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NCERT Solutions: मैं और मेरा देश

रचना से संवाद - मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1. "एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई", इस पंक्ति में रेखांकित शब्द 'दरार' किस ओर संकेत करता है?

(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि 
(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार 
(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार

तर्क: लेखक को लगता था कि उसकी मनुष्यता पूर्ण है - घर, पड़ोस, नगर सब उसके पास है। परंतु जब उसे लाला लाजपत राय के उस अनुभव का पता चला कि देश की गुलामी के कारण उन्हें विदेश में भी लज्जित होना पड़ा, तो लेखक की पूर्णता का भाव एक झटके में टूट गया। यही 'दरार' है - पूर्णता की भावना पर प्रहार।

प्रश्न 2. निबंध में कहा गया है कि "ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।" लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का 
(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का 
(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का 
(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का

तर्क: लेखक उन प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद अनुभव करता है जो बात को आगे बढ़ाने और खिलने का अवसर देते हैं। ऐसे प्रश्न सही समय पर पूछे जाते हैं और विचारों को विस्तार देते हैं।

प्रश्न 3. "अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए", इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में -

(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। 
(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी। 
(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

तर्क: पराधीनता के दिनों में भारतीयों का आत्मसम्मान कुचला जाता था। लाला लाजपत राय जैसे महान व्यक्ति भी विदेश में गुलामी का कलंक माथे पर ढोने को विवश थे। इसीलिए उन दिनों को 'दीन' कहा गया - जहाँ राष्ट्रीय गौरव का दमन होता था।

प्रश्न 4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि -

(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
 (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो। 
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

तर्क: लेखक स्पष्ट करता है कि यदि किसी मनुष्य के पास स्वर्ग के भी सब उपहार और साधन हों, पर उसका देश गुलाम हो या किसी भी रूप में हीन हो, तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नहीं दे सकते।

प्रश्न 5. "पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है", इस वाक्य में रेखांकित शब्द 'गाँठ' किन दो बातों को साथ बाँधती है?

(क) देश और नागरिक 
(ख) देश और संविधान 
(ग) देश और विदेश 
(घ) व्यवसाय और आजीविका

उत्तर: (क) देश और नागरिक

तर्क: लेखक ने जापान की दोनों घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया कि नागरिक के कार्य और देश का सम्मान अटूट रूप से जुड़े हैं। एक युवक के अच्छे कार्य से देश का गौरव बढ़ा और दूसरे के बुरे कार्य से देश को लांछित होना पड़ा। यही 'गाँठ' है जो देश और नागरिक को बाँधती है।

प्रश्न 6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था 
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध 
(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध

तर्क: यह निबंध पूरी तरह से इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति और देश दो अलग चीजें नहीं हैं। व्यक्ति की पूर्णता देश के सम्मान से जुड़ी है। नागरिक के हर कार्य का प्रतिबिंब देश पर पड़ता है और देश की हीनता-गौरव का प्रभाव नागरिक पर।

मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर: स्वामी रामतीर्थ जापान में रेल यात्रा कर रहे थे। फल न मिलने पर उनके मुँह से निकल गया कि जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते। एक जापानी युवक यह सुनकर दौड़ा और कहीं से ताजे फल लेकर उन्हें भेंट किए। जब स्वामी जी ने दाम पूछे तो उसने दाम लेने से इनकार कर दिया। बहुत आग्रह करने पर उसने केवल इतना कहा - "आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।"

स्वामी जी इस उत्तर से इसलिए मुग्ध हो गए क्योंकि उस युवक ने अपने देश के गौरव की रक्षा के लिए धन की परवाह नहीं की। उसमें देशभक्ति की भावना इतनी गहरी थी कि उसने अपने देश के सम्मान को ही अपना पारिश्रमिक माना। यह निःस्वार्थ देशप्रेम अत्यंत प्रशंसनीय था।

प्रश्न 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर: जापानी युवक ने फलों के मूल्य के रूप में यह माँगा कि स्वामी रामतीर्थ अपने देश में जाकर किसी से यह न कहें कि "जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।"

युवक के व्यक्तित्व की छवि: उस युवक के व्यक्तित्व की छवि एक सच्चे देशभक्त की है। वह भौतिक लाभ से ऊपर उठकर अपने देश के सम्मान को सर्वोपरि मानता है। वह साहसी, सतर्क और राष्ट्रीय गौरव के प्रति सजग है। उसकी यह भावना कि एक व्यक्ति की बात से पूरे देश की छवि प्रभावित होती है, उसे एक परिपक्व और विवेकशील नागरिक सिद्ध करती है।

प्रश्न 3. "बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।" स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लेखक का यह कथन अत्यंत गहन और सत्य है। इसके पीछे निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं -

1. नागरिक देश का प्रतिनिधि होता है: जब कोई भारतीय विदेश जाता है, तो वह अपने व्यक्तिगत रूप में नहीं, बल्कि भारत के प्रतिनिधि के रूप में जाता है। उसका आचरण भारत की छवि बनाता या बिगाड़ता है।

2. देश की हीनता नागरिक को हीन करती है: जैसे लाला लाजपत राय जितने भी महान थे, गुलाम भारत के नागरिक होने के कारण उन्हें विदेश में अपमान सहना पड़ा।

3. देश का गौरव नागरिक को गौरवान्वित करता है: जब भारत की कोई उपलब्धि होती है - चाहे खेल में, विज्ञान में या कला में - तो प्रत्येक भारतीय नागरिक गर्व से भर उठता है।

उदाहरण: जैसे जापान के उस विद्यार्थी ने पुस्तकालय से चित्र चुराए, उसके देश के सभी नागरिकों को उस पुस्तकालय में प्रवेश वर्जित कर दिया गया। एक व्यक्ति के कारण पूरे देश को लांछना मिली - यही सिद्ध करता है कि व्यक्ति और देश एक ही हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1. "देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है", अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि नागरिक और देश परस्पर प्रभावित करते हैं।

देश की हीनता → नागरिक पर प्रभाव: यदि किसी देश में भ्रष्टाचार, गरीबी या अशिक्षा है, तो उस देश का नागरिक जब भी विदेश जाता है, उसे वह कलंक सहना पड़ता है। उदाहरण - पराधीन भारत के नागरिकों को विदेशों में तुच्छ समझा जाता था।

नागरिक की हीनता → देश पर प्रभाव: यदि कोई भारतीय विदेश में बुरा व्यवहार करता है, तो पूरे भारत की छवि धूमिल होती है।

नागरिक का गौरव → देश का गौरव: जब कोई भारतीय वैज्ञानिक, खिलाड़ी या कलाकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्टता प्राप्त करता है, तो पूरे भारत का सिर गर्व से ऊँचा होता है। जैसे - किसी भारतीय के नोबेल पुरस्कार जीतने पर हर भारतीय गौरवान्वित होता है।

देश का गौरव → नागरिक का गौरव: जब भारत ने चंद्रमा पर यान भेजा, तो विश्व के हर कोने में बसे भारतीय को गर्व हुआ।

प्रश्न 2(क). "मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।" - प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर: यह पंक्ति सामाजिक परस्परावलंबन को दर्शाती है।

मैं दूसरों का सहयोग लेता हूँ:प्रातःकाल उठकर किसान द्वारा उगाए अनाज और दूधवाले के दूध से बना नाश्ता करता हूँ। विद्यालय जाने के लिए वाहन चालकों की सहायता लेता हूँ। शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त करता हूँ। बीमार होने पर डॉक्टर का सहयोग लेता हूँ। रात में बिजली कर्मचारियों की मेहनत से रोशनी पाता हूँ।

मैं दूसरों को सहयोग देता हूँ:छोटे भाई-बहनों को पढ़ाता हूँ। पड़ोसियों की जरूरत पर सहायता करता हूँ। सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखकर समाज का सहयोग करता हूँ। बुजुर्गों का सामान उठाने में मदद करता हूँ।

इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे पर निर्भर है और एक-दूसरे के लिए उपयोगी भी।

प्रश्न 2(ख). उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द 'बहुतों' में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: 'बहुतों' में वे सभी लोग सम्मिलित हैं जो लेखक के जीवन से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं - माता-पिता, परिवारजन, पड़ोसी, मित्र, शिक्षक, किसान जो अनाज उगाते हैं, मजदूर जो घर बनाते हैं, डॉक्टर, दुकानदार, वाहन चालक, सफाईकर्मी, बिजली कर्मचारी तथा वे सभी अनजान लोग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लेखक के जीवन को सुगम बनाते हैं। सरल शब्दों में - पूरा समाज ही 'बहुतों' में समाहित है।

प्रश्न 2(ग). रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: रचनाकार को मिलने वाला सहयोग: एक रचनाकार को पाठकों के प्रोत्साहन, प्रकाशकों के सहयोग, संपादकों के मार्गदर्शन और समाज के विभिन्न अनुभवों की आवश्यकता होती है। उसे अपने आस-पास के लोगों की जीवन-कथाओं और विचारों से रचना-सामग्री मिलती है।

रचनाकार का दूसरों को सहयोग: रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करता है, सामाजिक बुराइयों पर प्रकाश डालता है, राष्ट्रीय भावना जगाता है और पाठकों में सकारात्मक विचार उत्पन्न करता है। 'मैं और मेरा देश' जैसी रचना पाठकों में देशभक्ति और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करती है।

प्रश्न 3(क). "सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।" - देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं?

उत्तर: लेखक का कहना है कि जैसे युद्ध में सैनिकों के अतिरिक्त रसद पहुँचाने वाले, जय बोलने वाले और सहायक कार्य करने वाले भी महत्वपूर्ण होते हैं, उसी प्रकार देश की प्रगति में सभी नागरिकों की भूमिका होती है।

देश की प्रगति में दायित्व: ईमानदारी से अपना कार्य करना, कर का समय पर भुगतान, शिक्षा ग्रहण करना और दूसरों को शिक्षित करना, वैज्ञानिक सोच अपनाना।

देश के विकास में दायित्व: स्वदेशी उत्पादों का उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कुरीतियों का विरोध, जल और ऊर्जा की बचत।

देश की सुरक्षा में दायित्व: संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देना, राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना, सीमा पर तैनात सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और सहयोग की भावना रखना।

प्रश्न 3(ग). इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है?

उत्तर: लेखक ने जीवन को युद्ध इसलिए कहा है क्योंकि जीवन में भी युद्ध की तरह अनेक चुनौतियाँ, संघर्ष और बाधाएँ आती हैं। जैसे युद्ध में केवल लड़ना ही पर्याप्त नहीं होता, उसमें रसद पहुँचाने वाले, प्रोत्साहन देने वाले और अन्य सहायक भूमिकाएँ निभाने वाले भी आवश्यक होते हैं - उसी प्रकार जीवन में और देश के लिए हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकता है। कोई बड़ा वैज्ञानिक न हो, कोई बड़ा धनपति न हो - फिर भी वह किसान की तरह रसद पहुँचाने वाला या जय बोलने वाले दर्शक की तरह देश को शक्ति दे सकता है।

प्रश्न 4(क). "अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।" - पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर: इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि पहले पड़ोस में अत्यंत आत्मीय और पारिवारिक संबंध होते थे। पड़ोसी एक-दूसरे के बच्चों को अपने बच्चों की तरह स्नेह देते थे। सुख-दुख में एक-दूसरे के काम आते थे। त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते थे। एक-दूसरे के घरों में बिना औपचारिकता के आना-जाना होता था। बच्चे सभी के घरों में समान रूप से खेलते और पलते थे।

प्रश्न 4(ख). वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: वर्तमान समय में पड़ोसी संबंधों में काफी बदलाव आया है। आज शहरों में लोग महीनों रहने के बाद भी पड़ोसी का नाम नहीं जानते। बंद दरवाजे और ऊँची दीवारें आम हो गई हैं। सहयोग और सामूहिकता की भावना कम हो गई है।

कारण: व्यस्त जीवनशैली, एकल परिवारों का चलन, मोबाइल और इंटरनेट में अत्यधिक व्यस्तता, अविश्वास का बढ़ता माहौल, शहरीकरण और भौतिकवाद। इन सब कारणों से पड़ोसी-संबंधों की उष्णता कम हो गई है।

प्रश्न 5. "क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?" - अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: हम और हमारे सहपाठी देश के सौंदर्य-बोध की रक्षा के लिए अनेक कार्य करते हैं - सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा नहीं फेंकते, ऐतिहासिक इमारतों पर नाम नहीं लिखते, पार्कों और बगीचों में पेड़-पौधों को नष्ट नहीं करते। विद्यालय परिसर की सफाई में सहयोग करते हैं और दूसरों को भी सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करने के लिए प्रेरित करते हैं। स्वच्छता अभियानों में भाग लेते हैं।

प्रश्न 6. "मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।" - देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या न करें?

उत्तर:

क्या करें:सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना काम करें, देश की विविधता और एकता का सम्मान करें, देश को उन्नत करने वाले कार्यों में योगदान दें।

क्या न करें:सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें, भ्रष्टाचार में भाग न लें, विदेश में देश की बुराई न करें, राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान न करें, सांप्रदायिक या विभाजनकारी बातें न फैलाएँ।

मेरे प्रश्न

निबंध के संदर्भ में तीन प्रश्न -

  1. लेखक के अनुसार देश के नागरिक की पूर्णता किसमें निहित है?
  2. कमालपाशा ने देहाती बूढ़े के शहद को 'सर्वोत्तम उपहार' क्यों कहा?
  3. लेखक ने 'शक्ति-बोध' और 'सौंदर्य-बोध' को देश के लिए क्यों आवश्यक बताया है?

विधा से संवाद - निबंध की विशेषताएँ

'मैं और मेरा देश' निबंध में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं जो इसे एक उत्कृष्ट निबंध बनाती हैं -

वैयक्तिकता: लेखक अपने निजी अनुभव और विचारों से निबंध की शुरुआत करता है - "मैं अपने घर में जन्मा था, पला था।"

प्रश्नोत्तर शैली: पूरा निबंध संवादात्मक और प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है, जो पाठक को सीधे जोड़ता है।

सजीवता/चित्रात्मकता: जापान की घटनाएँ, कमालपाशा और बूढ़े किसान की कथा - ये सभी दृश्य आँखों के सामने जीवंत हो उठते हैं।

विषय-केंद्रीयता: पूरा निबंध एक ही केंद्रीय विषय - व्यक्ति और देश के अंतर्संबंध - पर केंद्रित है।

तार्किकता: हर बात को तर्क, उदाहरण और घटनाओं से सिद्ध किया गया है।

संक्षिप्तता और स्पष्टता: भाषा सरल, बोधगम्य और प्रभावशाली है।

प्रेरणात्मकता: निबंध पाठक में देशप्रेम और नागरिक कर्तव्यबोध की प्रेरणा जगाता है।

साहित्यिक सौंदर्य: मुहावरों, उदाहरणों और कहानियों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आई है।

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FAQs on NCERT Solutions: मैं और मेरा देश

1. What are the key features of the 'निबंध' (essay) as a literary form?
Ans. The key features of an essay include its structured format, which typically consists of an introduction, body, and conclusion. Essays express personal views and insights on a particular topic, allowing for a blend of subjective opinion and objective analysis. Additionally, they often incorporate a clear thesis statement, logical arguments, and supporting examples to effectively communicate the author's perspective.
2. How does the 'विधा से संवाद' (dialogue through form) contribute to understanding literature?
Ans. 'विधा से संवाद' enhances the understanding of literature by illustrating how different forms of writing, such as essays, poetry, and prose, interact and communicate with each other. It encourages readers to explore themes, styles, and techniques across various literary forms, fostering a deeper appreciation for the nuances of expression and the impact of the author's choice of form on the overall message.
3. Why is it important to study 'मैं और मेरा देश' (I and my country) in Class 9?
Ans. Studying 'मैं और मेरा देश' is important because it helps students develop a sense of identity and belonging. The essay encourages them to reflect on their cultural heritage, values, and responsibilities towards their country. This reflection fosters national pride and awareness of social issues, promoting critical thinking and civic responsibility among young learners.
4. What role does personal experience play in writing an essay like 'मैं और मेरा देश'?
Ans. Personal experience plays a crucial role in writing an essay like 'मैं और मेरा देश' as it allows the writer to connect with the audience on an emotional level. By sharing personal anecdotes and reflections, the author can illustrate broader themes related to cultural identity, social values, and national pride, making the essay more relatable and impactful for readers.
5. How can students effectively express their thoughts in an essay format?
Ans. Students can effectively express their thoughts in an essay format by first organising their ideas clearly. They should start with an outline that includes a strong thesis statement and key points to be discussed. Using concise language, relevant examples, and a coherent structure will enhance clarity. Additionally, revising and proofreading help to refine their arguments and ensure that the essay communicates their message effectively.
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