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NCERT Solutions: क्या लिखूँ?

NCERT Solutions: क्या लिखूँ?

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. "हैट टॉगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना 
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना 
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना 
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
तर्क: ए.जी. गार्डिनर का यह कथन यह स्पष्ट करता है कि निबंध लेखन में विषय (खूँटी) गौण होता है और लेखक के भाव तथा मनोदशा (हैट) प्रमुख होती है। विषय केवल एक आधार है, असली महत्त्व लेखक की आंतरिक अनुभूति और भावों का है।

2. "उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना 
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना 
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना 
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
तर्क: मानटेन ने जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया उसे अपने निबंधों में लिपिबद्ध किया। उनके निबंधों में लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता था। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने यह निर्णय लिया कि वे भी अपने स्वयं के अनुभव और ज्ञान के आधार पर स्वच्छंद रूप से निबंध लिखेंगे।

3. "तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद..." यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना 
(ख) ज्ञान और शिक्षा 
(ग) परिश्रम और उपलब्धि 
(घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव
तर्क: तरुण अनुभवहीन होते हैं इसलिए वे भविष्य की अभिलाषाओं में जीते हैं, जबकि वृद्धों के पास जीवन का संचित अनुभव होता है जो उन्हें अतीत की स्मृतियों में सुख देता है। यह तुलना इन्हीं दो आधारों - अभिलाषा और अनुभव - पर टिकी है।

4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए 
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए 
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए 
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
तर्क: लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखने थे। अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चार औरतों की चार अलग-अलग इच्छाओं की पूर्ति कर दी थी। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने भी एक ही निबंध में दोनों विषयों को समाहित करने का उपाय ढूँढा।

5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। 
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। 
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। 
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्क: लेखक ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो। बुद्धदेव से लेकर महात्मा गांधी तक - हर युग में सुधारक हुए हैं। जो सुधार था वही आज दोष बन जाता है, और उस दोष का फिर नव-सुधार किया जाता है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है? 
उत्तर: ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग स्वतः उत्पन्न हो जाता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती और कोई भी विषय हो - लेखक उसमें अपने हृदय के आवेग को भर देता है।
इसके विपरीत लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं होता। उन्हें सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है और परिश्रम करना पड़ता है। वे गार्डिनर के कथन की यथार्थता में संदेह नहीं करते, परंतु उनके लिए निबंध लिखना स्वाभाविक नहीं बल्कि एक कठिन परिश्रम साध्य कार्य है।

2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:

  • तरुण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे अपनी महत्त्वाकांक्षाओं और स्वप्नों को वर्तमान में साकार होते नहीं देखते। वे भविष्य में बड़े परिवर्तन और क्रांति चाहते हैं और वर्तमान की धीमी गति से व्याकुल रहते हैं।
  • वृद्ध वर्तमान से असंतुष्ट इसलिए रहते हैं क्योंकि वर्तमान उनके अनुभव में संचित अतीत की सुखद स्मृतियों से मेल नहीं खाता। वे चाहते हैं कि पुरानी परंपराएँ, मूल्य और व्यवस्थाएँ बनी रहें, परंतु तेज़ी से बदलता समाज उन्हें अपरिचित लगता है।

3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं? 
उत्तर: निमिता चाहती है कि लेखक "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" विषय पर निबंध लिखें और अमिता चाहती है कि "समाज-सुधार" विषय पर निबंध लिखा जाए।
लेखक को निम्नलिखित कठिनाइयाँ आईं - पहली, लेखक को गार्डिनर जैसी स्वतःस्फूर्त मानसिक स्थिति उपलब्ध नहीं थी। दूसरी, उनके पास न विश्वकोश था और न कोई संदर्भ ग्रंथ। तीसरी, निबंधशास्त्र के आचार्यों के परस्पर विरोधी मत - किसी ने छोटे निबंध की, किसी ने लंबे वाक्यों की, किसी ने सरल भाषा की सलाह दी - उलझन बढ़ा रहे थे। चौथी, विषयों की रूपरेखा बनाना भी कठिन था क्योंकि गार्डिनर स्वयं शीर्षक देने का भार मित्रों पर छोड़ देते थे।

4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर: निबंधशास्त्र के आचार्यों ने निम्नलिखित युक्तियाँ सुझाई हैं - निबंध छोटा होना चाहिए क्योंकि छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है। निबंध के दो प्रमुख अंग हैं - सामग्री और शैली। पहले विचार-समूह संचित करने चाहिए, मनन करना चाहिए। भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे पर एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। रूपरेखा पहले से बना लेनी चाहिए।
अपनी तैयारी के बारे में विद्यार्थी स्वयं उत्तर लिखें। सामान्यतः हम पहले विषय को समझते हैं, उससे संबंधित विचार और उदाहरण एकत्र करते हैं, रूपरेखा बनाते हैं और फिर क्रमबद्ध रूप से लिखते हैं।

5. मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर: निबंध लेखन के लिए देखना, सुनना और अनुभव करना अत्यंत उपयोगी है क्योंकि इससे निबंध में जीवंतता और सत्यता आती है। जो बात लेखक ने स्वयं देखी हो वह पाठक के हृदय को सीधे स्पर्श करती है। अनुभव आधारित लेखन में लेखक की सच्ची भावनाएँ प्रतिबिंबित होती हैं जो पाठक को आकृष्ट करती हैं। सुनी हुई बातों और घटनाओं से लेखक को विविध दृष्टिकोण मिलते हैं जो निबंध को समृद्ध बनाते हैं। इस प्रकार मानटेन की पद्धति निबंध को कृत्रिम नहीं बल्कि स्वाभाविक और प्रभावशाली बनाती है।

विधा से संवाद

निबंध लिखने की कला

'निबंध' का शाब्दिक अर्थ है- 'बाँधना' (नि+बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गढ़ा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
निबंध लिखने की कला

उत्तर: 1. निबंध क्या है?
निबंध गद्य की वह विधा है जिसमें किसी विषय पर लेखक अपने विचार, अनुभव और भावनाओं को तार्किक और क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।
2. निबंध की विशेषताएँ लिखिए

  • विचारपूर्ण और तार्किक होता है
  • क्रमबद्ध प्रस्तुति होती है
  • भाषा सरल और प्रभावी होती है
  • भावनात्मक एवं साहित्यिक शैली होती है

3. निबंध लेखन की प्रक्रिया (आरेख के आधार पर)

  1. प्रेरणा - लिखने की इच्छा और विचार उत्पन्न होना
  2. विषय चयन - सही विषय चुनना
  3. सामग्री संग्रह - जानकारी और उदाहरण जुटाना
  4. रूपरेखा निर्माण - लिखने की योजना बनाना
  5. शैली निर्धारण - भाषा और प्रस्तुति तय करना
  6. लेखन और समापन - निबंध लिखना और निष्कर्ष देना

4. अपना निबंध लेखन का तरीका (उदाहरण उत्तर)
मुझे निबंध लिखने का तरीका यह लगता है:

  • पहले विषय को समझना
  • मुख्य बिंदु लिखना
  • रूपरेखा बनाना
  • सरल भाषा में लिखना
  • अंत में निष्कर्ष देना

यह तरीका बेहतर है क्योंकि इससे निबंध स्पष्ट, व्यवस्थित और प्रभावी बनता है।
5. शैली क्या है?
शैली का अर्थ है- अपने विचारों को प्रस्तुत करने का तरीका।
6. क्यों आवश्यक है रूपरेखा निर्माण?
रूपरेखा बनाने से निबंध व्यवस्थित और क्रमबद्ध बनता है तथा विषय से भटकाव नहीं होता।

भाव-विस्तार

"तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक"
यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव-विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि- युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं, जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।
पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए-

  • "जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।" 

उत्तर: जो युवा अभी तक जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों से अपरिचित हैं, उन्हें संसार बहुत सुंदर और रोमांचक दिखाई देता है। दूरी से हर वस्तु आकर्षक लगती है। जैसे-जैसे वे व्यावहारिक जीवन में उतरते हैं, वास्तविकता की कठोरता का अनुभव होने लगता है और संसार का वह मनमोहक चित्र धुँधला पड़ जाता है। यही कारण है कि कल्पना में जीने वाले और अनुभवहीन लोग जीवन को जितना सरल और सुंदर समझते हैं, अनुभवी लोग उतना नहीं।

  • "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।" 

उत्तर: मानव समाज सदा परिवर्तनशील रहा है। हर युग की अपनी समस्याएँ होती हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है। बुद्ध ने हिंसा और जाति-भेद के विरुद्ध सुधार किया, कबीर ने पाखंड के विरुद्ध, राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध। इसका अर्थ यह नहीं कि उनके प्रयास व्यर्थ थे - बल्कि समाज निरंतर आगे बढ़ता है और हर नई पीढ़ी को नए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है।

  • "आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।" 

उत्तर: यह एक शाश्वत सत्य है। आज का युवा जो क्रांति और परिवर्तन चाहता है, कल वही बूढ़ा होकर अपनी जवानी के दिनों को स्वर्णिम काल मानने लगेगा। जो आज नया है वह कल पुराना होगा और उसकी स्मृति सुखद लगेगी। इस प्रकार तरुण और वृद्ध की मानसिकता एक ही चक्र में घूमती रहती है।

  • "निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।" 

उत्तर: कम शब्दों में अधिक और सटीक बात कहना ही श्रेष्ठ लेखन की पहचान है। बड़े निबंध में प्रायः विषय से भटकाव हो जाता है और रचना की सुंदरता नष्ट हो जाती है। छोटे निबंध में हर वाक्य का महत्त्व होता है, कोई भी शब्द अनावश्यक नहीं होता। जैसे छोटी-सी कविता अनेक भावों को समेट लेती है, उसी प्रकार एक कसा हुआ छोटा निबंध बड़े प्रभाव वाला होता है।

मेरा अनुभव

इस निबंध में लेखक को दो विषयों ("दूर के ढोल सुहावने होते हैं" और "समाज-सुधार") पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर: 
मुझे 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय सरल लगा क्योंकि यह लोकोक्ति है और रोजमर्रा के अनुभव से जुड़ा है। 'समाज-सुधार' कठिन लगा क्योंकि यह बहुत व्यापक है और तथ्यों की जरूरत पड़ती है।

विषयों से संवाद

1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर:

  • बुद्धदेव:गौतम बुद्ध ने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश देकर समाज में फैली हिंसा और जाति-भेद के विरुद्ध क्रांति की। बौद्ध धर्म की स्थापना कर उन्होंने विश्व को शांति का संदेश दिया।
  • महावीर स्वामी: जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर ने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों से समाज को नई दिशा दी।
  • शंकराचार्य: आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रतिपादन करके भारतीय दर्शन को सुदृढ़ किया और बिखरे हुए हिंदू समाज को एकता के सूत्र में बाँधा।
  • कबीर: कबीरदास ने हिंदू-मुस्लिम एकता, जाति-प्रथा के विरोध और सच्ची भक्ति का संदेश अपने दोहों और पदों के माध्यम से दिया।
  • गुरु नानक: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने ईश्वर की एकता, मानव-समानता और सेवा का संदेश फैलाया।

2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: आज भी समाज में कई व्यक्ति और संस्थाएँ विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं-

  • स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में: "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा कई NGOs ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण: "चिपको आंदोलन" ने पेड़ों की रक्षा का संदेश दिया। आज भी "वन-महोत्सव", स्वच्छ भारत अभियान और कई पर्यावरण संगठन वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण पर कार्य कर रहे हैं।
  • दिव्यांगजन के लिए कार्य: "दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्रालय" तथा कई संस्थाएँ दिव्यांग लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार और समान अवसर प्रदान करने का कार्य कर रही हैं।
  • असमानता के विरुद्ध कार्य: "प्रथम (NGO)" जैसी संस्थाएँ गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करती हैं। कई संगठन सामाजिक समानता और मानवाधिकारों के लिए कार्यरत हैं।

3. आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर: यदि मुझे समाज-सुधार का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित कार्य करना चाहूँगा-

  • लिंग भेद समाप्त करना: मैं स्कूलों और समाज में जागरूकता अभियान चलाकर लड़कियों और लड़कों को समान अधिकार देने पर बल दूँगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाऊँगा, वृक्षारोपण करूँगा और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करूँगा।
  • शिक्षा का प्रसार: गरीब और वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा और ट्यूशन उपलब्ध कराऊँगा ताकि वे भी आगे बढ़ सकें।
  • डिजिटल साक्षरता: गाँवों और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा के केंद्र खोलकर लोगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ूँगा।

4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। 
उत्तर: भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन के तीन महत्वपूर्ण पक्षों-नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक-का संतुलन अत्यंत आवश्यक माना गया है।

  • भगवद्गीता में कर्मयोग का सिद्धांत दिया गया है, जो सिखाता है कि हमें अपने कर्तव्य का पालन करते हुए फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।
  • उपनिषद आत्मज्ञान और सत्य की खोज पर बल देते हैं, जिससे व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है।
  • रामायण मर्यादा, आदर्श जीवन और नैतिक मूल्यों का पालन सिखाती है।
  • अर्थशास्त्र जीवन के व्यावहारिक पक्ष-राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन-का ज्ञान देता है।

इस प्रकार भारतीय ज्ञान साहित्य हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता और संतुलन के लिए नैतिकता, आध्यात्मिकता और व्यवहारिकता-तीनों का समन्वय आवश्यक है।

सृजन

1. "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- "आम के आम गुठलियों के दाम।" अब आप इस लोकोक्ति और "जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास" विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
विषय: 
"आम के आम, गुठलियों के दाम" और जैविक खाद
"आम के आम, गुठलियों के दाम" का अर्थ है- एक कार्य से दो लाभ प्राप्त होना। आज के समय में जैविक खाद बनाना इस लोकोक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण है।
घर के रसोई कचरे, जैसे सब्जियों के छिलके, फल के अवशेष आदि को फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे एक ओर कचरा कम होता है और दूसरी ओर खेतों व पौधों के लिए उपयोगी खाद प्राप्त होती है।
जैविक खाद पर्यावरण के लिए भी लाभदायक होती है क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से बचाती है। इस प्रकार, एक ही कार्य से हमें स्वच्छता और उपजाऊ मिट्टी-दोनों का लाभ मिलता है।
अतः यह कहा जा सकता है कि जैविक खाद बनाना "आम के आम, गुठलियों के दाम" की लोकोक्ति को पूर्ण रूप से सार्थक करता है।

2. "जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।" 
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न होता है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर:
दिनांक: 
15 जुलाई 20XX
आज मुझे एक महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ। मैंने हमेशा सुना था कि बड़े शहरों के स्कूल बहुत अच्छे होते हैं और वहाँ पढ़ाई का स्तर बहुत ऊँचा होता है। दूर से मुझे यह सब बहुत आकर्षक और आदर्श लगता था।
लेकिन जब मुझे एक बड़े शहर के स्कूल में पढ़ने का अवसर मिला, तो मेरा अनुभव कुछ अलग ही था। वहाँ पढ़ाई तो अच्छी थी, परंतु छात्रों पर बहुत अधिक दबाव था। प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक थी कि कई छात्र तनाव में रहते थे।
इसके विपरीत, मेरे पुराने स्कूल में भले ही सुविधाएँ कम थीं, लेकिन वहाँ का वातावरण अधिक सहज और आनंददायक था।
इस अनुभव से मुझे समझ आया कि "दूर के ढोल सुहावने होते हैं।" जो चीज़ दूर से आकर्षक लगती है, वह पास जाकर वैसी ही हो, यह जरूरी नहीं।

भाषा से संवाद

समास

"मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा"
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों 'निबंध' और 'रचना' के मेल से बना है, जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।

उत्तर: समास की परिभाषा: समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। जैसे - गंगा + जल = गंगाजल।

समास के छः प्रमुख भेद:

  1. तत्पुरुष समास - इसमें उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच में आने वाले परसर्गों (का, से, पर आदि) का लोप हो जाता है। जैसे - रसोईघर = रसोई के लिए घर।
  2. कर्मधारय समास - इसमें पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है। जैसे - नीलकमल = नील + कमल = नीले रंग का कमल।
  3. द्विगु समास - इसमें पूर्वपद संख्यावाची शब्द होता है और यह समूहवाची होता है। जैसे - तिरंगा = तीन रंगों का समाहार।
  4. बहुव्रीहि समास - इसमें दोनों पद गौण होते हैं और ये मिलकर किसी अन्य पद के विषय में संकेत करते हैं। जैसे - पीतांबर = पीला है अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थात कृष्ण/विष्णु।
  5. द्वंद्व समास - इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और जोड़ने वाले अव्यय का लोप हो जाता है। जैसे - भाई-बहन = भाई और बहन।
  6. अव्ययीभाव समास - इसमें पूर्वपद अव्यय होता है। जैसे - यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।

पाठ से समास विग्रह के उदाहरण:

समास

उपसर्ग एवं प्रत्यय

  • "सेनापति ने भी अपनी कविता दुहराई कर दी है।"
  • "समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।"

दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द 'बोल' के पहले 'अनादि' में 'अ' उपसर्ग जोड़कर नया शब्द बना है। उपसर्ग ऐसे शब्दांश होते हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता, ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।

अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-

  • "आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।"
  • "लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।"

रेखांकित शब्दों में मूल शब्द 'सुधार' के बाद 'क' प्रत्यय और 'कठिन' शब्द के बाद 'आई' प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: 

  • उपसर्ग - भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड जो शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
    उदाहरण - दुर्बोध = दुर् + बोध, अनादि = अन् + आदि।
  • प्रत्यय - भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
    उदाहरण - सुधारक = सुधार + क, कठिनाई = कठिन + आई।

2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-

  • निबंध लिखना बड़ी __________ ("कठिन") की बात है।
  • वर्तमान में दोनों को __________ ("संतोष") होता है।
  • वाक्यों में कुछ __________ ("स्पष्ट") भी चाहिए, क्योंकि यह __________ ("स्पष्ट") या __________ ("बोध") गंभीरता ला देती है।

उत्तर: 

  • निबंध लिखना बड़ी कठिनाई (कठिन + आई) की बात है।
  • वर्तमान से दोनों को असंतोष (अ + संतोष) होता है।
  • वाक्यों में कुछ अस्पष्टता (अ + स्पष्ट + ता) भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता (अ + स्पष्ट) या दुर्बोधता (दुर् + बोध + ता) गांभीर्य ला देती है।

3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है-
मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज
उदाहरण: मधुर → मधुरता, मधुरमय, समधुर
उत्तर: उपसर्ग/प्रत्यय से नए शब्द:

  • मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
  • सुधार → सुधारक, असुधार, सुधारना
  • सुंदर → सुंदरता, असुंदर, सुंदरतम
  • गति → गतिमान, दुर्गति, प्रगति
  • समाज → सामाजिक, असामाजिक, समाजसुधार

भाव एक शब्द अनेक

इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव एक शब्द अनेक

गतिविधियाँ

1. "खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।" 
पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।

उत्तर: अमीर खुसरो की कुछ प्रसिद्ध अनमेलियाँ/मुकरियाँ (पाठ्य सामग्री के अनुसार संकलन का उदाहरण):

  • खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा। (पाठ में दी गई)
  • एक मुकरी: "क्या कहूँ क्या, क्या कहूँ क्या, क्या कहूँ क्या रे?" जवाब: "क्या कहूँ क्या, क्या कहूँ क्या, क्या कहूँ क्या रे!"
  • पहेली: "अंधा क्या खाएगा?" जवाब: "अंधा अंधेरे में खाएगा।"

2. कक्षा में 'युवा और वृद्ध-दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर' पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर:
विषय: युवा और वृद्ध - दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर
पक्ष 1 (युवा पक्ष):

  • युवा क्रांति के समर्थक हैं, परिवर्तन चाहते हैं।
  • वे भविष्य को उज्ज्वल मानते हैं।
  • पुरानी परंपराओं को तोड़कर नया समाज बनाना चाहते हैं।

पक्ष 2 (वृद्ध पक्ष):

  • वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक हैं।
  • अनुभव से सीखकर सुधार चाहते हैं।
  • अतीत को सुखद मानते हैं और वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।

नियम (मल्हार पाठ्यपुस्तक के अनुसार):

  • प्रत्येक वक्ता को 2 मिनट।
  • पहले पक्ष, फिर विपक्ष।
  • अंत में प्रतिवाद।
  • शिष्टाचार बनाए रखना अनिवार्य।

भाषा संगम

"निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।"
नीचे 'निबंध' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
निबंध (हिंदी); निबंधः (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मजमूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाइडू (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कट्टुरै (तमिल); उपन्यासमु (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप 'निबंध' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर: 'निबंध' शब्द अन्य भाषाओं में इस प्रकार कहा जाता है-

  • English (अंग्रेज़ी): Essay
  • French (फ्रेंच): Essai
  • Spanish (स्पेनिश): Ensayo

(आप अपनी जानकारी के अनुसार कोई भी अन्य भाषा लिख सकते हैं।)

  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर: 

  • English: Before writing an essay, one should prepare its outline.
  • Bhojpuri: निबंध लिखे से पहिले ओकर रूपरेखा बना लेवे के चाहीं।
  • Awadhi: निबंध लिखै से पहिले ओकर रूपरेखा बना लेइ चाही।
  • Hinglish (optional): Essay likhne se pehle uski outline bana leni chahiye.
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FAQs on NCERT Solutions: क्या लिखूँ?

1. What are the main themes covered in Class 9 NCERT Solutions?
Ans. The main themes covered in Class 9 NCERT Solutions include subjects such as Mathematics, Science, Social Science, and English. Each subject focuses on foundational concepts, problem-solving techniques, and critical thinking skills relevant to the curriculum. Key topics include algebra, geometry, physics principles, chemical reactions, historical events, and literary analysis.
2. How can students effectively use NCERT Solutions for their exam preparation?
Ans. Students can effectively use NCERT Solutions by first reading the chapter thoroughly to understand the concepts. They should then attempt the exercises provided in the NCERT textbook before referring to the solutions for guidance. This practice helps reinforce their understanding and improves their problem-solving skills. Additionally, reviewing previous years' question patterns can enhance their exam readiness.
3. Are NCERT Solutions sufficient for scoring well in Class 9 exams?
Ans. While NCERT Solutions provide a comprehensive overview and are aligned with the syllabus, they should be supplemented with additional resources such as reference books, sample papers, and revision notes. Engaging in group study and discussing concepts can also help solidify knowledge and ensure thorough preparation for exams.
4. What role does the NCERT textbook play in the learning process for Class 9 students?
Ans. The NCERT textbook serves as the primary resource for Class 9 students, offering structured content that adheres to the curriculum. It presents concepts in a clear and concise manner, includes illustrative examples, and provides exercises that facilitate practice. The textbook's systematic approach helps students build a strong foundation in various subjects.
5. How are the NCERT Solutions structured to aid understanding?
Ans. The NCERT Solutions are structured to provide step-by-step explanations for each question, ensuring clarity in understanding complex concepts. Each solution is designed to break down problems into manageable parts, allowing students to follow the reasoning process. This method fosters better comprehension and encourages independent problem-solving skills among learners.
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