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Unit Test (Solutions): मनुष्यता

समय: 1 घंटा

पूर्णांक: 30

निर्देश: सभी प्रश्नों का प्रयास करें।

  • प्रश्न संख्या 1 से 5 तक 1 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 6 से 8 तक 2 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 9 से 11 तक 3 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 12 और 13 प्रत्येक 5 अंक का प्रश्न है।

प्रश्न 1: कविता में सुमृत्यु किसे कहा गया है? (1 अंक)

(i) जो मृत्यु से डरकर जिए

(ii) जो याद में रहकर मरे

(iii) जो वृथा जिए और मरे

(iv) जो पशु की तरह जिए

उत्तर: (ii)

कविता में सुमृत्यु उसे कहा गया है जो मरने के बाद भी लोगों की यादों में जीवित रहे।

प्रश्न 2: वही मनुष्य है कि जो...? (1 अंक)

(i) अपने लिए जिए

(ii) मनुष्य के लिए मरे

(iii) पशु-प्रवृत्ति अपनाए

(iv) धन कमाए

उत्तर: (ii)

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।

प्रश्न 3: रंतदेव ने क्या दान किया? (1 अंक)

(i) अस्थिजाल

(ii) करस्थ थाल

(iii) स्वमांस

(iv) शरीर-चर्म

उत्तर: (iii)

रंतदेव ने स्वमांस दान किया।

प्रश्न 4: कविता में किसका दया-प्रवाह में बहना बताया गया है? (1 अंक)

(i) विरुद्धवाद बुद्ध का

(ii) उदार की कथा

(iii) दधीचि की हड्डियाँ

(iv) कर्ण का दान

उत्तर: (ii)

कविता में उदार की कथा का दया-प्रवाह में बहना बताया गया है।

प्रश्न 5: त्रिलोकनाथ किसके साथ हैं? (1 अंक)

(i) अनाथ के

(ii) दयालु दीनबंधु के

(iii) मदांध के

(iv) क्षुधार्त के

उत्तर: (i)

त्रिलोकनाथ अनाथ के साथ हैं।

प्रश्न 6: पशु-प्रवृत्ति और मनुष्य के बीच क्या अंतर है? संक्षेप में बताएँ। (2 अंक)

उत्तर: पशु केवल अपने लिए चारा चरता है, पर मनुष्य दूसरों के लिए भी कमाता और उत्पादन करता है। मनुष्य में चेतना-शक्ति अधिक होती है, जिससे वह दूसरों के हित-अहित का खयाल रखता है।

प्रश्न 7: उदार व्यक्ति की विशेषताएँ संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2 अंक)

उत्तर: उदार व्यक्ति दूसरों के लिए जीता-मरता है, दया-प्रवाह में बहता है, अनाथ का साथी बनता है और अपनी हर चीज़ दूसरों को दे देता है। उसकी मृत्यु भी सुमृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 8: कविता में रंतदेव, दधीचि, उशीनर और कर्ण के उदाहरण क्यों दिए गए हैं? (2 अंक)

उत्तर: इन उदाहरणों से यह दिखाया गया है कि सच्चे मनुष्य दूसरों के लिए अपना सर्वस्व त्याग देते हैं-रंतदेव ने स्वमांस, दधीचि ने हड्डियाँ, उशीनर ने शरीर-चर्म और कर्ण ने करस्थ थाल दान किया। ये परोपकार के आदर्श हैं।

प्रश्न 9: 'मरो परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी' पंक्ति का भाव विस्तार से समझाएँ। (3 अंक)

उत्तर: इस पंक्ति में कवि कहते हैं कि मृत्यु सबकी होती है, पर सच्ची मृत्यु वही है जिसके बाद लोग सदैव याद करें। केवल अपने लिए जीने-मरने वाले भुला दिए जाते हैं, पर दूसरों के लिए त्याग करने वाले सदा याद रहते हैं। यह सुमृत्यु का संदेश है।

प्रश्न 10: कविता में मनुष्यता के गुणों का वर्णन विस्तार से कीजिए। (3 अंक)

उत्तर: मनुष्यता के गुण हैं-दूसरों के हित का चिंतन, परोपकार, दया, उदारता, त्याग और अनाथ का साथ देना। मनुष्य केवल अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए जीता-मरता है। वह दया-प्रवाह में बहता है, अपना सर्वस्व दान करता है और मरने के बाद भी यादों में जीवित रहता है।

प्रश्न 11: 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' से क्या आशय है? (3 अंक)

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि सच्चा मनुष्य वह है जो केवल अपने और अपनों के लिए नहीं, बल्कि पूरे मानव-समाज के हित के लिए जीए और मरे। अपने सुख-दुख से ऊपर उठकर दूसरों का भला सोचे, त्याग करे और परोपकार करे-यही मनुष्यता का लक्षण है।

प्रश्न 12: कविता "मनुष्यता" से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से समझाएँ। (5 अंक)

उत्तर: यह कविता हमें सिखाती है कि केवल अपने लिए जीना पशु-प्रवृत्ति है, सच्ची मनुष्यता दूसरों के लिए जीने-मरने में है। हमें उदार, दयालु और त्यागी बनना चाहिए। रंतदेव, दधीचि, कर्ण जैसे उदाहरण हमें परोपकार की प्रेरणा देते हैं। कविता बताती है कि सुमृत्यु वही है जब हम मरने के बाद भी लोगों की स्मृति में जीवित रहें। हमें अनाथ का साथ देना, दया-प्रवाह में बहना और समाज के हित के लिए कार्य करना चाहिए। यह कविता स्वार्थ त्यागकर मानव-सेवा का संदेश देती है, जो आज के स्वार्थी युग में अत्यंत प्रासंगिक है।

प्रश्न 13: कविता में परोपकार और समर्पण की भावना कैसे व्यक्त हुई है? उदाहरण सहित बताएँ। (5 अंक)

उत्तर: कविता में परोपकार और समर्पण की भावना बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त हुई है। कवि कहते हैं कि मनुष्य दूसरों के लिए कमाता और उत्पादन करता है। उदार की कथा दया-प्रवाह में बहती है।

उदाहरण-रंतदेव ने स्वमांस दान किया, दधीचि ने अस्थिजाल (हड्डियाँ) दान कीं, उशीनर ने शरीर-चर्म और कर्ण ने करस्थ थाल दान किया। ये सभी अपने सर्वस्व दूसरों को दे देते हैं।

त्रिलोकनाथ अनाथ के साथ हैं-यह पंक्ति दयालु दीनबंधु की समर्पण भावना दिखाती है। कवि कहते हैं कि सच्चा मनुष्य मनुष्य के लिए मरे, यानी अपना जीवन समाज-सेवा में समर्पित कर दे। मरने के बाद भी याद रहना ही सुमृत्यु है। ये सभी उदाहरण परोपकार और पूर्ण समर्पण की भावना को जीवंत बनाते हैं तथा हमें दूसरों के हित में जीने की प्रेरणा देते हैं।

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FAQs on Unit Test (Solutions): मनुष्यता

1. What are the key themes of मनुष्यता in Class 10?
Ans. The key themes of मनुष्यता include the exploration of human values, the significance of empathy and compassion, the importance of social justice, and the role of individual responsibility in fostering a harmonious society. These themes encourage students to reflect on their actions and their impact on others.
2. How does मनुष्यता address the concept of social justice?
Ans. मनुष्यता addresses the concept of social justice by highlighting the need for equality and fairness in society. It discusses various social issues, such as discrimination and inequality, and encourages students to think critically about their role in advocating for justice and supporting those who are marginalized.
3. What role does empathy play in the lessons of मनुष्यता?
Ans. Empathy plays a crucial role in मनुष्यता as it teaches students to understand and share the feelings of others. By fostering empathy, the lessons encourage students to connect with different perspectives, which is essential for building strong, supportive communities and resolving conflicts peacefully.
4. Why is individual responsibility emphasised in मनुष्यता?
Ans. Individual responsibility is emphasised in मनुष्यता to instil a sense of accountability in students for their actions and choices. It encourages them to recognise that their contributions, whether positive or negative, have repercussions on society as a whole, thereby promoting a culture of responsible citizenship.
5. How can the teachings of मनुष्यता be applied in everyday life?
Ans. The teachings of मनुष्यता can be applied in everyday life by practising kindness, standing up against injustice, and being aware of the impact of one's actions on others. Students are encouraged to engage in community service, support their peers, and advocate for positive change in their environments, fostering a more humane society.
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