अक्क महादेवी - पठन सामग्री और सार Humanities/Arts Notes | EduRev

Hindi Class 11

Humanities/Arts : अक्क महादेवी - पठन सामग्री और सार Humanities/Arts Notes | EduRev

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सारांश -: कवयित्री अक्कमहादेवी द्वारा रचित वचन में प्रभु-भक्ति में स्वयं को समर्पित करने की बात की गई है| प्रथम कविता या वचन में इंद्रियों में नियंत्रण का संदेश दिया गया है| यह उपदेशात्मक न होकर प्रेम-भरा मनुहार है| दूसरा वचन एक भक्त का ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है| कवियित्री ऐसी निस्पृह स्थिति की कामना करती है जिससे उनका स्व या अहंकार पूरी तरह से नष्ट हो जाए| 

1. हे भूख! मत मचल.........................संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का

कवयित्री अक्कमहादेवी भगवान शिव की परमभक्त थीं| प्रस्तुत पद में उन्होंने सांसारिकता त्यागकर शिव की आराधना में लीन होने का संदेश दिया है| वे कहती हैं कि सांसारिक वस्तुओं की चाह में और अधिक पाने की लालसा नहीं होनी चाहिए| भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, ईर्ष्या, लोभ आदि मन के ऐसे विकार हैं जो प्रभु-भक्ति के मार्ग की बाधाएँ हैं| इन विकारों का त्याग करके ही हम प्रभु-भक्ति में लीन हो सकते हैं| कवयित्री चन्नमल्लिकार्जुन अर्थात् भगवान शिव का भक्ति-संदेश लेकर आई हैं| वे चाहती हैं कि सांसारिकता का त्याग करके हम स्वयं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दें| 

2. हे मेरे जूही के फूल.....................झपटकर छीन न ले मुझसे

प्रस्तुत वचन में कवयित्री ने ईश्वर को जूही के फूल की उपमा दी है| उनके प्रभु जूही के फूल की तरह कोमल, मनोरम और सुंदर हैं| वे ईश्वर से कामना करते हुए कहती हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दें कि उन्हें भूख मिटाने के लिए भीख माँगना पड़े| यहाँ तक कि भीख मांगने पर भी उन्हें कोई भीख न दे| भीख मिलने पर कोई कुत्ता उसे छीन ले और कवियित्री की झोली खाली रह जाए| वह अपने घर-गृहस्थी अर्थात् मायावी संसार को भूलने की बात करती हैं ताकि सभी प्रकार के सांसारिक कष्ट दूर हो जाए| इस प्रकार वह चाहती हैं कि इससे उनका अहंकार नष्ट हो जाए और वह प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाए|
कवयित्री-परिचय -: अक्क महादेवी

जन्म - 12 वीं सदी, कर्नाटक के उडुतरी गाँव, जिला- शिवमोगा में|

प्रमुख रचनाएँ- हिंदी में वचन सौरभ नाम से, अंग्रेजी में स्पीकिंग ऑफ़ शिवा के नाम से|

इतिहास में वीर शैव आन्दोलन से जुड़े कवियों, रचनाकारों की एक लंबी सूची है| अक्कमहादेवी भी इस आंदोलन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कवियित्री थीं| कन्नड़ भाषा में अक्क शब्द का अर्थ बहिन होता है| अक्कमहादेवी ने पुरूष वर्चस्व समाज के विरूद्ध आक्रोश की अभिव्यक्ति के रूप में अपने वस्त्रों को भी उतार फेंका|

अक्क के कारण शैव आंदोलन से बड़ी संख्या में स्त्रियाँ जुड़ीं और अपने संघर्ष और यातना को कविता के रूप में अभिव्यक्ति दी| इस प्रकार अक्कमहादेवी की कविता पूरे भारतीय साहित्य में इस क्रांतिकारी चेतना का पहला सर्जनात्मक दस्तावेज है और संपूर्ण स्त्रीवादी आंदोलन के लिए एक अजस्र प्रेरणास्रोत भी|


कठिन शब्दों के अर्थ 

• पाश - जकड

• ढील - ढीला करना

• मद - नशा

• चराचर - जय और चेतन

• चन्नमल्लिकार्जुन  - शिव

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