समय: 1 घंटा
पूर्णांक: 30
निर्देश: सभी प्रश्नों का प्रयास करें।
प्रश्न 1: कविता में पर्वत को किस रूप में वर्णित किया गया है? (1 अंक)
(i) मेखलाकार
(ii) दर्पण-सा
(iii) मोती की लड़ी
(iv) इंद्रजाल
उत्तर: (i)
कविता में पर्वत को मेखलाकार (करधनी के आकार वाला) बताया गया है।
प्रश्न 2: कविता में निर्झर किस प्रकार बहते हैं? (1 अंक)
(i) झर-झर
(ii) कल-कल
(iii) छल-छल
(iv) झलमल
उत्तर: (i)
निर्झर झर-झर बहते हैं, जैसे मोतियों की लड़ियाँ झर रही हों।
प्रश्न 3: कविता में ताल को किसकी तरह बताया गया है? (1 अंक)
(i) विशाल दर्पण-सा
(ii) नीरव नभ
(iii) अपार अंबर
(iv) उच्चाकांक्षा
उत्तर: (i)
ताल को विशाल दर्पण-सा बताया गया है, जिसमें पर्वत अपना प्रतिबिंब देखता है।
प्रश्न 4: कविता में तरुवर क्या कर रहे हैं? (1 अंक)
(i) झाँक रहे नीरव नभ पर
(ii) धँस गए धरा में
(iii) उड़ गया भूधर
(iv) खेलता इंद्रजाल
उत्तर: (i)
तरुवर गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से नीरव नभ पर झाँक रहे हैं।
प्रश्न 5: कविता का अंत किस घटना से होता है? (1 अंक)
(i) इंद्र खेलता इंद्रजाल
(ii) रव-शेष रह गए निर्झर
(iii) उठ रहा धुआँ
(iv) पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश
उत्तर: (i)
कविता का अंत इंद्र के जलद-यान में विचर-विचरकर इंद्रजाल खेलने से होता है।
प्रश्न 6: कविता में पावस ऋतु का वर्णन संक्षेप में कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: पावस ऋतु में पर्वत प्रदेश में प्रकृति का रूप पल-पल बदलता रहता है। कभी धूप, कभी बादल छा जाते हैं, जिससे जादुई दृश्य उत्पन्न होता है।
प्रश्न 7: कविता में निर्झरों की विशेषताएँ संक्षेप में बताएँ। (2 अंक)
उत्तर: निर्झर झर-झर बहते हैं, जैसे मोतियों की लड़ियाँ झर रही हों। वे पर्वत के गौरव का गान करते हैं और करतल ध्वनि से उत्साह भरते हैं।
प्रश्न 8: कविता में बादलों के आने का दृश्य कैसे चित्रित है? (2 अंक)
उत्तर: बादल अचानक उमड़ आते हैं, ऐसा लगता है जैसे भूधर उड़ गया हो और आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। घना कोहरा छा जाता है, शालवृक्ष धंस जाते हैं।
प्रश्न 9: 'मेखलाकार पर्वत अपार' पंक्ति का भाव विस्तार से समझाएँ। (3 अंक)
उत्तर: इस पंक्ति में पर्वत को मेखलाकार (करधनी के आकार वाला) और अपार बताया गया है। पर्वत अपनी सहस्र आँखों (फूलों) से नीचे ताल में अपना प्रतिबिंब बार-बार देखता है। यह पर्वत की विशालता और सौंदर्य को दर्शाता है।
प्रश्न 10: कविता में प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन विस्तार से कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: कविता में प्रकृति का सौंदर्य पल-पल बदलता है। मेखलाकार पर्वत, दर्पण-सा ताल, झर-झर बहते निर्झर, उच्चाकांक्षी तरुवर, बादलों का इंद्रजाल-ये सभी वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्र की मनोरम छटा प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 11: 'उड़ गया, अचानक लो, भूधर' से क्या आशय है? (3 अंक)
उत्तर: इस पंक्ति में बादलों के घने छा जाने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे विशाल पर्वत अचानक उड़ गया हो। कोहरा इतना घना हो जाता है कि पर्वत और शालवृक्ष दिखाई नहीं देते, मानो डरकर धरती में धंस गए हों।
प्रश्न 12: कविता "पर्वत प्रदेश में पावस" से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से समझाएँ। (5 अंक)
उत्तर: यह कविता हमें प्रकृति के सौंदर्य की सराहना करने और उसके साथ एकाकार होने की शिक्षा देती है। वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्र की बदलती छटा सिखाती है कि प्रकृति गतिशील और रहस्यमयी है। कविता उपमाओं से सजी होने से हमें सौंदर्य बोध विकसित करने की प्रेरणा मिलती है। यह हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाती है और प्रकृति की लीला में डूबने का आनंद सिखाती है।
प्रश्न 13: कविता में प्रकृति चित्रण की विशेषताएँ उदाहरण सहित बताएँ। (5 अंक)
उत्तर: कविता में प्रकृति चित्रण जीवंत, मानवीकरणपूर्ण और उपमा प्रधान है। पर्वत को मेखलाकार और सहस्र नेत्रों वाला बताया गया है। निर्झर मोतियों की लड़ी जैसे झरते हैं। तरुवर उच्चाकांक्षी होकर नभ की ओर झाँकते हैं। बादलों का इंद्रजाल और भूधर का उड़ना जैसे दृश्य जादुई हैं। ताल दर्पण-सा है। ये सभी विशेषताएँ प्रकृति को सजीव और भावपूर्ण बनाती हैं, जिससे पाठक स्वयं पर्वत प्रदेश में विचरण का अनुभव करता है।11.5sFast
| 1. पर्वत प्रदेश में पावस का क्या महत्व है? | ![]() |
| 2. पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा के प्रकार क्या होते हैं? | ![]() |
| 3. पर्वत प्रदेश में पावस से होने वाले नुकसान क्या हैं? | ![]() |
| 4. पर्वत प्रदेश में पावस का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है? | ![]() |
| 5. पर्वत प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का पावस पर क्या असर है? | ![]() |