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All questions of मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा for Class 8 Exam

संस्कृतस्य काव्येषु कति रसाः दृश्यन्ते?
  • a)
    केवल शृंगार
  • b)
    केवल वीर
  • c)
    सर्वा: रसाः
  • d)
    केवल हास्य
Correct answer is option 'C'. Can you explain this answer?

Samridhi Kumar answered
संस्कृत काव्य में रसों का महत्व
संस्कृत साहित्य में काव्य का विशेष स्थान है, और इसमें अनेक प्रकार के रसों का समावेश होता है।
रस की संकल्पना
- संस्कृत काव्य में 'रस' वह भाव है जो पाठक या दर्शक के मन में उत्पन्न होता है।
- यह काव्य के आनंद और सौंदर्य को बढ़ाता है।
कुल रसों की संख्या
- भारतीय काव्यशास्त्र में कुल नौ रसों को मान्यता दी गई है, जिन्हें 'नव रस' कहा जाता है।
- ये रस हैं:
- शृंगार (प्रेम)
- वीर (वीरता)
- करुण (दुःख)
- रौद्र (क्रोध)
- हास्य (हंसी)
- भयंक (भय)
- वीभत्स (असह्य)
- अद्भुत (आश्चर्य)
- शान्त (शांति)
सभी रसों का महत्व
- प्रत्येक रस का अपना विशेष महत्व और उपयोग है, और ये सभी मिलकर काव्य को संपूर्णता प्रदान करते हैं।
- इसलिए, "सर्वाः रसाः" का विकल्प सही है, क्योंकि संस्कृत काव्य में केवल एक या दो रस नहीं, बल्कि सभी रसों का समावेश होता है।
निष्कर्ष
- संस्कृत काव्य में केवल शृंगार, वीर, या हास्य ही नहीं, बल्कि सभी रसों का समावेश होता है। इसीलिए सही उत्तर 'C) सर्वाः रसाः' है।

किम् अस्ति संस्कृतभाषायाः अन्यनाम?
  • a)
    मातृभाषा
  • b)
    देववाणी
  • c)
    लोकभाषा
  • d)
    विदेशीभाषा
Correct answer is option 'B'. Can you explain this answer?

Gitanjali Saha answered
संस्कृत भाषा का अन्य नाम
संस्कृत भाषा एक प्राचीन और समृद्ध भाषा है, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्षों से बोला और लिखा जाता रहा है। इसका एक प्रमुख नाम "देववाणी" है।
देववाणी का अर्थ
- ईश्वरीय भाषा: "देववाणी" का शाब्दिक अर्थ है "ईश्वरीय भाषा"। इसे इस प्रकार कहा जाता है क्योंकि संस्कृत में धार्मिक ग्रंथ, उपनिषद, वेद और पुराण लिखे गए हैं, जो कि भारतीय संस्कृति और धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- साहित्यिक समृद्धि: संस्कृत का उपयोग न केवल धार्मिक ग्रंथों में, बल्कि काव्य, नाटक और दर्शन में भी किया गया है। यह भाषा वैज्ञानिक और साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण
- मातृभाषा: यह शब्द आमतौर पर किसी व्यक्ति की जन्मजात भाषा के लिए उपयोग होता है। संस्कृत मातृभाषा नहीं है, बल्कि यह एक शास्त्रीय भाषा है।
- लोकभाषा: यह शब्द उन भाषाओं को संदर्भित करता है जो आम जनता द्वारा बोली जाती हैं। संस्कृत आज के समय में मुख्यतः अध्ययन और धार्मिक ग्रंथों में प्रयोग होती है, इसलिए इसे लोकभाषा नहीं कहा जा सकता।
- विदेशीभाषा: यह शब्द उन भाषाओं के लिए उपयोग होता है जो किसी देश की मूल भाषा नहीं हैं। संस्कृत भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए यह विदेशी भाषा नहीं है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, संस्कृत को "देववाणी" के रूप में जाना जाता है, जो इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।

अलङ्कृतधारा कस्य अर्थः?
  • a)
    सज्जा धारा
  • b)
    निर्मल धारा
  • c)
    शब्दरहित धारा
  • d)
    सरल धारा
Correct answer is option 'A'. Can you explain this answer?

Nidhi Bhatt answered
अलङ्कृतधारा इत्यर्थः अलंकारयुक्ता सुसज्जा धारा। संस्कृतकाव्ये शब्दाः सुव्यवस्थितं प्रवहन्ति। एषा भाषा सौन्दर्यपूर्णा च मधुरं च। बालकाः एतत् पठित्वा काव्यसौन्दर्यं अनुभवति।

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