CBSE Class 9  >  Class 9 Notes  >  Hindi Ganga (New NCERT)  >  NCERT Solutions: घर की याद

NCERT Solutions: घर की याद

अभ्यास के प्रश्न एवं उत्तर

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?(क) विदेश से मित्र के लिए(ख) युद्धभूमि से जनता के लिए(ग) जेल से परिवार के लिए 

(घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए

उत्तर : (ग) जेल से परिवार के लिए

तर्क : भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन वर्ष के लिए कारावास का दंड दिया था। जेल में रहते हुए सावन की बरसात देखकर घर-परिवार की याद आने पर उन्होंने यह कविता लिखी। कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बनाकर परिवार को संदेश भेजता है - यह स्पष्ट करता है कि यह कविता जेल से परिवार के लिए लिखी गई।

प्रश्न 2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?(क) उत्साह और आवेग(ख) भय और क्रोध(ग) साहस और उमंग(घ) चिंता और बेचैनी
उत्तर : (घ) चिंता और बेचैनी

तर्क : "रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है" - इन पंक्तियों से स्पष्ट है कि लगातार बरसता पानी कवि के मन की चिंता और बेचैनी का परिचायक है। जेल में बंद कवि रात-भर जागता रहा, परिवार की याद में व्याकुल रहा। वर्षा की निरंतरता उसके मन की बेचैनी को और गहरा करती है।

प्रश्न 3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?(क) कमजोर और निष्क्रिय(ख) स्नेहमयी और दृढ़

(ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय(घ) सरल और उदासीन

उत्तर : (ख) स्नेहमयी और दृढ़

तर्क : कविता में माँ की छवि अत्यंत ममतामयी और भावनात्मक रूप से मजबूत स्त्री की है। "माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर" - यह पंक्ति उनके असीम स्नेह को दर्शाती है। वे अनपढ़ हैं पर "दुख में वह गढ़ी मेरी" - दुख में उन्होंने कवि को गढ़ा है अर्थात् वे भावनात्मक रूप से दृढ़ हैं। पिताजी को धीर बँधाने वाली भी माँ ही है।

प्रश्न 4. "वज्र-भुज नवनीत-सा उर" पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?(क) कर्मठ और सृजनशील(ख) साहसी और पराक्रमी(ग) दृढ़ और संवेदनशील

(घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय

उत्तर : (ग) दृढ़ और संवेदनशील

तर्क : "वज्र-भुज" का अर्थ है वज्र (बिजली) जैसी भुजाएँ - अर्थात् बाहर से अत्यंत कठोर और शक्तिशाली; और "नवनीत-सा उर" का अर्थ है ताजे मक्खन जैसा हृदय - अर्थात् अंदर से अत्यंत कोमल और संवेदनशील। इस प्रकार यह पंक्ति पिताजी के बाहरी कठोरता और आंतरिक कोमलता के विरोधाभासी पर वास्तविक व्यक्तित्व को दर्शाती है।

प्रश्न 5. "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" पंक्ति किस ओर संकेत करती है?(क) पिता की कठोरता(ख) पिता की भावुकता

(ग) वर्षा की तीव्रता(घ) पिता की निर्बलता

उत्तर : (ख) पिता की भावुकता

तर्क : यह पंक्ति पिताजी की भावुकता को दर्शाती है। जैसे किसी पेड़ से एक पत्ता टूटे और पानी की धारा फूट पड़े - उसी प्रकार पिताजी के हृदय में बेटे (पाँचवें) की याद आते ही आँसुओं की धारा बह निकलती है। बाहर से वज्र जैसे कठोर पिताजी अंदर से इतने भावुक हैं कि जरा-सी बात पर रो पड़ते हैं।

प्रश्न 6. "बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर" पंक्ति में 'परिताप' शब्द से क्या संकेत मिलता है?(क) घर का समृद्ध होना(ख) घर की सजावट(ग) घर में दुख का वातावरण

(घ) घर की शांति

उत्तर : (ग) घर में दुख का वातावरण

तर्क : 'परिताप' का अर्थ है - अत्यधिक दुख, शोक, पीड़ा। कवि जेल में बंद है और उस दिन बहन भी मायके आई है। बहन और सभी भाई घर में इकट्ठे हैं, पर कवि स्वयं अनुपस्थित है। इस अनुपस्थिति के कारण घर में शोक और दुख का वातावरण छाया है - इसीलिए कवि कह रहा है "हाय रे परिताप के घर" अर्थात् वह घर जो आज दुख से भरा है।

प्रश्न 7. "और कहना मस्त हूँ मैं" पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?(क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।(ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है। 

(ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है।(घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।

उत्तर : (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।

तर्क : कवि परिवार को बताना चाहता है कि वह मस्त है, ठीक है - ताकि घर के लोग चिंता न करें। वास्तव में वह जेल में है, दुखी है, घर की याद में रो रहा है। पर परिवार के प्रति उसका प्रेम इतना गहरा है कि वह उन्हें चिंतित नहीं करना चाहता। यह एक त्यागपूर्ण, स्नेहिल झूठ है।

प्रश्न 8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?(क) घर की शांति और सुरक्षा(ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध(ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया(घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

उत्तर : (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

तर्क : यह कविता जेल में बंद कवि की घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा को प्रमुखता से उजागर करती है। पूरी कविता में कवि बार-बार घर, माँ, पिताजी, भाइयों और बहन की याद करता है। सावन की बरसात उसे घर की याद दिलाती है और अकेलेपन की पीड़ा को और गहरा कर देती है।

मेरी समझ मेरे विचार (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।

उत्तर :कविता में पिताजी का व्यक्तित्व अत्यंत बहुआयामी और प्रभावशाली रूप में चित्रित हुआ है -

शारीरिक रूप से शक्तिशाली : "वज्र-भुज नवनीत-सा उर" - उनकी भुजाएँ वज्र (बिजली) की तरह कठोर और शक्तिशाली हैं। बुढ़ापे में भी वे दौड़ सकते हैं और खिलखिला सकते हैं।

साहसी और निर्भीक : "मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें" - वे मृत्यु से नहीं डरते, शेर के सामने भी नहीं झिझकते। उनकी वाणी में बादल जैसी गरज है।

कर्मठ और परिश्रमी : "काम में झंझा लरजता" - वे काम में झंझावात की तरह लरजते हैं अर्थात् काम करते समय उनमें आँधी-तूफान जैसी ऊर्जा होती है। गीता-पाठ, दंड-बैठक, मुगदर - सभी उनकी दिनचर्या है।

भावुक और स्नेही : "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" - बाहर से कठोर पिताजी अंदर से अत्यंत कोमल हैं। बेटे की याद आते ही उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकलती है।

धार्मिक और अनुशासित : वे प्रतिदिन गीता-पाठ करते हैं और शारीरिक व्यायाम (दंड, मुगदर) को अपनी दिनचर्या में शामिल रखते हैं।

पुत्र-प्रेमी : वे अपने "पाँचवें" (कवि) को विशेष रूप से प्यार करते हैं। उसकी याद में वे रोते हैं और पाँचवें का नाम लेते हैं।

इस प्रकार कविता में पिताजी का चरित्र बाहरी कठोरता और आंतरिक कोमलता, साहस और प्रेम, कर्मठता और धार्मिकता का अद्भुत संगम है।

प्रश्न 2. "दुख डटकर ठेलता हूँ" यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?

उत्तर :'घर की याद' कविता में कवि भवानीप्रसाद मिश्र कारावास जैसी कठिन परिस्थिति में भी अद्भुत धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देते हैं -

धैर्य : कवि जेल में बंद है, घर-परिवार से दूर है, सावन की बरसात मन को और व्याकुल करती है - पर वह टूटता नहीं। वह स्वयं कहता है - "दुख डटकर ठेलता हूँ" - दुख को सामना करके पीछे धकेलता हूँ। यही उसका धैर्य है।

साहस : देश की आजादी के लिए उन्होंने स्वेच्छा से जेल स्वीकार की। माँ के शब्दों में भी यह साहस दिखता है - "पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता" - अर्थात् अगर वह पीछे हटता तो माँ की कोख को लजाता। यह साहस उन्हें परिवार से, विशेषकर माँ से, मिला है।

त्याग : कवि परिवार को अपना दुख नहीं बताना चाहता। वह कहता है - "किंतु उनसे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना" - परिवार के लिए वह अपनी पीड़ा छिपाता है। यह सबसे बड़ा त्याग है - प्रियजनों से अपनी तकलीफ छिपाना।

संतुलन : कवि यह भी जानता है कि "घर नहीं हूँ बस यही है, किंतु यह बस बड़ा बस है" - घर से दूरी ही सबसे बड़ी पीड़ा है, पर वह इसे स्वीकार करके आगे बढ़ता है।

इस प्रकार कठिन परिस्थितियों में कवि धैर्य, साहस और त्याग के बल पर अपनी पीड़ा को झेलता है और देश-प्रेम को परिवार-प्रेम से ऊँचा रखता है।

प्रश्न 3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?

उत्तर :'घर की याद' कविता में वर्षा का वर्णन बार-बार आता है और यह केवल प्राकृतिक वर्णन नहीं है - यह कवि के अंतर्मन की भावनाओं का दर्पण है।

बेचैनी का प्रतीक : "आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है" - लगातार बरसता पानी कवि के मन की बेचैनी और घुटन का प्रतीक है। जैसे बादल घिरे हैं, वैसे ही कवि का मन भी घिरा है।

याद की तीव्रता : "गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर" - वर्षा की तीव्रता के साथ घर की याद भी तीव्र होती जाती है। पानी जितना तेज बरसता है, प्राण उतना ही काँपते हैं।

आँसुओं का प्रतीक : कविता में बार-बार पानी गिरने का उल्लेख कवि के आँसुओं का भी प्रतीक है। "और पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है" - पानी में घर तैरता दिखता है - यह कल्पना कवि की आँखों में आए आँसुओं का प्रतिबिंब भी हो सकता है।

संदेशवाहक का माध्यम : वर्षा (सावन के बादल) ही वह माध्यम है जिसके द्वारा कवि परिवार को संदेश भेजता है - "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।"

शांति का संकेत : अंत में "अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है" - पानी थमने के साथ कवि का मन शांत और भावुक हो जाता है।

इस प्रकार वर्षा इस कविता में केवल मौसम नहीं, कवि के हृदय की पीड़ा, याद और प्रेम का सजीव प्रतीक है।

प्रश्न 4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।

उत्तर :

पंक्तियाँ :

1. "माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर"भाव : माँ की गोद में इतनी शक्ति है कि वहाँ सिर रखते ही सारे दुख दूर हो जाते हैं। माँ की गोद संसार का सबसे सुरक्षित आश्रय है। यह पंक्ति माँ के स्नेह की असीमता और उनकी भावनात्मक मजबूती को दर्शाती है।

2. "और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी"भाव : माँ भले ही अनपढ़ हैं, पर जीवन के दुखों में उन्होंने कवि को गढ़ा है - उसे मजबूत बनाया है। अनपढ़ होना कमजोरी नहीं, माँ की जीवन-शिक्षा अनुभव से आई है।

3. "और माँ ने कहा होगा, दुख कितना बहा होगा, आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी"भाव : पिताजी के रोने पर माँ ने उन्हें धीर बँधाया होगा। खुद दुखी होते हुए भी उन्होंने पिताजी को सँभाला - यही उनकी भावनात्मक दृढ़ता है।

4. "पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता"भाव : माँ कहती है कि अगर भवानी पीछे हटता तो मेरी कोख लजाती। माँ ने बेटे को देश-सेवा के लिए प्रेरित किया - यह त्याग उनकी सबसे बड़ी भावनात्मक मजबूती है।

प्रश्न 5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?

उत्तर :कविता का सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी अंश मुझे यह लगता है -

"एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, एक हल्की चोट लग ले, दूध की नद्दी उमग ले"

कारण : यह पंक्तियाँ पिताजी की भावुकता का अत्यंत सजीव और मार्मिक चित्रण करती हैं। बाहर से वज्र-भुज (वज्र जैसी भुजाओं वाले) और शेर से न डरने वाले पिताजी - एक पत्ते के टूटने जैसी छोटी-सी बात पर भी आँसुओं की धारा बहा देते हैं। पिता के इस कोमल पक्ष को 'दूध की नद्दी उमगना' जैसे बिंब से व्यक्त करना अत्यंत प्रभावशाली है। यह पंक्तियाँ पढ़कर ऐसे महसूस होता है मानो एक कठोर दिखने वाले पिता का हृदय आँखों के सामने खुल जाता है। यह बाल-पाश (पुत्र-प्रेम की शक्ति) की अनुपम अभिव्यक्ति है।

विधा से संवाद

कविता का सौंदर्य

प्रश्न : "गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर" - इन पंक्तियों की विशेषताओं वाली अन्य पंक्तियाँ कविता से ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर : उपर्युक्त पंक्तियों में ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य की प्रधानता है। कविता में इसी प्रकार की अन्य विशेषताओं वाली पंक्तियाँ इस प्रकार हैं -

स्मृति और दृश्य बिंब :"घर नजर में तिर रहा है, घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो" (यहाँ घर की याद एक दृश्य बिंब के रूप में सामने आती है।)

लोकभाषा की सहजता :"मायके में बहिन आई, बहिन आई बाप के घर" (सरल, स्वाभाविक भाषा में गहरी भावना।)

पंक्तियों का दोहराव :"बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है" - यह पंक्ति कविता में बार-बार आती है। "आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है" - पुनरावृत्ति से भाव तीव्र होता है।

आलंकारिक प्रयोग :"वज्र-भुज नवनीत-सा उर" - उपमा अलंकार "मन कि बड़ का झाड़ जैसे" - उपमा अलंकार

प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन :"लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों" - बादलों की छटा को माँ के आँगन लीपने से जोड़ना।

संबोधनात्मकता :"हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन"

कविता की संरचना

प्रश्न : 'घर की याद' कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें।(संकेत - पानी का गिरना, सबेरा होना)

उत्तर :कविता में भावों की यात्रा प्रकृति के माध्यम से इन प्रमुख चरणों में व्यक्त होती है -

प्रथम चरण - वर्षा का आरंभ और बेचैनी : रात-भर पानी गिरता रहा, प्राण-मन घिरता रहा। बादल घने हैं, हर ओर रात की छाप है। वर्षा की झर-झर से कवि का मन व्याकुल हो उठा।

द्वितीय चरण - घर की याद : वर्षा देखकर घर नजर में तैरने लगा। घर में चार भाई, मायके आई बहन - सब याद आने लगे।

तृतीय चरण - परिवार के सदस्यों का स्मरण : माँ, पिताजी, भाई-बहन एक-एक करके याद आते हैं। पिताजी का व्यक्तित्व, माँ का स्नेह, भाई-बहनों का प्यार - सब मन में उभरता है।

चतुर्थ चरण - भावनात्मक द्वंद्व और धीरज : कवि को लगता है कि घर में उसके बिना दुख होगा - "आज ऐसा कुछ हुआ होगा, आज सबका मन चुआ होगा।" पर वह संयम रखता है - "दुख डटकर ठेलता हूँ।"

पंचम चरण - सावन को संदेश : पानी थम जाता है, मन नम हो जाता है। कवि सावन के बादलों को संबोधित करता है - हे सावन, तुम उन पर बरसो, उन्हें मेरी चिंता न दो।

षष्ठ चरण - समापन और संकल्प : कवि परिवार को संदेश भेजता है - वह मस्त है, कूदता-खेलता है, मजे में है। उन्हें धीर रहना है। यह त्यागपूर्ण संदेश कविता को एक उदात्त अंत देता है।

विषयों से संवाद

प्रश्न 1. कविता में चित्रित 'घर' एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?

उत्तर :कविता में 'घर' केवल दीवारों और छत से बना मकान नहीं है - वह माँ की ममता, पिताजी की शक्ति, भाई-बहनों का प्यार और परिवार की सामूहिक भावना का केंद्र है।

संयुक्त परिवार :पसंद - सबका साथ, दुख-सुख में एक-दूसरे का सहारा, बड़ों का मार्गदर्शन, बच्चों का समुचित पालन-पोषण, त्योहारों की रौनक, अकेलेपन से मुक्ति। कविता में यही संयुक्त परिवार चित्रित है जहाँ माँ, पिता, चार भाई, भाभी, बहन सब एक साथ हैं। नापसंद - मतभेद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कमी, सबकी राय में एकमत होना कठिन।

एकल परिवार :पसंद - व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निर्णय लेने में आसानी, गोपनीयता, आधुनिक जीवनशैली के अनुकूल। नापसंद - अकेलापन, बच्चों को बड़ों का स्नेह न मिलना, आपदा में अकेलापन, बुजुर्गों की उपेक्षा।

निष्कर्ष : कविता के 'घर' की तरह संयुक्त परिवार में भावनात्मक सुरक्षा और अपनापन होता है जो एकल परिवार में प्रायः अनुपस्थित रहता है।

प्रश्न 2. कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

उत्तर :लगातार वर्षा से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ -

ग्रामीण क्षेत्र में : खेतों में जलभराव से फसल नष्ट हो सकती है। बाढ़ आने से घर और मवेशी खतरे में पड़ सकते हैं। कच्चे मकान गिर सकते हैं। रास्ते बंद हो जाते हैं, आवागमन रुक जाता है। बीमारियाँ फैलती हैं।

शहरी क्षेत्र में : सड़कों पर जलभराव, यातायात ठप। निचले इलाकों में बाढ़। बिजली आपूर्ति बाधित। घरों में पानी घुसना। सब्जी-दूध जैसी दैनिक आवश्यकताओं की किल्लत।

प्रश्न 3. कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।

उत्तर :कविता में कवि जेल में बंद होने के कारण परिवार से सीधे संपर्क नहीं कर सकता - इसलिए वह सावन के बादलों को दूत बनाता है। यह कल्पना अत्यंत काव्यात्मक है।

पुराने संचार माध्यम : पत्र (चिट्ठी), दूत, कबूतर, ढोल-नगाड़े, धुआँ संकेत, आग की लपटें। ये धीमे थे, पर भावनाएँ उनमें कहीं अधिक होती थीं।

नए संचार माध्यम : मोबाइल फोन, इंटरनेट, ईमेल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया। ये तात्कालिक हैं, पर कभी-कभी भावनात्मक गहराई कम होती है।

अंतर : पुराने माध्यम धीमे पर भावपूर्ण थे; नए माध्यम तेज पर कभी-कभी यांत्रिक हैं। पुराने में प्रतीक्षा की कविता थी; नए में तत्काल संपर्क है।

प्रश्न 4. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से 'भारत का स्वतंत्रता संग्राम' विषय पर लेख लिखिए।

उत्तर :

भारत का स्वतंत्रता संग्राम

भारत लगभग 200 वर्षों तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। इस दासता से मुक्ति के लिए लाखों देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाएँ : सन् 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (सिपाही विद्रोह), जिसमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, तात्या टोपे आदि ने भाग लिया। सन् 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 - नमक सत्याग्रह/दांडी मार्च) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) का नेतृत्व किया। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों ने सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया।

भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लिया और तीन वर्ष का कारावास भोगा। इसी दौरान उन्होंने 'घर की याद' लिखी।

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ - इन करोड़ों बलिदानियों के त्याग और संघर्ष का फल।

सृजन

प्रश्न 1. कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?

उत्तर :

प्रिय भवानी,

तेरी माँ का आशीर्वाद।

आज सावन की बारिश देखकर तेरी बहुत याद आई बेटा। घर में चारों भाई हैं, बहन भी आई है, पर तेरे बिना सब सूना-सूना लगता है। तेरे पिताजी तेरा नाम लेकर रोज याद करते हैं - कल रो पड़े थे, पर मैंने उन्हें समझाया।

बेटा, मुझे तेरे जाने का दुख नहीं है - तू सही काम के लिए गया है। जो पाँव पीछे हटाता, वह मेरी कोख को लजाता। पर तू ध्यान रखना अपना। भूखा मत रहना। जो मिले, खा लेना।

घर में बरकत है, सब ठीक हैं। तू बस साहस रख। भगवान तेरे साथ है। जल्दी आना - तेरी राह देख रही हूँ।

तेरी माँ

प्रश्न 2. कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद-लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर :

(रात का समय, घर में बारिश हो रही है। पिताजी उदास बैठे हैं।)

पिताजी : (आँखें पोंछते हुए) आज फिर भवानी की बहुत याद आ रही है। कैसा होगा वहाँ जेल में...

माँ : (शांत स्वर में) क्यों रोते हो? आँख में किसलिए पानी? वहाँ अच्छा है भवानी।

पिताजी : पर अपना लड़का जेल में हो और बाप चैन से बैठे - यह कैसे हो?

माँ : उसने जो किया, सही किया। पाँव पीछे हटाता तो मेरी कोख लजाती। वह गया - यही उसकी लीक है।

पिताजी : पर हमारा पाँचवाँ... (गला रुंध जाता है)

माँ : देखना, वह ठीक होगा। उसे हमारी चिंता होगी - इसलिए हमें मजबूत रहना होगा। वह सुनेगा तो उसे दुख होगा।

पिताजी : तुम कहती हो तो मानता हूँ। पर मन मानता नहीं।

माँ : मन को मानना होगा। वह लौटेगा - जरूर लौटेगा। तब तक धीर धरो।

प्रश्न 3. इस कविता में कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाया है। अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?

उत्तर :अगर मुझे किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से संदेश भेजना हो तो मैं हवा (पवन) को चुनूँगा।

कारण : हवा सर्वव्यापी है - वह हर जगह पहुँच सकती है, कोई सीमा उसे नहीं रोक सकती। जहाँ बादल नहीं पहुँच सकते, नदी नहीं जा सकती - वहाँ भी हवा पहुँच जाती है। हवा बिना रुके, बिना थके चलती रहती है। उसकी स्पर्श-शक्ति में कोमलता है जो माँ की साँस जैसी लगती है। मैं हवा से कहता - "हे पवन, मेरे घर जाओ, माँ के गालों को अपनी लहर से स्पर्श करो और मेरा प्यार और आशीर्वाद उन तक पहुँचा दो।"

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

प्रश्न 1. कविता से दी गई पंक्तियों में रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तर :

(i) "एक छिन सौ बरस है रे"छिन - क्षण, पलअर्थ : एक पल भी सौ साल जैसा लग रहा है।नया वाक्य : परीक्षा के दिनों में एक-एक छिन बीतना मुश्किल हो जाता है।

(ii) "तुझे बतलाता कि बेला ने फलानी फूल झेला"फलानी - अमुक, किसी विशेष (का नाम न लेकर)अर्थ : तुझे बताता कि फलानी (अमुक) बेला के फूल उसने झेले (ग्रहण किए)।नया वाक्य : फलानी दुकान पर सबसे अच्छी मिठाई मिलती है।

(iii) "और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला"भौजी - भाभी (भाई की पत्नी)अर्थ : भाभी और सरला (बहन) - दोनों सरल पानी की तरह सहज और कोमल हैं।नया वाक्य : हमारी भौजी बहुत मृदुभाषी और स्नेहिल हैं।

(iv) "मन कि बड़ का झाड़ जैसे"बड़ - बरगद का पेड़अर्थ : पिताजी का मन बरगद के पेड़ जैसा विशाल और स्थिर है।नया वाक्य : गाँव के चौराहे पर एक विशाल बड़ का पेड़ छाया देता है।

प्रश्न 2. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।

उत्तर :

(क) "बहुत पानी गिर रहा है"'पानी' शब्द है - संज्ञा (द्रव्यवाचक संज्ञा) 'बहुत' शब्द है - विशेषण (परिमाणवाचक विशेषण) 'गिर रहा है' है - क्रिया (अकर्मक क्रिया, वर्तमान कालिक)

(ख) "पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा"'बुढ़ापा' शब्द है - संज्ञा (भाववाचक संज्ञा) 'व्यापा' शब्द है - क्रिया (सकर्मक क्रिया, भूतकालिक) 'जिनको' शब्द है - सर्वनाम (संबंधवाचक सर्वनाम)

(ग) "खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह"'खुले' शब्द है - विशेषण (गुणवाचक विशेषण) 'वह' शब्द है - सर्वनाम (अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम) 'बदन' शब्द है - संज्ञा (जातिवाचक संज्ञा) 'फिरता' शब्द है - क्रिया (अकर्मक क्रिया)

(घ) "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए"'एक' शब्द है - विशेषण (संख्यावाचक विशेषण) 'फूट जाए' है - क्रिया (अकर्मक क्रिया, संभावनार्थ वर्तमान) 'पत्ता' शब्द है - संज्ञा (जातिवाचक संज्ञा)

(ङ) "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन"'सजीले' शब्द है - विशेषण (गुणवाचक विशेषण) 'मेरे' शब्द है - सर्वनाम (उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम / संबंधकारक) 'सावन' शब्द है - संज्ञा (जातिवाचक संज्ञा - महीने का नाम)

गतिविधियाँ

गतिविधि 1 : कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार-वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर : (यह गतिविधि छात्र स्वयं करेंगे। उदाहरण के रूप में -)

मेरे परिवार का वृक्ष - दादा-दादी (जड़ें) → माता-पिता (तना) → भाई-बहन (शाखाएँ) → मैं (एक पत्ती)

पिताजी के लिए : कर्मठ और स्नेही, घर के आधार-स्तंभ, प्रतिदिन काम पर जाते, हम सबका भरण-पोषण करते।माँ के लिए : ममता की मूर्ति, बिना थके घर सँभालतीं, हर दुख में सहारा।भाई के लिए : मेरा सबसे अच्छा मित्र, खेलकूद में साथी, हर झगड़े के बाद फिर मिल जाते।

गतिविधि 2 : कविता में प्रयुक्त ध्वनि आधारित शब्द (जैसे - झरा-झर, थर-थर, सर-सर) को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए।

उत्तर : (यह गतिविधि छात्र कक्षा में मौखिक रूप से करेंगे।)

कविता में प्रयुक्त ये ध्वनि-आधारित शब्द वातावरण निर्माण करते हैं -

झरा-झर - पानी के झरने की ध्वनि का अनुकरण।थर-थर - काँपने की ध्वनि का अनुकरण - मन की बेचैनी दर्शाता है।सर-सर - हवा के बहने की ध्वनि - प्रकृति की सजीवता।हरा-हर - पत्तों के हिलने की ध्वनि।झाँकें-झूँकें - बादलों की किरणों का प्रकाश-अंधकार।

इन शब्दों को जोर से और लय में पढ़ने से वर्षा का जीवंत वातावरण मन में साकार हो उठता है।

The document NCERT Solutions: घर की याद is a part of the Class 9 Course Hindi Class 9 Ganga (New NCERT).
All you need of Class 9 at this link: Class 9

FAQs on NCERT Solutions: घर की याद

1. What are the main themes presented in the chapter "घर की याद"?
Ans. The chapter "घर की याद" explores themes such as nostalgia, the emotional connection to one's home, and the impact of changes in one's environment. It reflects on how memories of the past shape an individual's identity and experiences, emphasizing the significance of home as a place of comfort and belonging.
2. How does the author describe the feelings associated with leaving home?
Ans. The author conveys a deep sense of loss and longing when leaving home. There is a poignant reflection on the memories tied to the physical space and the emotional resonance these memories hold. The feelings of attachment to familiar surroundings are depicted through vivid imagery and personal anecdotes, highlighting the bittersweet nature of departure.
3. Can you explain the significance of the title "घर की याद"?
Ans. The title "घर की याद," which translates to "Memories of Home," signifies the central focus of the chapter on the recollections and sentiments associated with one's home. It underscores the idea that home is not merely a physical structure but a repository of memories that evoke emotions and shape one's sense of identity. The title encapsulates the essence of nostalgia that permeates the narrative.
4. What literary devices are used in "घर की याद" to enhance the narrative?
Ans. The author employs various literary devices such as imagery, metaphor, and personification to enhance the narrative in "घर की याद." Imagery is used to vividly portray the sights, sounds, and feelings associated with home, while metaphors create deeper meanings about the connection to the past. Personification may be used to give human-like qualities to elements of the home, thereby strengthening the emotional impact of the narrative.
5. How does the chapter reflect on the relationship between memory and identity?
Ans. The chapter illustrates that memory plays a crucial role in shaping an individual's identity. The recollections of home and the experiences associated with it contribute to a person's sense of self. The author suggests that these memories are integral to understanding one's place in the world, as they provide context and continuity to personal history, reinforcing the idea that identity is deeply intertwined with the places we come from.

Top Courses for Class 9

Related Searches
Exam, pdf , NCERT Solutions: घर की याद, Previous Year Questions with Solutions, study material, Objective type Questions, Viva Questions, ppt, Extra Questions, Free, practice quizzes, mock tests for examination, shortcuts and tricks, Semester Notes, NCERT Solutions: घर की याद, Sample Paper, video lectures, MCQs, Important questions, past year papers, Summary, NCERT Solutions: घर की याद;