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NCERT Solutions: रैदास

पृष्ठ संख्या: 89

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न.1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।
(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए -
प्रश्न अभ्यास 

(घ) दूसरे पद में कवि ने 'गरीब निवाजु' किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।
(ङ) दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
(च) 'रैदास' ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?
(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए -
मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसइआ

उत्तर. 
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना निम्नलिखित चीज़ों से की गई हैं:
(i) भगवान की घन बन से, भक्त की मोर से
(ii) भगवान की चंद्र से, भक्त की चकोर से
(iii) भगवान की दीपक से, भक्त की बाती से
(iv) भगवान की मोती से, भक्त की धागे से
(v) भगवान की सुहागे से, भक्त की सोने से
(vi) भगवान की चंदन से, भक्त की पानी से
(ख)
प्रश्न अभ्यास (ग)
प्रश्न अभ्यास (घ) 'गरीब निवाजु' का अर्थ है, गरीबों पर दया करने वाला। कवि ने भगवान को 'गरीब निवाजु' कहा है क्योंकि ईश्वर ही गरीबों का उद्धार करते हैं, सम्मान दिलाते हैं, सबके कष्ट हरते हैं और भवसागर से पार उतारते हैं
(ङ) 'जाकी छोति जगत कउ लागै' का अर्थ है जिसकी छूत संसार के लोगों को लगती है और 'ता पर तुहीं ढरै' का अर्थ है उन पर तू ही (दयालु) द्रवित होता है। पूरी पंक्ति का अर्थ है गरीब और निम्नवर्ग के लोगों को समाज सम्मान नहीं देता। उनसे दूर रहता है। परन्तु ईश्वर कोई भेदभाव न करके उन पर दया करते हैं, उनकी मद्द करते हैं, उनकी पीड़ा हरते हैं।
(च) रैदास ने अपने स्वामी को गुसईया, गरीब निवाज़, गरीब निवाज़ लाला प्रभु आदि नामों से पुकारा है।
(छ)
प्रश्न अभ्यास 
प्रश्न.2. नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए -
(क) जाकी अँग-अँग बास समानी
(ख) जैसे चितवत चंद चकोरा
(ग) जाकी जोति बरै दिन राती
(घ) ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै
(ङ) नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
उत्तर (क) कवि के अंग-अंग मे राम-नाम की सुगंध व्याप्त हो गई है। जैसे चंदन के पानी में रहने से पानी में उसकी सुगंध फैल जाती है, उसी प्रकार राम नाम के लेप की सुगन्धि उसके अंग-अंग में समा गयी है।
(ख) चकोर पक्षी अपने प्रिय चाँद को एकटक निहारता रहता है, उसी तरह कवि अपने प्रभु राम को भी एकटक निहारता रहता है। इसीलिए कवि ने अपने को चकोर कहा है।
(ग) ईश्वर दीपक के समान है जिसकी ज्योति हमेशा जलती रहती है। उसका प्रकाश सर्वत्र सभी समय रहता है।
(घ) भगवान को लाल कहा है कि भगवान ही सबका कल्याण करता है इसके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों को ऊपर उठाने का काम करता हो।
(ङ) कवि का कहना है कि ईश्वर हर कार्य को करने में समर्थ हैं। वे नीच को भी ऊँचा बना लेता है। उनकी कृपा से निम्न जाति में जन्म लेने के उपरांत भी उच्च जाति जैसा सम्मान मिल जाता है।

प्रश्न 3. रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर. 

  • पहले पद का केंद्रिय भाव:
    (i) जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती।
    (ii) कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है।
    (iii) भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है।
  • दूसरे पद  का केंद्रिय भाव:
    (i) प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं।
    (ii) वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं।
    (iii) ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।
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FAQs on NCERT Solutions: रैदास

1. कौन थे रैदास और उनकी जीवनी क्या है?
उत्तर: रैदास एक महान संत-कवि थे जो 15वीं शताब्दी में जन्मे थे। वे दलित समुदाय से थे और उनकी जीवनी भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
2. रैदास जी की कविताओं में कौन से विषय हैं?
उत्तर: रैदास जी की कविताओं में धार्मिक तत्व, मानवता, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, लोगों के बीच एकता और स्वतंत्रता जैसे विषय होते हैं।
3. रैदास जी की कविताओं का भावार्थ क्या होता है?
उत्तर: रैदास जी की कविताओं का भावार्थ समाज के बीच एकता, समानता और अधिकारों का विस्तार होता है। उनकी कविताओं में दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की मांग की गई है।
4. रैदास जी की कविताओं का महत्व क्या है?
उत्तर: रैदास जी की कविताओं का महत्व उनकी मानवतावादी और समाजसेवी भावनाओं के कारण है। उनकी कविताएं आज भी समाज के बीच एकता, समानता और अधिकारों के बारे में जागरूकता लाती हैं।
5. रैदास जी की कविताओं को समझने के लिए कौन-कौन से तत्व जरूरी हैं?
उत्तर: रैदास जी की कविताओं को समझने के लिए गंभीरता, समझदारी, अनुभव, धैर्य और संकल्प जैसे तत्व जरूरी होते हैं। इसके अलावा, उनके विचारों को समझने के लिए उनके जीवन और समय के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।
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