All questions of गीता सुगीता कर्तव्य for Class 8 Exam
दुःखेषु मनः का प्रकार
दुःख और संकट के समय में मन की स्थिति व्यक्ति के मानसिक संतुलन को दर्शाती है। यहाँ हम स्थिरबुद्धि वाले व्यक्ति की विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
स्थिरबुद्धि की परिभाषा
- स्थिरबुद्धि का अर्थ है एक ऐसा मन, जो विकर्षणों और कठिनाइयों के बावजूद संतुलित और शांत रहता है।
दुःख में विचलित न होना
- स्थिरबुद्धि वाले व्यक्ति का मन दुःख और संकट के समय में भी विचलित नहीं होता।
- ऐसे व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित रख सकते हैं, जिससे वे सही निर्णय ले पाते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण
- अज्ञानी (a): अज्ञानी व्यक्ति ज्ञान की कमी के कारण अपने मन को नियंत्रित नहीं कर पाता।
- क्रोधी (c): क्रोधी व्यक्ति अपने क्रोध और भावनाओं के प्रभाव में आकर सही तरीके से सोच नहीं पाता, जिससे वह दुःख में विचलित होता है।
- लोभी (d): लोभी व्यक्ति अपनी इच्छाओं और लालच के चलते मानसिक शांति को खो देता है।
निष्कर्ष
- इसलिए, सही उत्तर 'b) स्थिरबुद्धिः' है, क्योंकि यह व्यक्ति दुःख में भी अपने मन को नियंत्रित रखता है और विचलित नहीं होता। स्थिरता और संतुलन ही एक स्थिरबुद्धि वाले व्यक्ति की पहचान है।
वाणी यदि सर्वेषां प्रति करुणामयी भवति। सा सत्यं, प्रियं च भवति। एवमेव हितकारी च भवति। यदा एषा वाणी दुःखं न ददाति, तदा सा अनुद्वेगकरं वाक्यं इति कथ्यते।
श्रद्धा, संयम, अभ्यासः च आवश्यकः। ज्ञानं लब्ध्वा पाठकः शीघ्रं परमशान्तिं प्राप्नोति। एषः मानसिकतया स्थिरः भवति।