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NCERT Solutions: आखिरी चट्टान तक

NCERT Solutions: आखिरी चट्टान तक

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से 
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से 
(ग) पच्छिमी क्षितिज से 
(घ) सैंड हिल से

उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
तर्क: लेखक ने सैंड हिल से शुरू करके एक के बाद एक कई टीले पार किए। अंत में अरब सागर की ओर के सबसे ऊँचे टीले से पूरे पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखाई दिया और वहीं से उसने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखा।

2. "मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।" यह कथन लेखक की किस मन:स्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना 
(ख) विस्मित हो जाना 
(ग) भ्रमित हो जाना 
(घ) आशंकित होना

उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना
तर्क: जब लेखक तीनों ओर के क्षितिज को आँखों में समेटता हुआ उस अपार समुद्री विस्तार के बीच खड़ा था, तो वह प्रकृति के उस भव्य दृश्य से इतना अभिभूत हो गया कि उसे अपने अलग अस्तित्व का बोध ही नहीं रहा। यह विस्मय की ही स्थिति है।

3. "मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।" इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा 
(ख) विनम्रता 
(ग) आत्मीयता 
(घ) संतुष्टि

उत्तर: (घ) संतुष्टि
तर्क: लेखक ने अनेक कठिनाइयों और थकान के बावजूद एक के बाद एक टीले पार करके सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचने में सफलता पाई। इस कठिन प्रयत्न की सार्थकता सिद्ध होने पर उसे जो आत्मिक संतुष्टि मिली, वह इस कथन में व्यक्त होती है।

4. "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" वाक्य में वर्णन है -
(क) बलखाती लहरों का 
(ख) सागर की व्यापकता का 
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का 
(घ) पच्छिमी क्षितिज का

उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का
तर्क: जब लेखक तीनों दिशाओं में केवल पानी-ही-पानी देख रहा था और हिंद महासागर का क्षितिज अपेक्षाकृत अधिक दूर और गहरा जान पड़ता था, तब उसने अपनी पूरी चेतना से इस विशाल सागरीय विस्तार को "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" कहकर व्यक्त किया।

5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि -
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है। 
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है। 
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है। 
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
तर्क: लेखक ने केवल स्थान-चित्रण नहीं किया है बल्कि प्रकृति के साथ अपने भावात्मक संवाद, स्थानीय लोगों से परिचय, विस्मय, भय, रोमांच और आत्म-चेतना को भी वर्णित किया है। इससे यात्रा जीवंत अनुभूतियों से जुड़ जाती है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
उत्तर: लेखक के सैंड हिल से आगे बढ़ने के पीछे मूल कारण उसकी सौंदर्यपूर्ण जिज्ञासा और पूर्णता की तलाश थी। सैंड हिल से सामने का पूरा विस्तार तो दिखाई दे रहा था, परंतु अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो उस विस्तार को ओट में लिए हुए था। लेखक चाहता था कि सूर्यास्त की पूरी पृष्ठभूमि दिखाई दे, इसलिए वह रुक नहीं सका। दूसरों के साथ रहकर समझौता करने की बजाय वह अकेला आगे बढ़ता गया। यह उसकी उस मानसिकता को दर्शाता है जो किसी अनुभव को अधूरा नहीं छोड़ना चाहती। वह हर अगले टीले पर सोचता था कि शायद अब एक ही टीला और है - और इसी उम्मीद में वह बढ़ता रहा। यह प्रवृत्ति उसकी आत्मिक दृढ़ता और सौंदर्य-बोध की गहराई को प्रकट करती है।

2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के बारे में निम्नलिखित बातें बताईं:

  • बेरोजगार युवा वर्ग: एक ग्रेजुएट नवयुवक ने बताया कि कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में कम-से-कम चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेकार हैं। उनमें से लगभग सौ ग्रेजुएट हैं। उनका मुख्य धंधा नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और बैठकर आपस में बहस करना है।
  • छोटे-मोटे काम: वह नवयुवक स्वयं फोटो-एल्बम बेचता था। दूसरे नवयुवक भी उसी तरह के छोटे-मोटे काम करते थे। उन्होंने हँसते हुए कहा कि वे "सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।"
  • स्थानीय युवतियाँ: दो स्थानीय नवयुवतियाँ सरकारी मेहमानों को अपनी टोकरियों से शंख और मालाएँ दिखला रही थीं। वे एक साथ मालाओं का मोल-तोल और बाइनाक्यूलर से सूर्य-दर्शन का काम कर रही थीं।
  • मल्लाह: चार मल्लाह थे जो एक छोटी-सी मछुआ नाव में पर्यटकों को विवेकानंद चट्टान तक ले जाते थे।
  • धार्मिक प्रवृत्ति: कन्याकुमारी के मंदिर में पूजा की घंटियाँ बजती रहती थीं और भक्तों की एक मंडली मंदिर की दीवार के पास रुककर उसे प्रणाम कर रही थी।

3. "अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया" - इस पंक्ति में 'प्रयत्न की सार्थकता' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: 'प्रयत्न की सार्थकता' से अभिप्राय है - लेखक के अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प का सफल परिणाम। लेखक ने सूर्यास्त का संपूर्ण और बाधारहित दृश्य देखने के लिए एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक गई थीं, अकेले रेत पर कदम घसीटना कठिन था, पर मन ने हार नहीं मानी। प्रत्येक टीले पर पहुँचकर लगता था कि अभी एक और टीला है, और वह आगे बढ़ता रहा।
अंततः एक ऐसे टीले पर पहुँचा जहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी - जैसे समुद्र में उतरने का रास्ता हो - और सूर्य पानी से थोड़ा ही ऊपर था। इस खुले विस्तार को देखकर लेखक को लगा जैसे उसने किसी ऊँची चोटी को पहली बार सर किया हो। यह उसके लगातार प्रयत्न का फल था। इसीलिए वह संतुष्ट मन से उस टीले पर बैठ गया - यही 'प्रयत्न की सार्थकता' है।

4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
उत्तर: इस यात्रा-वृत्तांत में लेखक के लिए कई दृश्य और अनुभव बिल्कुल नए थे:

  • तीन समुद्रों का संगम: अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी - तीनों के संगम-स्थल की विशालता और शक्ति को देखना और महसूस करना लेखक के लिए नया और अद्भुत था। इस दृश्य ने उसे इतना आच्छादित किया कि वह अपना अस्तित्व भी भूल गया।
  • सूर्यास्त के बदलते रंग: सूर्य के अस्त होते समय पानी पर सोने-सा रंग फैलना और फिर उसका लहू जैसा लाल होना, बैंजनी और फिर काला पड़ जाना - रंगों का यह क्षण-क्षण बदलता सिलसिला लेखक के लिए नया था। किसी भी एक क्षण को एक नाम दे सकना असंभव था।
  • समुद्र तट की रंगीन रेत: लेखक ने वहाँ की रेत में सुरमई, खाकी, पीली और लाल - अनेक रंग देखे। एक-एक इंच पर एक-दूसरे से अलग रंग थे और हर एक रंग कई-कई रंगों की झलक लिए हुए था। ऐसी रंग-बिरंगी रेत उसने पहले कभी कहीं नहीं देखी थी।
  • रेत पर अपने पैरों के निशान: जब सुनहली किरणों ने पीली रेत को एक नया-सा रंग दिया, तब उस रेत पर दूर तक बने अपने पैरों के निशानों को देखकर लेखक को लगा जैसे रेत पहली बार उन निशानों से टूटी हो। इससे उसके मन में एक सिहरन और हल्की उदासी घिर आई।
  • विवेकानंद चट्टान की यात्रा: रबड़ के तीन तनों को जोड़कर बनी नाव में बैठकर ऊँची-ऊँची लहरों के बीच समुद्र में आगे बढ़ना लेखक के लिए रोमांचकारी और नया अनुभव था।

5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
उत्तर:

  • अंश 1 - टीले पार करना:"टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है, उस पर पहुँचकर पच्छिमी क्षितिज का खुला विस्तार अवश्य नजर आएगा।" यह अंश दर्शाता है कि शारीरिक थकान होने के बावजूद लेखक का मन हार नहीं मानता। लक्ष्य प्राप्त न होने पर वह निराश नहीं होता, बल्कि आगे बढ़ता रहता है।
  • अंश 2 - बढ़ते पानी से घिरने पर:"मेरे मन में खतरा बढ़ गया। मैं दौड़ने लगा। ...एक ऊँची लहर से बचकर इस तरह दौड़ा जैसे सचमुच वह मुझे अपनी लपेट में लेने आ रही हो।" यहाँ लेखक अंधेरे और बढ़ते पानी के खतरे में भी घबराकर रुकता नहीं, बल्कि हिम्मत से आगे बढ़ता है। चट्टान से टकराने पर हल्की चोट लगती है, पर वह किसी तरह सुरक्षित किनारे तक पहुँच जाता है। यह उसकी दृढ़ता और साहस को दर्शाता है।

विधा से संवाद

यात्रा का वृत्तांत

मोहन राकेश का 'आखिरी चट्टान तक' यात्रा-वृत्तांत केवल स्थान-चित्रण नहीं है बल्कि इसमें प्रकृति का सजीव रूपांकन, मानव-जीवन और समाज की झलक तथा आत्मानुभूति का गहरा समन्वय मिलता है।
नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों/विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा-वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।
1. दृश्य-वर्णन

  • समुद्र, चट्टानें
  • लहरों का चित्रण
  • रंग, आकाश, रेत का जीवंत चित्रण

2. आत्मानुभूति व भावनाएँ

  • विस्मय, रोमांच, भय, आत्म-संवेदना
  • अपने अस्तित्व का बोध
  • प्रकृति से संवाद

3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य

  • विवेकानंद चट्टान
  • स्थानीय लोग, नवयुवक, शिक्षा
  • धार्मिक परंपराएँ (मंदिर, अर्चा)

4. जीवन-दर्शन

  • शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति
  • आत्म-चेतना
  • क्षणभंगुरता व उदासी

5. शैलीगत विशेषताएँ

  • सजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा
  • दृश्यात्मकता
  • रूपक, उपमा, प्रतीक
  • रंगों का भावात्मक प्रयोग

6. रोमांच व संघर्ष

  • लहरों से संघर्ष
  • अंधेरे में भटकने का भय
  • सुरक्षित लौटने की चिंता

उत्तर: यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व
यात्रा का वृत्तांत

विषयों से संवाद

यात्रा और खोज

संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है-
यात्रा और खोज

उत्तर: संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है।
पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से मैंने कुछ महत्वपूर्ण हिंदी यात्रा-वृत्तांतों की जानकारी एकत्रित की है। इन रचनाओं में लेखकों ने केवल स्थानों का वर्णन ही नहीं किया, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, जन-जीवन, व्यक्तिगत अनुभूतियाँ, कठिनाइयाँ और जीवन-दर्शन भी शामिल किए हैं।
नीचे एक विस्तृत तालिका दी गई है जिसमें पुस्तक में दिए गए संकेत (किन्नर देश में) के साथ कुछ अन्य प्रमुख यात्रा-वृत्तांत शामिल हैं:
यात्रा और खोज

अतिरिक्त जानकारी (पुस्तकालय से प्राप्त)

  • राहुल सांकृत्यायन को "हिंदी यात्रा-साहित्य का जनक" या "घुमक्कड़ शास्त्री" कहा जाता है। उन्होंने 'घुमक्कड़शास्त्र' नामक पुस्तक भी लिखी जिसमें यात्रा को एक विज्ञान और जीवन-शैली बताया गया है।
  • ये रचनाएँ केवल रोमांच नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, प्रकृति-संरक्षण और आत्म-खोज सिखाती हैं।
  • शिक्षक ने सलाह दी कि इन पुस्तकों को पढ़ने से हम अपनी यात्राओं को भी गहराई से समझ सकते हैं।

निष्कर्ष: ये यात्रा-वृत्तांत हमें सिखाते हैं कि यात्रा सिर्फ़ जगह बदलने की नहीं, बल्कि मन और ज्ञान को समृद्ध करने की होती है। पुस्तकालय में इनकी प्रतियाँ उपलब्ध हैं। यदि आप चाहें तो मैं इनमें से किसी एक रचना का और विस्तृत अंश या सारांश भी लिख सकता हूँ।

मेरे देश की धरती

कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है जिसके प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण पाठ में हुआ है।

1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिन्हित कीजिए।
उत्तर: भारत में कुल 9 राज्य समुद्री तट पर स्थित हैं। इनकी अवस्थिति मुख्य रूप से तीन भागों में बँटी हुई है:

  • पश्चिमी तट (अरब सागर):
    • गुजरात (सबसे लंबा तट, खंभात और कच्छ की खाड़ी)
    • महाराष्ट्र (मुंबई के आसपास)
    • गोवा (छोटा लेकिन प्रसिद्ध पर्यटन तट)
    • कर्नाटक
    • केरल (दक्षिण-पश्चिम)
  • पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी):
    • पश्चिम बंगाल
    • ओडिशा
    • आंध्र प्रदेश
    • तमिलनाडु (दक्षिण-पूर्व)
  • दक्षिणी छोर: तमिलनाडु (कन्याकुमारी) - जहाँ अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी मिलते हैं।

नोट: भारत के कुल तटीय क्षेत्र में ये राज्य मुख्य हैं। संघ राज्य क्षेत्र जैसे अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, पुदुचेरी आदि भी तटीय हैं, लेकिन प्रश्न में "राज्यों" का उल्लेख है। (मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए: पश्चिमी तट पर गुजरात से केरल तक लाइन खींचें, पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक, और दक्षिण में तमिलनाडु के कन्याकुमारी बिंदु को त्रिकोण चिह्न से दिखाएँ।)
(मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए: पश्चिमी तट पर गुजरात से केरल तक लाइन खींचें, पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक, और दक्षिण में तमिलनाडु के कन्याकुमारी बिंदु को त्रिकोण चिह्न से दिखाएँ।)

2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए-

मेरे देश की धरती

उत्तर: 
मेरे देश की धरती

3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति और परिवेश: कन्याकुमारी (कन्याकुमारी) भारत के मुख्य भूमि का दक्षिणतम छोर है। यह तमिलनाडु राज्य में स्थित है। यहाँ तीन समुद्र मिलते हैं-अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी। समुद्र तट पर स्याह चट्टानें, सुनहरी रेत के टीले, ऊँची-ऊँची लहरें और सूर्योदय-सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य हैं। जलवायु उष्णकटिबंधीय है-गर्म और नम।
महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल:

  • विवेकानंद स्मारक चट्टान (जहाँ स्वामी विवेकानंद ने ध्यान किया था)
  • तिरुवल्लुवर प्रतिमा (133 फीट ऊँची)
  • कन्याकुमारी अम्मन मंदिर
  • सैंड हिल और समुद्री तट
  • घाट और नाव यात्रा

जन-जीवन:आबादी लगभग 8,000 है। अधिकांश लोग मछली पकड़ने, पर्यटन और छोटे-मोटे व्यापार से जुड़े हैं। स्थानीय नवयुवक शिक्षा प्राप्त हैं लेकिन बेरोजगारी की समस्या है। वे सीपियाँ बेचते हैं, दार्शनिक चर्चा करते हैं और पर्यटकों को शंख-मालाएँ बेचते हैं। संस्कृति द्रविड़ है-मंदिरों में पूजा, शंख की ध्वनि और समुद्री जीवन प्रमुख है।

आपके राज्य/शहर (कानपुर, उत्तर प्रदेश) से भिन्नता:

  • भौगोलिक: कन्याकुमारी समुद्री तट है, जबकि कानपुर गंगा-यमुना के मैदानी दोआब क्षेत्र में है। यहाँ कोई समुद्र नहीं, केवल नदियाँ हैं।
  • जलवायु: कन्याकुमारी में हमेशा गर्मी और नमी रहती है, सूर्योदय-सूर्यास्त समुद्र पर दिखते हैं। कानपुर में गर्मियाँ बहुत तेज़ (45°C तक) और सर्दियाँ ठंडी (5-10°C) होती हैं।
  • परिवेश: वहाँ चट्टानें, लहरें और समुद्री जीवन है; कानपुर औद्योगिक शहर है-कारखाने, ट्रैफिक और प्रदूषण ज्यादा।
  • जन-जीवन: कन्याकुमारी में पर्यटन और मछली पकड़ना मुख्य है; कानपुर में उद्योग, व्यापार और कृषि प्रमुख हैं। संस्कृति भी भिन्न है-उत्तर भारतीय (हिंदी, हिंदू परंपराएँ) बनाम दक्षिण भारतीय (तमिल, मंदिर-केंद्रित)। कुल मिलाकर कन्याकुमारी शांत, प्राकृतिक और रोमांचक है, जबकि कानपुर व्यस्त, औद्योगिक और मैदानी है।

4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।
उत्तर: पाठ में "आखिरी चट्टान" कन्याकुमारी की विवेकानंद चट्टान को कहा गया है, जो भारत की मुख्य भूमि (mainland) का दक्षिणतम बिंदु है।
वर्तमान समय में भारत का दक्षिणतम बिंदु (अंतिम छोर): इंदिरा पॉइंट (Indira Point) को भारत का दक्षिणतम बिंदु माना जाता है।

  • स्थान: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित।
  • अक्षांश: लगभग 6°46′ N (कन्याकुमारी से करीब 1,300 किमी दक्षिण)।
  • विवरण: यहाँ पहले एक गांव और लाइटहाउस था। 2004 के सुनामी में यहाँ 4.25 मीटर धँसाव हुआ, लेकिन फिर भी यह भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है। यहाँ समुद्री कछुए (लेदरबैक) पाए जाते हैं।
  • महत्व: यह भारत की सम्पूर्ण भौगोलिक सीमा का अंतिम छोर है (केवल मुख्य भूमि नहीं)।

(नोट: मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु अब भी कन्याकुमारी ही है।)

5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है?
(संकेत- तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)

उत्तर: पाठ में वर्णित "आखिरी चट्टान" (विवेकानंद चट्टान) पर 1970 में विवेकानंद स्मारक बनाया गया था, जिसमें स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा और ध्यान मंडपम हैं।
विस्तार (2000 के बाद):

  • तिरुवल्लुवर प्रतिमा (Thiruvalluvar Statue): वर्ष 2000 में विवेकानंद चट्टान के पास ही एक अन्य चट्टान पर 133 फीट (40.6 मीटर) ऊँची विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। यह तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की है, जिनकी रचना तिरुक्कुरल (133 अध्याय) है। प्रतिमा का डिज़ाइन तिरुक्कुरल के अध्यायों पर आधारित है।
  • कांच का पुल (Glass Bridge): दिसंबर 2024 में विवेकानंद चट्टान और तिरुवल्लुवर प्रतिमा को जोड़ने वाला 77 मीटर लंबा कांच का पैदल पुल (Kanyakumari Glass Bridge) बनाया गया। इससे दोनों स्थलों के बीच पैदल चलना संभव हो गया है।
  • अन्य सुविधाएँ: फेरी सेवा अब दोनों स्थलों तक जाती है। पर्यटक संख्या बढ़ी है।

इस विस्तार से कन्याकुमारी अब केवल विवेकानंद स्मारक तक सीमित नहीं रही, बल्कि तमिल संस्कृति और आधुनिक पर्यटन का प्रतीक बन गई है।

हस्तशिल्प कौशल

"दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखा रही थीं"

उपयुक्त पंक्ति में स्थानीय युवतियों द्वारा यात्रियों को दिखाए जाने वाली शंख-मालाओं का उल्लेख है। यह भारतीय हस्तकला उद्योग के एक पारंपरिक रूप को दर्शाता है, जहाँ स्थानीय कारीगर घरेलू स्तर पर उत्पाद बनाते और बेचते हैं। शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।

1. किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संकलित कीजिए। यह कार्य दो-दो के जोड़े में कीजिए-

  • शिल्प का नाम
  • यह कार्य कब से कर रहे हैं?
  • इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया?
  • शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की सहभागिता
  • प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन
  • औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण

उत्तर: हमारी कक्षा में दो-दो के जोड़ों में कार्य किया गया। मेरे जोड़े ने कानपुर (उत्तर प्रदेश) के निकट ग्राम पंडितपुरा के स्थानीय शिल्पकार श्री रामप्रसाद (उम्र 52 वर्ष) से बातचीत की। वे बांस शिल्प (बांस की टोकरी, टोकरे, झोले, दीवार की सजावट और छोटे-छोटे उपयोगी सामान) बनाते हैं। यह शिल्प कानपुर-लखनऊ क्षेत्र में आम है और पर्यटकों तथा स्थानीय बाजार में बिकता है। नीचे उनके दिए गए उत्तर हैं:

  • शिल्प का नाम: बांस शिल्प (Bamboo Craft) - मुख्यतः टोकरी, झोला, फूलदान, दीवार की सजावट की वस्तुएँ और छोटे-मोटे घरेलू सामान।
  • यह कार्य कब से कर रहे हैं?: पिछले 35 वर्षों से। बचपन से पिता-दादा के साथ सीखा। 1990 के दशक से पूर्ण रूप से अपना पेशा बनाया।
  • इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया?: मुख्यतः घरेलू परंपरा से (पिता से)। बाद में 2015 में कानपुर के कुटीर उद्योग प्रशिक्षण केंद्र (KVIC केंद्र) में 15 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण लिया, जिसमें नई डिजाइन और बेहतर बुनाई की तकनीक सिखाई गई।
  • शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की सहभागिता: बहुत अधिक। पत्नी और दो बेटियाँ बुनाई, रंगाई और छोटी-छोटी सजावट का काम करती हैं। वे दिन में 4-5 घंटे काम करती हैं। इससे परिवार की आय दोगुनी हो गई है।
  • प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन:
    • सामग्री: स्थानीय बांस (रामपुर-कानपुर क्षेत्र से), प्राकृतिक रंग (हल्दी, कचनार), तार और सीमेंट की छोटी पट्टियाँ।
    • तकनीक: हाथ से बुनाई (मैनुअल वीविंग), कोई मशीन नहीं। नई डिजाइन के लिए मोबाइल से फोटो देखकर नकल करते हैं।
    • लागत: एक बड़ी टोकरी बनाने में ₹80-120 (सामग्री + समय)। बिक्री मूल्य ₹250-400। महीने की कुल आय ₹12,000-18,000 (परिवार मिलकर)।
    • विपणन: स्थानीय हाट, कानपुर का नवाबगंज बाजार, और कुछ पर्यटक दुकानों पर। कभी-कभी ऑनलाइन (WhatsApp) भी बेचते हैं।
  • औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण: हाँ। 2015 में KVIC (खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग) के तहत प्रशिक्षण लिया। 2023 में एक बार फिर "हस्तशिल्प विकास बोर्ड" के कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें नई डिजाइन और बाजार से जुड़ने का प्रशिक्षण मिला।

2. डिजिटल खरीददारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: डिजिटल खरीददारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बहुत बड़ा सहारा दे रहा है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • बाजार का विस्तार: पहले शिल्पकार केवल स्थानीय हाट या दुकान तक सीमित थे। अब Amazon, Flipkart, GeM (Government e-Marketplace), Etsy और सरकारी पोर्टल (handicrafts.nic.in) के माध्यम से पूरे भारत और विदेश (अमेरिका, यूरोप) तक उत्पाद पहुँच जाते हैं।
  • मध्यस्थों का अंत: सीधे ग्राहक तक पहुँचने से कारीगर को ज्यादा लाभ मिलता है (30-50% तक बढ़ोतरी)।
  • महिलाओं और छोटे कारीगरों को सशक्तिकरण: घर बैठे बिक्री संभव। उदाहरण: चिकनकारी, बांस शिल्प या शंख-माला बनाने वाली महिलाएँ अब अपना ऑनलाइन स्टोर चला रही हैं।
  • ब्रांडिंग और GI टैग: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर GI (Geographical Indication) टैग वाले उत्पाद (जैसे कानपुर चमड़ा या लखनऊ चिकनकारी) आसानी से पहचाने जाते हैं।
  • आंकड़े: 2025-26 में ई-कॉमर्स से हस्तशिल्प का निर्यात 20% बढ़ा है। सरकार का "One District One Product" (ODOP) पोर्टल भी इसी दिशा में काम कर रहा है।
  • चुनौतियाँ और समाधान: डिजिटल साक्षरता कम होने पर सरकारी प्रशिक्षण (Skill Development in Handicrafts Sector) दिया जा रहा है।

3. हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: सरकार द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास (2025-26 तक की नवीनतम जानकारी):

  • राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (NHDP): केंद्र सरकार की मुख्य योजना। इसमें कौशल विकास, डिजाइन सहायता, विपणन, क्लस्टर विकास और सामाजिक सुरक्षा शामिल है। 2022-26 के लिए ₹142.5 करोड़ आवंटित।
  • अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना (AHVY): हस्तशिल्प क्लस्टरों का एकीकृत विकास। कारीगरों को उत्पादक कंपनी बनाने, बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण मिलता है।
  • बृहत हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (CHCDS): विश्व स्तरीय सुविधाएँ और निर्यात बढ़ाने के लिए।
  • राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार: शिल्प गुरु पुरस्कार और नेशनल हैंडीक्राफ्ट अवॉर्ड (2025 के लिए आवेदन खुले) - उत्कृष्ट कारीगरों को सम्मान और प्रोत्साहन।
  • महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (2026-27 बजट): खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को एकीकृत कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया। हस्तशिल्प फार्म स्थापित करने की घोषणा।
  • KVIC (खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग) योजनाएँ:
    • खादी विकास योजना (KVY)
    • वर्कशेड स्कीम (कारीगरों को बेहतर कार्यस्थल)
    • मार्केटिंग सहायता और ISEC (ब्याज सब्सिडी)
  • ई-कॉमर्स और डिजिटल प्रचार: GeM पोर्टल, Amazon Saheli, Flipkart आदि पर विशेष सेल। ODOP पोर्टल।
  • कौशल विकास: SAMARTH योजना और Skill Development in Handicrafts Sector (SDHS) के तहत प्रशिक्षण।
  • अन्य: GI टैग संरक्षण, हस्तशिल्प सप्ताह, प्रदर्शनियाँ और निर्यात प्रोत्साहन।

कक्षा चर्चा के मुख्य बिंदु (हमने कक्षा में चर्चा की):

  • हस्तशिल्प ग्रामीण रोजगार और संस्कृति का संरक्षण दोनों करता है।
  • डिजिटल और सरकारी योजनाओं से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
  • चुनौती: कच्चे माल की महंगाई और युवाओं का पलायन।
  • सुझाव: हर जिले में एक हस्तशिल्प क्लस्टर और स्कूलों में प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएँ।

ये प्रयास कारीगरों की आय बढ़ा रहे हैं और भारतीय हस्तशिल्प को विश्व स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।

मिलकर चलें

आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता होगा।

1. ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके सामने किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?
उत्तर: 
विशेष आवश्यकता वाले साथियों (जैसे शारीरिक विकलांगता, दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, बौद्धिक विकलांगता या ऑटिज्म वाले छात्र) के लिए यात्रा कई चुनौतियों से भरी होती है। मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:

  • शारीरिक विकलांगता वाले साथियों के लिए: सीढ़ियाँ, असमान रास्ते, ऊँचे फुटपाथ, व्हीलचेयर के लिए रैंप न होना, बस/ट्रेन में चढ़ने-उतरने की सुविधा न होना, लंबी पैदल यात्रा, चट्टानों या समुद्री तट जैसे कन्याकुमारी में ऊबड़-खाबड़ जगहें।
  • दृष्टिबाधित साथियों के लिए: दृश्य संकेत (साइन बोर्ड), सुंदर दृश्य या सूर्योदय-सूर्यास्त का आनंद न ले पाना, अकेले भटकने का खतरा, ब्रेल या ऑडियो गाइड की कमी।
  • श्रवणबाधित साथियों के लिए: गाइड की आवाज़ न सुन पाना, आपातकालीन सूचनाएँ, भीड़-भाड़ में संकेतों का अभाव।
  • बौद्धिक या विकासात्मक विकलांगता वाले साथियों के लिए: नई जगह पर भटक जाना, भीड़ का डर, समय सारिणी समझने में कठिनाई, सुरक्षा का भय।
  • सामान्य चुनौतियाँ: सहायक उपकरण (व्हीलचेयर, क्रच, सुनने की मशीन) ले जाने में परेशानी, शौचालय और आराम की सुविधा न होना, चिकित्सकीय सहायता की कमी, परिवार या साथियों पर निर्भरता बढ़ना, और सबसे बड़ी समस्या-समाज की संवेदनहीनता।

ये चुनौतियाँ यात्रा को रोमांच के बजाय तनावपूर्ण बना देती हैं।

2. उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।
उत्तर: 
हमने कक्षा में चर्चा कर निम्नलिखित व्यावहारिक सुझाव तैयार किए हैं जो विशेष आवश्यकता वाले साथियों की यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और आनंदपूर्ण बना सकते हैं:

  • परिवहन और पहुँच: यात्रा से पहले व्हीलचेयर फ्रेंडली बस, ट्रेन या विशेष वाहन बुक करें। होटल/हॉस्टल में रैंप, लिफ्ट और ग्राउंड फ्लोर कमरे की व्यवस्था करें।
  • सहायक उपकरण: दृष्टिबाधित साथियों के लिए ब्रेल मैप, ऑडियो गाइड ऐप (जैसे Seeing Eye GPS) और वॉइस असिस्टेंट। श्रवणबाधित साथियों के लिए साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर या रियल-टाइम कैप्शन ऐप।
  • योजना बनाना: यात्रा से 15-20 दिन पहले पूरी सूचना (समय, दूरी, सुविधाएँ) लिखित और ऑडियो फॉर्म में दें। छोटे-छोटे समूह बनाकर यात्रा करें।
  • साथी और सहायता: हर विशेष आवश्यकता वाले साथी के साथ एक स्वयंसेवी साथी रखें। आपातकालीन चिकित्सा किट और फोन नंबर तैयार रखें।
  • पर्यटन स्थल पर: कन्याकुमारी जैसे स्थानों पर पहले से संपर्क कर व्हीलचेयर रैंप, विशेष नाव या गाइड की व्यवस्था करें। थकान कम करने के लिए ज्यादा आराम का समय रखें।
  • भावनात्मक सहयोग: यात्रा को "सभी के लिए" बनाएँ-कोई पीछे न छूटे। संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए कक्षा में पहले ही रोल-प्ले अभ्यास करें।
  • सरकारी मदद: RPWD Act 2016 के तहत उपलब्ध सुविधाओं (जैसे दिव्यांग प्रमाण-पत्र पर रियायत) का उपयोग करें।

ये सुझाव लागू करने से यात्रा केवल "जाना" नहीं, बल्कि "साथ मिलकर आनंद लेना" बन जाएगी।

3. अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?
उत्तर: 
हमने अपनी कक्षा की विशेष शिक्षा शिक्षिका श्रीमती रीता मिश्रा जी से इन सुझावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हमारे सुझावों को अच्छा और व्यावहारिक बताया, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी सुझाए:

  • प्रभावी पहलू:
    • व्हीलचेयर फ्रेंडली परिवहन और पहले से योजना बनाना बहुत उपयोगी है।
    • ब्रेल/ऑडियो गाइड और साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर सही दिशा में हैं।
    • साथी छात्र की मदद का विचार अच्छा है।
  • सुझाए गए बदलाव और सुधार:
    • व्यक्तिगत आवश्यकता का ध्यान: हर साथी की विकलांगता अलग होती है, इसलिए सामान्य सुझाव की जगह व्यक्तिगत यात्रा योजना (Individual Travel Plan) बनानी चाहिए।
    • बजट और संसाधन: स्कूल स्तर पर बजट की कमी हो सकती है, इसलिए स्थानीय NGO या "दिव्यांग कल्याण विभाग" से मदद लेनी चाहिए।
    • प्रशिक्षण: शिक्षक जी ने कहा कि कक्षा के सभी छात्रों को "संवेदनशीलता प्रशिक्षण" (Sensitivity Workshop) देना चाहिए।
    • नया सुझाव: यात्रा से पहले मॉक ड्रिल (अभ्यास यात्रा) करनी चाहिए ताकि वास्तविक यात्रा में समस्या न आए।
    • कानूनी सहायता: RPWD Act के अंतर्गत "सुलभ" (accessible) पर्यटन स्थलों की सूची पहले से तैयार रखनी चाहिए।

शिक्षिका जी ने कहा कि हमारे सुझाव 70% प्रभावी हैं, बाकी 30% में व्यक्तिगत और संस्थागत सहायता जोड़ने से 100% सफलता मिलेगी। हमने उनके सुझावों को अपनी सूची में शामिल कर लिया।

4. प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।
उत्तर: हमने कक्षा के तीन विशेष आवश्यकता वाले साथियों (राहुल - शारीरिक विकलांगता, प्रिया - दृष्टिबाधित, और आर्यन - हल्की बौद्धिक विकलांगता) से अलग-अलग और समूह में चर्चा की। उनकी राय निम्नलिखित रही:

  • राहुल (व्हीलचेयर यूजर): "रैंप और लिफ्ट की बात बहुत अच्छी लगी, लेकिन कन्याकुमारी जैसे समुद्री तट पर व्हीलचेयर के पहिए रेत में धँस जाते हैं। इसलिए विशेष मैट या ट्रैक की व्यवस्था होनी चाहिए।"
  • प्रिया (दृष्टिबाधित): "ऑडियो गाइड और ब्रेल मैप बहुत उपयोगी होंगे। मैं चाहती हूँ कि सूर्योदय-सूर्यास्त का वर्णन लाइव वॉइस में किया जाए ताकि मैं महसूस कर सकूँ।"
  • आर्यन: "भीड़-भाड़ मुझे डराती है। इसलिए कम भीड़ वाले समय में यात्रा करें और मेरे साथ कोई परिचित साथी रहे।"

सभी की साझा राय:

  • वे यात्रा पर जाना बहुत चाहते हैं, लेकिन "सुरक्षा और सम्मान" सबसे महत्वपूर्ण है।
  • वे कहते हैं कि "हम भी बाकी बच्चों जैसा आनंद लेना चाहते हैं, सिर्फ थोड़ी अतिरिक्त मदद चाहिए।"
  • सुझाव: यात्रा का नाम "सभी के साथ यात्रा" रखा जाए ताकि कोई अलग-थलग महसूस न करे।

इस चर्चा से हमें पता चला कि हमारे सुझाव अच्छे हैं, लेकिन साथियों की अपनी आवाज़ सुनना सबसे जरूरी है। हमने उनकी सलाह को अपनी अंतिम योजना में शामिल कर लिया।

सृजन

प्रकृति की ओर

क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

अनुभव की साझेदारी

विद्या से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा-संस्मरण लिखिए।
उत्तर: मेरा यात्रा-संस्मरण: प्रयागराज संगम की यात्रा
पिछले वर्ष दिसंबर में परिवार के साथ प्रयागराज (इलाहाबाद) के संगम घाट की यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार यात्रा रही।

  • दृश्य-वर्णन: संगम पर गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन देखकर मन मोहित हो गया। पानी का रंग नीला-हरा था, किनारे पर सफेद रेत चमक रही थी। सूर्योदय के समय पूरी नदी सोने की तरह चमक उठी।
  • आत्मानुभूति व भावनाएँ: नाव पर बैठते ही मैं कुछ देर के लिए भूल गया कि मैं कहाँ हूँ। लहरों की आवाज़, ठंडी हवा और दूर तक फैला पानी देखकर विस्मय और रोमांच दोनों हुआ। एक क्षण को लगा कि मैं प्रकृति का हिस्सा बन गया हूँ।
  • सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य: संगम पर हजारों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। कुंभ मेला याद आ गया। मंदिर की घंटियाँ बज रही थीं, शंख की ध्वनि गूँज रही थी। स्थानीय लोग नाव चलाते हुए पुरानी कहानियाँ सुना रहे थे।
  • जीवन-दर्शन: वहाँ खड़े होकर मैंने सोचा - "जैसे तीन नदियाँ मिलकर एक हो जाती हैं, वैसे ही जीवन में अलग-अलग अनुभव मिलकर हमें पूर्ण बनाते हैं।" क्षणभंगुरता का बोध भी हुआ।
  • रोमांच व संघर्ष: नाव में लहरें तेज़ होने पर थोड़ा डर लगा, लेकिन नाविक की हँसी ने साहस बढ़ा दिया। वापसी में अँधेरा होने पर रास्ता भटकने का डर हुआ, पर परिवार के साथ होने से सब सहज हो गया।
  • शैलीगत विशेषताएँ: पूरी यात्रा में भाषा सहज थी, फिर भी दृश्य जीवंत हो उठे।

यह यात्रा मुझे समृद्ध कर गई। अब जब भी थकान लगती है, संगम की याद मुझे नई ऊर्जा देती है।

चर्चा-परिचर्चा

  • "यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं" विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।

उत्तर: परिचर्चा के मुख्य बिंदु (जो हमने कक्षा में चर्चा किए):

  • यात्रा केवल जगह बदलना नहीं, बल्कि मन और ज्ञान बदलना है।
  • नई संस्कृति, भाषा, भोजन और लोगों से मिलकर हमारी सोच चौड़ी होती है।
  • मोहन राकेश की कन्याकुमारी यात्रा की तरह प्रकृति से संवाद हमें आत्म-चिंतन सिखाता है।
  • राहुल सांकृत्यायन की तिब्बत यात्रा हमें सिखाती है कि यात्रा ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत है।
  • यात्रा से सहनशीलता, साहस और अनुकूलन की क्षमता बढ़ती है।
  • निष्कर्ष: यात्राएँ हमें संकीर्णता से मुक्त करती हैं और इंसानियत से भर देती हैं।

हम सभी ने सहमति जताई कि "यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं - धन से नहीं, अनुभव से।"

  • "एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ"
    यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों का होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।

उत्तर: चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • साहस और दृढ़ता - डरने की बजाय तुरंत निर्णय लेना (जैसे लेखक ने चट्टान पर चढ़कर बच निकला)।
  • सतर्कता और उपस्थिति - आस-पास का ध्यान रखना।
  • धैर्य - घबराहट में गलती न करना।
  • समस्या-समाधान की क्षमता - वैकल्पिक रास्ता ढूँढ़ना (रेत के टीले पार न करके तट का रास्ता चुनना)।
  • सहयोग - यात्रा में साथियों पर भरोसा करना।
  • आत्मविश्वास - अपनी क्षमता पर भरोसा रखना।

हमारा निष्कर्ष: इन गुणों के बिना यात्रा रोमांचक नहीं, बल्कि खतरनाक हो जाती है।

  • यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।

उत्तर: मेरा व्यक्तिगत अनुभव
पिछले वर्ष नानी के साथ वाराणसी की यात्रा में हम काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहे थे। अचानक भीड़ में मैं अपने परिवार से अलग हो गया। चारों तरफ अनजान लोग, गलियाँ संकरी और मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं था। पहले तो डर लगा, लेकिन फिर मैंने शांत रहकर एक पुलिस वाले से पूछा। उन्होंने मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुँचा दिया। उस समय मुझे लगा कि सतर्कता और धैर्य ने मुझे बचाया।
इस अनुभव से मैंने सीखा - यात्रा में कभी घबराना नहीं चाहिए। आज भी जब कोई नई जगह पर जाता हूँ, तो इस घटना को याद करके सतर्क रहता हूँ।

भाषा से संवाद

क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन

"समुद्र में पानी बढ़ रहा था, तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।"
उपयुक्त वाक्य में रेखांकित पद 'धीरे-धीरे' कम होना क्रिया की विशेषता बता रहा है। यहाँ कम होने की क्रिया धीमी गति से हो रही है।
जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द 'क्रिया-विशेषण' कहलाते हैं। इस वाक्य में 'धीरे-धीरे' पद व्याकरणिक दृष्टि से क्रिया-विशेषण है।
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य
(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
(ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।

उदाहरण-
क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन
उत्तर: परिभाषा: जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द 'क्रिया-विशेषण' कहलाते हैं।
उदाहरण: "समुद्र में पानी बढ़ रहा था। तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।" - यहाँ 'धीरे-धीरे' क्रिया-विशेषण है जो 'कम होना' क्रिया की विशेषता बता रहा है।
वाक्यों में क्रिया-विशेषण पहचानिए:
क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन

आओ नए वाक्य बनाएँ

पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
वाक्य

  1. तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था।
  2. पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे।
  3. दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।
  4. पश्चिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक श्रृंखला दूर तक चली गई थी।
  5. सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।

उत्तर: पाठ के रेखांकित शब्दों से नए वाक्य:

  • क्षितिज - आकाश और धरती के मिलने का स्थान नया 
    वाक्य: समुद्र के किनारे खड़े होकर देखने पर क्षितिज बहुत दूर और रहस्यमय लगता है।
  • झुरमुट - समूह, पास-पास उगे पेड़-झाड़ नया 
    वाक्य: नदी के किनारे नारियलों का झुरमुट दूर से हरा-भरा दिखाई देता था।
  • ढलान - नीचे की ओर झुकी हुई भूमि नया 
    वाक्य: पहाड़ की ढलान पर चलना कठिन होता है क्योंकि पैर फिसलने का डर रहता है।
  • शृंखला - कड़ियों की माला, लंबी पंक्ति नया 
    वाक्य: हिमालय की शृंखला उत्तर भारत को ठंडी हवाओं से बचाती है।
  • बीहड़ - ऊबड़-खाबड़, विकट भूमि नया 
    वाक्य: चंबल के बीहड़ों में कभी डाकुओं का राज हुआ करता था।

गतिविधियाँ

1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है, लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?
उत्तर: कल्पना कीजिए कि हम परिवार के साथ कन्याकुमारी घूमने गए हैं। समुद्री तट पर अचानक एक विदेशी यात्री (जो कोरियाई भाषा बोलता है) हमसे मिलता है। वह बहुत घबराया हुआ है क्योंकि उसका मोबाइल खराब हो गया है, वह रास्ता भटक गया है और उसे केप होटल वापस जाना है। वह हमारे सामने हाथ जोड़कर खड़ा है।
मैं उसकी सहायता इस प्रकार करूँगा:

  1. शांत रहकर इशारे से बात शुरू करना - सबसे पहले मैं मुस्कुराकर हाथ हिलाऊँगा और "Help?" कहकर पूछूँगा। फिर इशारे से पूछूँगा - "Hotel?" या "Taxi?"।
  2. Google Translate का उपयोग - मैं तुरंत अपने फोन पर Google Translate ऐप खोलूँगा, उसमें उसकी भाषा (कोरियाई) चुन लूँगा और हिंदी/अंग्रेजी में लिखूँगा: "आप कहाँ जाना चाहते हैं?" फिर ऐप उसे अपनी भाषा में बोलकर सुना देगा।
  3. मैप दिखाना - फोन का GPS खोलकर लोकेशन शेयर करूँगा और नक्शे पर होटल का पिन दिखाकर इशारा करूँगा।
  4. सहायता का व्यावहारिक तरीका - अगर वह बहुत थका हुआ है तो मैं उसे पानी पिलाऊँगा (बोतल दिखाकर) और परिवार के साथ मिलकर उसे नजदीकी टैक्सी स्टैंड तक ले जाऊँगा। टैक्सी ड्राइवर को "Cape Hotel" लिखकर दे दूँगा।
  5. अतिरिक्त सुरक्षा - मैं उसे अपना फोन नंबर लिखकर दूँगा और कहूँगा कि "Emergency" पर कॉल कर ले। अगर जरूरत पड़े तो पुलिस हेल्पलाइन (112) पर कॉल करके मदद मँगवाऊँगा।
  6. अंत में - विदाई में हाथ मिलाकर "Safe journey" कहूँगा और मुस्कुराकर विदा करूँगा।

इस तरह भाषा की दीवार के बावजूद इशारे, मुस्कान, टेक्नोलॉजी और सहानुभूति से मैं उसकी पूरी मदद कर सकता हूँ। मोहन राकेश की यात्रा की तरह, जहाँ उन्होंने अकेले यात्रा की, वहाँ भी सहयोग की भावना सबसे जरूरी है।

2. पधारो म्हारे देश
अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रॉशर) तैयार कीजिए।

उत्तर: मेरा क्षेत्र - कानपुर (उत्तर प्रदेश)कानपुर गंगा नदी के किनारे बसा ऐतिहासिक औद्योगिक शहर है। यहाँ प्राचीन, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल हैं। मैंने अपने क्षेत्र के 5 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की सूची बनाई है।
पर्यटन स्थलों की सूची:
गतिविधियाँ

विवरणिका (ब्रॉशर) - "पधारो म्हारे कानपुर"

(ब्रॉशर की कल्पित डिज़ाइन - A4 साइज़, दोनों तरफ प्रिंट, आकर्षक रंग)

फ्रंट पेज (Cover):

  • शीर्षक: पधारो म्हारे कानपुर! (बड़े, सुनहरे अक्षरों में)
  • उपशीर्षक: "गंगा की गोद में बसा इतिहास, प्रकृति और संस्कृति का शहर"
  • मुख्य तस्वीर: गंगा नदी पर सूर्यास्त, बिठूर घाट और चिड़ियाघर का कोलाज
  • नीचे: "Welcome to Kanpur - Where History Flows with the Ganges"
  • छोटा QR कोड - "Scan for Virtual Tour"

अंदर का पेज (Inner Spread):

कानपुर के टॉप 5 पर्यटन स्थल

  1. बिठूर - गंगा की आध्यात्मिक नगरी
    • प्राचीन राम-सीता मंदिर, ब्रह्मावर्त घाट
    • नाव की सवारी और गंगा आरती
    • विशेष: 1857 की क्रांति से जुड़ा स्थान
  2. एलन फॉरेस्ट चिड़ियाघर - हरे-भरे जंगल का आनंद
    • शेर, बाघ, हिरण, पक्षी
    • घना जंगल, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र
    • विशेष: उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चिड़ियाघर
  3. मोटी झील - शाम की रंगीन दुनिया
    • नौका विहार, फव्वारे, लाइट शो
    • परिवार के साथ पिकनिक का आदर्श स्थान
  4. गंगा बैराज - नदी का विशाल चमत्कार
    • सूर्योदय-सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य
    • फोटोग्राफी और शांत वातावरण
  5. ऐतिहासिक घाट और मंदिर
    • 1857 की यादें, मस्जिद गेट

ब्रॉशर के पीछे (Back Page):

  • कैसे पहुँचें - कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से 5-15 किमी, बस/टैक्सी उपलब्ध
  • सुझाव: गंगा किनारे शुद्धता बनाए रखें, प्लास्टिक न फेंकें
  • संपर्क: कानपुर टूरिज्म ऑफिस - 0512-230XXXX
  • नीचे बड़ा QR कोड और "#VisitKanpur" हैशटैग
  • अंत में: "आइए, कानपुर को जानिए और गंगा की संस्कृति को अपनाइए!"

ब्रॉशर की विशेषताएँ:

  • रंग: हरा-नीला (प्रकृति और गंगा का प्रतीक)
  • चित्र: प्रत्येक स्थल की एक-एक आकर्षक तस्वीर
  • भाषा: सरल हिंदी + अंग्रेजी (पर्यटकों के लिए)

यह ब्रॉशर स्कूल प्रोजेक्ट या पर्यटन विभाग को देने के लिए तैयार किया जा सकता है। अगर प्रिंट करना हो तो Canva या Microsoft Publisher में आसानी से बना सकते हैं।
निष्कर्ष:"पधारो म्हारे देश" के माध्यम से हम अपने क्षेत्र की सुंदरता को दुनिया के सामने ला सकते हैं। कानपुर केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि गंगा की सांस्कृतिक नगरी भी है।

भाषा संगम

"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं"
'नाव' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची आगे दी गई है।
नाव (हिंदी); नौ, नौका (संस्कृत); बेड़ी (पंजाबी); किश्ती, नाव (उर्दू); नाव (कश्मीरी); बेड़ी, किश्ती (सिंधी); होड़ी, नाव (मराठी); नाव, होड़ी (गुजराती); बहड़ी (कोंकणी); नाव, नौका, डुङ्गा (नेपाली); नावो, नौका (बांग्ला); नावो (असमिया); हि (मणिपुरी); नौका, नावा (ओड़िया); पडव, नाव (तेलुगु); ओडम (तमिल); तोणि (मलयालम); दोणि (कन्नड़)

  • इनके अतिरिक्त यदि आप 'नाव' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

https://shabd.education.gov.in/in/lexicon.jsp
उत्तर: 'नाव' शब्द अन्य भारतीय भाषाओं में (पुस्तक में दी गई सूची के अतिरिक्त):
पुस्तक में संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं के शब्द दिए गए हैं। इनके अतिरिक्त मैं कुछ और भारतीय भाषाओं/बोलियों में 'नाव' शब्द जानता हूँ:

  • अंग्रेजी - Boat
  • अवधी (उत्तर प्रदेश की लोक भाषा, कानपुर क्षेत्र में बोली जाती है) - नाव / नौका
  • भोजपुरी (पूर्वी उत्तर प्रदेश-बिहार क्षेत्र) - नाव / नौका
  • राजस्थानी - नाव / होडी
  • हरियाणवी - नाव / बेड़ी
  • छत्तीसगढ़ी - नाव / डोंगा

ये शब्द स्थानीय बोलचाल में बहुत प्रयोग होते हैं।
उपयुक्त वाक्य अपनी मातृभाषा में: मेरी मातृभाषा हिंदी है (कानपुर, उत्तर प्रदेश)।
मूल वाक्य:"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं।"
हिंदी (मातृभाषा) में:"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे हैं।"
(यह वाक्य मेरी मातृभाषा में पहले से ही है, इसलिए इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। अगर घर में अवधी बोली जाती है तो अवधी रूप इस प्रकार होगा - "ऊँची-ऊँची लहरन से बचावत मल्लाह नाव के लावत हैं।")

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All you need of Class 9 at this link: Class 9

FAQs on NCERT Solutions: आखिरी चट्टान तक

1. What is the main theme of the travelogue in 'यात्रा का वृत्तांत'?
Ans. The main theme of the travelogue 'यात्रा का वृत्तांत' revolves around the exploration of diverse landscapes, cultures, and experiences encountered during a journey. It highlights the personal reflections and insights gained through travel, emphasising the transformative power of exploring new places.
2. How does the narrative structure enhance the reader's experience in the text?
Ans. The narrative structure of the text often employs a chronological approach, guiding the reader through the journey step by step. This structure helps to build anticipation and engagement, as readers can vividly imagine the experiences and emotions of the traveller, thereby enhancing their overall connection to the story.
3. What role does language play in the communication of themes in 'भाषा से संवाद - व्याकरण की वात'?
Ans. In 'भाषा से संवाद - व्याकरण की वात', language serves as a medium to convey complex ideas about grammar and communication. The text uses clear examples and explanations to illustrate grammatical concepts, enabling readers to understand the nuances of language and its importance in effective communication.
4. What are some key aspects of the content in 'मेरे देश की धरती'?
Ans. 'मेरे देश की धरती' focuses on the rich cultural heritage, natural beauty, and diversity of India. It discusses the significance of the land in shaping the identity of its people and highlights the historical landmarks, traditions, and values that contribute to the essence of Indian culture.
5. How do the themes in 'आखिरी चट्टान तक' reflect broader societal issues?
Ans. The themes in 'आखिरी चट्टान तक' often reflect broader societal issues such as perseverance, resilience, and the struggle against adversity. Through the protagonist's journey, the narrative sheds light on the challenges faced by individuals in society, encouraging readers to reflect on their own lives and the societal structures around them.
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