहानी के अनुसार दुख किसका अधिकार है? (1 अंक)

(i) केवल अमीरों का
(ii) केवल गरीबों का
(iii) सभी मनुष्यों का
(iv) केवल माताओं का

उत्तर: (iii)
कहानी का संदेश है कि दुख मनुष्य मात्र का अधिकार है, चाहे वह अमीर हो या गरीब।

प्रश्न 6: स्त्री अपने बेटे को बचाने के लिए क्या-क्या उपाय करती है? (2 अंक)

उत्तर: स्त्री अपने बेटे को बचाने के लिए ओझा को बुलवाती है, झाड़-फूँक कराती है और भगवान की पूजा करती है। वह अपनी स्थिति से बढ़कर दान-दक्षिणा भी देती है, लेकिन फिर भी उसका बेटा नहीं बच पाता।

प्रश्न 7: लोग स्त्री को निर्दयी और बेहया क्यों कहते हैं? (2 अंक)

उत्तर: लोग उसे इसलिए निर्दयी और बेहया कहते हैं क्योंकि बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन वह बाजार में खरबूजे बेचने आ जाती है। लोग उसकी मजबूरी को नहीं समझते और उसे भावनाहीन मान लेते हैं।

प्रश्न 8: लेखक को पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आती है? (2 अंक)

उत्तर: लेखक को संभ्रांत महिला की याद इसलिए आती है क्योंकि उस महिला का बेटा मरने पर वह महीनों तक शोक मनाती रही, जबकि यह गरीब स्त्री अपने बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन काम करने मजबूर हो जाती है।

प्रश्न 9: बाजार में मौजूद लोगों की मानसिकता का चित्रण कीजिए। (3 अंक)

उत्तर: बाजार में मौजूद लोग अत्यंत संवेदनहीन और निर्दयी दिखाई देते हैं। वे उस स्त्री की मजबूरी और दुःख को समझने के बजाय उसकी आलोचना करते हैं। कोई उसे बेशर्म कहता है, तो कोई धर्म और ईमान की बातें करता है। इस प्रकार लोग गरीब की पीड़ा को समझने के बजाय उस पर दोषारोपण करते हैं।

प्रश्न 10: कहानी में 'पोशाक' का क्या महत्व बताया गया है? (3 अंक)

उत्तर: कहानी में पोशाक को सामाजिक पहचान का प्रतीक बताया गया है। पोशाक से व्यक्ति की सामाजिक हैसियत पहचानी जाती है। अमीर की पोशाक उसे सम्मान दिलाती है, जबकि गरीब की पोशाक उसके दुख को भी समाज की नजरों में छोटा बना देती है।

प्रश्न 11: स्त्री की विवशता को स्पष्ट कीजिए। (3 अंक)

उत्तर: स्त्री की विवशता यह थी कि उसके बेटे की मृत्यु के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा था। घर में बच्चे, बहू और बूढ़ी माँ थी। सबके पेट भरने के लिए उसे अपने दुख को दबाकर अगले ही दिन बाजार में खरबूजे बेचने आना पड़ा।

प्रश्न 12: कहानी "दुख का अधिकार" का मूल भाव स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)

उत्तर: कहानी "दुख का अधिकार" का मूल भाव यह है कि दुख मनुष्य का मूल अधिकार है, लेकिन समाज गरीबों से यह अधिकार भी छीन लेता है। अमीर व्यक्ति अपने दुख को खुलकर व्यक्त कर सकता है, लेकिन गरीब को पेट की भूख के कारण अपने दुख को दबाना पड़ता है। लेखक ने इस कहानी के माध्यम से समाज की अमानवीयता, असमानता और संवेदनहीनता को उजागर किया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हर मनुष्य के दुख को समझना और उसका सम्मान करना चाहिए।

प्रश्न 13: लेखक ने समाज की संवेदनहीनता को कैसे उजागर किया है? उदाहरणों सहित समझाइए। (5 अंक)

उत्तर: लेखक ने बाजार में लोगों की प्रतिक्रियाओं के माध्यम से समाज की संवेदनहीनता को उजागर किया है। लोग उस स्त्री की मजबूरी को समझने के बजाय उसे बेशर्म और धर्महीन कहते हैं। कोई कहता है कि उसका ईमान चला गया, कोई उसकी नैतिकता पर प्रश्न उठाता है। कोई भी उसकी गरीबी और मजबूरी को नहीं समझता। लेखक इन उदाहरणों द्वारा यह दिखाते हैं कि समाज गरीब के दुख के प्रति कठोर और निर्दयी है।

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FAQs on Unit Test (Solutions): दुःख का अधिकार

1. What is the main theme of the chapter "दुःख का अधिकार"?
Ans. The main theme of the chapter "दुःख का अधिकार" revolves around the exploration of human suffering and the inherent right to experience and express pain. It discusses how suffering is a universal aspect of life and plays a crucial role in personal growth and understanding.
2. How does the author illustrate the concept of suffering in the chapter?
Ans. The author illustrates the concept of suffering through various narratives and examples that depict characters facing adversities. These stories highlight their emotional struggles and the lessons learned from enduring pain, ultimately suggesting that suffering can lead to greater empathy and resilience.
3. What role do emotions play in the context of suffering as described in the chapter?
Ans. Emotions play a significant role in the context of suffering as described in the chapter. The author emphasizes that acknowledging and embracing one's emotions during difficult times is essential for healing and personal development. It portrays emotions as vital indicators of one's experiences and responses to life's challenges.
4. Can you explain the significance of 'right to suffer' as mentioned in the chapter?
Ans. The 'right to suffer' signifies that individuals have the freedom to experience pain and hardship without societal stigma. The chapter argues that suffering is a natural part of life, and recognising this right can foster a more compassionate society where people support one another through their struggles rather than shunning them.
5. How does the chapter conclude regarding the perception of suffering?
Ans. The chapter concludes by advocating for a redefined perception of suffering. It suggests that instead of viewing suffering solely as a negative experience, it should be seen as an opportunity for growth and deeper understanding of oneself and others. This perspective encourages acceptance and empathy, paving the way for healing and connection.
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