प्रश्न 1. "भारति, जय, विजयकरे" कविता में विशेष रूप से-
(क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है।(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। ✓(घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
उत्तर - (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
तर्क - इस कविता में कवि ने भारत को 'कनक-शस्य-कमलधरे' कहकर उसकी कृषि-संपन्नता, 'गंगा ज्योतिर्जल-कण' कहकर प्राकृतिक सुंदरता, 'प्राण प्रणव ओंकार' कहकर आध्यात्मिक ज्ञान का वर्णन किया है। इसलिए विकल्प (ग) सबसे उपयुक्त है, क्योंकि कविता में भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता - तीनों का एकसाथ वर्णन मिलता है।
प्रश्न 2. "कनक-शस्य-कमल धरे" पंक्ति का भावार्थ है-
(क) भारत की धन-धान्य संपन्नता ✓(ख) भारत की नदियों का सौंदर्य (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास
उत्तर - (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
तर्क - 'कनक' का अर्थ है सोना/स्वर्णिम फसल, 'शस्य' का अर्थ है फसल/धान्य और 'कमल' जल एवं समृद्धि का प्रतीक है। अतः यह पंक्ति भारत की कृषि-आधारित धन-धान्य संपन्नता को दर्शाती है। यही सबसे उपयुक्त विकल्प है।
प्रश्न 3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं-
(क) गंगा ज्योतिर्जल-कण/धवल धार हार गले (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल/धोता शुचि चरण युगल(ग) भारति, जय, विजयकरे!/कनक-शस्य-कमलधरे! ✓(घ) ध्वनित दिशाएँ उदार/शतमुख-शतरव-मुखरे!
उत्तर - (ग) भारति, जय, विजयकरे!/कनक-शस्य-कमलधरे!
तर्क - ये पंक्तियाँ कविता का उद्घोष-वाक्य (refrain) हैं जिनमें भारत की विजय की कामना की गई है। 'जय' और 'विजयकरे' शब्द स्पष्ट रूप से भारत के विश्व में महत्व और श्रेष्ठता की घोषणा करते हैं।
प्रश्न 4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
(क) सरल, बोल-चाल की भाषा(ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त ✓(ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक
उत्तर - (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
तर्क - कविता में 'कनक-शस्य-कमलधरे', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण', 'शतमुख-शतरव-मुखरे' जैसे संस्कृत के तत्सम शब्दों और समासयुक्त पदों का प्रयोग हुआ है। इससे स्पष्ट है कि भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है।
प्रश्न 5. भारत के वस्त्रों में 'तरु-तृण-वन-लता' और गले में 'गंगा-धारा' को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
(क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक(ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम ✓(ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक (घ) सामाजिक और राजनीतिक
उत्तर - (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम।
तर्क - भारत को एक माँ/देवी के रूप में चित्रित करके, उसके वस्त्र के रूप में प्रकृति और आभूषण के रूप में गंगा का वर्णन करके कवि देशवासियों में भारत के प्रति गहरे लगाव और राष्ट्रीय गर्व की भावना जगाते हैं। यह राष्ट्रीयता और देशप्रेम की चेतना का संदेश है।
नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) "लंका पदतल शतदल,गर्जितोर्मि सागर-जलधोता शुचि चरण युगल!"
अर्थ - लंका (श्रीलंका) भारत के चरणों के नीचे शतदल (कमल) के समान है। गरजती हुई लहरों वाला सागर-जल भारत के पवित्र दोनों चरणों को धोता है।
भाव - इन पंक्तियों में भारतभूमि को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है। कवि कहता है कि समुद्र स्वयं भारत माता की पूजा करता है और उसके चरण धोता है। लंका जो भारत के दक्षिण में स्थित है, वह कमल के समान भारत माता के चरणों में है। यह पंक्तियाँ भारत की महानता, उसकी भौगोलिक स्थिति और उसकी पवित्रता का भव्य चित्रण करती हैं।
(ख) "प्राण प्रणव ओंकार,ध्वनित दिशाएँ उदार,शतमुख-शतरव-मुखरे!"
अर्थ - भारत के प्राण (जीवन) ओंकार (ॐ) की ध्वनि से भरे हुए हैं। उदार (विशाल) दिशाएँ इस ध्वनि से गूँज रही हैं। सैकड़ों मुखों और सैकड़ों आवाजों से यह देश मुखर (बोलता हुआ) है।
भाव - इन पंक्तियों में कवि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि का वर्णन करता है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ ओंकार की ध्वनि दिशाओं में गूँजती है, जो उसकी वैदिक ज्ञान-परंपरा का प्रतीक है। 'शतमुख-शतरव' अर्थात् सैकड़ों बोलियाँ, भाषाएँ और संस्कृतियाँ - यह विविधता में एकता का संदेश है। भारत अनेकता में भी एक स्वर से गूँजता है।
प्रश्न 1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
उत्तर - इस कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की गहरी देशभक्ति और भारत के प्रति अगाध श्रद्धा की अभिव्यक्ति मिलती है। कवि भारत को एक चेतन देवी (भारती/सरस्वती/भारतमाता) के रूप में देखता है और उसकी विजय की कामना करता है। उन्हें भारत की प्रकृति, कृषि, ज्ञान-परंपरा, नदियों, पर्वतों - सभी से प्रेम है। कविता में राष्ट्रीय गौरव, प्रकृति-प्रेम और आध्यात्मिक चेतना - तीनों भावनाएँ एकसाथ उभरती हैं।
प्रश्न 2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
उत्तर - कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का अत्यंत मनोरम वर्णन किया गया है। कवि ने वन, तरु (पेड़), तृण (घास), लता (बेल), पुष्प (फूल) को भारत के वस्त्र बताया है। गंगा की धवल (सफेद) धारा को भारत माता के गले का हार कहा है। हिमालय के हिम-तुषार को उसका मुकुट बताया है। समुद्र को उसके चरण धोने वाला बताया है।
हाँ, प्रकृति का संरक्षण करना निश्चित रूप से देशप्रेम का काम है। जब हम नदियों को स्वच्छ रखते हैं, वनों की कटाई रोकते हैं और पर्यावरण की रक्षा करते हैं, तो हम अपनी मातृभूमि की सेवा करते हैं। भारत की पहचान उसकी प्रकृति, गंगा और हिमालय से है - यदि ये नष्ट हों तो भारत का वैभव और सौंदर्य दोनों नष्ट हो जाएंगे। इसलिए पर्यावरण संरक्षण भी एक प्रकार की देशभक्ति है।
प्रश्न 3. "कनक-शस्य-कमलधरे!" पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
उत्तर - यह पंक्ति भारतभूमि की निम्नलिखित विशेषताओं की ओर संकेत करती है -
कनक (सोना/स्वर्णिम फसल) - भारत की उपजाऊ भूमि जहाँ सोने जैसी फसलें लहलहाती हैं। यह कृषि-प्रधान देश के रूप में भारत की पहचान है।
शस्य (फसल/धान्य) - भारत की धन-धान्य संपन्नता की ओर संकेत। यहाँ की भूमि अन्न से भरपूर है।
कमल (कमल का फूल धारण करने वाली) - कमल भारत का राष्ट्रीय पुष्प है और यह पवित्रता, सौंदर्य, ज्ञान और लक्ष्मी (समृद्धि) का प्रतीक है।
इस प्रकार यह पंक्ति भारत की कृषि-संपदा, भौतिक समृद्धि, पवित्रता और सांस्कृतिक सौंदर्य - सभी की ओर एकसाथ संकेत करती है।
प्रश्न 4. "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
उत्तर - "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताए जाने के निम्नलिखित कारण हैं -
भौगोलिक स्थिति - जैसे मुकुट सिर पर होता है, उसी प्रकार हिमालय भारत के उत्तर में (सिर की ओर) स्थित है। यह भारत की उत्तरी सीमा पर एक रक्षक की तरह खड़ा है।
श्वेत-शुभ्र रूप - मुकुट प्रायः चमकीला और उज्जवल होता है। हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ भी शुभ्र (श्वेत, चमकदार) हैं, जो उसे मुकुट जैसा रूप देती हैं।
ऊँचाई और भव्यता - हिमालय विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है। उसकी भव्यता और विशालता भारत की महानता का प्रतीक है, जैसे राजा का मुकुट उसकी महानता का प्रतीक होता है।
रक्षक की भूमिका - हिमालय भारत को उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं और शत्रुओं से बचाता है, जैसे मुकुट सिर की रक्षा करता है।
इसलिए हिमालय को भारत का मुकुट कहना अत्यंत उपयुक्त रूपक है।
पंक्तियाँ -"भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!"
इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है।
नीचे दी गई विशेषताओं वाली पंक्तियाँ कविता में से खोजकर लिखिए -
| विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
|---|---|
| प्रकृति का मानवीकरण | "गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल" (सागर को भारत माता के चरण धोते हुए दिखाना - मानवीकरण) |
| आलंकारिक प्रयोग | "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" (हिमालय को मुकुट कहना - रूपक अलंकार); "शतमुख-शतरव-मुखरे!" (अनुप्रास अलंकार) |
| समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग | "कनक-शस्य-कमलधरे", "तरु-तृण-वन-लता", "शतमुख-शतरव-मुखरे", "ज्योतिर्जल-कण" |
| संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग | "गर्जितोर्मि", "शुचि चरण युगल", "स्तव कर बहु-अर्थ-भरे", "प्राण प्रणव ओंकार" |
प्रश्न 1. स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
उत्तर - वर्तमान संदर्भ में भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करते हुए मैं निम्नलिखित विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करूँगा -
भारत आज तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में भी अग्रणी है। अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO), डिजिटल क्रांति (UPI, डिजिटल इंडिया), चिकित्सा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की उपलब्धियाँ विश्व-प्रसिद्ध हैं। भारत की भाषाई विविधता - 22 आधिकारिक भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ - इसे अनूठा बनाती हैं। लोकतंत्र की जड़ें, संविधान की भावना, सामाजिक न्याय की चेतना भी आधुनिक भारत की पहचान है। पर्यावरण संरक्षण में भारत की नई भूमिका, नारी-शक्ति का उभार और युवाओं की सृजनशीलता भी नए भारत के प्रतीक हैं।
प्रश्न 2. "शतमुख-शतरव-मुखरे!" पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करते हैं?
उत्तर - "शतमुख-शतरव-मुखरे!" का अर्थ है - सैकड़ों मुखों और सैकड़ों आवाजों से मुखर (गूँजता हुआ)। यह पंक्ति भारत की विविधता में एकता को दर्शाती है।
भारत में दीपावली, होली, ईद, क्रिसमस, बैसाखी, ओणम, पोंगल, दुर्गापूजा, छठ - ये अनेक पर्व विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों के लोग मिलकर मनाते हैं। विभिन्न राज्यों की वेशभूषा, खानपान, संगीत और नृत्यकला अलग-अलग होते हुए भी सब में भारतीयता की एक साझी भावना होती है। जब केरल का ओणम और पंजाब की बैसाखी एकसाथ मनाई जाती है, जब उत्तर और दक्षिण के लोग एक-दूसरे की संस्कृति अपनाते हैं - तभी 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना साकार होती है। 'शतमुख-शतरव' इसी विविधता का प्रतीक है जो एकसाथ बजकर एक सुर बनाती है।
प्रश्न 3. भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर -
भारत की शक्ति - प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा
भारत की असली शक्ति उसकी तीन धरोहरों में निहित है - प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा।
प्रकृति की दृष्टि से भारत अत्यंत समृद्ध है। हिमालय जहाँ हमें जल, औषधि और ऊर्जा देता है, वहीं समुद्र-तट व्यापार और मत्स्य-उद्योग का आधार है। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ लाखों लोगों को जीवन देती हैं। वन हमारी जलवायु को संतुलित रखते हैं। इस प्रकृति का संरक्षण करना भारत को सुदृढ़ बनाने की पहली शर्त है।
संस्कृति की दृष्टि से भारत की विशेषता उसकी विविधता है। अनेक धर्म, भाषाएँ, पर्व और रीति-रिवाज मिलकर भारत की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। सहिष्णुता, अहिंसा, वसुधैव कुटुम्बकम् - ये भारतीय संस्कृति के मूलभूत मूल्य हैं जो भारत को विश्व में एक विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
ज्ञान-परंपरा की दृष्टि से भारत ने गणित, खगोल, चिकित्सा, दर्शन आदि में विश्व को अमूल्य योगदान दिया है। वेद, उपनिषद, योग और आयुर्वेद आज भी पूरे विश्व में प्रासंगिक हैं। इस ज्ञान-परंपरा को आगे ले जाकर ही भारत एक सशक्त राष्ट्र बन सकता है।
निष्कर्षतः, इन तीनों धरोहरों के संरक्षण और विकास में ही भारत की सुदृढ़ता का रहस्य छिपा है।
प्रश्न 4. कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर - कवि निराला ने गंगा को 'धवल धार हार गले' कहा था - अर्थात् स्वच्छ और श्वेत धारा जो भारत के गले का हार है। हिमालय को 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' - बर्फ से ढका चमकीला मुकुट - बताया था। परंतु वर्तमान संदर्भ में स्थिति बदल गई है।
नदियों पर प्रभाव - औद्योगिक कचरा, शहरी मलजल और प्लास्टिक प्रदूषण ने गंगा सहित अनेक नदियों को दूषित कर दिया है। नदियाँ 'धवल' नहीं रहीं। जलीय जीव-जंतु संकट में हैं।
हिमालय पर प्रभाव - जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। हिम-आवरण कम हो रहा है। इससे नदियों के जलस्तर पर दीर्घकालीन खतरा मंडरा रहा है। हिमस्खलन और भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इसलिए हमें गंगा की स्वच्छता और हिमालय के संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करने होंगे, तभी कवि के स्वप्न का भारत वास्तविकता में साकार होगा।
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। समास रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। समास रचना से बने शब्द को 'समस्त पद' कहते हैं। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं।
कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए -
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| शतदल | सौ दलों वाला (कमल) |
| ज्योतिर्जल | ज्योति से युक्त जल, प्रकाश-युक्त जल |
| शतमुख | सौ मुखों वाला |
| सागरजल | सागर का जल |
(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
उत्तर - अनुप्रास अलंकार वहाँ होता है जहाँ एक ही वर्ण या वर्णसमूह की बार-बार आवृत्ति हो।
कविता में अनुप्रास अलंकार की पंक्तियाँ -
(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
उत्तर - रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ उपमेय (जिसकी तुलना की जाए) में उपमान (जिससे तुलना की जाए) का आरोप कर दिया जाए - दोनों को एक मान लिया जाए।
रूपक अलंकार की पंक्तियाँ और स्पष्टीकरण -
कवि ने निम्नलिखित प्राकृतिक दृश्यों/वस्तुओं को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है -हिमालय → मुकुट, गंगा → गले का हार, वन-लता → वस्त्र, समुद्र → चरण-धोने वाला सेवक, पुष्प → वस्त्र पर खचित सुमन।
प्रश्न 1. मान लीजिए आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?
उत्तर - (पंजाब राज्य के संदर्भ में उदाहरण)
यदि मुझे भारत को एक मनुष्य के रूप में सुसज्जित करने का अवसर मिले तो मैं पंजाब की सांस्कृतिक धरोहर का उपयोग इस प्रकार करूँगा -
वेशभूषा - पुरुषों की कुर्ता-पजामा और पगड़ी, स्त्रियों की रंग-बिरंगी फुलकारी कढ़ी हुई दुपट्टे वाली पोशाक।
आभूषण - गले में मोतियों की माला (मोतियों का हार), कानों में झुमके, कलाई में कड़ा।
चिह्न - पंजाब का राजकीय प्रतीक - बाज (चील); साथ में खंडा (सिख धर्म का पवित्र चिह्न)।
पुष्प - गेंदे के फूलों की माला (पंजाब के उत्सवों में प्रमुख) और कनेर के पुष्प।
अन्य - हाथ में सरसों के खेत की टहनी (पंजाब की पहचान), पैरों में कशीदाकारी वाली जूती।
इस प्रकार यह सज्जा पंजाब की कृषि-संस्कृति, रंग-बिरंगे लोक-जीवन और वीरता का प्रतीक बनेगी।
प्रश्न 2. भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?
उत्तर - मैं भारत पर आधारित एक पुस्तक का आवरण पृष्ठ (Cover Page) बनाऊँगा जिसमें निम्नलिखित प्रतीक सम्मिलित करूँगा -
केंद्र में - अशोक चक्र, क्योंकि यह भारत के राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक है और धर्म तथा प्रगति का संदेश देता है।
ऊपर - हिमालय की हिम-ढकी चोटियाँ, क्योंकि हिमालय भारत का मुकुट और रक्षक है।
नीचे - समुद्र की लहरें, क्योंकि समुद्र भारत के तीन ओर है और व्यापार-संस्कृति का प्रतीक है।
एक ओर - गंगा नदी का प्रवाह और कमल का फूल, क्योंकि ये भारत की पवित्रता और सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक हैं।
दूसरी ओर - बाँसुरी और ढोल, क्योंकि ये भारत की संगीत-परंपरा और विविध लोक-संस्कृति के प्रतीक हैं।
पृष्ठभूमि में - विभिन्न राज्यों की पोशाकों में लोग हाथ थामे खड़े हों, जो विविधता में एकता का प्रतीक हो।
प्रश्न 3. नदी की यात्रा - गंगा नदी की अपने उद्गम स्रोत से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उत्तर -
गंगा की यात्रा - गोमुख से गंगासागर तक
मैं गंगा हूँ। मेरी यात्रा उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से आरंभ होती है जहाँ गोमुख नामक स्थान पर हिमालय की बर्फ पिघलकर मुझे जन्म देती है। वहाँ की वायु शीतल और शुद्ध है, चारों ओर देवदार के वन हैं और हिम-ढकी चोटियाँ मेरा स्वागत करती हैं।
ऋषिकेश और हरिद्वार में मैं मैदानों में उतरती हूँ। यहाँ गंगा आरती की रोशनी में मेरा जल दीपमाला से जगमगा उठता है। यहाँ की भाषा हिंदी है और संस्कृत के श्लोकों की गूँज है।
इलाहाबाद (प्रयागराज) में मेरा मिलन यमुना और अदृश्य सरस्वती से होता है - यह त्रिवेणी संगम है। कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
वाराणसी (काशी) में मैं सबसे अधिक पूजी जाती हूँ। यहाँ के घाट, सुबह की आरती, पंडितों के मंत्र - सब मिलकर एक अलौकिक वातावरण बनाते हैं।
पटना में मैं बिहार की धरती को सींचती हूँ। यहाँ मैथिली, भोजपुरी और मगही की मिठास मेरे जल में घुल जाती है।
अंत में पश्चिम बंगाल से होते हुए गंगासागर में बंगाल की खाड़ी में मिलकर मेरी यात्रा पूरी होती है। यहाँ बांग्ला भाषा और लोक-संस्कृति मेरा स्वागत करती है।
इस प्रकार मैं - गंगा - भारत की प्रकृति, संस्कृति, भाषाएँ और जन-जीवन सबको एक सूत्र में पिरोती हूँ।
अनुप्रास अलंकार - जहाँ एक ही वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हो। उदाहरण - "शतमुख-शतरव-मुखरे" - 'श' वर्ण की पुनरावृत्ति।
रूपक अलंकार - जहाँ उपमेय और उपमान में अभेद स्थापित किया जाए। उदाहरण - "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" - हिमालय = मुकुट (अभेद)।
| 1. What is the main theme of the article "भारति, जय, विजयकरे!"? | ![]() |
| 2. How does the article portray the concept of patriotism? | ![]() |
| 3. What are the key qualities that the article suggests for achieving success? | ![]() |
| 4. In what way does the article relate historical events to the present context? | ![]() |
| 5. How does the article encourage youth participation in national development? | ![]() |