
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पच्छिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
तर्क: लेखक ने सैंड हिल से शुरू करके एक के बाद एक कई टीले पार किए। अंत में अरब सागर की ओर के सबसे ऊँचे टीले से पूरे पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखाई दिया और वहीं से उसने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखा।
2. "मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।" यह कथन लेखक की किस मन:स्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना
तर्क: जब लेखक तीनों ओर के क्षितिज को आँखों में समेटता हुआ उस अपार समुद्री विस्तार के बीच खड़ा था, तो वह प्रकृति के उस भव्य दृश्य से इतना अभिभूत हो गया कि उसे अपने अलग अस्तित्व का बोध ही नहीं रहा। यह विस्मय की ही स्थिति है।
3. "मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।" इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
उत्तर: (घ) संतुष्टि
तर्क: लेखक ने अनेक कठिनाइयों और थकान के बावजूद एक के बाद एक टीले पार करके सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचने में सफलता पाई। इस कठिन प्रयत्न की सार्थकता सिद्ध होने पर उसे जो आत्मिक संतुष्टि मिली, वह इस कथन में व्यक्त होती है।
4. "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" वाक्य में वर्णन है -
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पच्छिमी क्षितिज का
उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का
तर्क: जब लेखक तीनों दिशाओं में केवल पानी-ही-पानी देख रहा था और हिंद महासागर का क्षितिज अपेक्षाकृत अधिक दूर और गहरा जान पड़ता था, तब उसने अपनी पूरी चेतना से इस विशाल सागरीय विस्तार को "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" कहकर व्यक्त किया।
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि -
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
तर्क: लेखक ने केवल स्थान-चित्रण नहीं किया है बल्कि प्रकृति के साथ अपने भावात्मक संवाद, स्थानीय लोगों से परिचय, विस्मय, भय, रोमांच और आत्म-चेतना को भी वर्णित किया है। इससे यात्रा जीवंत अनुभूतियों से जुड़ जाती है।
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
उत्तर: लेखक के सैंड हिल से आगे बढ़ने के पीछे मूल कारण उसकी सौंदर्यपूर्ण जिज्ञासा और पूर्णता की तलाश थी। सैंड हिल से सामने का पूरा विस्तार तो दिखाई दे रहा था, परंतु अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो उस विस्तार को ओट में लिए हुए था। लेखक चाहता था कि सूर्यास्त की पूरी पृष्ठभूमि दिखाई दे, इसलिए वह रुक नहीं सका। दूसरों के साथ रहकर समझौता करने की बजाय वह अकेला आगे बढ़ता गया। यह उसकी उस मानसिकता को दर्शाता है जो किसी अनुभव को अधूरा नहीं छोड़ना चाहती। वह हर अगले टीले पर सोचता था कि शायद अब एक ही टीला और है - और इसी उम्मीद में वह बढ़ता रहा। यह प्रवृत्ति उसकी आत्मिक दृढ़ता और सौंदर्य-बोध की गहराई को प्रकट करती है।
2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के बारे में निम्नलिखित बातें बताईं:
3. "अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया" - इस पंक्ति में 'प्रयत्न की सार्थकता' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: 'प्रयत्न की सार्थकता' से अभिप्राय है - लेखक के अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प का सफल परिणाम। लेखक ने सूर्यास्त का संपूर्ण और बाधारहित दृश्य देखने के लिए एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक गई थीं, अकेले रेत पर कदम घसीटना कठिन था, पर मन ने हार नहीं मानी। प्रत्येक टीले पर पहुँचकर लगता था कि अभी एक और टीला है, और वह आगे बढ़ता रहा।
अंततः एक ऐसे टीले पर पहुँचा जहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी - जैसे समुद्र में उतरने का रास्ता हो - और सूर्य पानी से थोड़ा ही ऊपर था। इस खुले विस्तार को देखकर लेखक को लगा जैसे उसने किसी ऊँची चोटी को पहली बार सर किया हो। यह उसके लगातार प्रयत्न का फल था। इसीलिए वह संतुष्ट मन से उस टीले पर बैठ गया - यही 'प्रयत्न की सार्थकता' है।
4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
उत्तर: इस यात्रा-वृत्तांत में लेखक के लिए कई दृश्य और अनुभव बिल्कुल नए थे:
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
उत्तर:
मोहन राकेश का 'आखिरी चट्टान तक' यात्रा-वृत्तांत केवल स्थान-चित्रण नहीं है बल्कि इसमें प्रकृति का सजीव रूपांकन, मानव-जीवन और समाज की झलक तथा आत्मानुभूति का गहरा समन्वय मिलता है।
नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों/विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा-वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।
1. दृश्य-वर्णन
2. आत्मानुभूति व भावनाएँ
3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
4. जीवन-दर्शन
5. शैलीगत विशेषताएँ
6. रोमांच व संघर्ष
उत्तर: यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व
संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है-
उत्तर: संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है।
पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से मैंने कुछ महत्वपूर्ण हिंदी यात्रा-वृत्तांतों की जानकारी एकत्रित की है। इन रचनाओं में लेखकों ने केवल स्थानों का वर्णन ही नहीं किया, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, जन-जीवन, व्यक्तिगत अनुभूतियाँ, कठिनाइयाँ और जीवन-दर्शन भी शामिल किए हैं।
नीचे एक विस्तृत तालिका दी गई है जिसमें पुस्तक में दिए गए संकेत (किन्नर देश में) के साथ कुछ अन्य प्रमुख यात्रा-वृत्तांत शामिल हैं:
अतिरिक्त जानकारी (पुस्तकालय से प्राप्त)
निष्कर्ष: ये यात्रा-वृत्तांत हमें सिखाते हैं कि यात्रा सिर्फ़ जगह बदलने की नहीं, बल्कि मन और ज्ञान को समृद्ध करने की होती है। पुस्तकालय में इनकी प्रतियाँ उपलब्ध हैं। यदि आप चाहें तो मैं इनमें से किसी एक रचना का और विस्तृत अंश या सारांश भी लिख सकता हूँ।
कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है जिसके प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण पाठ में हुआ है।
1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिन्हित कीजिए।
उत्तर: भारत में कुल 9 राज्य समुद्री तट पर स्थित हैं। इनकी अवस्थिति मुख्य रूप से तीन भागों में बँटी हुई है:
नोट: भारत के कुल तटीय क्षेत्र में ये राज्य मुख्य हैं। संघ राज्य क्षेत्र जैसे अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, पुदुचेरी आदि भी तटीय हैं, लेकिन प्रश्न में "राज्यों" का उल्लेख है। (मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए: पश्चिमी तट पर गुजरात से केरल तक लाइन खींचें, पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक, और दक्षिण में तमिलनाडु के कन्याकुमारी बिंदु को त्रिकोण चिह्न से दिखाएँ।)
(मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए: पश्चिमी तट पर गुजरात से केरल तक लाइन खींचें, पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक, और दक्षिण में तमिलनाडु के कन्याकुमारी बिंदु को त्रिकोण चिह्न से दिखाएँ।)
2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए-

उत्तर: 
3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति और परिवेश: कन्याकुमारी (कन्याकुमारी) भारत के मुख्य भूमि का दक्षिणतम छोर है। यह तमिलनाडु राज्य में स्थित है। यहाँ तीन समुद्र मिलते हैं-अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी। समुद्र तट पर स्याह चट्टानें, सुनहरी रेत के टीले, ऊँची-ऊँची लहरें और सूर्योदय-सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य हैं। जलवायु उष्णकटिबंधीय है-गर्म और नम।
महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल:
जन-जीवन:आबादी लगभग 8,000 है। अधिकांश लोग मछली पकड़ने, पर्यटन और छोटे-मोटे व्यापार से जुड़े हैं। स्थानीय नवयुवक शिक्षा प्राप्त हैं लेकिन बेरोजगारी की समस्या है। वे सीपियाँ बेचते हैं, दार्शनिक चर्चा करते हैं और पर्यटकों को शंख-मालाएँ बेचते हैं। संस्कृति द्रविड़ है-मंदिरों में पूजा, शंख की ध्वनि और समुद्री जीवन प्रमुख है।
आपके राज्य/शहर (कानपुर, उत्तर प्रदेश) से भिन्नता:
4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।
उत्तर: पाठ में "आखिरी चट्टान" कन्याकुमारी की विवेकानंद चट्टान को कहा गया है, जो भारत की मुख्य भूमि (mainland) का दक्षिणतम बिंदु है।
वर्तमान समय में भारत का दक्षिणतम बिंदु (अंतिम छोर): इंदिरा पॉइंट (Indira Point) को भारत का दक्षिणतम बिंदु माना जाता है।
(नोट: मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु अब भी कन्याकुमारी ही है।)
5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है?
(संकेत- तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)
उत्तर: पाठ में वर्णित "आखिरी चट्टान" (विवेकानंद चट्टान) पर 1970 में विवेकानंद स्मारक बनाया गया था, जिसमें स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा और ध्यान मंडपम हैं।
विस्तार (2000 के बाद):
इस विस्तार से कन्याकुमारी अब केवल विवेकानंद स्मारक तक सीमित नहीं रही, बल्कि तमिल संस्कृति और आधुनिक पर्यटन का प्रतीक बन गई है।
"दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखा रही थीं"
उपयुक्त पंक्ति में स्थानीय युवतियों द्वारा यात्रियों को दिखाए जाने वाली शंख-मालाओं का उल्लेख है। यह भारतीय हस्तकला उद्योग के एक पारंपरिक रूप को दर्शाता है, जहाँ स्थानीय कारीगर घरेलू स्तर पर उत्पाद बनाते और बेचते हैं। शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
1. किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संकलित कीजिए। यह कार्य दो-दो के जोड़े में कीजिए-
उत्तर: हमारी कक्षा में दो-दो के जोड़ों में कार्य किया गया। मेरे जोड़े ने कानपुर (उत्तर प्रदेश) के निकट ग्राम पंडितपुरा के स्थानीय शिल्पकार श्री रामप्रसाद (उम्र 52 वर्ष) से बातचीत की। वे बांस शिल्प (बांस की टोकरी, टोकरे, झोले, दीवार की सजावट और छोटे-छोटे उपयोगी सामान) बनाते हैं। यह शिल्प कानपुर-लखनऊ क्षेत्र में आम है और पर्यटकों तथा स्थानीय बाजार में बिकता है। नीचे उनके दिए गए उत्तर हैं:
2. डिजिटल खरीददारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: डिजिटल खरीददारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बहुत बड़ा सहारा दे रहा है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
3. हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: सरकार द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास (2025-26 तक की नवीनतम जानकारी):
कक्षा चर्चा के मुख्य बिंदु (हमने कक्षा में चर्चा की):
ये प्रयास कारीगरों की आय बढ़ा रहे हैं और भारतीय हस्तशिल्प को विश्व स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।
आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता होगा।
1. ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके सामने किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?
उत्तर: विशेष आवश्यकता वाले साथियों (जैसे शारीरिक विकलांगता, दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, बौद्धिक विकलांगता या ऑटिज्म वाले छात्र) के लिए यात्रा कई चुनौतियों से भरी होती है। मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
ये चुनौतियाँ यात्रा को रोमांच के बजाय तनावपूर्ण बना देती हैं।
2. उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।
उत्तर: हमने कक्षा में चर्चा कर निम्नलिखित व्यावहारिक सुझाव तैयार किए हैं जो विशेष आवश्यकता वाले साथियों की यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और आनंदपूर्ण बना सकते हैं:
ये सुझाव लागू करने से यात्रा केवल "जाना" नहीं, बल्कि "साथ मिलकर आनंद लेना" बन जाएगी।
3. अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?
उत्तर: हमने अपनी कक्षा की विशेष शिक्षा शिक्षिका श्रीमती रीता मिश्रा जी से इन सुझावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हमारे सुझावों को अच्छा और व्यावहारिक बताया, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी सुझाए:
शिक्षिका जी ने कहा कि हमारे सुझाव 70% प्रभावी हैं, बाकी 30% में व्यक्तिगत और संस्थागत सहायता जोड़ने से 100% सफलता मिलेगी। हमने उनके सुझावों को अपनी सूची में शामिल कर लिया।
4. प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।
उत्तर: हमने कक्षा के तीन विशेष आवश्यकता वाले साथियों (राहुल - शारीरिक विकलांगता, प्रिया - दृष्टिबाधित, और आर्यन - हल्की बौद्धिक विकलांगता) से अलग-अलग और समूह में चर्चा की। उनकी राय निम्नलिखित रही:
सभी की साझा राय:
इस चर्चा से हमें पता चला कि हमारे सुझाव अच्छे हैं, लेकिन साथियों की अपनी आवाज़ सुनना सबसे जरूरी है। हमने उनकी सलाह को अपनी अंतिम योजना में शामिल कर लिया।
क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विद्या से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा-संस्मरण लिखिए।
उत्तर: मेरा यात्रा-संस्मरण: प्रयागराज संगम की यात्रा
पिछले वर्ष दिसंबर में परिवार के साथ प्रयागराज (इलाहाबाद) के संगम घाट की यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार यात्रा रही।
यह यात्रा मुझे समृद्ध कर गई। अब जब भी थकान लगती है, संगम की याद मुझे नई ऊर्जा देती है।
उत्तर: परिचर्चा के मुख्य बिंदु (जो हमने कक्षा में चर्चा किए):
हम सभी ने सहमति जताई कि "यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं - धन से नहीं, अनुभव से।"
उत्तर: चर्चा के मुख्य बिंदु:
हमारा निष्कर्ष: इन गुणों के बिना यात्रा रोमांचक नहीं, बल्कि खतरनाक हो जाती है।
उत्तर: मेरा व्यक्तिगत अनुभव
पिछले वर्ष नानी के साथ वाराणसी की यात्रा में हम काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहे थे। अचानक भीड़ में मैं अपने परिवार से अलग हो गया। चारों तरफ अनजान लोग, गलियाँ संकरी और मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं था। पहले तो डर लगा, लेकिन फिर मैंने शांत रहकर एक पुलिस वाले से पूछा। उन्होंने मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुँचा दिया। उस समय मुझे लगा कि सतर्कता और धैर्य ने मुझे बचाया।
इस अनुभव से मैंने सीखा - यात्रा में कभी घबराना नहीं चाहिए। आज भी जब कोई नई जगह पर जाता हूँ, तो इस घटना को याद करके सतर्क रहता हूँ।
"समुद्र में पानी बढ़ रहा था, तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।"
उपयुक्त वाक्य में रेखांकित पद 'धीरे-धीरे' कम होना क्रिया की विशेषता बता रहा है। यहाँ कम होने की क्रिया धीमी गति से हो रही है।
जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द 'क्रिया-विशेषण' कहलाते हैं। इस वाक्य में 'धीरे-धीरे' पद व्याकरणिक दृष्टि से क्रिया-विशेषण है।
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य
(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
(ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।
उदाहरण-
उत्तर: परिभाषा: जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द 'क्रिया-विशेषण' कहलाते हैं।
उदाहरण: "समुद्र में पानी बढ़ रहा था। तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।" - यहाँ 'धीरे-धीरे' क्रिया-विशेषण है जो 'कम होना' क्रिया की विशेषता बता रहा है।
वाक्यों में क्रिया-विशेषण पहचानिए:
पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
वाक्य
उत्तर: पाठ के रेखांकित शब्दों से नए वाक्य:
1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है, लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?
उत्तर: कल्पना कीजिए कि हम परिवार के साथ कन्याकुमारी घूमने गए हैं। समुद्री तट पर अचानक एक विदेशी यात्री (जो कोरियाई भाषा बोलता है) हमसे मिलता है। वह बहुत घबराया हुआ है क्योंकि उसका मोबाइल खराब हो गया है, वह रास्ता भटक गया है और उसे केप होटल वापस जाना है। वह हमारे सामने हाथ जोड़कर खड़ा है।
मैं उसकी सहायता इस प्रकार करूँगा:
इस तरह भाषा की दीवार के बावजूद इशारे, मुस्कान, टेक्नोलॉजी और सहानुभूति से मैं उसकी पूरी मदद कर सकता हूँ। मोहन राकेश की यात्रा की तरह, जहाँ उन्होंने अकेले यात्रा की, वहाँ भी सहयोग की भावना सबसे जरूरी है।
2. पधारो म्हारे देश
अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रॉशर) तैयार कीजिए।
उत्तर: मेरा क्षेत्र - कानपुर (उत्तर प्रदेश)कानपुर गंगा नदी के किनारे बसा ऐतिहासिक औद्योगिक शहर है। यहाँ प्राचीन, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल हैं। मैंने अपने क्षेत्र के 5 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की सूची बनाई है।
पर्यटन स्थलों की सूची:
विवरणिका (ब्रॉशर) - "पधारो म्हारे कानपुर"
(ब्रॉशर की कल्पित डिज़ाइन - A4 साइज़, दोनों तरफ प्रिंट, आकर्षक रंग)
फ्रंट पेज (Cover):
अंदर का पेज (Inner Spread):
कानपुर के टॉप 5 पर्यटन स्थल
ब्रॉशर के पीछे (Back Page):
ब्रॉशर की विशेषताएँ:
यह ब्रॉशर स्कूल प्रोजेक्ट या पर्यटन विभाग को देने के लिए तैयार किया जा सकता है। अगर प्रिंट करना हो तो Canva या Microsoft Publisher में आसानी से बना सकते हैं।
निष्कर्ष:"पधारो म्हारे देश" के माध्यम से हम अपने क्षेत्र की सुंदरता को दुनिया के सामने ला सकते हैं। कानपुर केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि गंगा की सांस्कृतिक नगरी भी है।
"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं"
'नाव' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची आगे दी गई है।
नाव (हिंदी); नौ, नौका (संस्कृत); बेड़ी (पंजाबी); किश्ती, नाव (उर्दू); नाव (कश्मीरी); बेड़ी, किश्ती (सिंधी); होड़ी, नाव (मराठी); नाव, होड़ी (गुजराती); बहड़ी (कोंकणी); नाव, नौका, डुङ्गा (नेपाली); नावो, नौका (बांग्ला); नावो (असमिया); हि (मणिपुरी); नौका, नावा (ओड़िया); पडव, नाव (तेलुगु); ओडम (तमिल); तोणि (मलयालम); दोणि (कन्नड़)
https://shabd.education.gov.in/in/lexicon.jsp
उत्तर: 'नाव' शब्द अन्य भारतीय भाषाओं में (पुस्तक में दी गई सूची के अतिरिक्त):
पुस्तक में संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं के शब्द दिए गए हैं। इनके अतिरिक्त मैं कुछ और भारतीय भाषाओं/बोलियों में 'नाव' शब्द जानता हूँ:
ये शब्द स्थानीय बोलचाल में बहुत प्रयोग होते हैं।
उपयुक्त वाक्य अपनी मातृभाषा में: मेरी मातृभाषा हिंदी है (कानपुर, उत्तर प्रदेश)।
मूल वाक्य:"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं।"
हिंदी (मातृभाषा) में:"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं।"
(यह वाक्य मेरी मातृभाषा में पहले से ही है, इसलिए इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। अगर घर में अवधी बोली जाती है तो अवधी रूप इस प्रकार होगा - "ऊँची-ऊँची लहरन से बचावत मल्लाह नाव के लावत हैं।")
| 1. What is the main theme of the travelogue in 'यात्रा का वृत्तांत'? | ![]() |
| 2. How does the narrative structure enhance the reader's experience in the text? | ![]() |
| 3. What role does language play in the communication of themes in 'भाषा से संवाद - व्याकरण की वात'? | ![]() |
| 4. What are some key aspects of the content in 'मेरे देश की धरती'? | ![]() |
| 5. How do the themes in 'आखिरी चट्टान तक' reflect broader societal issues? | ![]() |