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NCERT Solutions: रीढ़ की हड्डी

रचना से संवाद - मेरे उत्तर मेरे तर्क

(बहुविकल्पीय प्रश्न - सटीक उत्तर और तर्क सहित)

प्रश्न 1. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?

(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का 
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का 
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

तर्क: 'रीढ़ की हड्डी' शब्द यहाँ शाब्दिक अर्थ में नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक अर्थ में प्रयुक्त है। एकांकी के अंत में उमा गोपालप्रसाद से कहती है - "घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं - यानी बैकबोन!" इससे स्पष्ट है कि यह शीर्षक व्यक्ति के आत्म-सम्मान, नैतिक साहस और दृढ़ चरित्र का प्रतीक है। उमा स्वयं इस एकांकी में रीढ़ की हड्डी वाले व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रश्न 2. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर 
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर 
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर 
उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

तर्क: इस एकांकी में लेखक ने समाज की अनेक अनुचित मान्यताओं पर तीखा व्यंग्य किया है - जैसे लड़कियों की शिक्षा का विरोध, विवाह में लड़की को 'वस्तु' की तरह देखना, लड़के के चरित्र को नज़रअंदाज़ करना और स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग मानदंड रखना। गोपालप्रसाद जैसे पात्र इन्हीं अनुचित मान्यताओं के प्रतीक हैं।

प्रश्न 3. "घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" - यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता 
(ख) अनुभव और विवेक की कमी 
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता 
(घ) उदासीनता और एकाकीपन

उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता

तर्क: उमा का यह वाक्य शंकर की उस छवि को उजागर करता है जो पूरी एकांकी में उभरकर आती है। शंकर पिछली फरवरी में लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द घूमता था और वहाँ से भागाया गया था - यह उसके चरित्र की कमज़ोरी है। साथ ही, वह पूरी बातचीत के दौरान चुप रहता है, अपना पक्ष नहीं रखता - यह उसके नैतिक साहस की कमी को दर्शाता है।

प्रश्न 4. "जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ, मैंने बी.ए. पास किया है।" - उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?

(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना 
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना 
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

तर्क: उमा जब यह बात कहती है तो वह केवल डिग्री की बात नहीं कर रही। वह आगे कहती है - "कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की।" इससे स्पष्ट होता है कि उमा की दृष्टि में शिक्षा का अर्थ है - आत्मसम्मान, स्वतंत्र सोच, अपनी इज्जत की रक्षा करने की शक्ति। शिक्षा से व्यक्ति में आत्मबल और स्वतंत्र विचार आते हैं - यही उमा का संदेश है।

प्रश्न 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं। 
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

तर्क: रामस्वरूप आधुनिकता का दिखावा करते हैं, उमा को पढ़ाते भी हैं, परंतु जब विवाह की बात आती है तो वे उमा की शिक्षा छिपाते हैं। गोपालप्रसाद खुद पढ़े-लिखे वकील हैं और शंकर को मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं, पर बहू के लिए कहते हैं - "मेम साहब नहीं चाहिए।" दोनों ही स्त्री-शिक्षा के विरोधी हैं और समाज में दिखावे के लिए जी रहे हैं।

प्रश्न 6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक 
(घ) भावुक और संक्षिप्त

उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

तर्क: इस एकांकी के संवाद बिल्कुल स्वाभाविक और बोलचाल की भाषा में हैं। साथ ही इनमें तीखा व्यंग्य भी है - जैसे गोपालप्रसाद का "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं" वाला संवाद, या उमा का "रीढ़ की हड्डी" वाला अंतिम संवाद। संवाद पात्रों के चरित्र को भी उजागर करते हैं - इसलिए यह शैली स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण है।

मेरी समझ मेरे विचार

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।

उत्तर:

रामस्वरूप के चरित्र में आधुनिकता और रूढ़िवाद का गहरा अंतर्द्वंद्व है। इसके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

(i) उमा को पढ़ाना परंतु शिक्षा छिपाना:रामस्वरूप ने उमा को बी.ए. तक पढ़ाया - यह आधुनिकता का प्रमाण है। परंतु जब गोपालप्रसाद के लड़के से विवाह तय करना था तो उन्होंने उमा की शिक्षा को छिपा दिया और कहा कि वह सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ी है। यह उनकी रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है कि पढ़ी-लिखी लड़की की शादी नहीं होती।

(ii) उमा को सजाने का प्रयास छिपाना:प्रेमा बताती है कि उमा ने पाउडर-वाउडर लगाने से मना कर दिया। रामस्वरूप चाहते थे कि उमा अपना रूप-रंग दिखाकर 'पसंद' आए - यह भी स्त्री को दिखावे की वस्तु समझने की रूढ़िवादी सोच है।

(iii) गोपालप्रसाद की पुरानी सोच से सहमति:जब गोपालप्रसाद लड़कियों की शिक्षा के विरोध में बातें करते हैं तो रामस्वरूप "जी हाँ, जी हाँ" कहकर उनसे सहमत होते रहते हैं, जबकि उन्होंने खुद अपनी बेटी को पढ़ाया है।

(iv) उमा के बोलने पर रोकना:जब उमा अपनी बात कहने लगती है तो रामस्वरूप उसे रोकने की कोशिश करते हैं - "उमा, उमा!" - यह दर्शाता है कि वे लड़की को अधिकार देने में संकोच करते हैं।

इस प्रकार रामस्वरूप के व्यक्तित्व में बाहरी आधुनिकता और भीतरी रूढ़िवाद का द्वंद्व स्पष्ट दिखता है।

प्रश्न 2. 'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तर:

'रीढ़ की हड्डी' शब्द एकांकी में दो संदर्भों में और दो भिन्न अर्थों में प्रयुक्त हुआ है:

(i) गोपालप्रसाद के संदर्भ में - शाब्दिक अर्थ:जब गोपालप्रसाद अपने बेटे शंकर को झुककर बैठते देखते हैं तो वे कहते हैं - "झुककर क्यों बैठते हो? ब्याह तय करने आए हो, कमर सीधी करके बैठो। तुम्हारे दोस्त ठीक कहते हैं कि शंकर की 'बैकबोन'..." - यहाँ रीढ़ की हड्डी का शाब्दिक अर्थ है - कमर सीधी रखना, सीधे बैठना। यह शरीर के एक अंग के रूप में प्रयुक्त है।

(ii) उमा के संदर्भ में - लाक्षणिक/प्रतीकात्मक अर्थ:एकांकी के अंत में उमा कहती है - "घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं - यानी बैकबोन, बैकबोन!" - यहाँ रीढ़ की हड्डी का अर्थ है - नैतिक साहस, आत्म-सम्मान, चारित्रिक दृढ़ता। उमा यह कहकर शंकर के चरित्रहीन और कायर होने पर व्यंग्य कर रही है।

इस प्रकार एक ही शब्द - एक पात्र के लिए शाब्दिक और दूसरे के लिए लाक्षणिक अर्थ में आया है - यही इस एकांकी के शीर्षक की सार्थकता है।

प्रश्न 3. "मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" - प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तर:

प्रेमा का यह कथन 1939 के भारतीय समाज में स्त्री-शिक्षा की दुर्दशा को उजागर करता है। इससे निम्नलिखित बातें पता चलती हैं:

(i) स्त्री-शिक्षा को अनावश्यक समझा जाता था:प्रेमा कहती है कि पढ़ाई-लिखाई का जंजाल उसकी समझ में नहीं आता। वह चाहती थी कि उमा सिर्फ 'आ-ई' पढ़ ले, गिनती सीख ले - बस इतना काफी है। इससे पता चलता है कि महिलाओं की शिक्षा को केवल प्राथमिक स्तर तक उचित माना जाता था।

(ii) शिक्षित स्त्री को 'नखरेबाज़' समझा जाता था:प्रेमा को लगता था कि 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी पुस्तकें पढ़ने से लड़कियाँ 'बिगड़' जाती हैं। अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को घर-परिवार के लिए अनुकूल नहीं माना जाता था।

(iii) विवाह में शिक्षा बाधा मानी जाती थी:गोपालप्रसाद जैसे लोग बहू के लिए उच्च शिक्षा को अस्वीकार करते थे। इसीलिए रामस्वरूप को उमा की पढ़ाई छिपानी पड़ी - यह दर्शाता है कि उस समय शिक्षित होना लड़की की विवाह-संभावना को कम करता था।

(iv) स्त्री की भूमिका केवल गृहस्थी तक सीमित:समाज में यह धारणा थी कि स्त्री का काम घर चलाना है, पुरुषों जैसी पढ़ाई करना नहीं। गोपालप्रसाद का "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं" वाला संवाद इसी सोच का प्रतिबिंब है।

इस प्रकार प्रेमा का यह कथन 1939 के समाज में स्त्री-शिक्षा की दयनीय स्थिति का दर्पण है।

प्रश्न 4. लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तर:

'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक चुनने के कारण:

लेखक ने इस शीर्षक को अत्यंत सोच-समझकर चुना है। 'रीढ़ की हड्डी' शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है जो व्यक्ति को सीधा खड़ा रखती है। बिना रीढ़ के इंसान झुक जाता है। यहाँ इसका लाक्षणिक अर्थ है - आत्म-सम्मान, नैतिक साहस और चारित्रिक दृढ़ता। एकांकी में उमा वह पात्र है जिसके पास यह 'रीढ़' है - वह अन्याय के सामने झुकती नहीं। शंकर वह पात्र है जिसके पास यह 'रीढ़' नहीं है - वह कायर और चरित्रहीन है। इसलिए यह शीर्षक एकांकी के मूल संदेश को एक ही वाक्यांश में अभिव्यक्त कर देता है।

वैकल्पिक शीर्षक:

यदि इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना हो तो वह हो सकता है - "उमा का स्वाभिमान" या "स्त्री की आवाज़"

कारण: इस एकांकी की मुख्य बात यही है कि एक शिक्षित और स्वाभिमानी लड़की उमा, समाज की रूढ़िवादी सोच और स्त्री-विरोधी व्यवस्था के सामने खुलकर अपनी बात रखती है। "उमा का स्वाभिमान" शीर्षक इस भाव को सीधे और स्पष्ट रूप से दर्शाता है। "स्त्री की आवाज़" शीर्षक इस बात को व्यापक रूप से प्रकट करता है कि यह एकांकी केवल एक लड़की की नहीं, बल्कि समस्त शिक्षित स्त्रियों की आवाज़ है।

विधा से संवाद - एकांकी की पड़ताल

एकांकी के दस तत्वों के उदाहरण:

क्र.तत्व'रीढ़ की हड्डी' से उदाहरण
1.एकांकी का नामरीढ़ की हड्डी
2.लेखक का नामजगदीशचंद्र माथुर
3.पात्रउमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन
4.परिवेश/देश-कालएक मध्यवर्गीय परिवार का कमरा, भारत 1939
5.रंग-निर्देश/मंच-निर्देश"मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है..."
6.संवाद-निर्देश"(जरा तेज आवाज में)", "(चौंककर)", "(बात काटकर)" आदि
7.समस्यास्त्री-शिक्षा का विरोध, विवाह में लड़की को वस्तु समझना
8.संवादउमा का "जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता..."
9.मुख्य विचारस्त्री का आत्म-सम्मान, शिक्षा का अधिकार, सामाजिक पाखंड का पर्दाफाश
10.समाधान/परिणामगोपालप्रसाद और शंकर का लौट जाना, उमा का स्वाभिमानपूर्वक सत्य बोलना

विषयों से संवाद - तुलना और विचार

प्रश्न 1. "गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।" - एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?

उत्तर:

एकांकी में लड़के-लड़की के प्रति भिन्न दृष्टि दर्शाने वाले प्रमुख संवाद:

(i) गोपालप्रसाद का कथन:"अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेजी अखबार पढ़ने लगीं और 'पालिटिक्स' वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।" - यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि गोपालप्रसाद के मतानुसार शिक्षा केवल पुरुषों के लिए है।

(ii) गोपालप्रसाद का एक और कथन:"जनाब, मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।" - यह प्रकृति का उदाहरण देकर स्त्री-पुरुष भेद को उचित ठहराने का प्रयास है।

(iii) प्रेमा का कथन:"मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं। अपना जमाना अच्छा था। 'आ-ई' पढ़ ली, गिनती सीख ली..." - यह दर्शाता है कि स्त्रियों को भी शिक्षा की आवश्यकता न्यूनतम ही मानी जाती थी।

(iv) शंकर का चरित्र:शंकर बी.एस.सी. के बाद मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है - उसकी उच्च शिक्षा में किसी को आपत्ति नहीं। किंतु उमा जब बी.ए. पास बताती है तो गोपालप्रसाद क्रोधित हो जाते हैं।

मेरी समझ:यह भिन्नता पूरी तरह अनुचित और पक्षपातपूर्ण है। शिक्षा का अधिकार सभी को समान रूप से है। शिक्षित स्त्री परिवार, समाज और राष्ट्र - सभी के लिए अधिक उपयोगी होती है। उमा जैसी शिक्षित और स्वाभिमानी स्त्री ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

प्रश्न 2. "मुझे अपनी इज्जत - अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।" - एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?

उत्तर:

उमा के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:

(i) आत्मसम्मान और स्वाभिमान:उमा अपने अपमान को चुपचाप नहीं सहती। जब गोपालप्रसाद और शंकर उसे 'वस्तु' की तरह देख-परखते हैं, वह सीधे प्रश्न करती है - "क्या लड़कियों का दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती?"

(ii) साहस और निर्भीकता:उमा उन सबके सामने सत्य बोलती है जिनसे उसके माता-पिता भी डर रहे थे। वह शंकर के होस्टल के इर्द-गिर्द घूमने की बात सार्वजनिक रूप से कहती है - यह साहस दर्शाता है।

(iii) तार्किकता और स्पष्टवादिता:वह कुर्सी-मेज बिकने का उदाहरण देकर अपनी बात तर्कपूर्ण ढंग से रखती है। उसकी भाषा स्पष्ट और सटीक है।

(iv) शिक्षा का सदुपयोग:उमा ने शिक्षा को केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि अपने विचारों को विकसित करने के लिए उपयोग किया।

(v) भावनात्मक संवेदनशीलता:अंत में उमा की खामोशी सिसकियों में बदल जाती है - यह दर्शाता है कि वह भीतर से संवेदनशील भी है।

ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी (संकेत: शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि):

उमा की ये विशेषताएँ उसकी शिक्षा से आई होंगी। बी.ए. तक की पढ़ाई ने उसे स्वतंत्र सोचने और अपने अधिकारों को पहचानने की शक्ति दी। रामस्वरूप ने उसे पढ़ाया - भले ही वे दिखावे के लिए - पर उमा ने उस शिक्षा का सही उपयोग किया। इसके अलावा, स्वयं अपमान का अनुभव करने से भी उसके भीतर विद्रोह और स्वाभिमान की भावना जागी होगी।

सृजन - एकांकी का विस्तार

प्रश्न 1. एकांकी के अंत में रतन कहता है - "बाबूजी, मक्खन!" और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?

उत्तर:

लेखक ने बड़ी कुशलता से एकांकी का अंत "बाबूजी, मक्खन!" के संवाद से किया है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

(i) हास्य और व्यंग्य का संयोजन:पूरी एकांकी में एक गंभीर सामाजिक प्रश्न उठाया गया है, किंतु अंत में रतन के इस छोटे से संवाद ने एक हास्यास्पद मोड़ ला दिया। यह दर्शाता है कि जब घर में इतनी बड़ी उथल-पुथल हो रही थी, तब रतन मक्खन लेने गया था - यह व्यंग्य है कि रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें जीवन में चलती रहती हैं।

(ii) रामस्वरूप की व्यर्थ तैयारी पर व्यंग्य:रामस्वरूप पूरे नाटक में मक्खन न आने की चिंता करते रहे। अंत में जब मक्खन आया, तब तक मेहमान जा चुके थे और उमा रो रही थी। यह दर्शाता है कि रामस्वरूप की सारी तैयारी और दिखावा व्यर्थ हो गया।

(iii) टिप्पणी के रूप में:"मक्खन" शब्द का प्रयोग 'चापलूसी' के अर्थ में भी होता है - रामस्वरूप पूरी एकांकी में गोपालप्रसाद की खुशामद (मक्खन) करते रहे, परंतु वह भी व्यर्थ रही।

(iv) नाटकीय प्रभाव:गंभीर भावनात्मक क्षण (उमा का रोना) के बाद यह हल्का संवाद दर्शक/पाठक को एक हल्की हँसी देता है और नाटक को यादगार बनाता है।

प्रश्न 2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।

उत्तर:

यदि परदा दोबारा उठे तो संभावित दृश्य कुछ इस प्रकार हो सकता है:

कमरे में रामस्वरूप निराश बैठे हैं। उमा आँसू पोंछ चुकी है और शांत है। प्रेमा उमा को उलाहना दे रही है - "तुमने सब बर्बाद कर दिया।" रामस्वरूप चुप हैं।

तभी उमा उठकर कहती है - "बाबूजी, मैंने गलत नहीं किया। जो व्यक्ति स्त्री की शिक्षा का सम्मान नहीं करता, जिसका बेटा लड़कियों के होस्टल के चक्कर लगाता हो - उस घर में मैं नहीं जाना चाहती।"

रामस्वरूप धीरे से कहते हैं - "शायद तुम ठीक कहती हो, उमा।"

रतन मक्खन की तश्तरी रखकर चला जाता है। प्रेमा मक्खन उठाकर रख देती है - "अब किसके लिए रखा है यह?" परदा गिरता है।

(यह एक संभावित विस्तार है। विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार अन्य दृश्य भी लिख सकते हैं।)

भाषा से संवाद - व्याकरण की बात

मुहावरों के अर्थ और नए वाक्य:

क्र.मुहावराअर्थनया वाक्य
1.भीगी बिल्ली की तरहडरा हुआ, दब्बूपरीक्षा हॉल में नकलची छात्र भीगी बिल्ली की तरह बैठा था।
2.मुँह फुलानानाराज़ होनाछोटी बहन खिलौना न मिलने पर मुँह फुलाए बैठी रही।
3.किस मर्ज की दवा होनाकिस काम का होनाजो दोस्त मुसीबत में साथ न दे, वह किस मर्ज की दवा है?
4.सिर चढ़ानाअत्यधिक लाड़-प्यार करनाअत्यधिक सिर चढ़ाने से बच्चे बिगड़ जाते हैं।
5.सब-कुछ उगलनासारी बात कह देनापुलिस के पूछने पर चोर ने सब-कुछ उगल दिया।
6.काँटों में घसीटनापरेशानी में डालनाअपनी जिद से उसने पूरे परिवार को काँटों में घसीट दिया।
7.इज्जत उतारनाअपमान करनासबके सामने किसी की इज्जत उतारना उचित नहीं।
8.मुँह छिपाकर भागनाशर्म से या डर से भागनागलत काम करने के बाद वह मुँह छिपाकर भाग गया।

कहावत का सकारात्मक प्रयोग:

"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"

मूल प्रयोग (नकारात्मक): एकांकी में रामस्वरूप ने यह कहावत गोपालप्रसाद और शंकर की बुरी प्रवृत्ति के लिए कही - अर्थात् बाप भी पुरानी सोच का है तो बेटा उससे भी अधिक है।

सकारात्मक प्रयोग:जब पिता देशभक्त हो और बेटा उससे भी बढ़कर राष्ट्र-सेवा करे - तब कहते हैं, बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।

नया वाक्य: श्याम के पिता एक अच्छे शिक्षक थे और श्याम ने IAS बनकर पूरे जिले की तस्वीर बदल दी - सच ही है, बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्र. उमा ने गोपालप्रसाद को कुर्सी-मेज का उदाहरण क्यों दिया?

उत्तर: उमा ने कुर्सी-मेज का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि गोपालप्रसाद और शंकर उसे उसी तरह देख-परख रहे थे जैसे दुकान पर सामान खरीदते समय देखते हैं। उमा ने व्यंग्यपूर्वक कहा - "जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखला देता है। पसंद आ गई तो अच्छा है, वरना..." - इससे उमा यह बताना चाहती थी कि लड़की को बिना उसकी राय लिए वस्तु की तरह परखना अपमानजनक है।

प्र. गोपालप्रसाद का चरित्र किन बातों से पाखंडी सिद्ध होता है?

उत्तर: गोपालप्रसाद निम्नलिखित कारणों से पाखंडी सिद्ध होते हैं:

  • वे स्वयं वकील हैं और शंकर को मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं, परंतु बहू के लिए कहते हैं - "ज़्यादा पढ़ी-लिखी नहीं चाहिए।"
  • वे सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, आधुनिकता का दावा करते हैं, फिर भी स्त्री-शिक्षा के विरोधी हैं।
  • उनका बेटा शंकर चरित्रहीन है - लड़कियों के होस्टल के चक्कर लगाता था - परंतु गोपालप्रसाद उसके दोषों को नज़रअंदाज़ करते हैं।
  • वे दहेज और लेन-देन की बात करते हैं जो स्वयं एक सामाजिक कुरीति है।

प्र. एकांकी में रतन का क्या महत्व है?

उत्तर: रतन एक छोटा पात्र है परंतु एकांकी में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। वह घटनाक्रम में सहायक की भूमिका निभाता है और कई बार हास्य उत्पन्न करता है। एकांकी की शुरुआत रतन के साथ ही होती है। अंत में उसका "बाबूजी, मक्खन!" कहना पूरी एकांकी को एक व्यंग्यात्मक समापन देता है - यह दर्शाता है कि बड़ी-बड़ी सामाजिक समस्याओं के बीच भी जीवन की छोटी-छोटी बातें चलती रहती हैं।

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FAQs on NCERT Solutions: रीढ़ की हड्डी

1. What is the structure of the human vertebral column?
Ans. The human vertebral column, commonly known as the backbone, is made up of 33 vertebrae. These vertebrae are divided into five regions: cervical (7 vertebrae), thoracic (12 vertebrae), lumbar (5 vertebrae), sacral (5 fused vertebrae), and coccygeal (4 fused vertebrae). This structure provides support, flexibility, and protection for the spinal cord.
2. What are the functions of the vertebral column?
Ans. The vertebral column serves multiple functions including: providing structural support for the body, protecting the spinal cord, allowing for flexible movement, and serving as an attachment point for muscles and ribs. It also helps maintain an upright posture and absorbs shock during activities such as walking and running.
3. How does the vertebral column protect the spinal cord?
Ans. The vertebral column protects the spinal cord by encasing it within the vertebral foramen, which is the central opening formed by each vertebra. This bony structure acts as a shield against physical impacts and injuries, ensuring that the spinal cord, which is a vital part of the central nervous system, remains safe and intact.
4. What are intervertebral discs and their role in the vertebral column?
Ans. Intervertebral discs are fibrocartilaginous structures located between adjacent vertebrae in the vertebral column. They act as shock absorbers, providing cushioning during movement and preventing the vertebrae from grinding against each other. These discs also allow for slight movement between the vertebrae, contributing to the overall flexibility of the spine.
5. What are some common disorders associated with the vertebral column?
Ans. Common disorders associated with the vertebral column include herniated discs, scoliosis, and osteoporosis. Herniated discs occur when the inner gel-like material of the disc protrudes through the outer layer, causing pain and discomfort. Scoliosis is a condition characterised by an abnormal lateral curvature of the spine. Osteoporosis leads to weakened bones, increasing the risk of fractures in the vertebrae.
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