
1. "हैट टॉगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
तर्क: ए.जी. गार्डिनर का यह कथन यह स्पष्ट करता है कि निबंध लेखन में विषय (खूँटी) गौण होता है और लेखक के भाव तथा मनोदशा (हैट) प्रमुख होती है। विषय केवल एक आधार है, असली महत्त्व लेखक की आंतरिक अनुभूति और भावों का है।
2. "उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
तर्क: मानटेन ने जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया उसे अपने निबंधों में लिपिबद्ध किया। उनके निबंधों में लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता था। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने यह निर्णय लिया कि वे भी अपने स्वयं के अनुभव और ज्ञान के आधार पर स्वच्छंद रूप से निबंध लिखेंगे।
3. "तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद..." यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव
तर्क: तरुण अनुभवहीन होते हैं इसलिए वे भविष्य की अभिलाषाओं में जीते हैं, जबकि वृद्धों के पास जीवन का संचित अनुभव होता है जो उन्हें अतीत की स्मृतियों में सुख देता है। यह तुलना इन्हीं दो आधारों - अभिलाषा और अनुभव - पर टिकी है।
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
तर्क: लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखने थे। अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चार औरतों की चार अलग-अलग इच्छाओं की पूर्ति कर दी थी। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने भी एक ही निबंध में दोनों विषयों को समाहित करने का उपाय ढूँढा।
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्क: लेखक ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो। बुद्धदेव से लेकर महात्मा गांधी तक - हर युग में सुधारक हुए हैं। जो सुधार था वही आज दोष बन जाता है, और उस दोष का फिर नव-सुधार किया जाता है।
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर: ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग स्वतः उत्पन्न हो जाता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती और कोई भी विषय हो - लेखक उसमें अपने हृदय के आवेग को भर देता है।
इसके विपरीत लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं होता। उन्हें सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है और परिश्रम करना पड़ता है। वे गार्डिनर के कथन की यथार्थता में संदेह नहीं करते, परंतु उनके लिए निबंध लिखना स्वाभाविक नहीं बल्कि एक कठिन परिश्रम साध्य कार्य है।
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर: निमिता चाहती है कि लेखक "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" विषय पर निबंध लिखें और अमिता चाहती है कि "समाज-सुधार" विषय पर निबंध लिखा जाए।
लेखक को निम्नलिखित कठिनाइयाँ आईं - पहली, लेखक को गार्डिनर जैसी स्वतःस्फूर्त मानसिक स्थिति उपलब्ध नहीं थी। दूसरी, उनके पास न विश्वकोश था और न कोई संदर्भ ग्रंथ। तीसरी, निबंधशास्त्र के आचार्यों के परस्पर विरोधी मत - किसी ने छोटे निबंध की, किसी ने लंबे वाक्यों की, किसी ने सरल भाषा की सलाह दी - उलझन बढ़ा रहे थे। चौथी, विषयों की रूपरेखा बनाना भी कठिन था क्योंकि गार्डिनर स्वयं शीर्षक देने का भार मित्रों पर छोड़ देते थे।
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर: निबंधशास्त्र के आचार्यों ने निम्नलिखित युक्तियाँ सुझाई हैं - निबंध छोटा होना चाहिए क्योंकि छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है। निबंध के दो प्रमुख अंग हैं - सामग्री और शैली। पहले विचार-समूह संचित करने चाहिए, मनन करना चाहिए। भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे पर एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। रूपरेखा पहले से बना लेनी चाहिए।
अपनी तैयारी के बारे में विद्यार्थी स्वयं उत्तर लिखें। सामान्यतः हम पहले विषय को समझते हैं, उससे संबंधित विचार और उदाहरण एकत्र करते हैं, रूपरेखा बनाते हैं और फिर क्रमबद्ध रूप से लिखते हैं।
5. मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर: निबंध लेखन के लिए देखना, सुनना और अनुभव करना अत्यंत उपयोगी है क्योंकि इससे निबंध में जीवंतता और सत्यता आती है। जो बात लेखक ने स्वयं देखी हो वह पाठक के हृदय को सीधे स्पर्श करती है। अनुभव आधारित लेखन में लेखक की सच्ची भावनाएँ प्रतिबिंबित होती हैं जो पाठक को आकृष्ट करती हैं। सुनी हुई बातों और घटनाओं से लेखक को विविध दृष्टिकोण मिलते हैं जो निबंध को समृद्ध बनाते हैं। इस प्रकार मानटेन की पद्धति निबंध को कृत्रिम नहीं बल्कि स्वाभाविक और प्रभावशाली बनाती है।
'निबंध' का शाब्दिक अर्थ है- 'बाँधना' (नि+बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गढ़ा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
उत्तर: 1. निबंध क्या है?
निबंध गद्य की वह विधा है जिसमें किसी विषय पर लेखक अपने विचार, अनुभव और भावनाओं को तार्किक और क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।
2. निबंध की विशेषताएँ लिखिए
3. निबंध लेखन की प्रक्रिया (आरेख के आधार पर)
4. अपना निबंध लेखन का तरीका (उदाहरण उत्तर)
मुझे निबंध लिखने का तरीका यह लगता है:
यह तरीका बेहतर है क्योंकि इससे निबंध स्पष्ट, व्यवस्थित और प्रभावी बनता है।
5. शैली क्या है?
शैली का अर्थ है- अपने विचारों को प्रस्तुत करने का तरीका।
6. क्यों आवश्यक है रूपरेखा निर्माण?
रूपरेखा बनाने से निबंध व्यवस्थित और क्रमबद्ध बनता है तथा विषय से भटकाव नहीं होता।
"तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक"
यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव-विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि- युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं, जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।
पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए-
उत्तर: जो युवा अभी तक जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों से अपरिचित हैं, उन्हें संसार बहुत सुंदर और रोमांचक दिखाई देता है। दूरी से हर वस्तु आकर्षक लगती है। जैसे-जैसे वे व्यावहारिक जीवन में उतरते हैं, वास्तविकता की कठोरता का अनुभव होने लगता है और संसार का वह मनमोहक चित्र धुँधला पड़ जाता है। यही कारण है कि कल्पना में जीने वाले और अनुभवहीन लोग जीवन को जितना सरल और सुंदर समझते हैं, अनुभवी लोग उतना नहीं।
उत्तर: मानव समाज सदा परिवर्तनशील रहा है। हर युग की अपनी समस्याएँ होती हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है। बुद्ध ने हिंसा और जाति-भेद के विरुद्ध सुधार किया, कबीर ने पाखंड के विरुद्ध, राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध। इसका अर्थ यह नहीं कि उनके प्रयास व्यर्थ थे - बल्कि समाज निरंतर आगे बढ़ता है और हर नई पीढ़ी को नए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है।
उत्तर: यह एक शाश्वत सत्य है। आज का युवा जो क्रांति और परिवर्तन चाहता है, कल वही बूढ़ा होकर अपनी जवानी के दिनों को स्वर्णिम काल मानने लगेगा। जो आज नया है वह कल पुराना होगा और उसकी स्मृति सुखद लगेगी। इस प्रकार तरुण और वृद्ध की मानसिकता एक ही चक्र में घूमती रहती है।
उत्तर: कम शब्दों में अधिक और सटीक बात कहना ही श्रेष्ठ लेखन की पहचान है। बड़े निबंध में प्रायः विषय से भटकाव हो जाता है और रचना की सुंदरता नष्ट हो जाती है। छोटे निबंध में हर वाक्य का महत्त्व होता है, कोई भी शब्द अनावश्यक नहीं होता। जैसे छोटी-सी कविता अनेक भावों को समेट लेती है, उसी प्रकार एक कसा हुआ छोटा निबंध बड़े प्रभाव वाला होता है।
इस निबंध में लेखक को दो विषयों ("दूर के ढोल सुहावने होते हैं" और "समाज-सुधार") पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर: मुझे 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय सरल लगा क्योंकि यह लोकोक्ति है और रोजमर्रा के अनुभव से जुड़ा है। 'समाज-सुधार' कठिन लगा क्योंकि यह बहुत व्यापक है और तथ्यों की जरूरत पड़ती है।
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर:
2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: आज भी समाज में कई व्यक्ति और संस्थाएँ विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं-
3. आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर: यदि मुझे समाज-सुधार का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित कार्य करना चाहूँगा-
4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर: भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन के तीन महत्वपूर्ण पक्षों-नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक-का संतुलन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
इस प्रकार भारतीय ज्ञान साहित्य हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता और संतुलन के लिए नैतिकता, आध्यात्मिकता और व्यवहारिकता-तीनों का समन्वय आवश्यक है।
1. "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- "आम के आम गुठलियों के दाम।" अब आप इस लोकोक्ति और "जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास" विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
विषय: "आम के आम, गुठलियों के दाम" और जैविक खाद
"आम के आम, गुठलियों के दाम" का अर्थ है- एक कार्य से दो लाभ प्राप्त होना। आज के समय में जैविक खाद बनाना इस लोकोक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण है।
घर के रसोई कचरे, जैसे सब्जियों के छिलके, फल के अवशेष आदि को फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे एक ओर कचरा कम होता है और दूसरी ओर खेतों व पौधों के लिए उपयोगी खाद प्राप्त होती है।
जैविक खाद पर्यावरण के लिए भी लाभदायक होती है क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से बचाती है। इस प्रकार, एक ही कार्य से हमें स्वच्छता और उपजाऊ मिट्टी-दोनों का लाभ मिलता है।
अतः यह कहा जा सकता है कि जैविक खाद बनाना "आम के आम, गुठलियों के दाम" की लोकोक्ति को पूर्ण रूप से सार्थक करता है।
2. "जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न होता है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर:
दिनांक: 15 जुलाई 20XX
आज मुझे एक महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ। मैंने हमेशा सुना था कि बड़े शहरों के स्कूल बहुत अच्छे होते हैं और वहाँ पढ़ाई का स्तर बहुत ऊँचा होता है। दूर से मुझे यह सब बहुत आकर्षक और आदर्श लगता था।
लेकिन जब मुझे एक बड़े शहर के स्कूल में पढ़ने का अवसर मिला, तो मेरा अनुभव कुछ अलग ही था। वहाँ पढ़ाई तो अच्छी थी, परंतु छात्रों पर बहुत अधिक दबाव था। प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक थी कि कई छात्र तनाव में रहते थे।
इसके विपरीत, मेरे पुराने स्कूल में भले ही सुविधाएँ कम थीं, लेकिन वहाँ का वातावरण अधिक सहज और आनंददायक था।
इस अनुभव से मुझे समझ आया कि "दूर के ढोल सुहावने होते हैं।" जो चीज़ दूर से आकर्षक लगती है, वह पास जाकर वैसी ही हो, यह जरूरी नहीं।
"मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा"
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों 'निबंध' और 'रचना' के मेल से बना है, जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।
उत्तर: समास की परिभाषा: समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। जैसे - गंगा + जल = गंगाजल।
समास के छः प्रमुख भेद:
पाठ से समास विग्रह के उदाहरण:

दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द 'बोल' के पहले 'अनादि' में 'अ' उपसर्ग जोड़कर नया शब्द बना है। उपसर्ग ऐसे शब्दांश होते हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता, ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-
रेखांकित शब्दों में मूल शब्द 'सुधार' के बाद 'क' प्रत्यय और 'कठिन' शब्द के बाद 'आई' प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-
उत्तर:
3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है-
मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज
उदाहरण: मधुर → मधुरता, मधुरमय, समधुर
उत्तर: उपसर्ग/प्रत्यय से नए शब्द:
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1. "खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।"
पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर: अमीर खुसरो की कुछ प्रसिद्ध अनमेलियाँ/मुकरियाँ (पाठ्य सामग्री के अनुसार संकलन का उदाहरण):
2. कक्षा में 'युवा और वृद्ध-दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर' पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर:
विषय: युवा और वृद्ध - दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर
पक्ष 1 (युवा पक्ष):
पक्ष 2 (वृद्ध पक्ष):
नियम (मल्हार पाठ्यपुस्तक के अनुसार):
"निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।"
नीचे 'निबंध' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
निबंध (हिंदी); निबंधः (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मजमूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाइडू (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कट्टुरै (तमिल); उपन्यासमु (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।
उत्तर: 'निबंध' शब्द अन्य भाषाओं में इस प्रकार कहा जाता है-
(आप अपनी जानकारी के अनुसार कोई भी अन्य भाषा लिख सकते हैं।)
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
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| 3. Are NCERT Solutions sufficient for scoring well in Class 9 exams? | ![]() |
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