CBSE Class 9  >  Class 9 Notes  >  Hindi Ganga (New NCERT)  >  Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक

Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक

Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक

लेखक परिचय

इस पाठ के लेखक मोहन राकेश जी हैं। इनका जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत जैसी अनेक विधाओं में साहित्य सृजन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (नाटक), अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल (उपन्यास), क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल, वारिस तथा अन्य कहानियाँ (कहानी-संग्रह), मोहन राकेश की डायरी तथा आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)। नाटक आषाढ़ का एक दिन के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कुछ समय तक उन्होंने सारिका नामक हिंदी पत्रिका का संपादन भी किया।

लेखक परिचय

उनके लेखन में भावों की गहराई के साथ-साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। सन् 1972 में मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया।

'आखिरी चट्टान तक' में मोहन राकेश ने कन्याकुमारी की यात्रा के माध्यम से प्रकृति की भव्यता, समुद्र के तीनों सागरों के संगम की शक्ति, सूर्योदय-सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य तथा मानव-मन की गहन अनुभूतियों (विस्मय, रोमांच, शांति और आत्म-खोज) को एक साथ उजागर किया है। यह यात्रा-वृत्तांत केवल भौगोलिक वर्णन नहीं, बल्कि आत्मिक यात्रा भी है। लेखक ने इसमें सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किया है जो पाठक को यात्रा का साक्षी बना देता है।

पाठ का सार

'आखिरी चट्टान तक' मोहन राकेश का रोचक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें लेखक कन्याकुमारी की यात्रा के अपने अनुभवों, प्राकृतिक सौंदर्य और मन की गहरी भावनाओं को सजीव ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

कन्याकुमारी पहुँचकर लेखक केप होटल के आगे बने बाथ टैंक की बाईं ओर समुद्र में उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़े होकर भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देर तक देखते रहते हैं। पृष्ठभूमि में कन्याकुमारी मंदिर की लाल-सफेद लकीरें चमक रही हैं। अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का संगम-स्थल वह चट्टान, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी, हर तरफ से पानी की मार सहती हुई समाधिस्थ-सी लग रही है। हिंद महासागर की ऊँची-ऊँची लहरें स्याह चट्टानों से टकरा रही हैं। बलखाती लहरें नुकीली चट्टानों से कटती हुई ऊपर चूरा-बूँदों की जालियाँ बना रही हैं। लेखक पूरी चेतना से महसूस करते हैं- "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति"। तीनों ओर क्षितिज तक पानी-ही-पानी है, फिर भी हिंद महासागर का क्षितिज सबसे दूर और गहरा लगता है। वे क्षणभर अपना अस्तित्व भूल जाते हैं और दृश्य का हिस्सा बनकर खड़े रह जाते हैं।

जब होश आता है तो उनकी चट्टान बढ़ते पानी में घिर चुकी होती है। वे कूदकर सुरक्षित चट्टान पर पहुँचते हैं और फिर किनारे आ जाते हैं।

पश्चिमी क्षितिज में सूर्य धीरे-धीरे डूब रहा है। लेखक सूर्यास्त देखने सैंड हिल की ओर चलते हैं। वहाँ कई यात्री, नवयुवक-नवयुवतियाँ और गाँधी टोपी वाले लोग कॉफी पीते हुए सूर्यास्त का आनंद ले रहे हैं। सैंड हिल रंगीन हो उठी है। लेकिन लेखक को स्पष्ट विस्तार दिखाई नहीं देता। वे आगे रेत के टीले की ओर बढ़ जाते हैं। एक-एक करके कई टीले पार करते हैं। टाँगें थक रही हैं पर मन थकने को तैयार नहीं। अंत में एक टीले पर पहुँचकर उन्हें खुला पश्चिमी क्षितिज दिखाई देता है। वे संतुष्ट होकर टीले पर बैठ जाते हैं-ऐसे जैसे उन्होंने संसार की सबसे ऊँची चोटी सर कर ली हो।

पीछे नारियल के झुरमुट हवा में लहरा रहे हैं। सूर्य पानी की सतह से छू गया। सुनहली किरणों ने पीली रेत को नया रंग दे दिया। सूर्य का गोला पानी में डूबता है-रंग बदलते जाते हैं: सोना, लहू, बैंगनी, फिर काला। पूरा दृश्य स्याही-सा अंधकारमय हो जाता है।

अचानक लेखक को लौटने की चिंता होती है। अँधेरा घना हो चुका है। सैंड हिल दूर दिख रही है। वे रेत के टीलों से बचकर समुद्र तट पर उतर जाते हैं। तट की रेत अनोखे रंगों से भरी है-काले, लाल, नीले, सुरमई आदि अनेक सम्मिश्रण। वे रंगों को हाथ-पैर से छूकर देखते हैं। लेकिन ज्वार बढ़ रहा है। लहरें पैर भिगोने लगती हैं। तट संकरा होता जा रहा है। लेखक दौड़ने लगते हैं। एक ऊँची चट्टान से टकराते हैं, बाँह खरोंच जाती है। चट्टान पार करके वे सुरक्षित जगह पहुँच जाते हैं जहाँ लोग टहल रहे हैं।

अगली सुबह वे आठ आदमियों के साथ रबर की छोटी नाव से विवेकानंद चट्टान (सूर्योदय चट्टान) पर जाते हैं। चट्टान समुद्र के बीच में है। वहाँ बैठकर सूर्योदय का अद्भुत दृश्य देखते हैं। स्थानीय नवयुवक उनसे कन्याकुमारी की बेकारी की समस्या बताते हैं-आठ हजार आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेकार हैं। वे सीपियों का गूदा खाते और दार्शनिक बहस करते हैं। मंदिर की घंटियाँ बज रही हैं, भक्त पूजा कर रहे हैं, सरकारी मेहमान कॉफी पी रहे हैं। लेखक बसों का टाइम-टेबल दोहराते हुए वापसी की तैयारी करते हैं।

इस प्रकार यात्रा-वृत्तांत प्रकृति के भव्य दृश्यों, लेखक की आंतरिक अनुभूतियों और स्थानीय जीवन की झलक से भरा हुआ है।

केंद्रीय भाव / संदेश

मोहन राकेश इस यात्रा-वृत्तांत के माध्यम से बताते हैं कि यात्रा केवल स्थान-परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्म-खोज और प्रकृति से गहरा संवाद भी है। कन्याकुमारी के तीन सागरों के संगम, सूर्योदय-सूर्यास्त के रंग-बिरंगे दृश्य, लहरों की शक्ति और रेत के अनोखे रंग पाठक को विस्मय, रोमांच, शांति तथा क्षणभंगुरता का बोध कराते हैं। लेखक प्रकृति की भव्यता के सामने अपने अस्तित्व को छोटा महसूस करते हैं और आत्म-चेतना प्राप्त करते हैं।

साथ ही वे स्थानीय नवयुवकों की बेकारी की समस्या का भी उल्लेख करते हैं, जो सामाजिक यथार्थ को छूता है। संदेश है कि प्रकृति हमें विनम्र बनाती है, संघर्ष (अँधेरे में लौटना, लहरों से बचना) हमें सतर्क और दृढ़ बनाता है तथा सच्ची यात्रा मन और प्रकृति के बीच का सेतु होती है।

कठिन शब्दों के अर्थ (शब्द-संपदा)

  • स्याह/सियाह: काला, श्याम
  • चट्टान: शिला
  • समाधिस्थ/समाधि: समाधि में स्थित, मनोयोग, तपस्या
  • चेतना: बुद्धि-विवेक से काम लेना, सावधान होना, होश में आना
  • क्षितिज: वह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं, दृष्टि-सीमा
  • सिहरन: कंपन, सिहरने की क्रिया
  • पृष्ठभूमि: पहले की बातें, पीछे की भूमि या पीछे का दृश्य
  • झुरमुट: समूह, मंडली, पास-पास उगे पेड़ या झाड़ जिनकी डालियाँ मिलकर कुंज-सा बना रही हों
  • बीहड़: ऊबड़-खाबड़, विकट, विभक्त
  • मद्धिम/मद्धम: मध्यम, कम अच्छा, मंदा
  • महुआ/महुवा: एक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल, फल खाने और लकड़ी ईंधन तथा इमारती काम में आती है
  • सीपियाँ/सीपी/सीप: शंख, घोंघे आदि की जाति का एक जलचर प्राणी जिसका शरीर किस्तीनुमा दोहरे खोल के भीतर छिपा होता है
  • दार्शनिक: दर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता
  • ओट: आड़, रोक, शरण, परदे के लिए बनाई गई दीवार
  • अर्ध्य: पूजनीय, पूजा में देने योग्य वस्तु, एक प्रकार का मधु
  • कडल-काक: पक्षियों की एक प्रजाति
  • बाइनाक्यूलर्ज/बाइनाक्यूलर: दूबीन, द्वित्री
  • सैंड हिल: बालू का टीला
  • सुरमई: हल्का नीला, सुरमे के रंग का
  • सिर धुनना: शोक, पश्चाताप आदि के वेग से सिर पीटना, मातम करना, पछताना
  • बे-लाग: खरा, दो टूक (बात)
The document Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक is a part of the Class 9 Course Hindi Class 9 Ganga (New NCERT).
All you need of Class 9 at this link: Class 9

FAQs on Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक

1. Who is the author of the chapter "आखिरी चट्टान तक"?
Ans. The author of the chapter "आखिरी चट्टान तक" is not specified in the provided content. However, it is essential to note that the author typically aims to convey deep insights about courage, perseverance, and the human spirit through the narrative.
2. What is the main theme of the chapter "आखिरी चट्टान तक"?
Ans. The main theme of the chapter "आखिरी चट्टान तक" revolves around the strength of human will and determination. It encapsulates the struggles and the relentless pursuit of goals despite challenges, highlighting the importance of resilience in overcoming obstacles.
3. Can you explain the significance of the title "आखिरी चट्टान तक"?
Ans. The title "आखिरी चट्टान तक" signifies the ultimate struggle or the final challenge one must face in their journey. It metaphorically represents reaching the peak of one's aspirations and the dedication necessary to achieve success against all odds.
4. What are some difficult words found in the chapter, and what do they mean?
Ans. Some difficult words from the chapter may include 'अवरोध' (obstacle), meaning a hindrance or barrier, and 'संकल्प' (resolution), meaning a firm decision to do something. These words are significant in understanding the challenges faced by the characters in the narrative.
5. How does the chapter inspire readers?
Ans. The chapter inspires readers by portraying characters who exemplify bravery and determination. Their journeys encourage readers to remain steadfast in the face of difficulties, reinforcing the idea that persistence and a positive mindset can lead to eventual success.
Explore Courses for Class 9 exam
Get EduRev Notes directly in your Google search
Related Searches
Exam, ppt, video lectures, past year papers, Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक, study material, Viva Questions, practice quizzes, Semester Notes, MCQs, shortcuts and tricks, Important questions, Previous Year Questions with Solutions, Sample Paper, Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक, Free, Objective type Questions, mock tests for examination, Chapter Notes: आखिरी चट्टान तक, pdf , Extra Questions, Summary;