महार समुदाय: महार समुदाय को औपनिवेशिक काल के दौरान बंबई प्रेसीडेंसी में अछूत माना जाता था।
अछूतपन: अछूतपन एक प्रथा थी जिसमें भारतीय समाज में कुछ समुदायों को अशुद्ध माना जाता था और उन्हें समाज के अन्य हिस्सों से अलग रखा जाता था।
भेदभाव: महार समुदाय को जीवन के विभिन्न पहलुओं में, जैसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ा।
सामाजिक स्थिति: उन्हें मंदिरों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। उन्हें उच्च जाति के लोगों के साथ एक ही कुएं से पानी निकालने की भी अनुमति नहीं थी।
सुधार आंदोलन: महार समुदाय द्वारा अनुभव किए गए भेदभाव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं द्वारा अछूतों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक सुधार आंदोलनों का उदय किया।
कानून: अछूतपन की प्रथा को बाद में भारत के संविधान में समाप्त कर दिया गया और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न कानून बनाए गए।