वेदाङ्गेषु "छन्दः" कस्य शास्त्रम् अस्ति?a)यज्ञविधिःb)ग्रहणक्षत्रशास्त्...
छन्दः वेदाङ्गेषु एकम्। एतत् शास्त्रं कवितायाः लय-गणना च वर्णयति। छन्दज्ञानं विना श्लोकाः सम्यग् न रच्यन्ते।
वेदाङ्गेषु "छन्दः" कस्य शास्त्रम् अस्ति?a)यज्ञविधिःb)ग्रहणक्षत्रशास्त्...
छन्दः का अर्थ
छन्दः, जिसे संस्कृत में "छन्दस" भी कहा जाता है, कविता और उसके मीटर (कविता के लय) का अध्ययन है। यह वेदों के अंगों में से एक है और साहित्यिक रचनाओं के संरचना को निर्धारित करता है।
छन्दः का महत्व
- कविता की लय: छन्दः कविता की लय और ताल को निर्धारित करता है, इसलिए यह काव्य रचनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- साहित्यिक शैली: यह विभिन्न साहित्यिक शैलियों और उनके अनुप्रयोगों में मदद करता है।
- शिक्षा का माध्यम: छन्दः के माध्यम से विद्यार्थियों को कविता की गहराई और उसकी संरचना समझने में मदद मिलती है।
छन्दः के प्रमुख तत्व
- मात्रा: कविता में प्रत्येक शब्द की मात्रा की गणना की जाती है।
- वृत्त: छन्दः में विभिन्न प्रकार के वृत्त होते हैं, जैसे अनुष्टुप, त्रिष्टुप, आदि।
- संगति: कविता में शब्दों और भावों की संगति भी छन्दः का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
इसी प्रकार से, "छन्दः" काव्य और साहित्य की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो कविता की रचना में एक सुसंगतता और सौंदर्य प्रदान करता है। इसलिए, इसका सही उत्तर विकल्प 'C' है - "कविता-छन्दः"।