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NCERT Solutions: संवादहीन

NCERT Solutions: संवादहीन

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1: कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता

उत्तर: (ख) ममता और स्नेह
तर्क: ताई अपनी सारी ममता मिट्टू पर उँडेल देती हैं। वह उसके लिए नियमपूर्वक खाना बनाती हैं, उसके वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखती हैं। जब जब वह घर से बाहर जाती थीं तो मिट्टू की चिंता में दरवाज़ों की साँकलें टोहती रहती थीं। यह संबंध माँ-बेटे जैसा है जिसमें ममता और स्नेह का भाव प्रमुख है।

प्रश्न 2: जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता

उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता
तर्क: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। पिंजरे में बंद मिट्टू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी। वह किसी की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने मिट्टू को खुली हवा में आने का मौका दिया - यह करुणा और नैतिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था।

प्रश्न 3: मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह
तर्क: मिट्टू पिंजरे का आदी हो चुका था, परंतु जैसे ही उसे खुली हवा और विस्तृत आकाश का अवसर मिला, उसने उड़ान भर ली। यह स्वाभाविक है कि पक्षी का मन खुले आकाश में उड़ने की चाह रखता है। मिट्टू का उड़ना यही संदेश देता है कि स्वतंत्रता हर प्राणी की मूलभूत आकांक्षा होती है।

प्रश्न 4: ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद

उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
तर्क: ताई के बहू-बेटे शहरों में चले गए, बेटियाँ गृहस्थी में रम गईं। बड़े भरे-पूरे घर में ताई अकेली रह गईं। उनसे बात करने वाला, उनका हाल-चाल पूछने वाला कोई नहीं था। इसीलिए वह मिट्टू से संवाद करती थीं जो उनके सूनेपन का एकमात्र सहारा था।

प्रश्न 5: कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता

उत्तर: (ग) अकेलापन
तर्क: आधुनिक समाज में परिवार के सदस्य रोज़गार और बेहतर जीवन की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, और गाँवों में वृद्ध माता-पिता अकेले रह जाते हैं। ताई का जीवन इसी विसंगति का प्रतीक है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1: "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" - ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर: ताई यहाँ 'नैया' से अपने जीवन की नाव का अभिप्राय ले रही हैं। वे अपने शेष जीवन की कठिनाइयों की बात कर रही हैं। बुढ़ापे में अकेलापन, परिवार की अनुपस्थिति, और जीवन के प्रति अनिश्चितता उन्हें यह कहने पर विवश करती है। यह एक वृद्ध स्त्री की वेदना और ईश्वर से गुहार है कि वह उनके अंतिम दिन सरलता से बिताने में सहायता करें।

प्रश्न 2: "धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" - इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस वाक्य में ताई के जीवन में आई आर्थिक और सामाजिक गिरावट की ओर संकेत है। पहले ताई के घर में खेती-बाड़ी थी, कारबार था, नौकर-चाकर थे। धीरे-धीरे बच्चों के चले जाने, खेती न होने और बुढ़ापे के कारण सब कुछ दूसरों के हाथ में चला गया। यह पलायन और परिवारों के बिखराव की ओर भी संकेत है।

प्रश्न 3: "ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।" - क्यों?
उत्तर: ताई के जीवन में जो शून्य परिवार के जाने से उत्पन्न हुआ था, उसे भरने का काम मिट्टू ने किया। मिट्टू उनसे बातें करता, उनकी बातें सुनता, उन्हें सुबह जगाता और उनके सवालों का जवाब देता। एक ऐसे प्राणी को पाकर जो उनके साथ संवाद कर सकता था, ताई की दबी-छुपी ममता उस पर उमड़ पड़ी। बच्चों के जाने के बाद जो स्नेह अधूरा रह गया था, वह सब मिट्टू पर न्यौछावर हो गया।

प्रश्न 4: "अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।" इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर: मिट्टू के आने से पहले ताई अपनी अकेली जान के लिए एक वक्त चूल्हा जलाती थीं, व्रत-उपवास के बहाने खाना बनाना भी टाल जाती थीं। मिट्टू के आने के बाद उनमें निम्न परिवर्तन आए:

  • वह नियमपूर्वक मिट्टू के लिए दाल-भात बनाने लगीं।
  • उन्हें किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हैं, किस पेड़ में आखिरी अमरूद बचे हैं - इसकी पूरी जानकारी रहने लगी।
  • घर में रौनक आ गई, अड़ोस-पड़ोस की बहू-बेटियाँ मिट्टू से मन बहलाने आने लगीं।
  • वे बाहर जाने से कतराने लगीं क्योंकि मिट्टू का वियोग उन्हें सहन नहीं होता था।

प्रश्न 5: "जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के, सिद्धांतप्रिय और संवेदनशील व्यक्ति थे। वे अपने नियम-सिद्धांतों पर चलते और किसी को कष्ट न पहुँचे इसका ध्यान रखते थे।
उदाहरण:

  • पिंजरे में बंद मिट्टू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी, क्योंकि वे दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे।
  • उन्होंने कमरा बंद करके मिट्टू के पिंजरे का दरवाज़ा खोला ताकि वह खुली हवा में आ सके और वे अपने पाप का प्रायश्चित कर सकें।
  • मिट्टू के उड़ जाने पर वे खाना-पीना छोड़कर घंटों पिंजरे के सामने बैठकर नए तोते को पाठ पढ़ाते रहे।

प्रश्न 6: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है-ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'संवादहीन' शीर्षक ताई के लिए सर्वाधिक सार्थक है, यद्यपि यह कहानी के सभी पात्रों पर किसी न किसी रूप में लागू होता है।

  • ताई के बहू-बेटे शहर चले गए, वे पूरी तरह संवादहीन हो गईं। मिट्टू ही उनका एकमात्र संवाद-साथी था। मिट्टू के उड़ जाने के बाद ताई फिर से पूरी तरह संवादहीन हो गईं।
  • नया तोता (एवजी मिट्टू) भी संवादहीन है - वह ताई को देखकर कोई हरकत नहीं करता।
  • जगन मास्टर और ताई के बीच भी एक भावनात्मक संवादहीनता है - दोनों अपनी-अपनी पीड़ा में हैं पर एक-दूसरे को समझ नहीं पाते।

इस प्रकार यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव - आधुनिक जीवन में मानवीय संबंधों की शून्यता - को बखूबी अभिव्यक्त करता है।

प्रश्न 7: "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: ताई का घर एक समय बड़ा और भरा-पूरा था - पूरा परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर सब थे। लेकिन धीरे-धीरे सब चले गए। बेटे शहर में बस गए, बेटियाँ विदा हो गईं, नौकर-चाकर भी चले गए। जो घर कभी गुलज़ार था वह अब वीरान हो गया। इसीलिए उसे 'सूना खंडहर' कहा गया - बाहर से बड़ा दिखने वाला घर भीतर से खाली, उजड़ा और जर्जर हो चुका था, ठीक उसी तरह जैसे ताई का जीवन।

मेरे प्रश्न

1. उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
प्रश्न क: ताई के सूनापन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख: ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
उत्तर: 
प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

2. उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न क: ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उत्तर: 
प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

3. उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख: गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?

उत्तर: प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

4. उत्तर: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख: शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?

उत्तर: प्रश्न ख: शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?

मेरे अनुभव मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए-

प्रश्न 1: "कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं..." ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर: जब हम घर या परिवार से दूर होते हैं तो किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति की चिंता हमें भीतर से बेचैन करती है। जैसे ताई घर से बाहर जाने पर मिट्टू की चिंता में दरवाज़ों की साँकलें टोहती थीं, उसी प्रकार हम भी अपने प्रियजनों को बार-बार फ़ोन करते हैं, मन में उनकी सलामती की दुआ करते हैं। यह चिंता प्रेम और लगाव की गहराई को दर्शाती है।

प्रश्न 2: "आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। मेरे घर में एक कुत्ता था जो जब भी हम यात्रा से लौटते तो उत्साह से दौड़ता, पूँछ हिलाता और खुशी जताता। जब घर में कोई बीमार होता तो वह चुपचाप उनके पास बैठा रहता। यह उसकी संवेदनशीलता का प्रमाण था।

प्रश्न 3: "गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर: ताई को भ्रम में रखना पूरी तरह उचित नहीं था। सच्चाई कभी न कभी सामने आनी ही थी - जैसी कि आई। यदि ताई को सहानुभूति और सच्चाई के साथ बताया जाता तो शायद वे संभाल लेतीं। लेकिन गाँव वालों का उद्देश्य ताई को कष्ट से बचाना था, इसलिए उनकी भावना गलत नहीं थी, भले ही उपाय सही न था।

प्रश्न 4: "ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर: हाँ, जीवन में अनेक बार ऐसा होता है जब हम कुछ और सोचते हैं और होता कुछ और है। जैसे एक बार परीक्षा में बहुत अच्छी तैयारी के बावजूद प्रश्नपत्र कठिन निकला। हम जो उम्मीद लेकर गए थे वह पूरी न हुई - ताई की तरह जो मिट्टू के स्वागत की उम्मीद लेकर लौटीं लेकिन वहाँ नया तोता था जो उन्हें पहचानता ही नहीं था।

प्रश्न 5: "मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर: हाँ, प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं। जो प्राणी जन्म से या लंबे समय से पिंजरे में रहे हों, उनके लिए बाहर की दुनिया अनजानी और डरावनी हो जाती है। हमारे पड़ोस में एक पिंजरे में बंद तोता था - एक दिन पिंजरा खुला तो वह बाहर न गया। यही मिट्टू के साथ हुआ। यह कहानी यह भी बताती है कि लंबे समय की बंदिश प्राणी की स्वतंत्रता की इच्छा को कुंद कर देती है।

विधा से संवाद

कहानी का सौंदर्य

संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए।
कहानी का सौंदर्य

कहानी का अंत

किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-

  1. सुखांत - जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
  2. दुखांत - जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
  3. मुक्त अंत - जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
  4. अप्रत्याशित अंत - जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
  5. यथार्थवादी अंत - जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।
  6. प्रेरणात्मक अंत - जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
  7. व्यंग्यात्मक अंत - जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।

आपके अनुसार 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
उत्तर: 'संवादहीन' कहानी का अंत व्यंग्यात्मक एवं मुक्त अंत की श्रेणी में रखा जा सकता है। कहानी स्पष्ट रूप से समाप्त नहीं होती - ताई अपने असली मिट्टू को पुकार-पुकारकर थक जाती हैं, और वह "न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।" यह अंत पाठक को सोचने पर मजबूर करता है - ताई का क्या होगा? उनका अकेलापन और बढ़ेगा? यह यथार्थवादी अंत भी है क्योंकि यह जीवन की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।

विषयों से संवाद

प्रश्न 1: "अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।" 
कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं 'मास्टराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर: कहानी में जगन मास्टर की पत्नी को कहीं 'मास्टराइन' और कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। ऐसा इसलिए किया गया होगा क्योंकि लेखक यह दर्शाना चाहते हैं कि ग्रामीण समाज में स्त्री की पहचान प्रायः उसके पति के नाम से होती है, न कि उसके अपने नाम से। यह एक सामाजिक यथार्थ है जहाँ स्त्री की स्वतंत्र पहचान नहीं होती। यह नाम न देना एक प्रकार का सामाजिक व्यंग्य भी है।

प्रश्न 2: "गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे"
(क) 'कुंभ-स्नान' एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए-

  • इसका आयोजन क्यों किया जाता है?

उत्तर: हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए।

  • पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक प्रयागराज में महाकुंभ मेला हुआ था।

  • अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?

उत्तर: अगला अर्ध कुंभ प्रयागराज में 2031 में, पूर्ण कुंभ नासिक में 2027 में और हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 में होगा।

(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
उत्तर: (नमूना) ताई बस या ट्रेन से प्रयागराज गई होंगी। गाँव के साथी के साथ टिकट लेकर, साथ में खाना-पीना और थोड़ा सामान लेकर। ठहरने के लिए धर्मशाला में। यात्रा में गंगा-स्नान की चर्चा और भजन-कीर्तन होता।

(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(नमूना-उत्तर प्रदेश के संदर्भ में) कानपुर/कानपुर देहात में कुंभ या स्थानीय मेला। देखने में रंग-बिरंगी झालरें, सुनने में भजन-कीर्तन और नारे, सूँघने में फूल-धूप-खाने की गंध, छूने में भीड़ का स्पर्श, स्वाद में प्रसाद।

सुजन (रचनात्मक लेखन)

1. "बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।"
अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
उत्तर: (नमूना) बेहतर रोजगार, शिक्षा और सुविधाओं के लिए। सोचा होगा-"गाँव में खेती से क्या होगा, शहर में कमाई ज्यादा।" खुद को तैयार किया होगा-नौकरी की तलाश, सामान पैक करके भावुक होकर घर को देखा।

2. "वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की"
ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू 'राम राम सीताराम' कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।
उत्तर: (नमूना) "एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके... मिट्ठू उड़ता हुआ आया और पिंजरे पर बैठ गया। नया तोता देखकर बोला-'राम राम! सीताराम! मिट्ठू आ गया!' ताई निहाल हो गईं। दोनों तोते साथ में बोलने लगे। जगन मास्टर भी खुश हुए।"

3. "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।"
आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए-"आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि"। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: (नमूना) बुजुर्ग ने बताया-"हम खेतों में काम करते, गाँव में खेलते, कहानियाँ सुनते। टीवी नहीं था, रेडियो सुनते थे।"

4. "मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!"
मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
उत्तर: (नमूना विज्ञापन)
खोया हुआ तोता
नाम: मिट्ठू (पहाड़ी तोता) 
रंग: हरा, बोलता है-राम राम, सीताराम, हर हर गंगे। 
अंतिम देखा: जगन मास्टर के घर का रोशनदान। 
इनाम: ₹500। 
संपर्क: जगन मास्टर, गाँव...

भाषा से संवाद

'मिट्ठू' शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- "अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना" जिसका अर्थ है "अपनी प्रशंसा आप करना" या "अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना।"
आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे हुए वाक्य में है-
"अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।"

उत्तर: (उदाहरण)

  • शेर की दहाड़
  • चींटी की चाल
  • बंदर की तरह चढ़ना
  • गधे की तरह काम करना
  • लोमड़ी की तरह चालाकी

ध्वन्यात्मकता शब्दों से

"जगन मास्टर का ध्यान अचानक 'गीता-रहस्य' से हटकर मिट्ठू के पंखों की 'फड़फड़ाहट' पर गया।"
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि 'फड़फड़ाहट' कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तर: 

  • भनभनाना → मधुमक्खी भनभनाती हुई उड़ी।
  • छनछनाना → घुँघरू छनछनाते हुए बज रहे थे।
  • टनटनाना → घड़ी टनटनाती हुई बज रही थी।

शब्द-युग्म

"अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून दुल्हा फेंक लेती, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जाती।"
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़ों में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं-

  • पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे- बार-बार
  • समानार्थी शब्द-युग्म, जैसे- उठना-बैठना
  • समानार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-प्रतिदिन
  • विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-रात

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-
उत्तर: वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार
शब्द-युग्म और उनके वाक्य-प्रयोग
शब्द-युग्म

खोजबीन शब्दों की

"ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहा।"
उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए-

  • ऐसा शब्द जो 'तंग' का विलोम हो।
  • ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा हो।
  • ऐसा शब्द जो एक क्रिया हो।
  • ऐसा शब्द जो एक संज्ञा हो।
  • ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम हो।
  • ऐसा शब्द जो एक विशेषण हो।
  • ऐसा शब्द जो एक कारक हो।
  • ऐसा शब्द जो एक कर्ता हो।

उत्तर:

  • 'तंग' का विपरीतार्थक: ढीली
  • एक मुहावरा: पसीना-पसीना
  • क्रिया: पुकारते, मशगूल
  • संज्ञा: धोती, पेड़
  • सर्वनाम: वह (जगन मास्टर)
  • विशेषण: ढीली
  • कारक: दोनों हाथों से (करण कारक)
  • कर्ता: वह (जगन मास्टर)

अर्थ के आधार पर वाक्य

आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।
अर्थ के आधार पर वाक्य

अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
उत्तर: ये सभी वाक्य कहानी "संवादहीन" के मूल पाठ से लिए गए हैं।
इनका प्रयोग कहानी को स्वाभाविक, भावपूर्ण और जीवन के यथार्थ से जोड़ने के लिए किया गया है।

मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा

उत्तर:

  • बोलता है, पिंजरे में रहता है → तोता
  • अकेली वृद्धा → ताई
  • पवित्र स्नान → कुंभ
  • तोता रहता है → पिंजरा
  • जगन मास्टर का → कमरा
  • पवित्र नदी → गंगा

भाषा संगम

"वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।"
नीचे 'तोता' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है-
तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतू (कश्मीरी); तोतो (सिन्धी); पोपट (मराठी); पोपट, सुडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटो (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुका (ओड़िआ); बिलुक (तेलुगु); किल्ली (तमिल); शुक्कु, तत (मलयालम); गिलिक (कन्नड़)

  • इनके अतिरिक्त यदि आप 'तोता' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर: 'तोता' शब्द अन्य भाषाओं में इस प्रकार कहा जाता है-

  • English (अंग्रेज़ी): Parrot
  • French (फ्रेंच): Perroquet
  • Spanish (स्पेनिश): Loro

(विद्यार्थी अपनी जानकारी के अनुसार अन्य भाषाएँ भी लिख सकते हैं।)

  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
    https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

उत्तर:

  • English: He had brought a lovely little hill parrot from somewhere unknown.
  • Bhojpuri: ऊ ना जाने कहाँ से एगो प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आइल रहे।
  • Awadhi: उ न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता लाय आवा रहा।
  • Hinglish (optional): Woh na jaane kahaan se ek pyara sa pahadi tota le aaya tha.
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FAQs on NCERT Solutions: संवादहीन

1. What are the different types of dialogues discussed in the article?
Ans. The article discusses three main types of dialogues: विधा से संवाद (dialogue through genre), भाषा से संवाद (dialogue through language), and विषयों से संवाद (dialogue through subjects). Each type reflects different aspects of communication and expression in literature and conversation.
2. How does विधा से संवाद contribute to creative writing?
Ans. विधा से संवाद contributes to creative writing by allowing writers to explore various literary forms and styles. It enables them to express their thoughts and feelings through different genres, enriching their narrative and enhancing the reader's experience.
3. What role does भाषा से संवाद play in effective communication?
Ans. भाषा से संवाद plays a crucial role in effective communication as it encompasses the use of language to convey ideas clearly and accurately. It involves understanding linguistic nuances and cultural contexts, which helps in building meaningful connections between speakers and listeners.
4. Can you explain the importance of विषयों से संवाद in discussions?
Ans. विषयों से संवाद is important in discussions as it focuses on the exchange of ideas related to specific topics. It fosters critical thinking and deepens understanding by encouraging participants to engage with various perspectives and contribute their insights, thus enriching the dialogue.
5. How can creative writing be enhanced through the understanding of these dialogues?
Ans. Creative writing can be enhanced through the understanding of these dialogues by allowing writers to experiment with different forms, languages, and subjects. This understanding helps them to develop their unique voice, engage their audience effectively, and create more authentic and relatable narratives.
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