समय (Time): 1 घंटा
पूर्णांक (Marks): 30
सभी प्रश्नों का प्रयास करें।
प्रश्न 1: दीवान सरदार सज्जनसिंह ने पद क्यों छोड़ना चाहा? (1 अंक)
(क) बीमारी के कारण
(ख) वृद्धावस्था के कारण
(ग) राजा से नाराज़गी के कारण
(घ) परिवार के दबाव के कारण
उत्तर: (ख)
पाठ के अनुसार, दीवान साहब वृद्ध हो चुके थे और उन्हें डर था कि अब वे राज-काज ठीक से नहीं संभाल पाएँगे, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को हानि पहुँच सकती है।
प्रश्न 2: नए दीवान के चयन के लिए क्या विशेष शर्त रखी गई थी? (1 अंक)
उत्तर: नए दीवान के चयन के लिए यह शर्त रखी गई थी कि उम्मीदवारों के आचार-विचार और व्यवहार का एक महीने तक निरीक्षण किया जाएगा तथा विद्या से अधिक कर्तव्यनिष्ठा को महत्व दिया जाएगा।
प्रश्न 3: उम्मीदवारों ने अपने व्यवहार में क्या बदलाव किया? (1 अंक)
(क) वे और अधिक आलसी हो गए
(ख) वे झगड़ालू हो गए
(ग) वे विनम्र और सज्जन बनने लगे
(घ) वे प्रतियोगिता छोड़कर चले गए
उत्तर: (ग)
उम्मीदवारों ने दिखावे के लिए विनम्रता और सदाचार अपनाया ताकि वे चयन में सफल हो सकें।
प्रश्न 4: हॉकी खेल का आयोजन क्यों किया गया? (1 अंक)
(क) मनोरंजन के लिए
(ख) अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) राजा के आदेश से
(घ) समय बिताने के लिए
उत्तर: (ख)
उम्मीदवार अपनी खेल-कौशल और योग्यता दिखाना चाहते थे, जिससे चयन में लाभ मिल सके।
प्रश्न 5: किसान की मदद किसने की? (1 अंक)
(क) सभी खिलाड़ियों ने
(ख) किसी ने नहीं
(ग) एक घायल युवक ने
(घ) राजा ने
उत्तर: (ग)
एक घायल युवक, जिसके पैर में चोट लगी थी, फिर भी उसने दया और साहस दिखाते हुए किसान की सहायता की।
प्रश्न 6: दीवान के चयन के लिए विज्ञापन में क्या बातें कही गई थीं? (2 अंक)
उत्तर: दीवान के चयन के लिए दिए गए विज्ञापन में कहा गया था कि जो व्यक्ति अपने को इस पद के योग्य समझे, वह उपस्थित हो। इसमें यह भी बताया गया कि डिग्री आवश्यक नहीं है, बल्कि उम्मीदवार के आचरण, व्यवहार और कर्तव्य-पालन को अधिक महत्व दिया जाएगा।
प्रश्न 7: उम्मीदवारों का व्यवहार दिखावटी क्यों था? (2 अंक)
उत्तर: उम्मीदवारों का व्यवहार दिखावटी था क्योंकि वे केवल दीवान की नौकरी पाने के लिए अच्छा बनने का नाटक कर रहे थे। वे अपने असली स्वभाव को छिपाकर एक महीने तक अच्छे आचरण और व्यवहार का दिखावा कर रहे थे।
प्रश्न 8: किसान की सहायता करने वाले युवक के गुणों का वर्णन कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: युवक दयालु, साहसी और निःस्वार्थ था। स्वयं घायल होने के बावजूद उसने किसान की मदद की और कठिन परिस्थिति में भी हिम्मत नहीं हारी। उसके भीतर सेवा-भाव और आत्मबल था, जो उसे दूसरों से अलग बनाता है। इसके अतिरिक्त, उसमें परोपकार की भावना और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता भी थी।
प्रश्न 9: कहानी में 'परीक्षा' शीर्षक का क्या महत्व है? (3 अंक)
उत्तर: कहानी का शीर्षक 'परीक्षा' इसलिए सार्थक है क्योंकि इसमें उम्मीदवारों की वास्तविक परीक्षा उनके व्यवहार और चरित्र की थी। यह केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं थी, बल्कि उनके नैतिक गुणों, दया, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की परीक्षा थी। अंत में वही व्यक्ति सफल होता है, जो इन गुणों पर खरा उतरता है। इस प्रकार, यह शीर्षक जीवन की वास्तविक परीक्षा को भी दर्शाता है, जहाँ आचरण सबसे महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न 10: सरदार सज्जनसिंह ने युवक को दीवान क्यों चुना? (3 अंक)
उत्तर: सरदार सज्जनसिंह ने युवक को इसलिए चुना क्योंकि उसमें दया, साहस और आत्मबल जैसे गुण थे। उसने बिना किसी स्वार्थ के किसान की सहायता की, जो उसके श्रेष्ठ चरित्र का प्रमाण था। यह गुण एक आदर्श दीवान के लिए आवश्यक थे, इसलिए उसे इस पद के लिए योग्य माना गया। साथ ही, उसने कठिन परिस्थिति में धैर्य और दृढ़ता का परिचय दिया, जो नेतृत्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 11: कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? (3 अंक)
उत्तर: कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि वास्तविक महानता व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार में होती है, न कि केवल ज्ञान या दिखावे में। दया, साहस और निःस्वार्थ सेवा जैसे गुण ही व्यक्ति को सफल और सम्मानित बनाते हैं। जीवन में सच्चाई और अच्छे कर्म ही सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता दिलाते हैं। साथ ही, यह भी सीख मिलती है कि सच्चे गुण हमेशा पहचाने जाते हैं, भले ही देर से ही क्यों न हो।
प्रश्न 12: कहानी में दिखावा और वास्तविकता के अंतर को स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)
उत्तर: कहानी में कई उम्मीदवार दिखावे के लिए अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनके भीतर स्वार्थ और अहंकार होता है। वे केवल नौकरी पाने के लिए अपने स्वभाव को छिपाते हैं। इसके विपरीत, घायल युवक बिना किसी दिखावे के सच्चे मन से किसान की मदद करता है। उसका व्यवहार स्वाभाविक और निःस्वार्थ होता है। यही अंतर दिखाता है कि वास्तविक गुण दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
अंततः सच्चाई और अच्छे कर्म ही सफलता दिलाते हैं। इस प्रकार, कहानी यह स्पष्ट करती है कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसके बाहरी आचरण से।
प्रश्न 13: 'दया और आत्मबल' को आदर्श नेतृत्व के लिए क्यों आवश्यक माना गया है? (5 अंक)
उत्तर: दया और आत्मबल किसी भी नेता के लिए अत्यंत आवश्यक गुण हैं। दया से नेता दूसरों की समस्याओं को समझता है और उनकी सहायता करता है, जबकि आत्मबल उसे कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की शक्ति देता है। कहानी में युवक इन दोनों गुणों का परिचय देता है, जिससे वह एक आदर्श नेता साबित होता है। ऐसे गुणों वाला व्यक्ति ही न्यायपूर्ण और संवेदनशील शासन कर सकता है, जिससे समाज का कल्याण होता है।
इसके अतिरिक्त, आत्मबल नेता को विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहने की प्रेरणा देता है और दया उसे जनता के प्रति संवेदनशील बनाए रखती है, जिससे वह सभी का विश्वास जीतता है।
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