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Unit Test (Solutions): पर्वत प्रदेश में पावस

समय: 1 घंटा

पूर्णांक: 30

निर्देश: सभी प्रश्नों का प्रयास करें।

  • प्रश्न संख्या 1 से 5 तक 1 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 6 से 8 तक 2 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 9 से 11 तक 3 अंक का प्रत्येक प्रश्न है।
  • प्रश्न संख्या 12 और 13 प्रत्येक 5 अंक का प्रश्न है।

प्रश्न 1: कविता में पर्वत को किस रूप में वर्णित किया गया है? (1 अंक)

(i) मेखलाकार

(ii) दर्पण-सा

(iii) मोती की लड़ी

(iv) इंद्रजाल

उत्तर: (i)

कविता में पर्वत को मेखलाकार (करधनी के आकार वाला) बताया गया है।

प्रश्न 2: कविता में निर्झर किस प्रकार बहते हैं? (1 अंक)

(i) झर-झर

(ii) कल-कल

(iii) छल-छल

(iv) झलमल

उत्तर: (i)

निर्झर झर-झर बहते हैं, जैसे मोतियों की लड़ियाँ झर रही हों।

प्रश्न 3: कविता में ताल को किसकी तरह बताया गया है? (1 अंक)

(i) विशाल दर्पण-सा

(ii) नीरव नभ

(iii) अपार अंबर

(iv) उच्चाकांक्षा

उत्तर: (i)

ताल को विशाल दर्पण-सा बताया गया है, जिसमें पर्वत अपना प्रतिबिंब देखता है।

प्रश्न 4: कविता में तरुवर क्या कर रहे हैं? (1 अंक)

(i) झाँक रहे नीरव नभ पर

(ii) धँस गए धरा में

(iii) उड़ गया भूधर

(iv) खेलता इंद्रजाल

उत्तर: (i)

तरुवर गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से नीरव नभ पर झाँक रहे हैं।

प्रश्न 5: कविता का अंत किस घटना से होता है? (1 अंक)

(i) इंद्र खेलता इंद्रजाल

(ii) रव-शेष रह गए निर्झर

(iii) उठ रहा धुआँ

(iv) पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश

उत्तर: (i)

कविता का अंत इंद्र के जलद-यान में विचर-विचरकर इंद्रजाल खेलने से होता है।

प्रश्न 6: कविता में पावस ऋतु का वर्णन संक्षेप में कीजिए। (2 अंक)

उत्तर: पावस ऋतु में पर्वत प्रदेश में प्रकृति का रूप पल-पल बदलता रहता है। कभी धूप, कभी बादल छा जाते हैं, जिससे जादुई दृश्य उत्पन्न होता है।

प्रश्न 7: कविता में निर्झरों की विशेषताएँ संक्षेप में बताएँ। (2 अंक)

उत्तर: निर्झर झर-झर बहते हैं, जैसे मोतियों की लड़ियाँ झर रही हों। वे पर्वत के गौरव का गान करते हैं और करतल ध्वनि से उत्साह भरते हैं।

प्रश्न 8: कविता में बादलों के आने का दृश्य कैसे चित्रित है? (2 अंक)

उत्तर: बादल अचानक उमड़ आते हैं, ऐसा लगता है जैसे भूधर उड़ गया हो और आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। घना कोहरा छा जाता है, शालवृक्ष धंस जाते हैं।

प्रश्न 9: 'मेखलाकार पर्वत अपार' पंक्ति का भाव विस्तार से समझाएँ। (3 अंक)

उत्तर: इस पंक्ति में पर्वत को मेखलाकार (करधनी के आकार वाला) और अपार बताया गया है। पर्वत अपनी सहस्र आँखों (फूलों) से नीचे ताल में अपना प्रतिबिंब बार-बार देखता है। यह पर्वत की विशालता और सौंदर्य को दर्शाता है।

प्रश्न 10: कविता में प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन विस्तार से कीजिए। (3 अंक)

उत्तर: कविता में प्रकृति का सौंदर्य पल-पल बदलता है। मेखलाकार पर्वत, दर्पण-सा ताल, झर-झर बहते निर्झर, उच्चाकांक्षी तरुवर, बादलों का इंद्रजाल-ये सभी वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्र की मनोरम छटा प्रस्तुत करते हैं।

प्रश्न 11: 'उड़ गया, अचानक लो, भूधर' से क्या आशय है? (3 अंक)

उत्तर: इस पंक्ति में बादलों के घने छा जाने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे विशाल पर्वत अचानक उड़ गया हो। कोहरा इतना घना हो जाता है कि पर्वत और शालवृक्ष दिखाई नहीं देते, मानो डरकर धरती में धंस गए हों।

प्रश्न 12: कविता "पर्वत प्रदेश में पावस" से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से समझाएँ। (5 अंक)

उत्तर: यह कविता हमें प्रकृति के सौंदर्य की सराहना करने और उसके साथ एकाकार होने की शिक्षा देती है। वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्र की बदलती छटा सिखाती है कि प्रकृति गतिशील और रहस्यमयी है। कविता उपमाओं से सजी होने से हमें सौंदर्य बोध विकसित करने की प्रेरणा मिलती है। यह हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाती है और प्रकृति की लीला में डूबने का आनंद सिखाती है।

प्रश्न 13: कविता में प्रकृति चित्रण की विशेषताएँ उदाहरण सहित बताएँ। (5 अंक)

उत्तर: कविता में प्रकृति चित्रण जीवंत, मानवीकरणपूर्ण और उपमा प्रधान है। पर्वत को मेखलाकार और सहस्र नेत्रों वाला बताया गया है। निर्झर मोतियों की लड़ी जैसे झरते हैं। तरुवर उच्चाकांक्षी होकर नभ की ओर झाँकते हैं। बादलों का इंद्रजाल और भूधर का उड़ना जैसे दृश्य जादुई हैं। ताल दर्पण-सा है। ये सभी विशेषताएँ प्रकृति को सजीव और भावपूर्ण बनाती हैं, जिससे पाठक स्वयं पर्वत प्रदेश में विचरण का अनुभव करता है।11.5sFast

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FAQs on Unit Test (Solutions): पर्वत प्रदेश में पावस

1. पर्वत प्रदेश में पावस का क्या महत्व है?
Ans. पर्वत प्रदेश में पावस का महत्व अनेक दृष्टियों से है। यह न केवल कृषि के लिए आवश्यक जल प्रदान करता है, बल्कि जलवायु को भी संतुलित रखता है। वर्षा से नदियों और जलाशयों का स्तर बढ़ता है, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण होता है और पारिस्थितिकी तंत्र में भी संतुलन बना रहता है।
2. पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा के प्रकार क्या होते हैं?
Ans. पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं: एक, स्थायी वर्षा, जो पहाड़ों के ऊंचे हिस्सों में होती है और दूसरी, मौसमी वर्षा, जो वर्षा के मौसम में होती है। ये दोनों प्रकार की वर्षा स्थानीय कृषि और वन्य जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।
3. पर्वत प्रदेश में पावस से होने वाले नुकसान क्या हैं?
Ans. पर्वत प्रदेश में पावस से कई नुकसान हो सकते हैं, जैसे भूस्खलन, बाढ़, और मिट्टी का कटाव। अत्यधिक वर्षा से पहाड़ी क्षेत्रों में इन प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है, जो मानव जीवन और संपत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
4. पर्वत प्रदेश में पावस का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Ans. पर्वत प्रदेश में पावस का कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त वर्षा फसलों के उत्पादन को बढ़ा सकती है, जबकि अत्यधिक या अपर्याप्त वर्षा फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। फसलों की वृद्धि और गुणवत्ता के लिए संतुलित वर्षा आवश्यक है।
5. पर्वत प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का पावस पर क्या असर है?
Ans. जलवायु परिवर्तन पर्वत प्रदेश में पावस के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। यह वर्षा की मात्रा और वितरण को बदल सकता है, जिससे सूखा या बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। यह कृषि, जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है।
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