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NCERT Solutions: ऐसी भी बातें होती हैं

NCERT Solutions: ऐसी भी बातें होती हैं

रचना से संवाद 

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना

उत्तर: (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
तर्कलता जी ने साक्षात्कार में स्पष्ट कहा - "सबसे ज़्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा। उन्होंने जो संस्कार दिए, उससे जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली।" उन्होंने यह भी कहा कि कभी किसी से पाँच सौ रुपए माँगने की ज़रूरत नहीं पड़ी - यह उनके पिता का संस्कार था। अतः विकल्प (ग) सबसे उचित है।

2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा 
उत्तर: 
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
तर्कसन् 1942 में मात्र 13 वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु के बाद लता जी ने माँ और छोटे भाई-बहनों की देखभाल की। उस समय महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था, फिर भी उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी उठाई। यह केवल संघर्ष नहीं, बल्कि शुद्ध कर्तव्यनिष्ठा का भाव है।

3. "बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है..." 'मंगलागौर' के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर: 
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
तर्क: मंगलागौर एक ऐसा लोकपर्व है जिसमें विवाह के बाद नई बहू के घर आने पर स्त्रियाँ मिलकर गाती-नाचती हैं। यह संगीत को सामाजिक जीवन से जोड़ता है - खुशी, उत्सव और सामूहिकता का माध्यम बनाता है। यह संगीत की सामाजिक भूमिका का प्रमाण है।

4. "गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन" - इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर: 
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क: इस मराठी कहावत का अर्थ है - गाँव बह जाता है (नष्ट हो जाता है), लेकिन नाम (प्रतिष्ठा/कर्म) रह जाता है। लता जी ने इसे अपनी अमरता के संदर्भ में प्रयोग किया - शरीर नश्वर है, पर उनका गाना और कर्म अमर रहेगा।

5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर:
(ग) आत्मीय
तर्कलता जी ने कहा - "जितनी भी लड़कियाँ थीं, वो बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं। सबका ही घर में आना-जाना होता था।" मीना की शादी में कोरस की सभी लड़कियाँ और लड़के गए थे। यह स्पष्ट रूप से आत्मीय संबंध को दर्शाता है।

6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर:
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्कलता जी ने कहा कि हो सकता है उन महान संगीतकारों की कला में कोई सच्चा सुर या आत्मा की आवाज़ लगी हो, इसलिए ऐसा हुआ हो। उन्होंने यह भी माना कि "संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह ज़रूर रच देता है।" अतः निष्कर्ष यही है कि संगीत में असीमित शक्ति होती है।

7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर:
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
तर्कपूरे साक्षात्कार में लता जी ने सादगी से अपनी बातें कहीं, संगीत के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाया और आत्मसम्मान का भाव रखा - न कभी माँगा, न झुकीं। उनकी छवि विनम्र, समर्पित और स्वाभिमानी व्यक्तित्व की है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. "पिताजी उस समय पूछते थे, 'समझ गए न?'... इसके बाद वे कहते थे कि 'अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।'" यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत - यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर: यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के अद्भुत संतुलन को दर्शाता है। लता जी के पिताजी ने कभी बच्चों को डाँटा नहीं, लेकिन उनकी गंभीर दृष्टि ही पर्याप्त थी - बच्चे स्वतः समझ जाते थे।
यहाँ अनुशासन डर पर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास पर आधारित था। पिताजी बिना कड़े शब्दों के अपनी बात समझा देते थे और उसके बाद तुरंत "बाहर जाकर खेलो" कहकर बच्चों को स्वतंत्र भी छोड़ देते थे। इससे स्पष्ट होता है कि वे बच्चों के मन पर अनावश्यक बोझ नहीं डालना चाहते थे।
यह अनुशासन और स्नेह का आदर्श संतुलन है - जहाँ गलती का एहसास कराया जाता है, परंतु भय नहीं दिया जाता। ऐसा अनुशासन बच्चे के व्यक्तित्व को दृढ़ और आत्मविश्वासी बनाता है।

2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: लता मंगेशकर पर अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर का गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ा। यह प्रभाव उनके जीवन के हर पहलू में दिखाई देता है:

  1. स्वाभिमान: पिताजी ने सिखाया कि कभी किसी के सामने हाथ मत फैलाओ। लता जी ने जीवन भर इसका पालन किया - न कभी किसी से धन माँगा, न कभी किसी के आगे झुकीं।
  2. संगीत के प्रति समर्पण: पिताजी हमेशा संगीत में डूबे रहते थे। लता जी ने भी रिकॉर्डिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी - उन्हें गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज़ की सुध नहीं रहती थी।
  3. सही बात पर खड़े रहना: पिताजी ने सिखाया - "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं।" लता जी ने यही नीति जीवन भर अपनाई।
  4. परिवार के प्रति उत्तरदायित्व: पिता की मृत्यु के बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में परिवार की जिम्मेदारी उठाना उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कारों का ही परिणाम था।
  5. दीवाली पर संगीतकारों के घर मिठाई देना: यह विनम्रता और आदर का भाव भी पिता के संस्कारों से ही आया।

3. "मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।" 'नाम आगे बढ़ाने' का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर: लता जी के लिए 'नाम आगे बढ़ाने' का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है - यह एक गहरे उत्तरदायित्व का भाव है।
उनके पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर एक महान संगीतकार और नाटककार थे। वे शास्त्रीय संगीत, रागदारी और कर्नाटक-पंजाब के संगीत को मराठी रंगमंच पर लाए थे। उनके कई रिकॉर्ड HMV से रिलीज़ हुए थे।
लता जी ने इस नाम को आगे बढ़ाने में तीन स्तरों पर उत्तरदायित्व निभाया:

  • पहला: संगीत की गुणवत्ता बनाए रखना। वे हमेशा सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती रहीं।
  • दूसरा: स्वाभिमान और सच्चाई का पालन करना, जो उनके पिता का मूल संस्कार था।
  • तीसरा: भारतीय संगीत की विरासत को समृद्ध करना और उसे देश-विदेश में पहुँचाना।

मराठी कहावत "गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन" से वे यही समझाती हैं कि नाम तभी रहता है जब कर्म महान हो। अतः उनके लिए 'नाम आगे बढ़ाना' = श्रेष्ठ कर्म + पिता के संस्कारों का पालन है।

4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: लता मंगेशकर के अपने सहयोगियों के साथ संबंध अत्यंत आत्मीय, सम्मानपूर्ण और पारिवारिक थे। साक्षात्कार में इसके कई प्रमाण मिलते हैं:

  • संगीतकारों के साथ संबंध: लता जी दीवाली के दिन सुबह पाँच बजे उठकर नौशाद साहब, अनिल विश्वास, रोशनलाल, मदन भैया और बर्मन दादा जैसे संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाती थीं। यह सम्मान और कृतज्ञता का भाव था।
  • कोरस की लड़कियों के साथ संबंध: उन्होंने कहा - "जितनी भी लड़कियाँ थीं, वो बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं।" रिकॉर्डिंग के समय स्टूडियो में कुर्सियाँ न होने पर वे भी उनके साथ ज़मीन पर बैठ जाती थीं।
  • पुराने संगीतकारों के प्रति श्रद्धा: उन्होंने माना कि पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी, भले ही तकनीक सीमित थी।
  • नए कलाकारों के प्रति उदारता: उन्होंने रहमान, जतिन-ललित जैसे नए संगीतकारों की प्रतिभा को भी खुलकर सराहा।

इस प्रकार लता जी ने सभी सहयोगियों के साथ विनम्रता, सम्मान और आत्मीयता का व्यवहार किया।

साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि

साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए-
दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान

पंक्ति 1: "मुझे अपने गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज़ की सुध नहीं रहती थी।"
गुण/विशेषताएँ: एकाग्रता, साधना, समर्पण
व्याख्या: यह पंक्ति लता जी की अपने कार्य के प्रति पूर्ण एकाग्रता और समर्पण को दर्शाती है। वे संगीत में इस कदर डूबी रहती थीं कि बाकी सब गौण हो जाता था। यही एकाग्रता उन्हें महान बनाती है।

पंक्ति 2: "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं है।"
गुण/विशेषताएँ: स्वाभिमान, दृढ़ता, स्पष्टवादिता
व्याख्या: यह पंक्ति उनके आत्मसम्मान और जीवन-दर्शन को प्रकट करती है। वे अपने विचारों पर अटल रहती थीं और किसी के दबाव में नहीं झुकती थीं।

पंक्ति 3: "आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"
गुण/विशेषताएँ: विनम्रता, कृतज्ञता, सरलता
व्याख्या: इतनी महान गायिका होने के बावजूद वे अपनी अमरता को श्रोताओं के प्यार का परिणाम मानती हैं, न कि अपनी उपलब्धि। यह उनकी विनम्रता और कृतज्ञता का प्रमाण है।

पंक्ति 4: "मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।"
गुण/विशेषताएँ: दार्शनिकता, अमरता की समझ, स्पष्टता
व्याख्या: यह पंक्ति उनकी दार्शनिक सोच को दर्शाती है। वे जीवन-मृत्यु को सहज भाव से स्वीकार करती हैं और मानती हैं कि कर्म ही अमर होता है, शरीर नहीं।

मेरे प्रश्न

नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए-
"संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।"

इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे-

  1. लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?
  2. लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
  3. लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
  4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?

आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं।
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)-

  1. उत्तर: 'मंगलागौर' जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
  2. उत्तर: लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की साधना और गहराई अद्वितीय थी।

उत्तर 1 पर आधारित (पाठ्यपुस्तक से):

उत्तर: 'मंगलागौर' जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
इस उत्तर पर आधारित दो प्रश्न:

  1. 'मंगलागौर' पर्व किस अवसर पर और कैसे मनाया जाता है?
  2. 'मंगलागौर' जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों की क्या भूमिका होती थी?

उत्तर 2 पर आधारित (पाठ्यपुस्तक से):

उत्तर: लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
इस उत्तर पर आधारित दो प्रश्न:

  1. लता जी के अनुसार पुराने संगीतकारों की क्या विशेषता थी?
  2. क्या तकनीकी प्रगति से संगीत की गहराई और बढ़ी या घटी? लता जी के विचार क्या थे?

मेरे अनुभव मेरे विचार

अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।"
क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?

उत्तर: हाँ, जब स्कूल में गलत बात के खिलाफ अकेले खड़ा हुआ/हुई तो परिवार/दोस्तों का साथ नहीं मिला, लेकिन सही लगा तो आगे बढ़ गए/गई। (लता जी के स्वाभिमान से प्रेरित)

2. "बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।"
आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वयं करते होंगे। उनके विषय में बताइए।

उत्तर: परिवार में "अपना काम खुद करना" और "बड़ों का सम्मान" का नियम बिना याद दिलाए पालन करते हैं, ठीक वैसे जैसे लता जी ने पिताजी के संस्कार अपनाए।

3. "पहले दिन गुड़ी बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।"
आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।

उत्तर: हमारे घर में नवरात्रि में "गुड़ि" जैसा कलश स्थापना और आरती का विशेष उत्सव मनाया जाता है।

4. "बिल्कुल ठेठ मुंबई अंदाज़ में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आधुनिकता-आधुनिकता वह भी अब बदलने लगा है।"
पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं।

उत्तर: होली में अब रंग खेलना कम हो गया, सिर्फ "गुड़वड़" रह गया है। दीवाली में पटाखे बंद हो गए। मंगलागौर जैसी परंपराएँ शहरों में लगभग खत्म हो रही हैं।

विधा से संवाद

साक्षात्कार की पड़ताल

1. "ऐसी भी बातें होती हैं" एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढकर लिखिए।
साक्षात्कार के मुख्य बिंदु

  • साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम
  • प्रश्नोत्तर
  • भावनात्मक वातावरण
  • आगमन, स्वागत और परिचय
  • उत्तर देने की शैली से संकेत
  • विचार और उदाहरण
  • समापन

उत्तर: साक्षात्कार विधा के मुख्य बिंदु और उन्हें रेखांकित करने वाली पंक्तियाँ:

  • साक्षात्कार लेने वाले और देने वाले का नाम:यतींद्र मिश्र (साक्षात्कारकर्ता) और लता मंगेशकर (साक्षात्कारदाता)।
  • आमंत्रण, स्वागत और परिचय:"दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं..." - यतींद्र मिश्र ने आत्मीय परिचय से साक्षात्कार प्रारंभ किया।
  • प्रश्नोत्तर:पूरा साक्षात्कार प्रश्न-उत्तर के रूप में है। जैसे - "आपके पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर की वे कौन-सी स्मृतियाँ हैं, जो आज भी आपके स्मरण में जीवित हैं?"
  • उत्तर देने की शैली का संकेत:(हँसते हुए) "अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते थे।" - लता जी की मुस्कुराहट और सहजता उत्तर देने की शैली का संकेत देती है।
  • भावनात्मक वातावरण:पिताजी की यादें बताते समय, दीवाली पर मिठाई देने का प्रसंग और संगीत की असीम शक्ति पर चर्चा - ये सभी भावनात्मक वातावरण बनाते हैं।
  • विचार और उदाहरण:उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने का उदाहरण संगीत की शक्ति को सिद्ध करता है।
  • संस्मरण:"एक बार बड़ा मज़ेदार वाकया हुआ कि मैं नौशाद साहब के घर सुबह करीब साढ़े पाँच बजे पहुँच गई..."
  • समापन:"आज मुझे लगता है कि हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया..." - यह भावपूर्ण समापन है।

2. "मैं कोशिश करती कि जो कुछ भी मैंने सीखा है, उसे दूसरों तक पहुँचा सकूँ, जैसे आपको बता रही हूँ।" इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है? - क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर: इस कथन से स्पष्ट होता है कि यह साक्षात्कार आत्मीय बातचीत है, न कि केवल औपचारिक संवाद। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. भाषा की सहजता: लता जी ने "कोशिश करूँगी", "आपको बता सकूँ" जैसे सहज, बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया है। यह औपचारिक भाषा नहीं है।
  2. व्यक्तिगत अनुभवों की साझेदारी: उन्होंने अपने पिता की यादें, बचपन की शरारतें, दीवाली के अनुभव जैसी निजी बातें खुलकर साझा कीं - यह केवल आत्मीय माहौल में संभव है।
  3. संबोधन: यतींद्र मिश्र ने "दीदी" कहकर और लता जी ने "जी, जरूर" कहकर उत्तर दिया - यह औपचारिक नहीं, पारिवारिक संबोधन है।
  4. भावनात्मक प्रवाह: पिताजी की याद करते समय, नौशाद साहब के घर जाने का किस्सा बताते समय लता जी की भावनाएँ स्वाभाविक रूप से प्रकट हुईं।

अतः यह साक्षात्कार एक सुनियोजित आत्मीय संवाद है जिसमें औपचारिकता का ढाँचा है, परंतु भावनाएँ और अनुभव बिल्कुल स्वाभाविक और व्यक्तिगत हैं।

आपका साक्षात्कार

"आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।"
प्रस्तुत पाठ के विषय-आधारित व्यक्तिगत या साक्षात्कार लिखा गया है। कल्पना कीजिए कि आप ही लता मंगेशकर हैं। इस साक्षात्कार में उपस्थित आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?

उत्तर (नमूना): यदि मैं इस साक्षात्कार में उपस्थित होता, तो लता जी से निम्नलिखित पूछता:

  1. "दीदी, आपने हज़ारों गाने गाए - उनमें से कोई एक ऐसा गाना जो आपके दिल के सबसे करीब है और क्यों?" - क्योंकि इससे उनकी भावनात्मक गहराई का पता चलता।
  2. "संगीत की दुनिया में महिलाओं के लिए आपके समय में क्या-क्या कठिनाइयाँ थीं, जो आज नहीं हैं?" - क्योंकि इससे उस युग का सामाजिक चित्र उभरता।
  3. "अगर आप संगीतकार न होतीं, तो क्या करतीं?" - यह उनके व्यक्तित्व के दूसरे पहलू को सामने लाता।

विषयों से संवाद

1. "एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।"
सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपने पाँच छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने करियर का भी संभाला। उस समय उनकी उम्र मात्र 13 वर्ष की थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन मुश्किलों का सामना करती होंगी? (संकेत- भोजन, यातायात, थकान, सुरक्षा आदि)

उत्तर: 13 वर्षीय लता जी का एक दिन अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण रहा होगा:

  • सुबह: घर के काम, माँ की सहायता, छोटे भाई-बहनों की देखभाल करके जल्दी-जल्दी रिकॉर्डिंग के लिए निकलना।
  • यात्रा की चुनौती: उस समय मुंबई में यातायात के साधन सीमित थे। एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक जाना - किराया जुटाना, समय पर पहुँचना - यह बड़ी चुनौती थी।
  • सुरक्षा की चुनौती: उस समय महिलाओं के लिए अकेले काम करना सामाजिक रूप से कठिन था। स्टूडियो में देर रात तक रुकना और फिर घर लौटना - यह सुरक्षा की दृष्टि से कठिन था।
  • भोजन की समस्या: रिकॉर्डिंग की व्यस्तता में समय पर खाना मिलना मुश्किल रहा होगा।
  • थकान: सुबह से रात तक लगातार गाना, एक के बाद एक रिकॉर्डिंग - शारीरिक और मानसिक थकान स्वाभाविक थी।
  • पारिवारिक चिंता: काम के दौरान भी मन में घर की चिंता - माँ, भाई-बहन ठीक हैं या नहीं।

इन सब चुनौतियों के बावजूद लता जी ने अपना कर्तव्य निभाया - यही उनकी महानता है।

2. "पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाज़ों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रिकॉर्ड होते थे।" - अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिनमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर: सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता वाले कार्य:

  • घर में: त्योहारों की तैयारी, घर की सफाई, खाना बनाना, किसी बीमार सदस्य की देखभाल - इन सबमें परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक होता है।
  • आस-पड़ोस में: किसी के यहाँ शादी-विवाह, श्राद्ध या संकट का समय - पड़ोसी मिलकर काम करते हैं। सफाई अभियान, पेड़ लगाना।
  • समुदाय में: सामुदायिक भोज, धार्मिक उत्सव, गाँव की नाली-सड़क की मरम्मत, बाढ़ या आपदा के समय राहत कार्य।
  • विद्यालय में: वार्षिकोत्सव की तैयारी, खेल प्रतियोगिता, सामूहिक परियोजना कार्य, स्वच्छता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम।

इन सभी कार्यों में जब सब मिलकर काम करते हैं, तो कठिन से कठिन काम भी सरल हो जाता है। सामूहिकता से न केवल काम जल्दी होता है, बल्कि आपसी प्रेम और विश्वास भी बढ़ता है।

शास्त्रीय संगीत 

1. "फिर उसमें लंबी-चौड़ी रागदारी वाले गानों की भी परंपरा थी।"
रागदारी वाले गानों का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकों और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण लिखिए-
(राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहनी, फाग, बधावा)

उत्तर: 
शास्त्रीय संगीत 

2. "त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्व व अनुष्ठानों से संबंधित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।" आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमाल, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: पाठ में लता मंगेशकर जी ने बताया है कि "त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्व व अनुष्ठानों से संबंधित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।" उन्होंने होली, नवरात्रि, दशहरा, दीवाली और मंगलागौर जैसे त्योहारों का जिक्र किया। भारत में फाग, धमार (होली), सोहर (जन्मोत्सव), बधावा (शुभ अवसर) और छठ के गीत घर-घर में स्त्रियाँ गाती हैं। ये गीत समुदाय को जोड़ते हैं, खुशी बाँटते हैं और सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखते हैं।
कानपुर (उत्तर प्रदेश) में मेरे क्षेत्र की परंपरा
मैंने अपने घर-परिवार (कानपुर, उत्तर प्रदेश) और आस-पास के पड़ोसियों से पूछा। कानपुर अवध क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए यहाँ आवधी और देहाती शैली के गीत प्रचलित हैं। गाँवों (जैसे बिरसिंहपुर, अकबरनगर, सरोखीपुरा आदि) में आज भी ये गीत जीवित हैं।

  • होली पर: फाल्गुन में फागुआरों की टोलियाँ शाम को घर-घर जाती हैं। देहाती फाग और धमार गाए जाते हैं। (पाठ में लता जी ने होली का "गुड़वड़" और रंग-पंचमी का जिक्र किया है - कानपुर में भी यही परंपरा है।)
  • छठ पूजा पर: सूर्य देव और छठी मैया के लिए महिलाएँ अरघ्य देते समय छठ गीत गाती हैं।
  • बच्चे के जन्म पर: सोहर गीत। स्त्रियाँ अंगना में इकट्ठी होकर गाती हैं।
  • शादी-ब्याह या शुभ अवसर पर: बधावा।

ये गीत बिना किसी मंच के, घर की आँगन या छत पर, ढोलक-मंजीरा के साथ गाए जाते हैं। पुरुष भी फाग में शामिल होते हैं। आज शहर में थोड़ा कम हो गया है, लेकिन गाँवों और जागरणों में पूरी तरह जीवित है।
अपनी लेखन-पुस्तिका के लिए एक गीत
मैंने घर में पूछकर आवधी सोहर गीत चुना (बच्चे के जन्म पर गाया जाता है)। यह कानपुर और अवध क्षेत्र में बहुत प्रचलित है। स्त्रियाँ इसे मंगल गान के रूप में गाती हैं।
गीत का नाम: ससुर जी कै ऊंची महलिया (आवधी सोहर)गीतकार/शैली: पारंपरिक देहाती/आवधी लोकगीत
पूर्ण गीत (लेखन-पुस्तिका में लिखने के लिए):

  • ससुर जी कै ऊंची महलिया बयरिया ना लागै हो राजा एक बार बेनिया ढोलावा, गरम हमरे लागै, गरम हमरे लागै हो॥
  • अंगना मा सोवै मोरी मैया, दरवजवा बहिनियां हो रानी चुरुर-चुरुर बेनिया डोलै, सरम हमरे लागै, सरम हमरे लागै हो॥
  • (दोहराव) ससुर जी कै ऊंची महलिया...

अर्थ/भाव (समझने के लिए):

  • नवजात शिशु के आने पर ससुराल की महल में खुशी छा जाती है।
  • बहनें, माँ, रानी (नई माँ) सब शरमा-शरमाकर गीत गाती हैं।
  • यह गीत संतान की खुशी, परिवार की एकता और मंगल कामना व्यक्त करता है।

कैसे गाया जाता है?

  • महिलाएँ अंगना में बैठकर, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर या ताली बजाकर गाती हैं।
  • ढोलक पर "ढोलावा" शब्द आता है तो ताल तेज हो जाती है।
  • गीत के अंत में "हो... हो..." या "ललनवा..." जोड़कर खुशी मनाई जाती है।

यह गीत लता जी द्वारा बताए गए "सोहर और बधावा" की परंपरा का सटीक उदाहरण है। कानपुर में आज भी जच्चा-बच्चा के घर में यह गीत गाया जाता है।
नोट: अगर होली का फाग चाहिए तो घर-परिवार से देहाती फाग ("वन कों निकर गए दोउ भाई" या "कराई हो संत ने पहचान कराई") का पूरा बोल माँग लें। मैंने सोहर इसलिए चुना क्योंकि यह घरेलू और स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला है, जो पाठ की भावना से सबसे ज्यादा मेल खाता है।

साइबर सुरक्षा

"आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अब हर लोगों को काम करना ही पड़ता है, तो जागरूकता होना बहुत जरूरी हो गया है।"
आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज/ठग लोगों की बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी चालाकी से उन्हें धोखा दे देते हैं। ऐसे में अपनी सुरक्षा कैसे करें? साइबर सुरक्षा नियमों को ध्यान रखते हुए बताइए कि किस प्रकार के धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
https://cybercrime.gov.in/UploadMedia/CyberSafetyHindi.Pdf

उत्तर: आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग बहुत बढ़ गया है, जिसके साथ ही साइबर अपराध (ऑनलाइन धोखाधड़ी) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए जागरूक रहना और सही सावधानियाँ अपनाना अत्यंत आवश्यक है। नीचे प्रमुख प्रकार की धोखाधड़ी और उनसे बचने के उपाय दिए गए हैं-
सामान्य साइबर धोखाधड़ी के प्रकार और बचाव
1. फिशिंग (Phishing)
क्या है: नकली ईमेल, मैसेज या लिंक के माध्यम से बैंक डिटेल, OTP आदि चुराना।
बचाव:

  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • OTP, पासवर्ड किसी से साझा न करें
  • केवल आधिकारिक वेबसाइट/ऐप का ही उपयोग करें

2. ऑनलाइन बैंकिंग/UPI फ्रॉड
क्या है:
ठग कॉल या मैसेज करके पैसे ट्रांसफर करवाते हैं या OTP पूछते हैं।
बचाव:

  • किसी को भी OTP या PIN न बताएं
  • "Request Money" (पैसे माँगने) वाले नोटिफिकेशन को ध्यान से देखें
  • बैंक से जुड़े काम केवल आधिकारिक ऐप से करें

3. लॉटरी/इनाम धोखाधड़ी
क्या है:
झूठे इनाम या लॉटरी जीतने का लालच देकर पैसे ऐंठना।
बचाव:

  • बिना भाग लिए किसी लॉटरी पर विश्वास न करें
  • ऐसे संदेशों को नजरअंदाज करें

4. सोशल मीडिया फ्रॉड
क्या है: 
फेक प्रोफाइल बनाकर पैसे माँगना या व्यक्तिगत जानकारी लेना।
बचाव:

  • अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
  • निजी जानकारी सार्वजनिक न करें
  • संदिग्ध प्रोफाइल की रिपोर्ट करें

5. OTP/कस्टमर केयर फ्रॉड
क्या है: 
फर्जी कस्टमर केयर बनकर कॉल करना और जानकारी लेना।
बचाव:

  • केवल आधिकारिक नंबर पर ही संपर्क करें
  • OTP कभी साझा न करें

6. ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड
क्या है:
नकली वेबसाइट या सस्ते ऑफर देकर धोखा देना।
बचाव:

  • भरोसेमंद वेबसाइट से ही खरीदारी करें
  • "बहुत सस्ता" ऑफर देखकर सावधान रहें
  • वेबसाइट का URL (https) जरूर जांचें

सामान्य सुरक्षा उपाय

  • मजबूत पासवर्ड (Password) रखें और समय-समय पर बदलें
  • मोबाइल/कंप्यूटर में एंटीवायरस का उपयोग करें
  • पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग कार्य न करें
  • अपने डिवाइस को अपडेट रखें
  • संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें

शिकायत कहाँ करें

  • साइबर अपराध की शिकायत के लिए: https://cybercrime.gov.in
  • हेल्पलाइन नंबर: 1930

निष्कर्ष: साइबर सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता और सतर्कता। यदि हम सावधानी बरतें और अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखें, तो अधिकांश साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

हम ऐसे भी बोलते हैं

"वे बस हमें गुमसुम-सा देखते थे... मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।"

1. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ कहे सिर्फ नजरों से समझा देता है? (हाव-भाव) तो वह आपको कैसे समझाते हैं? उनके अनुभव के बारे में बताइए।
उत्तर: हाँ, मेरे जीवन में मेरी माँ (या शिक्षक/पिता) ऐसे व्यक्ति हैं जो बिना कुछ कहे केवल हाव-भाव और नजरों से बहुत कुछ समझा देते हैं। जब मैं कोई गलती करता/करती हूँ, तो वे केवल अपनी आँखों के इशारे या चेहरे के भाव से ही मुझे सावधान कर देते हैं। उनकी नजरों में प्यार, चिंता और कभी-कभी हल्की नाराज़गी भी साफ दिखाई देती है, जिससे मैं तुरंत समझ जाता/जाती हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए।
इस तरह के अनुभव से यह महसूस होता है कि शब्दों के बिना भी भावनाएँ और संदेश आसानी से समझे जा सकते हैं।

2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
(संकेत- हाँ, इशारा, मूकभाषा आदि)
उत्तर: यदि कोई व्यक्ति मुझे बिना बोले संकेत भाषा में कुछ समझा रहा है, तो मैं उसके साथ धैर्य और सम्मान का व्यवहार करूँगा/करूँगी। मैं उसके इशारों, चेहरे के भाव और हाथों के संकेतों को ध्यान से समझने की कोशिश करूँगा/करूँगी।
साथ ही, मैं भी उसके साथ सरल इशारों, जैसे-हाँ के लिए सिर हिलाना, ना के लिए सिर हिलाना, हाथों के संकेत या लिखकर संवाद करने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
इस प्रकार दोनों के बीच समझ, सहयोग और संवेदनशीलता बनी रहेगी, जिससे बिना बोले भी प्रभावी संवाद संभव हो सकेगा।

सृजन

1. "अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन 1949-50 में ले जाएँ", कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है और आप 1940-50 के दशक में चले जाते हैं। लता जी के जीवन पर एक दिन का वर्णन करते हुए एक पत्र लिखिए। उस समय के कपड़े, भोजन, समाज आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
उत्तर: 

प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्कार।

आज मैं तुम्हें एक अद्भुत अनुभव के बारे में बताने जा रहा/रही हूँ। कल्पना करो कि मैं टाइम मशीन से 1949-50 के दौर में पहुँच गया/गई हूँ और वहाँ मैंने लता जी के जीवन का एक दिन बहुत करीब से देखा।
सुबह का वातावरण बहुत शांत और सादगी भरा था। लता जी साधारण सूती साड़ी पहने हुए थीं, जो उस समय के समाज की सादगी और मर्यादा को दर्शाती थी। उनके घर का माहौल भी बेहद सरल था-न कोई दिखावा, न कोई आडंबर। भोजन में सादा खाना जैसे दाल, रोटी और सब्जी थी, जिसमें घर का प्यार झलकता था।
लता जी का दिन संगीत अभ्यास से शुरू होता था। वे घंटों रियाज़ करती थीं और अपने सुरों को और मधुर बनाने का प्रयास करती थीं। उस समय समाज में स्त्रियों के लिए इतनी स्वतंत्रता नहीं थी, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से एक अलग पहचान बनाई।
दिनभर वे रिकॉर्डिंग स्टूडियो में काम करती थीं, जहाँ सब कुछ बहुत सादा और सीमित साधनों में होता था। फिर भी उनके स्वर में इतनी शक्ति और भावनाएँ थीं कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता था।
उस दौर के लोग सादगी, परिश्रम और संस्कारों को बहुत महत्व देते थे। लता जी भी इन्हीं मूल्यों को अपनाकर अपने जीवन में आगे बढ़ रही थीं।
यह अनुभव मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक रहा। इससे मैंने सीखा कि सच्ची सफलता मेहनत, समर्पण और सादगी से ही मिलती है।
तुम्हारा मित्र/मित्रा
[आपका नाम]

2. "अपने सभी लोगों का प्यार ही मेरे जीवन के आगे बढ़ने वाले उस मंत्र जैसा है।"
कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है- आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।

उत्तर: लता जी का यह संदेश-"अपने सभी लोगों का प्यार ही मेरे जीवन के आगे बढ़ने वाले उस मंत्र जैसा है"-हृदय को गहराई से छू जाता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अपनों का प्यार और समर्थन भी उतना ही आवश्यक होता है। उनके इस विचार में विनम्रता, कृतज्ञता और प्रेम की भावना झलकती है। यह संदेश हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में रिश्तों को महत्व दें और अपने प्रियजनों के साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार करें। वास्तव में, अपनों का स्नेह ही हमें कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

भाषा से संवाद

मुहावरे

"मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है"
उपयुक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है- कुछ माँगना या याचना करना। ऐसे कई मुहावरे अपने जीवन में हमें सुनने को मिलते हैं। कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं-

  • हाथ से जाना
  • हाथ को मेला होना
  • हाथ से हाथ मिलाना
  • हाथ साफ करना
  • हाथ से निकल जाना
  • हाथ धो बैठना

उत्तर: "हाथ पसारना" - अर्थ: किसी से कुछ माँगना या याचना करना।
नीचे दिए गए मुहावरों का अर्थ और वाक्य प्रयोग:
मुहावरे

हमारी भाषाएँ

1. "गांव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन।" मतलब गांव तो वह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है। आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर: कहावत का अपनी भाषा में रूप
दिए गए अर्थ- "गांव चला जाता है, पर नाम रह जाता है"-को मैं अपनी क्षेत्रीय भाषा (उदाहरण: भोजपुरी/अवधी) में इस प्रकार लिख सकता/सकती हूँ:

  • भोजपुरी: "गाँव चल जाला, नाम रह जाला।"
  • अवधी: "गाँव चलि जात है, पर नाव रहि जात है।"

अर्थ: इस कहावत का भाव यह है कि समय के साथ स्थान या परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, लेकिन व्यक्ति का नाम, उसकी पहचान और उसके अच्छे-बुरे काम हमेशा लोगों के मन में बने रहते हैं। इसलिए व्यक्ति को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे उसका नाम सम्मान के साथ याद किया जाए।

2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर: 
अपनी मातृभाषा की कहावत और अनुवाद
कहावत (भोजपुरी):"जइसन करब, वइसन भरब।"
हिंदी अनुवाद:"जैसा करोगे, वैसा भरोगे (या फल पाओगे)।"
भाव में परिवर्तन: जब इस कहावत को भोजपुरी में कहा जाता है, तो इसमें अपनापन और लोक-जीवन की सादगी झलकती है। यह अधिक सहज और प्रभावशाली लगती है।
लेकिन हिंदी में अनुवाद करने पर इसका अर्थ तो वही रहता है, परंतु उसमें स्थानीय मिठास और भावनात्मक गहराई थोड़ी कम हो जाती है। इस प्रकार भाषा बदलने से भाव की तीव्रता और अभिव्यक्ति का अंदाज़ थोड़ा बदल जाता है।

3. एक 'सेतु चित्र' बनाइए जिसमें दो किनारे हों- एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हों।
उत्तर: 'सेतु चित्र' (Bridge Diagram का वर्णन)
आप इसे कॉपी में इस प्रकार बना सकते हैं:
बायाँ किनारा: हिंदी
दायाँ किनारा: अपनी भाषा (जैसे-भोजपुरी/अवधी)
बीच में पुल बनाकर समान अर्थ वाले शब्द लिखें-
हमारी भाषाएँ

विवरण: इस 'सेतु चित्र' से यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग भाषाओं के बीच कई शब्द समान या मिलते-जुलते होते हैं। यह भाषाओं के बीच संबंध और समानता को दर्शाता है तथा हमें यह समझने में मदद करता है कि विभिन्न भाषाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

गतिविधियाँ

1. "नाम रह जाएगा" वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर "नाम रह जाता है..." लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में "नाम" शब्द (जैसे- नाव, नालो, नाँव, नाँउ, मिंग, पे, नाम्मु आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सब विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें- "हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।"
उत्तर: 

पोस्टर के शीर्ष पर बड़े और आकर्षक अक्षरों में लिखें-
"नाम रह जाता है..."
इसके नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में "नाम" शब्द लिखें, जैसे-
हिंदी: नाम
मराठी: नाव
भोजपुरी/अवधी: नाँव / नाँउ
गुजराती: નામ
तमिल: பெயர் (पेयर)
बांग्ला: নাম
तेलुगु: పేరు
कन्नड़: ಹೆಸರು
पोस्टर के निचले भाग में लिखें-
"हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।"
पोस्टर को रंगीन बनाकर उसमें अलग-अलग संस्कृतियों के चित्र भी बनाए जा सकते हैं, जिससे विविधता का भाव स्पष्ट हो।

2. कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए- भाषा-वृक्ष। इसकी जड़ में लिखिए- "भारतीय संस्कृति"; तने पर और शाखाओं पर लिखिए- हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर: 

एक पेड़ का चित्र बनाकर उसे "भाषा-वृक्ष" नाम दें।
जड़ में लिखें- "भारतीय संस्कृति"
तने पर लिखें- "भारतीय भाषाएँ"
शाखाओं पर भाषाएँ और उनके शब्द लिखें-
हिंदी - प्रेम
मराठी - माया
तमिल - அன்பு (अनबु)
बांग्ला - ভালোবাসা (भालोबाशा)
गुजराती - સ્નેહ (स्नेह)
पंजाबी - ਪਿਆਰ (प्यार)
यह चित्र दर्शाता है कि सभी भाषाएँ एक ही संस्कृति से जुड़ी हैं और भावनाएँ हर भाषा में समान होती हैं।

3. समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है- "कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।"
उत्तर: 

विषय: कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं
हिंदी: आज हमारे विद्यालय में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न भाषाओं और कलाओं के माध्यम से एकता का संदेश दिया गया।
English: Today, a cultural program was organized in our school highlighting unity through art and different languages.
क्षेत्रीय भाषा (भोजपुरी): आज हमार स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भइल, जहाँ कला आ भाषा के माध्यम से एकता के सन्देश दिहल गइल।
निष्कर्ष: कला और भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम हैं, न कि बाँटने का।

4. भाषा स्मृति पोटली
अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे- दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक 'शब्द पोटली' में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर: 
परिवार में प्रयुक्त भाषाओं के पाँच शब्द इस प्रकार हो सकते हैं-
हिंदी - पानी (जल)
भोजपुरी - माई (माँ)
मराठी - बाबा (पिता)
अंग्रेजी - Love (प्रेम)
अवधी - बिटिया (बेटी)
इन शब्दों को कार्ड पर लिखकर "शब्द पोटली" बनाई जा सकती है। यह हमारी भाषाई विविधता को दर्शाती है।

5. स्वर-कोलाज
लता जी के जीवन के प्रेरक प्रसंगों और गीतों का चित्रमय कोलाज बनाइए।
उत्तर: 
कोलाज में लता जी की तस्वीर, उनके प्रसिद्ध गीतों के नाम, जीवन के प्रेरक प्रसंग और संगीत से जुड़े चित्र शामिल किए जा सकते हैं। जैसे उनके गीत "ऐ मेरे वतन के लोगों" और "लग जा गले"। यह कोलाज उनके संघर्ष, मेहनत और संगीत के प्रति समर्पण को दर्शाता है और हमें प्रेरणा देता है।

6.  समय-रेखा
लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।

उत्तर: 
1929 - जन्म (इंदौर)
1942 - गायन की शुरुआत
1949 - फिल्म महल के गीत "आएगा आनेवाला" से प्रसिद्धि
1963 - "ऐ मेरे वतन के लोगों" से विशेष पहचान
2001 - भारत रत्न से सम्मानित
2022 - निधन
यह समय-रेखा लता जी के जीवन की प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है।

भाषा संगम

"उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।"
नीचे 'संगीत' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है-
संगीत (हिंदी); संगीतम् (संस्कृत); संगीत (पंजाबी); म्यूज़िकी, म्यूज़िकी (उर्दू); म्यूजिक (कश्मीरी); संगीत (सिंधी); संगीत कला (मराठी); संगीतकला (गुजराती); संगीत (कोंकणी); संगीत (नेपाली); संगीत (बांग्ला); संगीत (असमिया); ईश (मणिपुरी); संगीत (ओड़िया); संगीत (तेलुगु); संगीतम् (तमिल); संगीत (मलयालम); संगीत (कन्नड़)

  • इनके अतिरिक्त यदि आप "संगीत" शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर: उपरोक्त भाषाओं के अतिरिक्त "संगीत" शब्द को अंग्रेजी में Music कहा जाता है।
इसी प्रकार कुछ अन्य भाषाओं में-

  • भोजपुरी/अवधी: संगीत
  • राजस्थानी: संगीत
  • फ्रेंच: Musique

इससे स्पष्ट होता है कि भले ही उच्चारण और रूप थोड़ा बदल जाए, पर अर्थ समान ही रहता है।

  • उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
    https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

उत्तर: 

  • दिया गया वाक्य: "उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।"
  • उत्तर (भोजपुरी में): "ओह दिन घर में संगीत के सभा होत रहे।"
  • या (अवधी में): "उ दिन घर मा संगीत की सभा होत रही।"
  • अर्थ: इस वाक्य का भाव सभी भाषाओं में समान रहता है, केवल शब्दों और बोलने के ढंग में अंतर होता है।
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FAQs on NCERT Solutions: ऐसी भी बातें होती हैं

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4. In what ways does the article suggest improving communication skills?
Ans. The article suggests several ways to improve communication skills, including actively listening, being open to feedback, and practising clarity in expression. It encourages individuals to engage in conversations with an open mind and to consider different viewpoints to enhance understanding and collaboration.
5. Why is it important to discuss value-based questions, as highlighted in the article?
Ans. Discussing value-based questions is important as they encourage critical thinking and reflection on personal beliefs and ethics. The article highlights that such discussions can lead to deeper insights into one's values and promote a culture of respect and understanding in society, facilitating better interpersonal relationships.
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